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2/13/2023

2/13/2023

पेड़ और चिड़िया की कहानी

(((( पेड़ और चिड़िया की कहानी ))))
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एक नदी के किनारे दो पेड़ थे। उस रास्ते एक छोटी सी चिड़िया गुजरी और पहले पेड़ से पूछा-बारिश होने वाला है, क्या मैं और मेरे बच्चे तुम्हारे टहनी में घोसला बनाकर रह सकते हैं।
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लेकिन वो पेड़ ने मना कर दिया। चिड़िया फिर दूसरे पेड़ के पास गई और वही सवाल पूछा.. 
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दूसरा पेड़ मान गया, चिड़िया अपने बच्चों के साथ खुशी-खुशी दूसरे पेड़ में घोसला बना कर रहने लगी..
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एक दिन इतनी अधिक बारिश हुई कि इसी दौरान पहला पेड़ जड़ से उखड़ कर पानी मे बह गया।
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जब चिड़िया ने उस पेड़ को बहते हुए देखा तो कहा..
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जब तुमसे मैं और मेरे बच्चे शरण के लिये आई तब तुमने मना कर दिया था, अब देखो तुम्हारे उसी रूखी बर्ताव की सजा तुम्हे मिल रही है।
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जिसका उत्तर पेड़ ने मुस्कुराते हुए दिया मैं जानता था मेरी जड़ें कमजोर है और इस बारिश में टिक नहीं पाऊंगा..
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मैं तुम्हारी और बच्चे की जान खतरे में नहीं डालना चाहता था, मना करने के लिए मुझे क्षमा कर दो,और ये कहते- कहते पेड़ बह गया। 
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मित्रों..! किसी के इंकार को हमेशा उनकी कठोरता न समझे.. क्या पता उसके उसी इंकार से आप का भला हो..
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कौन किस परिस्थिति में है शायद हम नहीं समझ पाए, इसलिए किसी के चरित्र और शैली को उनके वर्तमान व्यवहार से ना तौलें।
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साभार :- bhaktipath wordpress
Bhakti Kathayen भक्ति कथायें
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 ((((((( जय जय श्री राधे )))))))
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2/05/2023

2/05/2023

Health-Tips : हमेशा काम आने वाले 51 अचूक नुस्खे

Health-Tips : हमेशा काम आने वाले 51 अचूक नुस्खे

हमारे जीवन में रोगों का प्रभाव पड़ता ही रहता है -हम छोटी-मोटी बीमारियों का इलाज स्वयं कर सकते है आज हम आप के लिए लाये हैं साधारण छोटे-छोटे प्रयोग जिनको आप अवश्य अपनाए कुछ प्रयोग नीचे दिए गए है जो आपके घर में ही उपलब्ध है अजमाए और लाभ ले –

1. *दमे के लिये तुलसी और वासा:-*

दमे के रोगियों को तुलसी की १० पत्तियों के साथ वासा (अडूसा या वासक) का २५० मिलीलीटर पानी में उबालकर काढ़ा बनाकर दें। लगभग २१ दिनों तक सुबह यह काढ़ा पीने से आराम आ जाता है-

2. *मौसमी खाँसी के लिये सेंधा नमक:-*

सेंधा नमक की लगभग 5 ग्राम डली को चिमटे से पकड़कर आग पर, गैस पर या तवे पर अच्छी तरह गर्म कर लें। जब लाल होने लगे तब गर्म डली को तुरंत आधा कप पानी में डुबोकर निकाल लें और नमकीन गर्म पानी को एक ही बार में पी जाएँ। ऐसा नमकीन पानी सोते समय लगातार दो-तीन दिन पीने से खाँसी, विशेषकर बलगमी खाँसी से आराम मिलता है। नमक की डली को सुखाकर रख लें एक ही डली का बार बार प्रयोग किया जा सकता है-

3. *बैठे हुए गले के लिये मुलेठी का चूर्ण:-*

मुलेठी के चूर्ण को पान के पत्ते में रखकर खाने से बैठा हुआ गला ठीक हो जाता है। या सोते समय एक ग्राम मुलेठी के चूर्ण को मुख में रखकर कुछ देर चबाते रहे। फिर वैसे ही मुँह में रखकर जाएँ। प्रातः काल तक गला साफ हो जायेगा। गले के दर्द और सूजन में भी आराम आ जाता है-

4. *मुँह और गले के कष्टों के लिये सौंफ और मिश्री:-*

भोजन के बाद दोनों समय आधा चम्मच सौंफ चबाने से मुख की अनेक बीमारियाँ और सूखी खाँसी दूर होती है, बैठी हुई आवाज़ खुल जाती है, गले की खुश्की ठीक होती है और आवाज मधुर हो जाती है-

5. *खराश या सूखी खाँसी के लिये अदरक और गुड़:-*

गले में खराश या सूखी खाँसी होने पर पिसी हुई अदरक में गुड़ और घी मिलाकर खाएँ। गुड़ और घी के स्थान पर शहद का प्रयोग भी किया जा सकता है। आराम मिलेगा-

6. *पेट में कीड़ों के लिये अजवायन और नमक:-*

आधा ग्राम अजवायन चूर्ण में स्वादानुसार काला नमक मिलाकर रात्रि के समय रोजाना गर्म जल से देने से बच्चों के पेट के कीडे नष्ट होते हैं। बडों के लिये- चार भाग अजवायन के चूर्ण में एक भाग काला नमक मिलाना चाहिये और दो ग्राम की मात्रा में सोने से पहले गर्म पानी के साथ लेना चाहिये-

7. *अरुचि के लिये मुनक्का हरड़ और चीनी:-*

भूख न लगती हो तो बराबर मात्रा में मुनक्का (बीज निकाल दें), हरड़ और चीनी को पीसकर चटनी बना लें। इसे पाँच छह ग्राम की मात्रा में (एक छोटा चम्मच), थोड़ा शहद मिला कर खाने से पहले दिन में दो बार चाटें-

8. *बदन के दर्द में कपूर और सरसों का तेल:-*

10 ग्राम कपूर, 200 ग्राम सरसों का तेल – दोनों को शीशी में भरकर मजबूत ठक्कन लगा दें तथा शीशी धूप में रख दें। जब दोनों वस्तुएँ मिलकर एक रस होकर घुल जाए तब इस तेल की मालिश से नसों का दर्द, पीठ और कमर का दर्द और, माँसपेशियों के दर्द शीघ्र ही ठीक हो जाते हैं-

9. *जोड़ों के दर्द के लिये बथुए का रस:-*

बथुआ के ताजा पत्तों का रस पन्द्रह ग्राम प्रतिदिन पीने से गठिया दूर होता है। इस रस में नमक-चीनी आदि कुछ न मिलाएँ। नित्य प्रातः खाली पेट लें या फिर शाम चार बजे। इसके लेने के आगे पीछे दो-दो घंटे कुछ न लें। दो तीन माह तक लें-

10. *पेट में वायु-गैस के लिये मट्ठा और अजवायन:-*

पेट में वायु बनने की अवस्था में भोजन के बाद 125 ग्राम दही के मट्ठे में दो ग्राम अजवायन और आधा ग्राम काला नमक मिलाकर खाने से वायु-गैस मिटती है। एक से दो सप्ताह तक आवश्यकतानुसार दिन के भोजन के पश्चात लें-

11. *फटे हाथ पैरों के लिये सरसों या जैतून का तेल:-*

नाभि में प्रतिदिन सरसों का तेल लगाने से होंठ नहीं फटते और फटे हुए होंठ मुलायम और सुन्दर हो जाते है। साथ ही नेत्रों की खुजली और खुश्की दूर हो जाती है-

12. *सर्दी बुखार और साँस के पुराने रोगों के लिये तुलसी:-*

तुलसी की 21 पत्तियाँ स्वच्छ खरल या सिलबट्टे (जिस पर मसाला न पीसा गया हो) पर चटनी की भाँति पीस लें और 10 से 30 ग्राम मीठे दही में मिलाकर नित्य प्रातः खाली पेट तीन मास तक खाएँ। दही खट्टा न हो। यदि दही माफिक न आये तो एक-दो चम्मच शहद मिलाकर लें। छोटे बच्चों को आधा ग्राम तुलसी की चटनी शहद में मिलाकर दें। दूध के साथ भूलकर भी न दें। औषधि प्रातः खाली पेट लें। आधा एक घंटे पश्चात नाश्ता ले सकते हैं-

13. *अधिक क्रोध के लिये आँवले का मुरब्बा और गुलकंद:-*

बहुत क्रोध आता हो तो सुबह आँवले का मुरब्बा एक नग प्रतिदिन खाएँ और शाम को गुलकंद एक चम्मच खाकर ऊपर से दूध पी लें। क्रोध आना शांत हो जाएगा-

14. *घुटनों में दर्द के लिये अखरोट:-*

सवेरे खाली पेट तीन या चार अखरोट की गिरियाँ खाने से घुटनों का दर्द मैं आराम हो जाता है-

15. *काले धब्बों के लिये नीबू और नारियल का तेल:-*

चेहरे व कोहनी पर काले धब्बे दूर करने के लिये आधा चम्मच नारियल के तेल में आधे नीबू का रस निचोड़ें और त्वचा पर रगड़ें, फिर गुनगुने पानी से धो लें-

16. *कोलेस्ट्राल पर नियंत्रण सुपारी से:-*

भोजन के बाद कच्ची सुपारी 20 से 40 मिनट तक चबाएँ फिर मुँह साफ़ कर लें। सुपारी का रस लार के साथ मिलकर रक्त को पतला करने जैसा काम करता है। जिससे कोलेस्ट्राल में गिरावट आती है और रक्तचाप भी कम हो जाता है-

17. *मसूढ़ों की सूजन के लिये अजवायन:-*

मसूढ़ों में सूजन होने पर अजवाइन के तेल की कुछ बूँदें पानी में मिलाकर कुल्ला करने से सूजन में आराम आ जाता है-

18. *हृदय रोग में आँवले का मुरब्बा:-*

आँवले का मुरब्बा दिन में तीन बार सेवन करने से यह दिल की कमजोरी, धड़कन का असामान्य होना तथा दिल के रोग में अत्यंत लाभ होता है, साथ ही पित्त, ज्वर, उल्टी, जलन आदि में भी आराम मिलता है-

19. *शारीरिक दुर्बलता के लिये दूध और दालचीनी:-*

दो ग्राम दालचीनी का चूर्ण सुबह शाम दूध के साथ लेने से शारीरिक दुर्बलता दूर होती है और शरीर स्वस्थ हो जाता है। दो ग्राम दालचीनी के स्थान पर एक ग्राम जायफल का चूर्ण भी लिया जा सकता है-

20. *हकलाना या तुतलाना दूर करने के लिये दूध और काली मिर्च:-*

हकलाना या तुतलाना दूर करने के लिये 10 ग्राम दूध में 250 ग्राम कालीमिर्च का चूर्ण मिलाकर रख लें। 2-2 ग्राम चूर्ण दिन में दो बार मक्खन के साथ मिलाकर खाएँ-

21. *श्वास रोगों के लिये दूध और पीपल:-*

एक पाव दूध में 5 पीपल डालकर गर्म करें, इसमें चीनी डालकर सुबह और ‘शाम पीने से साँस की नली के रोग जैसे खाँसी, जुकाम, दमा, फेफड़े की कमजोरी तथा वीर्य की कमी आदि रोग दूर होते हैं-

22. *अच्छी नींद के लिये मलाई और गुड़:-*

रात में नींद न आती हो तो मलाई में गुड़ मिलाकर खाएँ और पानी पी लें। थोड़ी देर में नींद आ जाएगी-

23. *कमजोरी को दूर करने का सरल उपाय:-*

एक-एक चम्मच अदरक व आंवले के रस को दो कप पानी में उबाल कर छान लें। इसे दिन में तीन बार पियें। स्वाद के लिये काला नमक या शहद मिलाएँ-

24. *घमौरियों के लिये मुल्तानी मिट्टी:-*

घमौरियों पर मुल्तानी मिट्टी में पानी मिलाकर लगाने से रात भर में आराम आ जाता है-

25. *पेट के रोग दूर करने के लिये मट्ठा:-*

मट्ठे में काला नमक और भुना जीरा मिलाएँ और हींग का तड़का लगा दें। ऐसा मट्ठा पीने से हर प्रकार के पेट के रोग में लाभ मिलता है। यह बासी या खट्टा नहीं होना चाहिये-

26. *खुजली की घरेलू दवा:-*

फटकरी के पानी से खुजली की जगह धोकर साफ करें, उस पर कपूर को नारियल के तेल मिलाकर लगाएँ लाभ होगा-

27. *मुहाँसों के लिये संतरे के छिलके:-*

संतरे के छिलके को पीसकर मुहाँसों पर लगाने से वे जल्दी ठीक हो जाते हैं। नियमित रूप से ५ मिनट तक रोज संतरों के छिलके का पिसा हुआ मिश्रण चेहरे पर लगाने से मुहाँसों के धब्बे दूर होकर रंग में निखार आ जाता है-

28. *बंद नाक खोलने के लिये अजवायन की भाप:-*

एक चम्मच अजवायन पीस कर गरम पानी के साथ उबालें और उसकी भाप में साँस लें। कुछ ही मिनटों में आराम मालूम होगा-

29. *चर्मरोग के लिये टेसू और नीबू:-*

टेसू के फूल को सुखाकर चूर्ण बना लें। इसे नीबू के रस में मिलाकर लगाने से हर प्रकार के चर्मरोग में लाभ होता है-

30. *माइग्रेन के लिये काली मिर्च, हल्दी और दूध:-*

एक बड़ा चम्मच काली मिर्च का चूर्ण एक चुटकी हल्दी के साथ एक प्याले दूध में उबालें। दो तीन दिन तक लगातार रहें, माइग्रेन के दर्द में आराम मिलेगा।

31. *गले में खराश के लिये जीरा:-*

एक गिलास उबलते पानी में एक चम्मच जीरा और एक टुकड़ा अदरक डालें ५ मिनट तक उबलने दें। इसे ठंडा होने दें। हल्का गुनगुना दिन में दो बार पियें। गले की खराश और सर्दी दोनों में लाभ होगा-

32. *सर्दी जुकाम के लिये दालचीनी और शहद:-*

एक ग्राम पिसी दालचीनी में एक चाय का चम्मच शहद मिलाकर खाने से सर्दी जुकाम में आराम मिलता है-

33. *टांसिल्स के लिये हल्दी और दूध:-*

एक प्याला (200 मिलीली.) दूध में आधा छोटा चम्मच (2 ग्राम) पिसी हल्दी मिलाकर उबालें। छानकर चीनी मिलाकर पीने को दें। विशेषरूप से सोते समय पीने पर तीन चार दिन में आराम मिल जाता है। रात में इसे पीने के बात मुँह साफ करना चाहिये लेकिन कुछ खाना पीना नहीं चाहिये-

34. *ल्यूकोरिया से मुक्ति:-*

ल्यूकोरिया नामक रोग कमजोरी, चिडचिडापन, के साथ चेहरे की चमक उड़ा ले जाता हैं। इससे बचने का एक आसान सा उपाय- एक-एक पका केला सुबह और शाम को पूरे एक छोटे चम्मच देशी घी के साथ खा जाएँ 11-12 दिनों में आराम दिखाई देगा। इस प्रयोग को 21 दिनों तक जारी रखना चाहिए-

35. *मधुमेह के लिये आँवला और करेला:-*

एक प्याला करेले के रस में एक बड़ा चम्मच आँवले का रस मिलाकर रोज पीने से दो महीने में मधुमेह के कष्टों से आराम मिल जाता है-

36. *मधुमेह के लिये कालीचाय:-*

मधुमेह में सुबह खाली पेट एक प्याला काली चाय स्वास्थ्यवर्धक होती है। चाय में चीनी दूध या नीबू नहीं मिलाना चाहिये। यह गुर्दे की कार्यप्रणाली को लाभ पहुँचाती है जिससे मधुमेह में भी लाभ पहुँचता है-

37. *उच्च रक्तचाप के लिये मेथी:-*

सुबह उठकर खाली पेट आठ-दस मेथी के दाने निगल लेने से उच्चरक्त चाप को नियंत्रित करने में सफलता मिलती है-

38. *माइग्रेन और सिरदर्द के लिये सेब:-*

सिरदर्द और माइग्रेन से परेशान हों तो सुबह खाली पेट एक सेब नमक लगाकर खाएँ इससे आराम आ जाएगा-

39. *अपच के लिये चटनी:-*

खट्टी डकारें, गैस बनना, पेट फूलना, भूक न लगना इनमें से किसी चीज से परेशान हैं तो सिरके में प्याज और अदरक पीस कर चटनी बनाएँ इस चटनी में काला नमक डालें। एक सप्ताह तक प्रतिदिन भोजन के साथ लें, आराम आ जाएगा-

40. *मुहाँसों से मुक्ति:-*

जायफल, काली मिर्च और लाल चन्दन तीनो का पावडर बराबर मात्रा में मिलाकर रख लें। रोज सोने से पहले 2-3 चुटकी भर के पावडर हथेली पर लेकर उसमें इतना पानी मिलाए कि उबटन जैसा बन जाए खूब मिलाएँ और फिर उसे चेहरे पर लगा लें और सो जाएँ, सुबह उठकर सादे पानी से चेहरा धो लें। 15 दिन तक यह काम करें। इसी के साथ प्रतिदिन 250 ग्राम मूली खाएँ ताकि रक्त शुद्ध हो जाए और अन्दर से त्वचा को स्वस्थ पोषण मिले। 15-20 दिन में मुहाँसों से मुक्त होकर त्वचा निखर जाएगी-

41. *जलन की चिकित्सा चावल से:-*

कच्चे चावल के 8-10 दाने सुबह खाली पेट पानी से निगल लें। 21 दिन तक नियमित ऐसा करने से पेट और सीन की जलन में आराम आएगा। तीन माह में यह पूरी तरह ठीक हो जाएगी-

42. *दाँतों के कष्ट में तिल का उपयोग:-*

तिल को पानी में 4 घंटे भिगो दें फिर छान कर उसी पानी से मुँह को भरें और 10 मिनट बाद उगल दें। चार पाँच बार इसी तरह कुल्ला करे, मुँह के घाव, दाँत में सड़न के कारण होने वाले संक्रमण और पायरिया से मुक्ति मिलती है-

43. *विष से मुक्ति:-*

10-10 ग्राम हल्दी, सेंधा नमक और शहद तथा 5 ग्राम देसी घी अच्छी तरह मिला लें। इसे खाने से कुत्ते, साँप, बिच्छु, मेढक, गिरगिट, आदि जहरीले जानवरों का विष उतर जाता है-

44. *खाँसी में प्याज:-*

अगर बच्चों या बुजुर्गों को खांसी के साथ कफ ज्यादा गिर रहा हो तो एक चम्मच प्याज के रस को चीनी या गुड मिलाकर चटा दें, दिन में तीन चार बार ऐसा करने पर खाँसी से तुरंत आराम मिलता है-

45. *स्वस्थ त्वचा का घरेलू नुस्खा :-*

नमक, हल्दी और मेथी तीनों को बराबर मात्रा में लेकर पीस लें, नहाने से पाँच मिनट पहले पानी मिलाकर इनका उबटन बना लें। इसे साबुन की तरह पूरे शरीर में लगाएँ और 5 मिनट बाद नहा लें। सप्ताह में एक बार प्रयोग करने से घमौरियों, फुंसियों तथा त्वचा की सभी बीमारियों से मुक्ति मिलती है। साथ ही त्वचा मुलायम और चमकदार भी हो जाती है-

46. *पेट साफ रखे अमरूद:-*

कब्ज से परेशान हों तो शाम को चार बजे कम से कम 200 ग्राम अमरुद नमक लगाकर खा जाएँ, फायदा अगली सुबह से ही नज़र आने लगेगा। 10 दिन लगातार खाने से पुराने कब्ज में लाभ होगा। बाद में जब आवश्यकता महसूस हो तब खाएँ-

47. *बीज पपीते के स्वास्थ्य हमारा:-*

पके पपीते के बीजों को खूब चबा-चबा कर खाने से आँखों की रोशनी बढ़ती है। इन बीजों को सुखा कर पावडर बना कर भी रखा जा सकता है। सप्ताह में एक बार एक चम्मच पावडर पानी से फाँक लेन पर अनेक प्रकार के रोगाणुओं से रक्षा होती है-

48. *मुलेठी पेप्टिक अलसर के लिये:-*

मुलेठी के बारे में तो सभी जानते हैं। यह आसानी से बाजार में भी मिल जाती है। पेप्टिक अल्सर में मुलेठी का चूर्ण अमृत की तरह काम करता है। बस सुबह शाम आधा चाय का चम्मच पानी से निगल जाएँ। यह मुलेठी का चूर्ण आँखों की शक्ति भी बढ़ाता है। आँखों के लिये इसे सुबह आधे चम्मच से थोड़ा सा अधिक पानी के साथ लेना चाहिये-

49. *सरसों का तेल केवल पाँच दिन:-*

रात में सोते समय दोनों नाक में दो दो बूँद सरसों का तेल पाँच दिनों तक लगातार डालें तो खाँसी-सर्दी और साँस की बीमारियाँ दूर हो जाएँगी। सर्दियों में नाक बंद हो जाने के दुख से मुक्ति मिलेगी और शरीर में हल्कापन मालूम होगा-

50. *भोजन से पहले अदरक:-*

भोजन करने से दस मिनट पहले अदरक के छोटे से टुकडे को सेंधा नमक में लपेट कर [थोड़ा ज्यादा मात्रा में ] अच्छी तरह से चबा लें। दिन में दो बार इसे अपने भोजन का आवश्यक अंग बना लें, इससे हृदय मजबूत और स्वस्थ बना रहेगा, दिल से सम्बंधित कोई बीमारी नहीं होगी और निराशा व अवसाद से भी मुक्ति मिल जाएगी-

51. *अजवायन का साप्ताहिक प्रयोग:-*

सुबह खाली पेट सप्ताह में एक बार एक चाय का चम्मच अजवायन मुँह में रखें और पानी से निगल लें। चबाएँ नहीं। यह सर्दी, खाँसी, जुकाम, बदनदर्द, कमर-दर्द, पेटदर्द, कब्जियत और घुटनों के दर्द से दूर रखेगा। 10 साल से नीचे के बच्चों को आधा चम्मच 2 ग्राम और 10 से ऊपर सभी को एक चम्मच यानी 5 ग्राम लेना चाहिए |

1/25/2023

1/25/2023

अति सुन्दर,सनातन घड़ी

*🌹अति सुन्दर,सनातन घड़ी🌹*

*12:00* बजने के स्थान पर *आदित्य* लिखा हुआ है जिसका अर्थ यह है कि *सूर्य 12 प्रकार* के होते हैं।

*1:00* बजने के स्थान पर *ईश्वर* लिखा हुआ है इसका अर्थ यह है कि *ईश्वर एक* ही प्रकार का होता है। *एको ब्रह्म द्वितीयो नास्ति।*

*2:00* बजने की स्थान पर *पक्ष* लिखा हुआ है जिसका तात्पर्य यह है कि *पक्ष दो* होते हैं *1 कृष्ण पक्ष* औऱ दूसरा *शुक्ल पक्ष।*

*3:00* बजने के स्थान पर *अनादि तत्व* लिखा हुआ है जिसका तात्पर्य यह है कि *अनादि तत्व 3* हैं। *परमात्मा*, *जीवात्मा* और *प्रकृति* ये तीनों तत्व अनादि है ,

*4:00* बजने के स्थान पर *वेद* लिखा हुआ है जिसका तात्पर्य यह है कि वेद चार प्रकार के होते हैं -- *ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद।*

*5:00* बजने के स्थान पर *महाभूत* लिखा हुआ है जिसका तात्पर्य है कि महाभूत पांच प्रकार के होते हैं। *पांच महाभूत हैं* - *सत्वगुण, रजगुण, कर्म, काल, स्वभाव"*

*6:00* बजने के स्थान पर *दर्शन* लिखा हुआ है इसका तात्पर्य है कि *दर्शन 6 प्रकार* के होते हैं । छः दर्शन  *सांख्य, योग, न्याय, वैशेषिक, मीमांसा और वेदान्त* के नाम से विदित है।

*7:00* बजे के स्थान पर *धातु* लिखा हुआ है इसका तात्पर्य है कि *धातु 7* हैं। सात धातुओं के नाम
*रस : प्लाज्मा*
*रक्त : खून (ब्लड)*
*मांस : मांसपेशियां*
*मेद : वसा (फैट)*
*अस्थि : हड्डियाँ*
*मज्जा : बोनमैरो*
*शुक्र : प्रजनन संबंधी ऊतक*

*8:00* बजने के स्थान पर *अष्टांग योग* लिखा हुआ है इसका तात्पर्य है कि *योग के आठ प्रकार* होते है। योग के  आठ अंग हैं: *1) यम, २) नियम, ३) आसन, ४) प्राणायाम, ५) प्रत्याहार, ६) धारणा ७) ध्यान ८) समाधि*

*9:00* बजने के स्थान पर *अंक* लिखा हुआ है इसका तात्पर्य है कि *अंक 9 प्रकार के होते हैं। 1 2 3 4 5 6 7 8 9*

*10:00* बजने के स्थान पर *दिशाएं* लिखा हुआ है इसका तात्पर्य है कि *दिशाएं 10 होती है।*

*11:00* बजने के स्थान पर *उपनिषद* लिखा हुआ है इसका तात्पर्य है कि *उपनिषद 11 प्रकार के होते हैं।*
        


1/21/2023

1/21/2023

रावण संहिता के प्राचीन तांत्रिक उपाय

रावण संहिता के प्राचीन तांत्रिक उपाय
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रावण का संबंध असुर वंश से था, लेकिन वह सभी शास्त्रों का जानकार और प्रकाण्ड विद्वान भी था। रावण ने ज्योतिष और तंत्र शास्त्र संबंधी ज्ञान के लिए रावण संहिता की रचना की थी। रावण संहिता में ज्योतिष और तंत्र शास्त्र के माध्यम से भविष्य को जानने के कई रहस्य बताए गए हैं। इस संहिता में बुरे समय को अच्छे समय में बदलने के लिए भी चमत्कारी तांत्रिक उपाय बताए हैं। जो भी व्यक्ति इन तांत्रिक उपायों को अपनाता है उसकी किस्मत बदलने में अधिक समय नहीं लगता है।

1. धन प्राप्ति के लिए उपाय👉 किसी भी शुभ मुहूर्त में या किसी शुभ दिन सुबह जल्दी उठें। इसके बाद नित्यकर्मों से निवृत्त होकर किसी पवित्र नदी या जलाशय के किनारे जाएं। किसी शांत एवं एकांत स्थान पर वट वृक्ष के नीचे चमड़े का आसन बिछाएं। आसन पर बैठकर धन प्राप्ति मंत्र का जप करें।

धन प्राप्ति का मंत्र: ऊँ ह्रीं श्रीं क्लीं नम: ध्व: ध्व: स्वाहा।

इस मंत्र का जप आपको 21 दिनों तक करना चाहिए। मंत्र जप के लिए रुद्राक्ष की माला का उपयोग करें। 21 दिनों में अधिक से अधिक संख्या में मंत्र जप करें।

जैसे ही यह मंत्र सिद्ध हो जाएगा आपके लिए धन प्राप्ति के योग बनेंगे।

2👉 यदि किसी व्यक्ति को धन प्राप्त करने में बार-बार रुकावटें आ रही हों तो उसे यह उपाय करना चाहिए।
यह उपाय 40 दिनों तक किया जाना चाहिए। इसे अपने घर पर ही किया जा सकता है। उपाय के अनुसार धन प्राप्ति मंत्र का जप करना है। प्रतिदिन 108 बार।

मंत्र: ऊँ सरस्वती ईश्वरी भगवती माता क्रां क्लीं, श्रीं श्रीं मम धनं देहि फट् स्वाहा।

इस मंत्र का जप नियमित रूप से करने पर कुछ ही दिनों महालक्ष्मी की कृपा प्राप्त हो जाएगी और आपके धन में आ रही रुकावटें दूर होने लगेंगी।

महालक्ष्मी की कृपा तुरंत प्राप्त करने के लिए यह तांत्रिक उपाय करें।

3👉 दीपावली के लिए उपाय
किसी शुभ मुहूर्त जैसे दीपावली, अक्षय तृतीया, होली आदि की रात यह उपाय किया जाना चाहिए। दीपावली की रात में यह उपाय श्रेष्ठ फल देता है। इस उपाय के अनुसार दीपावली की रात कुमकुम या अष्टगंध से थाली पर यहां दिया गया मंत्र लिखें।

मंत्र: ऊँ ह्रीं श्रीं क्लीं महालक्ष्मी, महासरस्वती ममगृहे आगच्छ-आगच्छ ह्रीं नम:।

इस मंत्र का जप भी करना चाहिए। किसी साफ एवं स्वच्छ आसन पर बैठकर रुद्राक्ष की माला या कमल गट्टे की माला के साथ मंत्र जप करें। मंत्र जप की संख्या कम से कम 108 होनी चाहिए। अधिक से अधिक इस मंत्र की आपकी श्रद्धानुसार बढ़ा सकते हैं।

इस उपाय से आपके घर में महालक्ष्मी की कृपा बरसने लगेगी।

4👉 यदि आप दसों दिशाओं से यानी चारों तरफ से पैसा प्राप्त करना चाहते हैं तो यह उपाय करें। यह उपाय दीपावली के दिन किया जाना चाहिए।

दीपावली की रात में विधि-विधान से महालक्ष्मी का पूजन करें। पूजन के बाद सो जाएं और सुबह जल्दी उठें।
नींद से जागने के बाद पलंग से उतरे नहीं बल्कि यहां दिए गए मंत्र का जप 108 बार करें।
मंत्र: ऊँ नमो भगवती पद्म पदमावी ऊँ ह्रीं ऊँ ऊँ पूर्वाय दक्षिणाय उत्तराय आष पूरय सर्वजन वश्य कुरु कुरु स्वाहा।
शय्या पर मंत्र जप करने के बाद दसों दिशाओं में दस-दस बार फूंक मारें। इस उपाय से साधक को चारों तरफ से पैसा प्राप्त होता है।

5👉 यदि आप देवताओं के कोषाध्यक्ष कुबेर की कृपा से अकूत धन संपत्ति चाहते हैं तो यह उपाय करें।

उपाय के अनुसार आपको यहां दिए जा रहे मंत्र का जप तीन माह तक करना है। प्रतिदिन मंत्र का जप केवल 108 बार करें।

मंत्र: ऊँ यक्षाय कुबेराय वैश्रवाणाय, धन धन्याधिपतये धन धान्य समृद्धि मे देहि दापय स्वाहा।

मंत्र जप करते समय अपने पास धनलक्ष्मी कौड़ी रखें। जब तीन माह हो जाएं तो यह कौड़ी अपनी तिजोरी में या जहां आप पैसा रखते हैं वहां रखें। इस उपाय से जीवनभर आपको पैसों की कमी नहीं होगी।

6👉 यदि आपको ऐसा लगता है कि किसी स्थान पर धन गढ़ा हुआ है और आप वह धन प्राप्त करना चाहते हैं तो यह उपाय करें।

गड़ा धन प्राप्त करने के लिए यहां दिए गए मंत्र का जप दस हजार बार करना होगा।

मंत्र: ऊँ नमो विघ्नविनाशाय निधि दर्शन कुरु कुरु स्वाहा।

गड़े हुए धन के दर्शन करने के लिए विधि इस प्रकार है। किसी शुभ दिवस में यहां दिए गए मंत्र का जप हजारों की संख्या करें। मंत्र सिद्धि हो जाने के बाद जिस स्थान पर धन गड़ा हुआ है वहां धतुरे के बीज, हलाहल, सफेद घुघुंची, गंधक, मैनसिल, उल्लू की विष्ठा, शिरीष वृक्ष का पंचांग बराबर मात्रा में लें और सरसों के तेल में पका लें। इसके बाद इस सामग्री से गड़े धन की शंका वाले स्थान पर धूप-दीप ध्यान करें। यहां दिए गए मंत्र का जप हजारों की संख्या में करें।

ऐसा करने पर उस स्थान से सभी प्रकार की नकारात्मक शक्तियों का साया हट जाएगा। भूत-प्रेत का भय समाप्त हो जाएगा। साधक को भूमि में गड़ा हुआ धन दिखाई देने लगेगा।

ध्यान रखें तांत्रिक उपाय करते समय किसी विशेषज्ञ ज्योतिषी का परामर्श अवश्य लें।

7👉 यदि आप घर या समाज या ऑफिस में लोगों को आकर्षित करना चाहते हैं तो बिल्वपत्र तथा बिजौरा नींबू लेकर उसे बकरी के दूध में मिलाकर पीस लें। इसके बाद इससे तिलक लगाएं। ऐसा करने पर व्यक्ति का आकर्षण बढ़ता है।

8👉 अपामार्ग के बीज को बकरी के दूध में मिलाकर पीस लें, लेप बना लें। इस लेप को लगाने से व्यक्ति का समाज में आकर्षण काफी बढ़ जाता है। सभी लोग इनके कहे को मानते हैं।

9👉 सफेद आंकड़े के फूल को छाया में सुखा लें। इसके बाद कपिला गाय यानी सफेद गाय के दूध में मिलाकर इसे पीस लें और इसका तिलक लगाएं। ऐसा करने पर व्यक्ति का समाज में वर्चस्व हो जाता है।

10👉 शास्त्रों के अनुसार दूर्वा घास चमत्कारी होती है। इसका प्रयोग कई प्रकार के उपायों में भी किया जाता है। कोई व्यक्ति सफेद दूर्वा को कपिला गाय यानी सफेद गाय के दूध के साथ पीस लें और इसका तिलक लगाएं तो वह किसी भी काम में असफल नहीं होता है।

1/21/2023

तुलसी एक गुण अनेक

तुलसी एक गुण अनेक
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तुलसी के बारे में घर-घर में सभी जानते हैं। हिंदू धर्म में तुलसी को विशेष महत्व दिया गया हैैं। कहा जाता हैं कि जहां तुसली फलती हैं, उस घर में रहने वालों को कोई संकट नहीं आते। स्वास्थ्य के लिए आयुर्वेद में तुलसी के अनेक गुण के बारे में बताया गया हैं। यह बात कम लोग जानते हैं कि तुलसी परिवार में आने वाले संकट के बारे में सुखकर पहले संकेत दे देती हैं। पेटलावद के ज्योतिषी आनंद त्रिवेदी बता रहे हैं कि तुलसी एक, लेकिन गुण अनेक किय तरह से हैं।

प्रकृति की अपनी एक अलग खासियत है। इसने अपनी हर एक रचना को बड़ी ही खूबी और विशिष्ट नेमत बख्शी है। इंसान तो वैसे भी प्रकृति की उम्दा रचनाओं में से एक है जो समझदारी और सूझबूझ से काम लेता है। इसके अलावा जानवरों की खूबी ये है कि वे आने वाले खतरे, मसलन भूकंपए सुनामी, पारलौकिक ताकतों आदि को पहले ही भांप सकने में सक्षम होते हैं, लेकिन बहुत ही कम लोग यह बात जानते हैं कि पौधों के भीतर भी ऐसी ही अलग विशेषता है, जिसे अगर समझ लिया जाए तो घर के सदस्यों पर आने वाले कष्टों को पहले ही टाला जा सकता है।

क्यों मुरझाता है तुलसी का पौधा
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शायद कभी किसी ने इस बात पर ध्यान नहीं दिया कि चाहे तुलसी के पौधे पर कितना ही पानी क्यों ना डाला जाए उसकी कितनी ही देखभाल क्यों ना की जाएए वह अचानक मुरझाने या सूखने क्यों लगता है।

क्या बताना चाहता है👇
आपको यकीन नहीं होगा लेकिन तुलसी का मुरझाया हुआ पौधा आपको यह बताने की कोशिश कर रहा होता है कि जल्द ही परिवार पर किसी विपत्ति का साया मंडरा सकता है। कहने का अर्थ यह है कि अगर परिवार के किसी भी सदस्य पर कोई मुश्किल आने वाली है तो उसकी सबसे पहली नजर घर में मौजूद तुलसी के पौधे पर पड़ती है।

हिन्दू शास्त्र
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शास्त्रों में यह बात भली प्रकार से उल्लेख है कि अगर घर पर कोई संकट आने वाला है तो सबसे पहले उस घर से लक्ष्मी यानि तुलसी चली जाती है और वहां दरिद्रता का वास होने लगता है।

बुध ग्रह
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जहां दरिद्रता, अशांति व कलह का वातावरण होता है वहां कभी भी लक्ष्मी का वास नहीं होता। ज्योतिष के अनुसार ऐसा बुध ग्रह की वजह से होता है क्योंकि बुध का रंग हरा होता है और वह पेड़-पौधों का भी कारक माना जाता है।

लाल किताब
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ज्योतिष शास्त्र से संबंधित लाल किताब के अनुसार बुध को एक ऐसा ग्रह माना गया है जो अन्य ग्रहों के अच्छे-बुरे प्रभाव को व्यक्ति तक पहुंचाता है। अगर कोई ग्रह अशुभ-फल देने वाला है तो उसका असर बुध ग्रह से संबंधित वस्तुओं पर भी होगा और अगर कोई अच्छा फल मिलने वाला है तो उसका असर भी बुध ग्रह से जुड़ी चीजों पर दिखाई देगा।

अच्छा और बुरा प्रभाव
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अच्छे प्रभाव में पेड़-पौधे बढऩेे लगते हैं और बुरे प्रभाव में मुरझाकर अपनी दुर्दशा बयां कर देते हैं।

विभिन्न प्रकार की तुलसी
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शास्त्रानुसार तुलसी के विभिन्न प्रकार के पौधों का जिक्र मिलता है, जिनमें श्रीकृष्ण तुलसी, लक्ष्मी तुलसी, राम तुलसी, भू तुलसी, नील तुलसी, श्वेत तुलसी, रक्त तुलसी, वन तुलसी, ज्ञान तुलसी मुख्य रूप से हैं। इन सभी के गुण अलग-अलग और विशिष्ट हैं। तुलसी मानव शरीर में कान, वायु, कफ, ज्वर, खांसी और दिल की बीमारियों के लिए खासी उपयोगी है।

वास्तुशास्त्र में तुलसी
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वास्तुशास्त्र में भी तुलसी को महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। वास्तु के अनुसार तुलसी को किसी भी प्रकार के दोष से मुक्त रखने के लिए उसे दक्षिण-पूर्व से लेकर उत्तर-पश्चिम के किसी भी स्थान तक लगा सकते हैं। अगर तुलसी के गमले को रसोई के पास रखा जाए तो किसी भी प्रकार की कलह से मुक्ति पाई जा सकती है। जिद्दी पुत्र का हठ दूर करने के लिए पूर्व दिशा में लगी खिड़की के सामने रखें।

संतान में सुधार
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नियंत्रण या मर्यादा से बाहर निकल चुकी संतान को पूर्व दिशा से रखी गई तुलसी के तीन पत्तों को किसी ना किसी रूप में खिलाने पर वह आपकी आज्ञा का पालन करने लगती है।

कारोबार में वृद्धि
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कारोबार की चिंता सताने लगी है, घर में आय के साधन कम होते जा रहे हैं तो दक्षिण-पश्चिम दिशा में रखी तुलसी पर हर शुक्रवार कच्चा दूध और मिठाई का भोग लगाने के बाद उसे किसी सुहागिन स्त्री को दे दें। इससे व्यवसाय में सफलता मिलती है।

नौकरी पेशा
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अगर आप नौकरी पेशा हैं और ऑफि स में आपका कोई सीनियर परेशान कर रहा है तो ऑफि स की खाली जमीन पर या किसी गमले में सोमवार के दिन तुलसी के सोलह बीज किसी सफेद कपड़े में बांध कर ऑफि स जाते ही दबा दीजिए। इससे ऑफिस में आपका सम्मान बढ़ेगा।

शालिग्राम का अभिषेक
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घर की महिलाएं रोजाना पंचामृत बनाकर शालिग्राम का अभिषेक करती हैं तो घर में कभी भी वास्तुदोष की हालत नहीं आएगी।

शारीरिक फायदे
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ज्योतिष के अलावा शारीरिक तौर पर भी तुलसी के बड़े लाभ देखे गए हैं। सुबह के समय खाली पेट ग्रहण करने से डायबिटीज, रक्त की परेशानी, वात, पित्त आदि जैसे रोगों से मुक्ति पाई जा सकती है। प्रतिदिन अगर तुलसी के सामने कुछ समय के लिए बैठा जाए तो अस्थमा आदि जैसे श्वास के रोगों से जल्दी छुटकारा मिलता है।

वैद्य का दर्जा
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शास्त्रों में तुलसी को एक वैद्य का दर्जा भी दिया गया है, जिसका घर में रहना अत्यंत लाभकारी है। मनुष्य को अपने जीवन के प्रत्येक चरण में तुलसी की आवश्यकता पड़ती है। साथ ही आधुनिक रसायन शास्त्र भी यह बात स्वीकारता है कि तुलसी का सेवन, इसका स्पर्श, दीर्घायु और स्वास्थ्य के लिए बहुत लाभकारी सिद्ध होता है। 

ध्यान रखें तुलसी की ये 10 बात
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पुरानी परंपरा है कि घर में तुलसी जरूर होना
चाहिए। शास्त्रों में तुलसी को पूजनीय, पवित्र और
देवी का स्वरूप बताया गया है। यदि आपके घर में भी
तुलसी हो तो यहां बताई जा रही 10 बातें हमेशा
ध्यान रखनी चाहिए। यदि ये बातें ध्यान रखी
जाती हैं तो सभी देवी-देवताओं की विशेष कृपा
हमारे घर पर बनी रहती है। घर में सकारात्मक और
सुखद वातावरण रहता है। पैसों की कमी नहीं आती
है और परिवार के सदस्यों को स्वास्थ्य लाभ भी
मिलता है। यहां जानिए शास्त्रों के अनुसार बताई
गई तुलसी की खास बातें...

1🌱तुलसी के पत्ते चबाना नहीं चाहिए
तुलसी का सेवन करते समय ध्यान रखें कि इन पत्तों
को चबाए नहीं, बल्कि निगल लेना चाहिए। इस तरह
तुलसी का सेवन करने से कई रोगों में लाभ मिलता है।
तुलसी के पत्तों में पारा धातु के तत्व होते हैं। पत्तों
को चबाते समय ये तत्व हमारे दांतों पर लग जाते हैं
जो कि दांतों के लिए फायदेमंद नहीं है। इसीलिए
तुलसी के पत्तों को बिना चबाए ही निगलना
चाहिए।

2🌱शिवलिंग पर तुलसी नहीं चढ़ाना चाहिए शिवपुराण के अनुसार, शिवलिंग पर तुलसी के पत्ते नहीं चढ़ाना चाहिए। इस संबंध में एक कथा बताई गई है। कथा के अनुसार, पुराने समय दैत्यों के राजा
शंखचूड़ की पत्नी का नाम तुलसी था। तुलसी के पतिव्रत धर्म की शक्ति के कारण सभी देवता भी शंखचूड़ को हराने में असमर्थ थे। तब भगवान विष्णु ने
छल से तुलसी का पतिव्रत भंग कर दिया। इसके बादशिवजी ने शंखचूड़ का वध कर दिया।
जब ये बात तुलसी को पता चली तो उसने भगवान विष्णु को पत्थर बन जाने का श्राप दिया। विष्णुजी ने तुलसी का श्राप स्वीकार कर लिया और कहा कि तुम धरती पर गंडकी नदी तथा तुलसी के पौधे के रूप में हमेशा रहोगी। इसके बाद से ही अधिकांश पूजन कर्म में तुलसी का उपयोग विशेष रूप से किया जाता है, लेकिन शंखचूड़ की पत्नी होने के कारण तुलसी शिवलिंग पर नहीं चढ़ाई जाती है।

3🌱कब नहीं तोड़ना चाहिए तुलसी के पत्ते तुलसी के पत्ते कुछ खास दिनों में नहीं तोड़ना चाहिए। ये दिन हैं एकादशी, रविवार और सूर्य या चंद्र ग्रहण समय। इन दिनों में और रात के समय तुलसी के पत्ते नहीं तोड़ना चाहिए। बिना वजह तुलसी केपत्ते कभी नहीं तोड़ना चाहिए। ऐसा करने पर दोष लगता है। अनावश्यक रूप से तुलसी के पत्ते तोड़ना, तुलसी को नष्ट करने के समान माना गया है।

4🌱रोज करें तुलसी का पूजन हर रोज तुलसी पूजन करना चाहिए। साथ ही, तुलसी के संबंध में यहां बताई गई सभी बातों का भी ध्यान रखना चाहिए। हर शाम तुलसी के पास दीपक जलाना चाहिए। ऐसी मान्यता है कि जो लोग शाम के समय तुलसी के पास दीपक जलाते हैं, उनके घर में महालक्ष्मी की कृपा सदैव बनी रहती है।

5🌱तुलसी से दूर होते हैं वास्तु दोष
घर-आंगन में तुलसी होने से कई प्रकार के वास्तु दोष भी समाप्त हो जाते हैं। परिवार की आर्थिक स्थिति पर भी इसका शुभ असर होता है।

6🌱तुलसी घर में हो तो नहीं लगती है बुरी नजर मान्यता है कि तुलसी से घर पर किसी की बुरी नजर नहीं लगती है। साथ ही, घर के आसपास की किसी भी प्रकार की नकारात्मक ऊर्जा पनप नहीं पाती
है। सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है।

7🌱तुलसी से वातावरण होता है पवित्र
तुलसी से घर का वातावरण पूरी तरह पवित्र और
हानिकारक सूक्ष्म कीटाणुओं से मुक्त रहता है। इसी
पवित्रता के कारण घर में लक्ष्मी का वास होता है
और सुख-समृद्धि बनी रहती है।

8🌱तुलसी का सूखा पौधा नहीं रखना चाहिए घर में
यदि घर में लगा हुआ तुलसी का पौधा सूख जाता है
तो उसे किसी पवित्र नदी में, तालाब में या कुएं में
प्रवाहित कर देना चाहिए। तुलसी का सूखा पौधा
घर में रखना अशुभ माना जाता है। एक पौधा सूख
जाने के बाद तुरंत ही दूसरा पौधा लगा लेना
चाहिए। घर में हमेशा स्वस्थ तुलसी का पौधा ही
लगाना चाहिए।

9🌱तुलसी है औषधि भी
आयुर्वेद में तुलसी को संजीवनी बूटी के समान माना
जाता है। तुलसी में कई ऐसे गुण होते हैं जो बहुत-सी
बीमारियों को दूर करने में और उनकी रोकथाम करने
में सहायक होते हैं। तुलसी का पौधा घर में रहने से
उसकी महक हवा में मौजूद बीमारी फैलाने वाले कई
सूक्ष्म कीटाणुओं को नष्ट करती है।

10🌱रोज तुलसी की एक पत्ती सेवन करने से मिलते हैं ये
फायदे
तुलसी की महक से सांस से संबंधित कई रोगों में लाभ
मिलता है। साथ ही, तुलसी का एक पत्ता रोज सेवन
करने से हम सामान्य बुखार से बचे रहते हैं। मौसम
परिवर्तन के समय होने वाली बीमारियों से बचाव
हो जाता है। इससे शरीर की रोग प्रतिरोधक
क्षमता बढ़ती है, लेकिन हमें नियमित रूप से तुलसी
का सेवन करते रहना चाहिए।

एक और बात तुलसी कृष्ण को बेहद प्यारी हैं,इसलिये प्रतिदिन कान्हा के चरणों में तुलसीदल यानि तुलसी का पत्ता ज़रूर अर्पण करना चाहिये..

कृष्णसेवा के प्रत्येक भोग में तुलसी दल रखकर अर्पण करना चाहिये

“तुलसी कृष्ण प्रेयसी नमो: नमो:"

1/16/2023

1/16/2023

परिजात पुष्प की पौराणिक कथा

परिजात पुष्प की पौराणिक कथा
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पुराणों में एक कथा विख्यात है जिसके अनुसार एक बार देवऋषि नारद श्री कृष्ण से मिलने धरती पर पधारे थे. उस समय उनके हाथों में परिजात के सुन्दर पुष्प थे और उन्होंने वे पुष्प श्री कृष्ण को भेंट में दे दिए. कृष्ण ने वे पुष्प साथ में बैठी अपनी पत्नी रुक्मणी को सौंप दिए लेकिन जब ये बात कृष्ण की दूसरी पत्नी सत्यभामा को पता लगी तो वो क्रोधित हो उठी और कृष्ण से अपनी वाटिका के लिए परिजात वृक्ष की मांग की.

कृष्ण के समझाने पर भी भामा का क्रोध शांत नहीं हुआ और अंत में अपनी पत्नी की जिद के सामने झुकते हुए उन्होंने अपने एक दूत को स्वर्गलोक में परिजात वृक्ष को लाने के लिए भेजा पर उनकी यह मांग पर इंद्र ने इंकार कर दिया और वृक्ष नहीं दिया. जब इस बात का संदेश कृष्ण तक पहुंचा तो वे रोष से भर गए और इंद्र पर आक्रमण कर दिया. युद्ध में कृष्ण ने विजय प्राप्त की और इंद्र से परिजात वृक्ष ले आए. पराजित इंद्र ने क्रोध में आकर परिजात वृक्ष पर कभी भी फल ना आने का श्राप दिया इसीलिए इस वृक्ष पर कभी भी फल नहीं उगते.

वादे के अनुसार कृष्ण ने उस वृक्ष को लाकर सत्यभामा की वाटिका में लगवा दिया लेकिन उन्हें सबक सिखाते हुए कुछ ऐसा किया जिस कारण रात को वृक्ष पर पुष्प तो उगते थे लेकिन वे उनकी पहली पत्नी रुक्मणी की वाटिका में ही गिरते थे. इसीलिए आज भी जब इस वृक्ष के पुष्प झड़ते भी हैं तो पेड़ से काफी दूर जाकर गिरते हैं.

वर्तमान में पारिजात का पेड़ उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले के किन्तूर गांव स्थित है. इस गांव का नाम पांडवों की माता कुंती के नाम पर किन्तूर पड़ा. इसी गांव में पारिजात का ऐतिहासिक पेड़ स्थित है. यह पेड़ कई मायनों में बेहद खास है. इस पेड़ पर सफेद रंग के फूल आते हैं जो कि सूखने पर सुनहले हो जाते हैं. यह फूल रात को खिलते हैं और सुबह मुरझा जाते हैं. रात में जब पारिजात के फूल खिलते हैं तो उनकी सुगंध दूर दूर तक फैल जाती है.

किन्तूर गांव के इस पारिजात पेड़ की जांच कई बार वनस्पति विज्ञानियों ने की है. जिन्होंने इसे असाधारण करार दिया है. वनस्पति वैज्ञानिकों के मुताबिक परिजात के इस पेड़ को ‘ऐडानसोनिया डिजिटाटा’ के नाम से जाना जाता है. इसे एक विशेष श्रेणी में रखा गया है  क्योंकि यह अपने फल या उसके बीज का उत्पादन नहीं करता है. यही नहीं इसकी शाखा या कलम से एक दूसरा परिजात वृक्ष भी नहीं लगाया जा सकता. वनस्पतिशास्त्रियों के अनुसार यह एक यूनिसेक्स पुरुष वृक्ष है. ऐसा कोई पेड़ और कहीं नहीं मिला है. इस पेड़ के बारे में एक और खास बात कही जाती है कि इसकी शाखाएं टूटती या सूखती नहीं हैं. बल्कि पुरानी हो जाने के बाद सिकुड़ते हुए मुख्य तने में ही गायब हो जाती हैं.

पारिजात में फूल लगते तो हैं, लेकिन बहुत कम संख्या में. इस पेड़ में जून के महीने(गंगा दशहरा के समय) फूल आते हैं. लेकिन इनकी संख्या बेहद कम होती है. कुछ खास ही लोगों को इसके फूल मिल पाते हैं. इसके पुष्पों की गंध रात में दूर तक फैलती है. इस पेड़ की पत्तियां भी बेहद खास हैं. पारिजात पेड़ के निचले हिस्से में पत्तियां हाथ की उंगलियों की तरह पांच युक्तियों वाली होती है. जबकि पेड़ के उपरी हिस्सों में यही पत्तियां सात युक्तियों वाली हो जाती हैं।

1/12/2023

1/12/2023

पांच वस्तु ऐसी हे ,जो अपवित्र होते हुए भी पवित्र है....

पांच वस्तु ऐसी हे ,जो अपवित्र होते हुए भी पवित्र है....
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उच्छिष्टं शिवनिर्माल्यं
वमनं शवकर्पटम् ।
काकविष्टा ते पञ्चैते
पवित्राति मनोहरा॥ 

1. उच्छिष्ट — गाय का दूध । 
गाय का दूध पहेले उसका बछडा पीकर उच्छिष्ट करता है।फिर भी वह पवित्र ओर शिव पर चढता हे ।

2. शिव निर्माल्यं - गंगा का जल

गंगा जी का अवतरण स्वर्ग से सीधी शिव जी के मस्तक पे आई नियमानुसार शिव जी पर चढायी हुइ हर चीज़ निर्माल्य यानि (प्रवाहित करने योग्य) है पर गंगाजल पवित्र है.

3. वमनम्—उल्टी — शहद..

मधुमख्खी जब फूलो का रस लेके अपने छल्ले पे आती है , तब वो अपने मुख से उसे निकालती है ,जिससे शहद बनता है ,जो पवित्र कार्यो मे लिया जाता है.

4. शव कर्पटम्— रेशमी वस्त्र

धार्मिक कार्यो को संपादित करने के लिये पवित्रता की आवश्यकता रहती है , रेशमी वस्त्र को पवित्र माना गया है , पर रेशम को बनाने के लिये रेशमी किडें को उबलते पानी मे डाला जाता है ,ओर उसकी मौत हो जाती है उसके बाद रेशम मिलता है तो हुआ शव कर्पट फिर भी पवित्र है ।

5. काक विष्टा— कौए का मल

कौवा पीपल वगेरे पेडो के फल खाता है ,ओर उन पेडो के बीज अपनी विष्टा मे इधर उधर छोड देता है ,जीसमे से पेडोकी उत्पत्ति होती है ,आपने देखा होगा की कही भी पीपल के पेड उगते नहि हे बल्कि पीपल काक विष्टा से उगता है ,फिर भी पवित्र है।

1/08/2023

1/08/2023

ताम्रजल के फायदे

ताम्रजल के फायदे 

तांबे के बर्तन का पानी पीने से दूर होते हैं ये रोग, पूजा में इसलिए करते हैं USE...
सोना, चांदी धातुएं महंगी है, जबकि तांबा इन दोनों की तुलना में सस्ता होने के साथ ही मंगल की धातु मानी गई। माना जाता है कि तांबे के बर्तन का पानी पीने से खून साफ होता है। इसलिए जब पूजा में आचमन किया जाता है तो अचमनी तांबे की ही रखी जाती है, क्योंकि पूजा के पहले पवित्र क्रिया के अंर्तगत हम जब तीन बार आचमन करते हैं तो उस जल से कई तरह के रोग दूर होते हैं और रक्त प्रवाह बढ़ता है। इससे पूजा में मन लगता है और एकाग्रता बढ़ती है। तांबे के इन्हीं गुणों के कारण इस धातु के बर्तनों को उपयोग करना बहुत अच्छा माना जाता है।

कहते हैं रात को तांबे के पात्र में पानी रख दें और सुबह इस पानी को पीने से अनेक फायदे होते हैं। आयुर्वेद में कहा गया है कि यह पानी शरीर के कई दोषों को शांत करता है। साथ ही, इस पानी से शरीर के जहरीले तत्व बाहर निकल जाते हैं। रात को इस तरह तांबे के बर्तन में संग्रहित पानी को ताम्रजल के नाम से जाना जाता है। ये ध्यान रखने वाली बात है कि तांबे के बर्तन में कम से कम 8 घंटे तक रखा हुआ पानी ही लाभकारी होता है। जिन लोगों को कफ की समस्या ज्यादा रहती है, उन्हें इस पानी में तुलसी के कुछ पत्ते डाल देने चाहिए। बहुत कम लोग जानते हैं कि तांबे के बर्तन का पानी पीने के बहुत सारे फायदे हैं। आज हम आपको बताने जा रहे हैं तांबे के बर्तन में रखे पानी को पीने से होने वाले कुछ बेहतरीन फायदों के बारे में...

थायराइड को करता है नियंत्रित-
थायरेक्सीन हार्मोन के असंतुलन के कारण थायराइड की बीमारी होती है। थायराइड के प्रमुख लक्षणों में तेजी से वजन घटना या बढऩा, अधिक थकान महसूस होना आदि हैं। थायराइड एक्सपर्ट मानते है कि कॉपर के स्पर्श वाला पानी शरीर में थायरेक्सीन हार्मोन को बैलेंस कर देता है। यह इस ग्रंथि की कार्यप्रणाली को भी नियंत्रित करता है। तांबे के बर्तन में रखे पानी को पीने से रोग नियंत्रित हो जाता है।

स्किन को बनाए स्वस्थ-
अधिकतर लोग हेल्दी स्किन के लिए तरह-तरह के कॉस्मेटिक्स का उपयोग करते हैं। वो मानते हैं कि अच्छे कॉस्मेटिक्स यूज करने से त्वचा सुंदर हो जाती है, लेकिन ये सच नहीं है। स्किन पर सबसे अधिक प्रभाव आपकी दिनचर्या और खानपान का पड़ता है। इसीलिए अगर आप अपनी स्किन को हेल्दी बनाना चाहते हैं तो तांबे के बर्तन में रातभर पानी रखें और सुबह उस पानी को पी लें। नियमित रूप से इस नुस्खे को अपनाने से स्किन ग्लोइंग और स्वस्थ लगने लगेगी।

हमेशा दिखेंगे जवान-
कहते हैं, जो पानी ज्यादा पीता है उसकी स्किन पर अधिक उम्र में भी झुर्रियां दिखाई नहीं देती हैं। ये बात एकदम सही है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि अगर आप तांबे के बर्तन में जल को रखकर पिएं तो इससे त्वचा का ढीलापन आदि दूर हो जाता है। डेड स्किन भी निकल जाती है और चेहरा हमेशा चमकता हुआ दिखाई देता है।

गठिया में होता है फायदेमंद-
आजकल कई लोगों को कम उम्र में ही गठिया और जोड़ों में दर्द की समस्या सताने लगती हैं। यदि आप भी इस समस्या से परेशान हैं तो रोज तांबे के पात्र का पानी पिएं। गठिया की शिकायत होने पर तांबे के बर्तन में रखा हुआ जल पीने से लाभ मिलता है। तांबे के बर्तन में ऐसे गुण आ जाते हैं, जिनसे बॉडी में यूरिक एसिड कम हो जाता है और गठिया व जोड़ों में सूजन के कारण होने वाले दर्द में आराम मिलता है।

पाचन क्रिया को ठीक करता है-
एसिडिटी या गैस या पेट की कोई दूसरी समस्या होने पर तांबे के बर्तन का पानी अमृत की तरह काम करता है। आयुर्वेद के अनुसार, अगर आप अपने शरीर से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालना चाहते हैं तो तांबे के बर्तन में कम से कम 8 घंटे रखा हुआ जल पिएं। इससे राहत मिलेगी और पाचन की समस्याएं भी दूर होंगी।

खून की कमी करता है दूर-
एनीमिया या खून की कमी एक ऐसी समस्या है जिससे 30 की उम्र से अधिक की कई भारतीय महिलाएं परेशान हैं। कॉपर के बारे में यह तथ्य सबसे ज्यादा आश्चर्यजनक है कि यह शरीर की अधिकांश प्रक्रियाओं में बेहद आवश्यक होता है। यह शरीर के लिए आवश्यक पोषक तत्वों को अवशोषित करने का काम करता है। इसी कारण तांबे के बर्तन में रखे पानी को पीने से खून की कमी या विकार दूर हो जाते हैं।

दिल को बनाए हेल्दी -
तनाव आजकल सभी की दिनचर्या का हिस्सा बन चुका है। इसीलिए
दिल के रोग और तनाव से ग्रसित लोगों की संख्या तेजी बढ़ती जा रही है। यदि आपके साथ भी ये परेशानी है तो तो तांबे के जग में रात को पानी रख दें। सुबह उठकर इसे पी लें। तांबे के बर्तन में रखे हुए जल को पीने से पूरे शरीर में रक्त का संचार बेहतरीन रहता है। कोलेस्ट्रॉल कंट्रोल में रहता है और दिल की बीमारियां दूर रहती हैं।

1/08/2023

मनुष्य, भूख और प्यास रचना की कथा?

मनुष्य, भूख और प्यास रचना की कथा?
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सृष्टि की रचना से पहले ब्रह्मा ने अग्नि, वरुण, पवन आदि देवों की उत्पत्ति की. लेकिन यह तय नहीं हो पा रहा था कि ये देवगण निवास कहां करेंगे।

उन्होंने ब्रह्मा से कहा- परमपिता हम पंचभूत हैं. आप हमारे अंश से सृष्टि रचना के इच्छुक हैं. परंतु हम भूख-प्यास से पीड़ित हैं.पहले हमारे रहने का प्रबंध करें ताकि हम आहार ग्रहण कर सकें।

उनकी प्रार्थना पर ब्रह्मा ने एक गौ का शरीर बनाकर दिखाया और पूछा कि क्या इसमें निवास करेंगे? देवों ने कहा- यह शरीर तो उत्तम है किंतु हमारे उपयुक्त नहीं है. कुछ और प्रबंध करें।

फिर ब्रह्मा ने घोड़े का शरीर बनाया. देवों ने अश्व को अच्छी तरह देखकर कहा कि इससे भी उनका काम नहीं चलने वाला. परमपिता के सामने उलझन बढ़ती जा रही थी।

तब परमात्मा ने विचार करके मनुष्य का शरीर बनाया. देवताओं को यह शरीर भा गया. उन्होंने ब्रह्मा से कहा यह सुंदरतम रचना है और हम इसमें रहेंगे।

ब्रह्मा ने सभी देवों को कहा कि इस मनुष्य शरीर में अपने योग्य उत्तम स्थान देखकर प्रवेश कर जाओ।

अग्नि ने उदर यानी पेट में स्थान बनाया. वरुण ने रसना यानी जीभ में वायुदेव ने प्राणवायु के रूप में नाक में, आकाश ने शरीर के हर रिक्त भाग में डेरा जमाया।

इस प्रकार जब सबने अपने लिए स्थान चुन लिए तो भूख-प्यास ने ब्रह्मा से उनके लिए भी कुछ प्रबंध करने को कहा।

ब्रह्मा ने कहा- तुम्हारे लिए अलग से प्रबंध की जरूरत ही नहीं. दोनों को मैं इन देवों के बीच बांट देता हूं. इनके आहार में तुम्हारा हिस्सा होगा. उनकी संतुष्टि से तुम्हें संतुष्टि मिलेगी।

सबकी जगह बन गई. ब्रह्मा ने भूख और प्यास को हर देवता के साथ कर दिया. देवों चिंता हुई कि इनके निर्वाह के लिए अन्न न हुआ तो काम कैसे चलेगा. अगर तृप्ति न हुई तो सब लड़ मरेंगे.

ब्रह्मा ने अन्न बनाया. अन्न को लगा कि मुझे तो पैदा करने से पहले ही ब्रह्मा ने मेरे विनाशक भी बना दिए थे. वह पैदा होते ही जान बचाकर भागा.
सभी देवताओं के संयोग से बने मनुष्य के शरीर ने उसे दबोचने के लिए वाणी का प्रयोग किया. वाणी अन्न को पकड़ने के लिए मंत्र पढ़ने लगी लेकिन अन्न उसकी पकड़ में नहीं आया.
सभी परमपिता के पास पहुंचे और सारी आपबीती सुनाई. ब्रह्मा ने कहा- भूख मिटाने के लिए अन्न मात्र मंत्र पढ़ने से नहीं मिलेगा. तुम सब कुछ और प्रयास करो.

उसके बाद घ्राण इंद्रियों यानी नाक, कर्ण इंद्री, नेत्र इंद्री, त्वचा इंद्री सबने अन्न को पकड़ने की कोशिश की लेकिन अन्न किसी के पकड़ में नहीं आया.

सब फिर गुहार लगाने ब्रह्मा के पास पहुंचे. ब्रह्मा ने कहा-अन्न का कहना है कि वह मनुष्य को सूंघने, छूने या सुनने से प्राप्त नहीं होगा. भूख मिटानी है तो कुछ और उपाय करो.

अंत में वह पुरुष मुख के रास्ते अन्न को अपने शरीर में प्रवेश कराने में सफल हुआ. अन्न ने अपना बलिदान देकर मानव शरीर में बसे सभी देवों को तृप्त किया.

जब शरीर में देवों को तृप्ति मिल गई तो प्राण का संचार हुआ. यानी शरीर में प्राण आ गए.

अब परमात्मा ने सोचा कि अगर मानव इस प्रकार से स्वयं समर्थ तो हो गया लेकिन इसे हर कदम पर मेरी जरूरत पड़ेगी. यह आखिर अकेला कैसे रहेगा.

ब्रह्मा ने मनुष्य का एकांत मिटाने के लिए संसार की और सारी वस्तुएं बना दीं. ब्रह्मा की रचना को देखकर प्राण युक्त उस मानव शरीर को आभास हुआ यह काम तो मेरे बस का नहीं.जरूर कोई ऐसी शक्ति है जो मुझसे ज्यादा समर्थवान है.
मानव शरीर ने सोचा- भले ही वह शक्ति अदृश्य है लेकिन अलौकिक है. रोम-रोम में है और सर्वशक्तिमान है. ऐसा विचार आते ही उसने महसूस किया कि परमात्मा को देख लिया है. इस जगत का कर्ता-धर्ता ईश्वर हैं.

अब ब्रह्मा संतुष्ट हो गए और उन्होंने मनुष्य को अपना जीवन आगे बढ़ाने के लिए छोड़ा फिर अन्य कार्यों में लग गए.

सोचिए अगर कुछ मंत्र बोल देने, या देख लेने, छू लेने, सूंघ लेने से मनुष्य का पेट भर जाता तो संसार वहीं ठप्प हो जाता. ब्रह्मा का उद्देश्य कहां पूरा होता.
             
                (वेदो की कथा)

1/07/2023

1/07/2023

माघ माह में तिल

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          माघ माह में 'संकष्टी चतुर्थी, 'षटतिला एकादशी, 'लोहड़ी", 'मकरसंक्रान्ति' इन सभी त्यौहारों पर तिल का सर्वाधिक महत्व है। इसके पीछे हैं तिल के विशेष गुण जिनकी बजह से माघ माह में तिल को इतना महत्व दिया जाता है।

1.तिल का सेवन हमारे शरीर के लिए बहुत लाभदायक होता है। सर्दियों में तिल व उसके तेल दोनों का ही सेवन करना चाहिए। काले तिल व सफेद तिल दोनों का ही उपयोग औषधीय रूप में भी किया जाता है। तिल का तेल एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होता है। वाइरस, एजिंग और बैक्टीरिया से शरीर की रक्षा करता है।

2.ठंड में तिल गुड़ दोनो समान मात्रा में लेकर मिला लें। उसके लड्डू बना लें। प्रतिदिन 2 बार 1-1 लड्डू दूध के साथ खाने से मानसिक दुर्बलता एवं तनाव दूर होते है। शक्ति मिलती है।

3. कठिन शारीरिक श्रम करने पर सांस फूलना जल्दी बुढ़ापा आना बन्द हो जाता है। इससे चुस्ती व स्फूर्ती बनी रहती है।

4.तिल व तिल के तेल के सेवन से व सिर में इसकी मालिश करने से न केवल बाल घने और चमकदार होते हैं बल्कि बालों का गिरना भी कम हो जाता है।

5.प्रतिदिन दो चम्मच काले तिल को चबाकर खाइए और उसके बाद ठंडा पानी पीजिए। इसका नियमित सेवन करने से पुराना बवासीर भी ठीक हो जाता है।

6.ठंड में तिल और गुड़ सर्द हवा से बचाता है। जिससे सर्दी, खाँसी जैसे रोग भी दूर रहते हैं।

7.तिल का उपयोग चेहरे पर निखार के लिए भी किया जाता है। तिल को दूध में भिगोकर उसका पेस्ट चेहरे पर लगाने से चेहरे पर प्राकृतिक चमक आती है, और रंग भी निखरता है। इसके अलावा तिल के तेल की मालिश करने से भी त्वचा कांतिमय हो जाती है।

৪.शरीर के किसी भी अंग की त्वचा के जल जाने पर, तिल को पीसकर घी और कपूर के साथ लगाने पर आराम मिलता है, और घाव भी जल्दी ठीक हो जाता है।

9.सूखी खाँसी होने पर तिल को मिश्री व पानी के साथ सेवन करने से लाभ मिलता है। इसके अलावा तिल के तेल को लहसुन के साथ गर्म करके, गुनगुने रूप में कान में डालने पर कान के दर्द में आराम मिलता है।
                   
                          "जय जय श्री राधे"

1/05/2023

1/05/2023

रोचक जानकारी # Rochak jankari

रोचक जानकारी # Rochak jankari 

1. चीनी को जब चोट पर लगाया जाता है, दर्द तुरंत कम हो जाता है...
2. जरूरत से ज्यादा टेंशन आपके दिमाग को कुछ समय के लिए बंद कर सकती है...
3. 92% लोग सिर्फ हस देते हैं जब उन्हे सामने वाले की बात समझ नही आती...
4. बतक अपने आधे दिमाग को सुला सकती हैंजबकि उनका आधा दिमाग जगा रहता....
5. कोई भी अपने आप को सांस रोककर नही मार सकता...
6. स्टडी के अनुसार : होशियार लोग ज्यादा तर अपने आप से बातें करते हैं...
7. सुबह एक कप चाय की बजाए एक गिलास ठंडा पानी आपकी नींद जल्दी खोल देता है...
8. जुराब पहन कर सोने वाले लोग रात को बहुत कम बार जागते हैं या बिल्कुल नही जागते...
9. फेसबुक बनाने वाले मार्क जुकरबर्ग के पास कोई कालेज डिगरी नही है...
10. आपका दिमाग एक भी चेहरा अपने आप नही बना सकता आप जो भी चेहरे सपनों में देखते हैं वो जिदंगी में कभी ना कभी आपके द्वारा देखे जा चुके होते हैं...
11. अगर कोई आप की तरफ घूर रहा हो तो आप को खुद एहसास हो जाता है चाहे आप नींद में ही क्यों ना हो...
12. दुनिया में सबसे ज्यादा प्रयोग किया जाने वाला पासवर्ड 123456 है.....
13. 85% लोग सोने से पहले वो सब सोचते हैं जो वो अपनी जिंदगी में करना चाहते हैं...
14. खुश रहने वालों की बजाए परेशान रहने वाले लोग ज्यादा पैसे खर्च करते हैं...
15. माँ अपने बच्चे के भार का तकरीबन सही अदांजा लगा सकती है जबकि बाप उसकी लम्बाई का...
16. पढना और सपने लेना हमारे दिमाग के अलग-अलग भागों की क्रिया है इसी लिए हम सपने में पढ नही पाते...
17. अगर एक चींटी का आकार एक आदमी के बराबर हो तो वो कार से दुगुनी तेजी से दौडेगी...
18. आप सोचना बंद नही कर सकते.....
19. चींटीयाँ कभी नही सोती...
20. हाथी ही एक एसा जानवर है जो कूद नही सकता...
21. जीभ हमारे शरीर की सबसे मजबूत मासपेशी है...
22. नील आर्मस्ट्रांग ने चन्द्रमा पर अपना बायां पाँव पहलेरखा था उस समय उसका दिल 1 मिनट में 156 बार धडक रहा था...
23. पृथ्वी के गुरूत्वाकर्षण बल के कारण पर्वतों का 15,000मीटर से ऊँचा होना संभव नही है...
23. शहद हजारों सालों तक खराब नही होता..
24. समुंद्री केकडे का दिल उसके सिर में होता है...
25. कुछ कीडे भोजन ना मिलने पर खुद को ही खा जाते है....
26. छींकते वक्त दिल की धडकन 1 मिली सेकेंड के लिए रूक जाती है...
27. लगातार 11 दिन से अधिक जागना असंभव है...
28. हमारे शरीर में इतना लोहा होता है कि उससे 1 इंच लंबी कील बनाई जा सकती है.....
29. बिल गेट्स 1 सेकेंड में करीब 12,000 रूपए कमाते हैं...
30. आप को कभी भी ये याद नही रहेगा कि आपका सपना कहां से शुरू हुआ था...
31. हर सेकेंड 100 बार आसमानी बिजली धरती पर गिरती है...
32. कंगारू उल्टा नही चल सकते...
33. इंटरनेट पर 80% ट्रैफिक सर्च इंजन से आती है...
34. एक गिलहरी की उमर,, 9 साल होती है...
35. हमारे हर रोज 200 बाल झडते हैं...
36. हमारा बांया पांव हमारे दांये पांव से बडा होता हैं...
37. गिलहरी का एक दांत हमेशा बढता रहता है....
38. दुनिया के 100 सबसे अमीर आदमी एक साल में इतना कमा लेते हैं जिससे दुनिया
की गरीबी 4 बार खत्म की जा सकती है...
39. एक शुतुरमुर्ग की आँखे उसके दिमाग से बडी होती है...
40. चमगादड गुफा से निकलकर हमेशा बांई तरफ मुडती है...
41. ऊँट के दूध की दही नही बन सकता...
42. एक काॅकरोच सिर कटने के बाद भी कई दिन तक जिवित रह सकता है...
43. कोका कोला का असली रंग हरा था...
44. लाइटर का अविष्कार माचिस से पहले हुआ था...
45. रूपए कागज से नहीं बल्कि कपास से बनते है...
46. स्त्रियों की कमीज के बटन बाईं तरफ जबकि पुरूषों की कमीजके बटन दाईं तरफ होते हैं...
47. मनुष्य के दिमाग में 80% पानी होता है.
48. मनुष्य का खून 21 दिन तक स्टोर किया जा सकता है...
49. फिंगर प्रिंट की तरह मनुष्य की जीभ के निशान भी अलग-अलग होते हैं...
कैसी लगी जानकारी
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1/04/2023

1/04/2023

किसे कहते हैं सोला का भोजन?

किसे कहते हैं सोला का भोजन?
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स्वस्थ शरीर और स्वस्थ मस्तिष्क दोनों ही के लिये शुद्ध आहार बहुत आवश्यक है। एक स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मस्तिष्क विद्यमान होता है। प्रायः देखने में आता है कि जिस व्यक्ति का जैसा आहार होता है, उसके विचार भी उसी प्रकार के होते हैं। शुद्ध आहार लेने वालों के विचार भी शुद्ध होते हैं और दूषित एवं अशुद्ध भोजन करने वालों के विचार भी दूषित होते हैं। जितने भी महापुरूष, संन्यासी, महात्मा, साधु, ऋषि, महाराज हैं, वे सभी शुद्ध एवं संयमित भोजन करते हैं। इसलिये उनके विचार उनकी सोच और उनके मुँह से निकले हुए शब्द भी उसी प्रकार शुद्ध, नपे-तुले संतुलित एवं शिक्षा प्रदान करने वाले होते हैं। आहार, विचार एवं स्वास्थ्य ये तीनों ही एक माला के दमकते मोती हैं। सभी एक दूसरे के पूरक हैं और एक-दूसरे पर आधारित हैं। अशुद्ध आहार से विचार भी अशुद्ध होते हैं और हमारा स्वास्थ्य भी।"

सूर्यास्त के पूर्व भोजन क्यों
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कीटाणु और रोगाणु जिन्हें हम सीधे तौर पर देख नहीं सकते वे सूक्ष्म जीव रात्रि में तेजी से फ़ैल जाते हैं। ऐसे में सूर्यास्त के बाद खाने से वे सीधा हमारे शरीर में जाकर बीमारियां पैदा करते हैं और जैन धर्म में इसे हिंसा माना गया है। आयुर्वेद का मानना है कि सूर्यास्त से पहले भोजन करने से हमारा पाचन तंत्र ठीक रहता है और ऐसा करने पर पाचन शक्ति मजबूत होती है। इसके अलावा शाम के पहले खाने से भोजन जल्दी पचता है और पेट से सम्बंधित विकार नही होते हैं।

सोला क्या होता है? सोला के भोजन से क्या आशय है?
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प्राचीन से मुनियो एवं त्यागी व्रतियों के चौको (रसोई घर) में अक्सर सोला शब्द प्रयोग किया जाता है। कई बार जानकारी के अभाव में सोला शब्द एक रूढ़िवादी परम्परा सा लगने लगता है लेकिन सोला को सोला क्यों कहा जाता है? इससे जुड़ी भ्रांतियां और 16 का वास्तविक स्वरूप क्या है इसे हम जैन दर्शन के परिपेक्ष में जानते हैं।

यह सोला शब्द भोजन निर्माण संबंधी सोलह नियमों पर आधारित एक स्वास्थ्य परक भोजन शैली है जिसे कालान्तर में सोला शब्द तक सीमित होना पड़ा।

भोजन निर्माण संबंधी सोलह नियम 
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1- द्रव्य शुद्धि 2- क्षेत्र शुद्धि 3-काल शुद्धि
4-भाव शुद्धि

1 द्रव्य शुद्धि 
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अन्न शुद्धि 👉 खाद्य सामग्री सड़ी गली घुनी एवं अभक्ष्य न हो ।

जल शुद्धि 👉 जल जीवानी किया हुआ और प्रासुक हो ।

अग्नि शुद्धि 👉 ईंधन देखकर शोध कर उपयोग किया गया हो ।

कर्त्ता शुद्धि 👉 भोजन बनाने वाला स्वस्थ हो , स्नान करके धुले शुद्ध वस्त्र पहने हो , नाखून बडे न हो , अंगुली वगैरह कट जाने पर खून का स्पर्श खाद्य वस्तु से न हो , गर्मी में पसीने का स्पर्श न हो या पसीना खाद्य वस्तु में ना गिरे ।

2 क्षेत्र शुद्धि 
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प्रकाश शुद्धि 👉 रसोई में समुचित सूर्य का प्रकाश रहता है ।

वायु शुद्धि 👉 रसोई में शुद्ध हवा का संचार हो ।

स्थान शुद्धि 👉 रसोई लोगों के आवागमन का सार्वजनिक स्थान न हो एवं अधिक अंधेरे वाला स्थान न हो ।

दुर्गंध शुद्धि 👉  हिंसादि कार्य न होता हो , गंदगी से दूर हो ।

3 काल शुद्धि 
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ग्रहण काल 👉 चंद्र ग्रहण या सूर्य ग्रहण के काल में भोजन न बनाया जाय ।

शोक काल 👉 शोक दुःख अथवा मरण के समय भोजन न बनाया जाए।

रात्रि काल 👉 रात्रि के समय भोजन नहीं बनाना चाहिए ।

प्रभावना काल 👉 धर्म प्रभावना अर्थात् उत्सव काल के समय भोजन नहीं बनाना चाहिए ।

4 भाव शुद्धि 
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वात्सल्य भाव 👉 पात्र और धर्म के प्रति वात्सल्य होना चाहिए । रिश्वत,चोरी आदि के धन से भोजन तैयार करके साधु को भोजन कभी नहीं कराना चाहिए।

करुणा भाव 👉 सब जीवों एवं पात्र के ऊपर दया का भाव रखना चाहिए ।

विनय भाव 👉 पात्र के प्रति विनय का भाव होना चाहिए ।

दान भाव 👉  दान करने का भाव रहना चाहिए। अकड़,अहम भाव के साथ आहार दान नहीं देना चाहिए।

कहा भी गया है जैसा खाए अन्न, वैसा होवे मन।

1/03/2023

1/03/2023

मृत्यु के 14 प्रकार # mutyu ke 14 prakar

मृत्यु के 14 प्रकार # mutyu ke 14 prakar 

राम-रावण युद्ध चल रहा था, तब अंगद ने रावण से कहा- तू तो मरा हुआ है, मरे हुए को मारने से क्या फायदा?

रावण बोला– मैं जीवित हूँ, मरा हुआ कैसे?

अंगद बोले, सिर्फ साँस लेने वालों को जीवित नहीं कहते - साँस तो लुहार की धौंकनी भी लेती है!

तब अंगद ने मृत्यु के 14  प्रकार बताए👉

कौल कामबस कृपिन विमूढ़ा।
अतिदरिद्र अजसि अतिबूढ़ा।।
सदारोगबस संतत क्रोधी।
विष्णु विमुख श्रुति संत विरोधी।।
तनुपोषक निंदक अघखानी।
जीवत शव सम चौदह प्रानी।।

1. कामवश:
〰️〰️〰️〰️ जो व्यक्ति अत्यंत भोगी हो, कामवासना में लिप्त रहता हो, जो संसार के भोगों में उलझा हुआ हो, वह मृत समान है। जिसके मन की इच्छाएं कभी खत्म नहीं होतीं और जो प्राणी सिर्फ अपनी इच्छाओं के अधीन होकर ही जीता है, वह मृत समान है। वह अध्यात्म का सेवन नहीं करता है, सदैव वासना में लीन रहता है।

2. वाममार्गी:
〰️〰️〰️〰️ जो व्यक्ति पूरी दुनिया से उल्टा चले, जो संसार की हर बात के पीछे नकारात्मकता खोजता हो; नियमों, परंपराओं और लोक व्यवहार के खिलाफ चलता हो, वह वाम मार्गी कहलाता है। ऐसे काम करने वाले लोग मृत समान माने गए हैं।

3. कंजूस:
〰️〰️〰️ अति कंजूस व्यक्ति भी मरा हुआ होता है। जो व्यक्ति धर्म कार्य करने में, आर्थिक रूप से किसी कल्याणकारी कार्य में हिस्सा लेने में हिचकता हो, दान करने से बचता हो, ऐसा आदमी भी मृतक समान ही है।

4. अति दरिद्र:
〰️〰️〰️〰️गरीबी सबसे बड़ा श्राप है। जो व्यक्ति धन, आत्म-विश्वास, सम्मान और साहस से हीन हो, वह भी मृत ही है। अत्यंत दरिद्र भी मरा हुआ है। गरीब आदमी को दुत्कारना नहीं चाहिए, क्योंकि वह पहले ही मरा हुआ होता है। दरिद्र-नारायण मानकर उनकी मदद करनी चाहिए।

5. विमूढ़:
〰️〰️〰️ अत्यंत मूढ़ यानी मूर्ख व्यक्ति भी मरा हुआ ही होता है। जिसके पास बुद्धि-विवेक न हो, जो खुद निर्णय न ले सके, यानि हर काम को समझने या निर्णय लेने में किसी अन्य पर आश्रित हो, ऐसा व्यक्ति भी जीवित होते हुए मृतक समान ही है, मूढ़ अध्यात्म को नहीं समझता।

6. अजसि:
〰️〰️〰️〰️ जिस व्यक्ति को संसार में बदनामी मिली हुई है, वह भी मरा हुआ है। जो घर-परिवार, कुटुंब-समाज, नगर-राष्ट्र, किसी भी ईकाई में सम्मान नहीं पाता, वह व्यक्ति भी मृत समान ही होता है।

7. सदा रोगवश
〰️〰️〰️〰️〰️ जो व्यक्ति निरंतर रोगी रहता है, वह भी मरा हुआ है। स्वस्थ शरीर के अभाव में मन विचलित रहता है। नकारात्मकता हावी हो जाती है। व्यक्ति मृत्यु की कामना में लग जाता है। जीवित होते हुए भी रोगी व्यक्ति जीवन के आनंद से वंचित रह जाता है।

8. अति बूढ़ा:
〰️〰️〰️〰️ अत्यंत वृद्ध व्यक्ति भी मृत समान होता है, क्योंकि वह अन्य लोगों पर आश्रित हो जाता है। शरीर और बुद्धि, दोनों अक्षम हो जाते हैं। ऐसे में कई बार वह स्वयं और उसके परिजन ही उसकी मृत्यु की कामना करने लगते हैं, ताकि उसे इन कष्टों से मुक्ति मिल सके।

9. सतत क्रोधी:
〰️〰️〰️〰️〰️ 24 घंटे क्रोध में रहने वाला व्यक्ति भी मृतक समान ही है। ऐसा व्यक्ति हर छोटी-बड़ी बात पर क्रोध करता है। क्रोध के कारण मन और बुद्धि दोनों ही उसके नियंत्रण से बाहर होते हैं। जिस व्यक्ति का अपने मन और बुद्धि पर नियंत्रण न हो, वह जीवित होकर भी जीवित नहीं माना जाता। पूर्व जन्म के संस्कार लेकर यह जीव क्रोधी होता है। क्रोधी अनेक जीवों का घात करता है और नरकगामी होता है।

10. अघ खानी:
〰️〰️〰️〰️〰️ जो व्यक्ति पाप कर्मों से अर्जित धन से अपना और परिवार का पालन-पोषण करता है, वह व्यक्ति भी मृत समान ही है। उसके साथ रहने वाले लोग भी उसी के समान हो जाते हैं। हमेशा मेहनत और ईमानदारी से कमाई करके ही धन प्राप्त करना चाहिए। पाप की कमाई पाप में ही जाती है और पाप की कमाई से नीच गोत्र, निगोद की प्राप्ति होती है।

11. तनु पोषक:
〰️〰️〰️〰️〰️ ऐसा व्यक्ति जो पूरी तरह से आत्म संतुष्टि और खुद के स्वार्थों के लिए ही जीता है, संसार के किसी अन्य प्राणी के लिए उसके मन में कोई संवेदना न हो, ऐसा व्यक्ति भी मृतक समान ही है। जो लोग खाने-पीने में, वाहनों में स्थान के लिए, हर बात में सिर्फ यही सोचते हैं कि सारी चीजें पहले हमें ही मिल जाएं, बाकी किसी अन्य को मिलें न मिलें, वे मृत समान होते हैं। ऐसे लोग समाज और राष्ट्र के लिए अनुपयोगी होते हैं। शरीर को अपना मानकर उसमें रत रहना मूर्खता है, क्योंकि यह शरीर विनाशी है, नष्ट होने वाला है।

12. निंदक:
〰️〰️〰️〰️ अकारण निंदा करने वाला व्यक्ति भी मरा हुआ होता है। जिसे दूसरों में सिर्फ कमियाँ ही नजर आती हैं, जो व्यक्ति किसी के अच्छे काम की भी आलोचना करने से नहीं चूकता है, ऐसा व्यक्ति जो किसी के पास भी बैठे, तो सिर्फ किसी न किसी की बुराई ही करे, वह व्यक्ति भी मृत समान होता है। परनिंदा करने से नीच गोत्र का बंध होता है।

13. परमात्म विमुख:
〰️〰️〰️〰️〰️〰️ जो व्यक्ति ईश्वर यानि परमात्मा का विरोधी है, वह भी मृत समान है। जो व्यक्ति यह सोच लेता है कि कोई परमतत्व है ही नहीं; हम जो करते हैं, वही होता है, संसार हम ही चला रहे हैं, जो परमशक्ति में आस्था नहीं रखता, ऐसा व्यक्ति भी मृत माना जाता है।

14. श्रुति संत विरोधी:
〰️〰️〰️〰️〰️〰️जो संत, ग्रंथ, पुराणों का विरोधी है, वह भी मृत समान है। श्रुत और संत, समाज में अनाचार पर नियंत्रण (ब्रेक) का काम करते हैं। अगर गाड़ी में ब्रेक न हो, तो कहीं भी गिरकर एक्सीडेंट हो सकता है। वैसे ही समाज को संतों की जरूरत होती है, वरना समाज में अनाचार पर कोई नियंत्रण नहीं रह जाएगा।

अतः मनुष्य को उपरोक्त चौदह दुर्गुणों से यथासंभव दूर रहकर स्वयं को मृतक समान जीवित रहन से बचाना चाहिए।

12/29/2022

12/29/2022

मापक पैमाने : प्रश्नोत्तरी

मापक पैमाने : प्रश्नोत्तरी
〰〰〰〰〰〰〰
1. एक गज = 3 फूट
2. एक फलॉग = 220 गज
3. एक मील में 1760 गज, 8 फलॉग यानि 220*8 = 1760
4. एक कर्म = 66 इंच
5. एक मर्ला = 272 वर्ग फूट
6. कर्म का दूसरा नाम = सरसाही
7. एक मर्ला में = 9 कर्म
8. एक कनाल में मर्ले = 20
9. एक एकड़ मे मर्ले =160
10. एकड़ का दूसरा नाम = कीला
11. एक एकड़ में कनाल = 8
12. एक एकड़ में कर्म = 36*40 = 1440 कर्म
13. एक कनाल में विसवासी = 240
14. एक मर्ले मे बिसवासी = 12
15. एक बिसवे मे बिसवासी = 20
16. एक बीघे मे बिसवे = 20
17. एक एकड़ मे बिसवे = 96
18. एक एकड़ मे बीघे = 4.8
19. एक कनाल में वर्ग मीटर = 505*8385
20. एक एकड मे वर्ग मीटर = 4046*7091
21. एक बिलियन = एक अरब रुपये
22. एक फूट में = 30.48 सैंटीमीटर
23. एक गज मे मीटर = 0.9144
24. एक मीटर में इंच = 39.3708
25. एक मील में किलोमीटर = 1.609
26. एक किलोमीटर मे = 0.32137227 मील
27. एक वर्ग किलोमीटर मे = 0391 वर्गमील
28. एक वर्ग मील में = 2.59 वर्ग किलोमीटर
29. एक सैंटीमीटर = 0.3937 इंच
30. एक मिलियन = 10लाख रुपय
31. एक मीटरिक टन = 10 किवंटल
32. पक्का या शाहजहानी बीघा एक एकड़ काहिस्सा = 5/8
33. कच्चा बीघा एक एकड़ का हिस्सा = 5/24भाग
34. एक मीटर में इंच = 39.3701
35. 99 इंच के कर्मों से जो बीघा बनताहै उसे = पक्का या
शाहजहानी बीघा कहते है।
36. अगर एक कर्म 66 इंच का है तो एक बिसवे मे = 15
बिसवासी होगें।
37. 20 बिसवासों का एक विसवा बनें इसके लिये एक कर्म =
57/157 इंच का होगा।
38. बकदर का अर्थ = एक विस्वे के वर्गफुट है।
39. अनुपात हमेशा एक निरोल = राशि होती है।
40. कर्म का दूसरा नाम = गट्ठा
41. जरीब बनी होती है = लोहे की नर्म कड़ियों से
42. जरीब आमतौर पर कर्मों की होती है= 10
43. 66 इंच कर्म वाली जरीब मे = 8 कड़ियां होती है, तथा
इससे कम वाली इंच की जरीब में =7 कड़ियां होती है।

12/29/2022

वाम मार्ग क्या है ?

वाम मार्ग क्या है ?

युगों युगों से अध्यात्म के महान संसार में स्वयं को जानने और परम तत्व को प्राप्त की इच्छा के चलते मानव अपने लक्ष्य को निर्धारित कर स्वयं को अनुशासन में बद्ध करके अध्यात्म के विभिन्न मार्गों के माध्यम से उस परम तत्व की खोज करता है। जिन्हें अनेक नामों से जाना जाता है। जैसे वाम मार्ग, दक्षिण मार्ग, ज्ञान मार्ग, भक्ति मार्ग, योग मार्ग, आनन्द मार्ग, पिशाच मार्ग आदि।
हम यहां वाम मार्ग की चर्चा करेंगे। वाम शब्द का अर्थ बांया, स्त्री से संबंधित और उलटा है। यहां इसका अर्थ वामा अर्थात स्त्री से है। वाम मार्ग में स्त्री के सम्मान को सर्वोच्च स्थान दिया गया है। जो विभिन्न रूपों में मातृस्वरूप होती हैं। ऐसा माना जाता है कि बिना वामा की प्रसन्नता के, बिना उसके सहयोग के किसी भी कुल में कोई उच्चावस्था या सिद्धि प्राप्त नहीं की जा सकती।
वाम मार्ग में जाति व्यवस्था को क्षुद्रता माना जाता है और स्त्री को शक्ति स्वरूपा। जाति से उठकर स्त्री को शक्ति स्वरूपा मानकर ही साधक उच्चावस्था को प्राप्तकर अपने लक्ष्य को पा सकते हैं, क्यों कि वाम मार्ग में स्त्री को जो सम्मान प्राप्त है, वह कहीं ओर प्राप्त हो ही नहीं सकता। विभिन्न जाति की महिलाओं को ऊर्जा / शक्ति अर्थात् सर्वोच्च शक्ति का रूप माना जाता है।
इस संबंध में रसयामल तंत्र के उत्तर तंत्र में कहा गया भी है कि
रजस्वला पुष्करं तीर्थ चाण्डाली तु महाकाशी।
चर्मकारी प्रयाग: स्याद्रजकी मथुरामता॥
वाम मार्ग में साधक, स्त्री को वह पवित्रावस्था में हो या अपवित्रावस्था में, अपने जीवन और शरीर से अधिक महत्वपूर्ण और शक्तिवाहिनी मानता है।
वाम मार्गीय तंत्र में न तो जातियां ही महत्वपूर्ण हैं और न रंगभेद। इस मार्ग में मां के नौ रूपों में भिन्न भिन्न जाति की कन्याओं को सर्वोच्च शक्तिसंपन्न मां दुर्गा का रूप मानकर पूजा जाता है।
रसयामल तंत्र के उत्तर तंत्र में इस संबंध में स्पष्टï कहा गया है कि
नटी कपालिका वेश्या रजकी नापिताङ्गना।
ब्रह्माणी शुद्रकन्या च तथा गोपालकन्यका:।
मालाकारस्य कन्या च नवकन्या प्रकीर्तिता:॥
अर्थात् नट की कन्या, अंतिम संस्कार कराने वाले की कन्या, वेश्या की कन्या, वस्त्रादि धोकर आजीविका चलाने वाले की कन्या, नापित की कन्या, ब्राह्मïण की कन्या, शूद्र कर्मकार की कन्या, गौ आदि चराकर उदरपूर्ति करने वाले की कन्या और बाग बगीचों का कार्य कर उदराभरण करने वाले की कन्या। इन सभी नौ कन्याओं को दुर्गा स्वरूपा देवी माना जाता है। माँ के नौ समान शक्तिशाली पवित्र रूपों में सर्वशक्तिमान इन नौ कन्याओं को मां दुर्गा देवी की तरह पूजा जाता है और सम्मान दिया जाता है।
नवरात्रि के पर्वों पर पारणा के समय जब इन नव दुर्गा देवी स्वरूपा कन्याओं को पुष्प, फल, भोजन और दक्षिणा आदि प्रदानकर उन्हें प्रसन्न किया जाता है और उनसे आशीर्वाद लिया जाता है। उस समय उनके भोजनादि से निवृत्ति के बाद बचे अवशिष्टï को मां का प्रसादस्वरूप मानकर ग्रहण किया जाता है।
रसयामल तंत्र के उत्तर तंत्र में इसका उल्लेख इस प्रकार किया गया है।
धूपैर्दीपैश्च नैवैद्यैर्विविधै: भगवतीश्ननन्।
विधाय वन्दितां तां च तदुच्छिष्ट स्वयंचरेत्॥

भगवान विष्णु के अवतार, सूर्यवंश के प्रतापी अयोध्या के राजा प्रभु राम द्वारा वाम मार्ग का साधन करते हुए वनवास काल के दौरान शूद्रा शबरी के द्वारा उच्छिष्ट किए गए फलों को ग्रहणकर बिना किसी अहंकार के या छुआछूत के किसी भी मुद्दे पर विचार किए बिना वाममार्ग का पालन किया।
वाममार्ग में कहा है कि अगर एक शक्तिशाली और सक्रिय (शिष्य) अपने जाति, पंथ, अभिमान, अहंकार, धन, आदि के प्रभाव में इन नौ (देवी नौ महिलाओं, जो माँ देवी दुर्गा के नौ रूपों के बराबर माना जाता है) देवियों का अपमान करता है तो वह अपनी शक्ति और ऊर्जा खो देता है, चाहे वह स्वयं देवताओं का राजा इंद्र ही क्यों न हो। यदि इंद्र भी ऐसा करेगा तो वह भी अपनी सत्ता और राज्य खो देता है।
वाम मार्ग तंत्र में स्पष्ट कहा है कि
अविचारं शक्त्युच्छिष्ठ पिबेच्छक्रपुरो यदि।
घोरञ्च नरकं याति वाममार्गात्पतेद्ध्रुवम्॥
यह मार्ग अघोर मार्ग है। भगवान् शिव को अघोरेश्वर कहा जाता है। वाम मार्ग को भगवान् शिव का मार्ग भी कहा जाता है।
यह मार्ग प्रकृति के कृतित्व निर्माण के लिए जाना जाता है, इसके माध्यम से बिना किसी भ्रम के पुनरोत्पादन, पुनर्निर्माण, विकास और क्रियात्मकता का मार्ग खुलता है।
भगवान शिव जो खुद वाम मार्ग का अनुयायी कहे जाते है। वे अर्धनारीश्वर हैं, जिसका अर्थ है – जो आधा स्त्री हो और आधा पुरुष हो।
इस पथ का अनुयायी सब झंझओं से मुक्त हो जाता है और अघोरी शिष्य कहा जाता है, जो साधना के बल पर भगवान शिव के समान हो जाता है।
महानिर्वाण तंत्र में कहा गया है-
पाशबद्धो भवेज्जीव: पाशमुक्त: सदाशिव:॥
ये भगवान् शिव ही भैरव रूप में प्रगट होते है।
भैरवोऽहम् शिवोऽहम्॥
अर्थात् मैं भैरव हूँ और मैं शिव हूं। शिव हमेशा गहराई में ध्यान केंद्रित हैं। शक्ति में स्थित हैं। बिना शक्ति के शिव शव मात्र हैं। शक्ति को धारण करने के बाद इस मार्ग का शिष्य/अनुयायी भैरव के समान है जिसका अर्थ है वह खुद को शिव के रूप में ही स्थिति पा लेता है।

शिव ही सत्य है 🚩

12/27/2022

12/27/2022

कार्य बंधन मुक्ति के उपाय (भाग 1)

कार्य बंधन मुक्ति के उपाय (भाग 1)

सभी व्यक्तियों का जीवन सुख-दुःख के उतार-चढ़ाव से भरा रहता है। सभी अपने परिश्रम से आगे बढ़ना चाहते हैं और समस्त प्रकार के सुखों का भोग करना चाहते हैं। इसमें अनेक व्यक्ति सफल हो जाते हैं और कुछ विफल रह जाते हैं। विफलता का कारण उन्हें समझ नहीं आता है। कभी-कभी ऐसा कुछ अचानक घटने लगता है, जिसके कारण अनेक प्रकार की समस्या उत्पत्र होने लगती है जो जीवन को दु:खों की ओर धकेल देती हैं। ऐसा अचानक क्यों होने लगा है, इसका कारण समझ नहीं आता। इससे जीवन का प्रत्येक पक्ष प्रभावित होता है। मनुष्य के साथ जीवनभर घटित होने वाली अनेक ऐसी घटनायें हैं, जिनके घटित होने के बारे में कोई स्पष्ट उत्तर प्राप्त नहीं हो पाता कि ऐसा क्यों हो रहा है? इसके उपरांत भी घटित होने वाली दुर्घटनाओं के कारण उत्पन्न दु:खों का वहन उसे करना ही होता है।

पुरातन काल से यह समझा जाता रहा है कि सब कुछ ईश्वर के हाथ में है, किसी को कब सुख मिलेगा और कब दुःख की प्राप्ति होगी, कौन कब जन्म लेगा और कब उसकी मृत्यु होगी, इसका निर्धारण ईश्वर करता है। आज इस विचारधारा का प्रभाव कम होता जा रहा है और सब कुछ धीरे-धीरे मनुष्य अपने हाथों में लेता जा रहा है। कौन कब जन्म लेगा और किस योनि में जन्म लेगा, इसका ही निर्धारण करना ईश्वर के हाथों में है। मृत्यु पर ईश्वर का प्रभाव कम होने लगा है। आये दिन होने वाली दुर्घटनाओं में असामयिक मृत्यु, किसी की शत्रुतावश हत्या कर देना और किसी तांत्रिक-मांत्रिक के द्वारा कुछ मारण क्रियायें करवाकर किसी व्यक्ति को मरवा देना आम होता जा रहा है।

इनमे से कुछ ऐसे कारण हम आपको बता रहे है जिनसे बंधन दोष लगने की संभावना अधिक रहती है जैसे की किसी के द्वारा टोके जाने के कारण से तो बंधन दोष लगता ही है, साथ ही अन्य कुछ कारण भी हो सकते हैं। इनमें से एक बड़ा कारण है किसी चौराहे पर रखी ऐसी सामग्री को लांघना अथवा पैरों द्वारा स्पर्श करना है जो किसी के द्वारा किसी प्रयोजन के पश्चात् रखी होती है। आपने कई बार चौराहों पर कुछ खाने की सामग्री, काले उड़द, सिंदूर तथा दीपक आदि रखा देखा होगा। यह सामग्री किसी आपदा अथवा टोने-टोटके को दूर करने हेतु किये जाने वाले किसी उपाय के प्रयोग करने में काम आती है, जिसे प्रयोग करने के पश्चात् चौराहे पर रख दिया जाता है। जब अज्ञानता अथवा भूलवश इस सामग्री को चलते समय ठोकर मार दी जाती है अथवा इसे उलांघ दिया जाता है, तब भी व्यक्ति बंधनदोष का पीड़ित हो जाता है। यह सामग्री क्या होती है, इसे भी जान लें। जब किसी घर में कोई सदस्य किसी के द्वारा किये-कराये टोने-टोटके का शिकार हो जाता है अथवा किसी ऊपरी बाधा से ग्रसित हो जाता है तो किसी उपाय के प्रयोग के अन्तर्गत ऐसी अदृश्य शक्ति के निमित्त भोजन सामग्री अर्पित की जाती है। इसमें खाने के सामान के साथ-साथ काले साबुद उड़द द्वारा पीड़ित का उसारा किया जाता है, बाद में यह उड़द भी खाने के सामान के साथ रख दिये जाते हैं। फिर समस्त सामग्री घर से दूर किसी चौराहे पर रखकर एक दीपक लगाया जाता है, जल अर्पित किया जाता है और इसके बाद उपाय करने वाला वापिस अपने घर लौट आता है। इस प्रयोग के द्वारा परिवार के पीड़ित सदस्य पर जो भी विपदा, ऊपरी शक्ति अथवा किसी प्रकार का नज़रदोष आदि होता है, वह इस सामग्री के साथ घर से बाहर आ जाता है, और फिर वह सदस्य धीरे-धीरे स्वस्थ होने लगता है। चूंकि यह उपाय सुबह जल्दी सम्पन्न किये जाते हैं ताकि कोई इसे करते देखे अथवा टोके नहीं, इसलिये पता नहीं चलता कि यह उपाय किसने किया है। बाद में चौराहे पर आने-जाने वाले व्यक्ति इससे बच कर निकलने का प्रयास करते हैं। जो इसके बारे में अधिक नहीं जानते हैं, वे भी इस सामग्री को देखकर समझ जाते हैं कि इसे उलांघना अथवा छूना नहीं है, इसके उपरान्त भी कुछ व्यक्ति अज्ञानता अथवा असावधानी के कारण इस सामग्री के ऊपर से निकल जाते हैं अथवा उनका पांव इससे लग जाता है। इसके कुछ दिनों के बाद ही उस पर अनेक प्रकार की समस्यायें आने लगती हैं। यह भी अपने आप में एक प्रकार का बंधन ही है। इसके प्रभाव से व्यक्ति का स्वास्थ्य प्रभावित होता है, उसका मन बेचैन और व्यग्र रहता है, किसी काम में मन नहीं लगता। प्रारम्भ में इसे किसी प्रकार का बंधन अथवा समस्या आदि नहीं समझा जाता और न ही यह कोई रोग होता है, इसलिये इसे पीड़ित की अपनी कोई व्यक्तिगत समस्या मान लिया जाता है।

आज हम इन्ही समस्याओ के समाधान के विषय मे विस्तृत चर्चा करेंगे।

उपरोक्त वर्णित तथा इसी प्रकार किसी भी व्यक्ति के कार्य में बाधक अन्य प्रकार के बंधनों से मुक्ति के कुछ सरल उपाय नीचे दिये जा रहे हैं:

1👉  किसी भी दुकान का बंधन खोलने हेतु नागफनी-कील (ये मोटी-चपटी कील होती है जिसका ऊपरी हिस्सा साँप के फन के समान मुड़ा रहता है) की आवश्यकता होती है। ऐसी 4 कीलें लेकर उन्हें देसी गाय के मूत्र में डुबोकर 3 दिनों तक रखें। इसके पश्चात् उन कीलों को निकाल लें तथा गोमूत्र किसी वृक्ष की जड़ों में डाल दें। नागफनी की इन कारों को किसी पीपल के वृक्ष के नीचे छोटा सा गड्डा खोदकर गाड़ दें। तीन से लेकर सात दिन तक उन कीलों को वहाँ गड़ा रहने दें। इसके पश्चात् उन कीलों को पुनः खोद लायें। इनमें से एक-एक कील को दुकान के चारों कोनों पर इस प्रकार गाड़ दें कि उनके फन दुकान के अंदर की तरफ नहीं हों । प्रत्येक कील पर थोड़ा-थोड़ा कंकु, अक्षत छिड़क दें। ऐसा करने से बंधी हुई दुकान खुल जाती है।

👉 बंधी हुई दुकान खोलने हेतु एक अन्य विधि के अन्तर्गत एक नारियल तथा एक नींबू व एक ताम्बे का सिक्का लें। इन तीनों का कंकु-अक्षतादि से पूजन कर दुकान की देहलीज जहाँ हो, वहाँ बीच में एक गड्ढा खोदकर इन पदार्थों को गाड़ दें। यदि इस प्रकार से गाड़ी जाना सम्भव नहीं हो तो इन पदार्थों का पूजन कर इन्हें सम्पूर्ण दुकान में घुमाकर किसी पवित्र नदी में विसर्जित कर दें। इस कार्य को मुख्य रूप से मंगलवार अथवा शनिवार को करें।

👉 दुकान के बंधन को खोलने हेतु एक अन्य सरल प्रयोग भी है। इसके अन्तर्गत नवचंदी (जिस दिन नया चाँद निकले, उस दिन) मित्र यंत्र का निर्माण शुभ मुहूर्त में करें। मंत्र को सफेद कोरे कागज पर काली स्याही से बनायें। यंत्र निर्माण करते समय जातक ऊनी कम्बल के आसन पर पश्चिम दिशा की तरफ मुख करके बैठे तथा मुख में कोई खुशबूदार पदार्थ रख ले जैसे कि इलायची, नागरमोथा आदि। यंत्र को बनाकर इस पर किसी भी इत्र की एक बूंद लगा दें। इसे अगरबत्ती की धूनी दें अथवा थोड़ा सा लोबान जलाकर उसकी धूनी दें। इस प्रकार, जो यंत्र तैयार होगा, उसकी 20-30 फोटोकॉपी तैयार करवा लें। उन फोटोकॉपी की गड्डी पर मुख्य यंत्र को उल्टा रख दें। इस सैट को किसी फाइल में सम्भाल कर रख दें। अब, रोजाना मूल कॉपी के नीचे वाले यंत्र को निकाल कर यह प्रार्थना करते हुये कि मेरी दुकान पर किसी भी प्रकार का बंधन हो, तो वह दूर हो जाये, तब यंत्र को कपूर जलाकर उसकी अग्नि से जला दें। यंत्र के जलने से बनने वाली राख को मसल कर किसी झाड़ या गमले में डाल दें ऐसा नित्य 20 से 40 दिन तक करने से दुकान का बंधन अथवा रोक खुल जाती है। 

यंत्र इस चित्र में दिया गया है।
क्रमश...
शेष अलगे लेख में।

12/27/2022

मधुमेह ” की रामबाण औषधि

मधुमेह ” की रामबाण औषधि


मधुमेह ” की रामबाण औषधि ” 
और ‘ इन्द्र जौ ‘ के 9 अचूक फायदे “

आज   शुगर   या   मधुमेह   रोग   मानवता   के   लिए   एक   नासूर   बन   गया   है   एलोपैथी   में   हजारों   रुपए   की   दवाएं   लोग खाते   खाते   थके   जा   रहें   हैं   पुरुष   हो   या   स्त्री   दोनों   जातियों   में   यह   रोग   घुन   लगा   रहा   है   और   बहुतयात   से   पाया   जाता है ।

डायबिटीज के लिए:
आप   सामग्री   ध्यान   में   रखें  :
इन्द्र  जव  250  ग्राम
बादाम   250   ग्राम
भुने   चने   250   ग्राम
यह   योग   बिल्कुल   अजूबा   योग   है   अनेकों   रोगियों   पर   आजमाया   गया   है 

100%   रिजल्ट   आया   है   आप   इस नुस्खे   के   रिजल्ट   का   अंदाजा   यूं   लगा   सकते   हैं   कि   अगर   इसको   उसकी   मात्रा   से   ज्यादा   लिया   जाए   तो   शुगर   इसके सेवन   से   लो   होने   लगती   है   बादाम   को   इस   वजह   से   शामिल   किया   गया   यह   शुगर   रोगी   की   दुर्बलता   कमजोरी   सब    दूर   कर   देता   है   चने   को   इन्द्र  जो   की   कड़वाहट   थोड़ी   कम   करने   के   लिए   मिलाया   गया  |

बनाने  की   विधि  :
तीनों   औषधियों   का   अलग   अलग   पावडर   बनाए   और   तीनो   को   मिक्स   कर   लीजिये   और   कांच   के   जार   में   रख   लें   और खाने   के   बाद   एक   चाय   वाला   चम्मच   एक   दिन   में   केवल   एक   बार   खाएं   सादे   जल   से  |

इंद्र  जौ   के  और भी 9  चमत्कारी   फ़ायदे :
1. मुंह के छाले :
इन्द्र   जौ   और   काला   जीरा  10-10   ग्राम   की   मात्रा   में   लेकर   कूट  कर   चूर्ण   बना   लें ।  इस  चूर्ण   को  छालों   पर   दिन   में          2   बार   लगाने   से   छाले   नष्ट   होते   हैं  ।

2. बवासीर :
कड़वे   इन्द्रजौ   को   पानी   के   साथ   पीस  कर   बेर   के   बराबर   गोलियां   बना   लें  ।   रात   को   सोते   समय   दो   गोली   ठंडे   जल  के साथ   खायें  ।   इससे   बादी   बवासीर   ठीक   होती   है  ।

3. कुष्ठ या कोढ :
इन्द्र   जौ   को   पीस  कर   गाय   के   पेशाब   में   मिला  कर   लेप   करने   से   चर्म-दल  कोढ़   मिट   जाता   है  ।

4. पाचन की खराबी :
इन्द्र  जौ   के   चूर्ण   को   2-2   ग्राम   खाने   से   पेट   का   दर्द   और   मंदाग्नि   समाप्त   हो   जाती   है  ।

5. पेट के कीड़े :
इन्द्रजौ   को   पीस   और   छान  कर   1-1   ग्राम   की   मात्रा   में   सुबह   और   शाम   पीने   से   पेट   के   कीडे़   मर  कर,  मल   के   साथ बाहर   निकल   जाते   हैं  ।

6. पीलिया :
काले   इन्द्र जौ   के   बीजों   का   रस   निकालें   और   थोड़ा-थोड़ा   तीन   दिनों   तक   खायें  ।

7. पथरी :
इन्द्र   जौ   और   नौसादर   का   चूर्ण   दूध   अथवा   चावल   के   धोये   हुए   पानी   में   डाल  कर   पीना   चाहिए  ।   इससे   5  दिन   में  पथरी   गल  कर   निकल   जाती   है  ।   नही   निकले   तो   प्रयोग   कुछ   दिन   आगे   बढ़ाए  । इन्द्र   जौ   की   छाल   को   दही    में   पीस  कर   पिलाना   चाहिए  ।   इससे   पथरी   नष्ट   हो   जाती   है ।  

8. दस्त :
इन्द्र -जौ  को  पीस   कर   चूर्ण   को   3  ग्राम  की   मात्रा   में   ठंडे   पानी   के   साथ   दिन   में   3  बार   पिलाने   से   अतिसार   समाप्त   हो जाती   है  ।

9. पेट की ऐंठन :
इन्द्र  जौ   के   बीजों   को   कुछ   गर्म   करके   पानी   में   भिगोयें  ,   बाद   में   उस   पानी   को   सेवन   करें  ।   इससे   पेट   की   ऐंठन   खत्म   हो   जाती   है  ।

जन हित में जारी

12/24/2022

12/24/2022

झाड़ू का वास्तु एवं ज्योतिषीय आधार

झाड़ू का वास्तु एवं ज्योतिषीय आधार

पौराणिक शास्त्रों में कहा गया है कि जिस घर में झाड़ू का अपमान होता है वहां धन हानि होती है, क्योंकि झाड़ू में धन की देवी महालक्ष्मी का वास माना गया है।
विद्वानों के अनुसार झाड़ू पर पैर लगने से महालक्ष्मी का अनादर होता है। झाड़ू घर का कचरा बाहर करती है और कचरे को दरिद्रता का प्रतीक माना जाता है। जिस घर में पूरी साफ-सफाई रहती है वहां धन, संपत्ति और सुख-शांति रहती है। इसके विपरित जहां गंदगी रहती है वहां दरिद्रता का वास होता है। ऐसे घरों में रहने वाले सभी सदस्यों को कई प्रकार की आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इसी कारण घर को पूरी तरह साफ रखने पर जोर दिया जाता है ताकि घर की दरिद्रता दूर हो सके और महालक्ष्मी की कृपा प्राप्त हो सके। घर से दरिद्रता रूपी कचरे को दूर करके झाड़ू यानि महालक्ष्मी हमें धन-धान्य, सुख-संपत्ति प्रदान करती है।
वास्तु विज्ञान के अनुसार झाड़ू सिर्फ घर की गंदगी को दूर नहीं करती है बल्कि दरिद्रता को भी घर से बाहर निकालकर घर में सुख समृद्घि लाती है। झाड़ू का महत्व इससे भी समझा जा सकता है कि रोगों को दूर करने वाली शीतला माता अपने एक हाथ में झाड़ू धारण करती हैं।
यदि भुलवश झाड़ू को पैर लग जाए तो महालक्ष्मी से क्षमा की प्रार्थना कर लेना चाहिए।जब घर में झाड़ू का इस्तेमाल न हो, तब उसे नजरों के सामने से हटाकर रखना चाहिए।
ऐसे ही झाड़ू के कुछ सतर्कता के नुस्खे अपनाये गये उनमें से आप सभी के समक्ष हैं।

१👉 शाम के समय सूर्यास्त के बाद झाड़ू नहीं लगाना चाहिए इससे आर्थिक परेशानी आती है।

२👉झाड़ू को कभी भी खड़ा नहीं रखना चाहिए, इससे कलह होता है।

३👉आपके अच्छे दिन कभी भी खत्म न हो, इसके लिए हमें चाहिए कि हम गलती से भी कभी झाड़ू को पैर नहीं लगाए या लात ना लगने दें, अगर ऐसा होता है तो मां लक्ष्मी रुष्ठ होकर हमारे घर से चली जाती है।

४👉झाड़ू हमेशा साफ रखें ,गिला न छोडे ।

५👉ज्यादा पुरानी झाड़ू को घर में न रखें। किसी एकांत जगह या जमीन में दबा दें।

६👉झाड़ू को कभी घर के बाहर बिखराकर ना फेके और इसको जलाना भी नहीं चाहिए।

७👉झाड़ू को कभी भी घर से बाहर अथवा छत पर नहीं रखना चाहिए। ऐसा करना अशुभ माना जाता है। कहा जाता है कि ऐसा करने से घर में चोरी की वारदात होने का भय उत्पन्न होता है। झाड़ू को हमेशा छिपाकर रखना चाहिए। ऐसी जगह पर रखना चाहिए जहां से झाड़ू हमें, घर या बाहर के किसी भी सदस्यों को दिखाई नहीं दें।

८👉गौ माता या अन्य किसी भी जानवर को झाड़ू से मारकर कभी भी नहीं भगाना चाहिए।

९👉घर-परिवार के सदस्य अगर किसी खास कार्य से घर से बाहर निकले हो तो उनके जाने के उपरांत तुरंत झाड़ू नहीं लगाना चाहिए। यह बहुत बड़ा अपशकुन माना जाता है। ऐसा करने से बाहर गए व्यक्ति को अपने कार्य में असफलता का मुंह देखना पड़ सकता है।

१०👉शनिवार को पुरानी झाड़ू बदल देना चाहिए।

११👉सपने मे झाड़ू देखने का मतलब है नुकसान

१२👉घर के मुख्य दरवाजा के पीछे एक छोटी झाड़ू टांगकर रखना चाहिए। इससे घर में लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है।

१३👉पूजा घर के ईशान कोण यानी उत्तर-पूर्वी कोने में झाडू व कूड़ेदान आदि नहीं रखना चाहिए क्योंकि ऐसा करने से घर में नकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है और घर में बरकत नहीं रहती है इसलिए वास्तु के अनुसार अगर संभव हो तो पूजा घर को साफ करने के लिए एक अलग से साफ कपड़े को रखें।

१४👉जो लोग किराये पर रहते हैं वह नया घर किराये पर लेते हैं अथवा अपना घर बनवाकर उसमें गृह प्रवेश करते हैं तब इस बात का ध्यान रखें कि आपका झाड़ू पुराने घर में न रह जाए। मान्यता है कि ऐसा होने पर लक्ष्मी पुराने घर में ही रह जाती है और नए घर में सुख-समृद्घि का विकास रूक जाता है।