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1/29/2022

1/29/2022

क्या आपने कभी प्यार किया है ?

क्या आपने कभी प्यार किया है ?


💞💞💞💞

सुबह के नौ

यह समय लगभग दो बजे का था.......!!.

एक दादा जी अपने अंगूठे पर टांके लगवाने के लिए प्रतीक्षालय में बैठे थे........!!

ड्यूटी पर नर्स

अपने काम में थोड़ा व्यस्त.......!!


दादा जी ने एक बार नर्स से कहा था कि मुझे जल्दी है, तो नर्स ने उसका केस हाथ में ले लिया.........!!


दादाजी के पैर के अंगूठे पर घाव देखा, सारा विवरण देखा। नर्स ने दादाजी को टेबल पर सुलाया......!! फिर पूछा, 'दादाजी क्या मैं आपकी जल्दी का कारण पूछूं?


बहन! फलाना ने मेरी पत्नी को नर्सिंग होम में भर्ती कराया उसके साथ नाश्ता करने का समय है..........!!


पिछले पांच साल से सुबह 9:30 बजे उनके साथ नाश्ता करने का अटूट आदेश रहा है........!!

मेरी पत्नी पिछले पांच साल से नर्सिंग होम में भर्ती है........!!

पांच साल से..?? क्या हो गया है इनको ? नर्स ने इसके लिए पूछा ...... !!

पुरानी यादें - अल्जाइमर रोग का पता चला है। दादा जी ने जवाब दिया......!!


नर्स ने अपने मुंह पर सहानुभूति रखते हुए टांके लगाने शुरू कर दिए....!!

एक सिलाई का धागा खींचते खींचते दादा हल्की सी सिसकियाँ पड़ गई,

तो उसका ध्यान आकर्षित करने के लिए नर्स फिर से बात करने लगी........!!


'दादाजी' अगर आप देर हो गए तो क्या आपकी पत्नी चिंता करेगी ?

दादाजी दो पल नर्स को देखते हुए फिर कहा, 'नहीं! बिल्कुल नहीं,....!! क्योंकि पिछले पांच साल से उनकी याद पूरी तरह से है

वो चली गई........!!

वो किसी को नहीं जानती.......!!

उसे ये भी नहीं पता कि मैं कौन हूँ.......!!! '


नर्स बेहद हैरान थी। उसी से माँगा

चला गया,......!!

'दादा ! जो आपको जानता तक नहीं उसके लिए क्या आप पिछले पांच साल से नियमित नर्सिंग होम जाते हैं.....???


इतना ख्याल रखते हो.......!!

लेकिन वह नहीं जानता कि आप कौन हैं.....???


दादा एक नर्स का हाथ

अपने हाथ में लिया

धीरे से कहा, 'बेटा! वो नहीं जानता मैं कौन हूँ, मगर मैं जानता हूँ वो कौन है.......??? '


*सच्चे प्यार का मतलब है... *

*व्यक्ति जैसा विपरीत होता है, उसे पूरी तरह से स्वीकार किया जाता है.......!! *

*उसके सम्पूर्ण अस्तित्व को स्वीकार कर लिया........!! *

*जो था उसे स्वीकार किया.....!! *

*जो है उसे स्वीकार करना......!! *

*भविष्य में जो होगा उसकी स्वीकृति.......!!! *

और

*जो कुछ भी नहीं है उसकी स्वीकृति........!! *👍🏻🙏🏻💐👏🏻👏🏻





11/24/2021

11/24/2021

Ghazal Shayari : ग़ज़ल शायरी

Ghazal Shayari : ग़ज़ल शायरी




हर जनम में....


हर जनम में उसी की चाहत थे;

हम किसी और की अमानत थे;


उसकी आँखों में झिलमिलाती हुई;

हम ग़ज़ल की कोई अलामत थे;


तेरी चादर में तन समेट लिया;

हम कहाँ के दराज़क़ामत थे;


जैसे जंगल में आग लग जाये;

हम कभी इतने ख़ूबसूरत थे;


पास रहकर भी दूर-दूर रहे;

हम नये दौर की मोहब्बत थे;


इस ख़ुशी में मुझे ख़याल आया;

ग़म के दिन कितने ख़ूबसूरत थे


दिन में इन जुगनुओं से क्या लेना;

ये दिये रात की ज़रूरत थे।


🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸


कोई बिजली इन ख़राबों में घटा रौशन करे;

ऐ अँधेरी बस्तियो! तुमको खुदा रौशन करे;


नन्हें होंठों पर खिलें मासूम लफ़्ज़ों के गुलाब;

और माथे पर कोई हर्फ़-ए-दुआ रौशन करे;


ज़र्द चेहरों पर भी चमके सुर्ख जज़्बों की धनक;

साँवले हाथों को भी रंग-ए-हिना रौशन करे;


एक लड़का शहर की रौनक़ में सब कुछ भूल जाए;

एक बुढ़िया रोज़ चौखट पर दिया रौशन करे;


ख़ैर अगर तुम से न जल पाएँ वफाओं के चिराग;

तुम बुझाना मत जो कोई दूसरा रौशन करे।



🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺


तेरा चेहरा सुब्ह का तारा लगता है;

सुब्ह का तारा कितना प्यारा लगता है;


तुम से मिल कर इमली मीठी लगती है;

तुम से बिछड़ कर शहद भी खारा लगता है;


रात हमारे साथ तू जागा करता है;

चाँद बता तू कौन हमारा लगता है;


किस को खबर ये कितनी कयामत ढाता है;

ये लड़का जो इतना बेचारा लगता है;


तितली चमन में फूल से लिपटी रहती है;

फिर भी चमन में फूल कँवारा लगता है;


'कैफ' वो कल का 'कैफ' कहाँ है आज मियाँ;

ये तो कोई वक्त का मारा लगता है।


💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐


नज़र फ़रेब-ए-कज़ा खा गई तो क्या होगा;

हयात मौत से टकरा गई तो क्या होगा;


नई सहर के बहुत लोग मुंतज़िर हैं मगर;

नई सहर भी कजला गई तो क्या होगा;


न रहनुमाओं की मजलिस में ले चलो मुझको;

मैं बे-अदब हूँ हँसी आ गई तो क्या होगा;


ग़म-ए-हयात से बेशक़ है ख़ुदकुशी आसाँ;

मगर जो मौत भी शर्मा गई तो क्या होगा;


शबाब-ए-लाला-ओ-गुल को पुकारनेवालों;

ख़िज़ाँ-सिरिश्त बहार आ गई तो क्या होगा;


ख़ुशी छीनी है तो ग़म का भी ऐतमाद न कर;

जो रूह ग़म से भी उकता गई तो क्या होगा।


🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸


तेरे कमाल की हद...


तेरे कमाल की हद कब कोई बशर समझा;

उसी क़दर उसे हैरत है, जिस क़दर समझा;


कभी न बन्दे-क़बा खोल कर किया आराम;

ग़रीबख़ाने को तुमने न अपना घर समझा;


पयामे-वस्ल का मज़मूँ बहुत है पेचीदा;

कई तरह इसी मतलब को नामाबर समझा;


न खुल सका तेरी बातों का एक से मतलब;

मगर समझने को अपनी-सी हर बशर समझा। 


🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺


मेरी रातों की राहत, दिन के इत्मिनान ले जाना;

तुम्हारे काम आ जायेगा, यह सामान ले जाना;


तुम्हारे बाद क्या रखना अना से वास्ता कोई;

तुम अपने साथ मेरा उम्र भर का मान ले जाना;


शिकस्ता के कुछ रेज़े पड़े हैं फर्श पर, चुन लो;

अगर तुम जोड़ सको तो यह गुलदान ले जाना;


तुम्हें ऐसे तो खाली हाथ रुखसत कर नहीं सकते;

पुरानी दोस्ती है, की कुछ पहचान ले जाना;


इरादा कर लिया है तुमने गर सचमुच बिछड़ने का;

तो फिर अपने यह सारे वादा-ओ-पैमान ले जाना;


अगर थोड़ी बहुत है, शायरी से उनको दिलचस्पी;

तो उनके सामने मेरा यह दीवान ले जाना।


💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐


बुझी नज़र तो करिश्मे भी रोज़ो शब के गये;

कि अब तलक नही पलटे हैं लोग कब के गये;


करेगा कौन तेरी बेवफ़ाइयों का गिला;

यही है रस्मे ज़माना तो हम भी अब के गये;


मगर किसी ने हमें हमसफ़र नही जाना;

ये और बात कि हम साथ साथ सब के गये;


अब आये हो तो यहाँ क्या है देखने के लिए;

ये शहर कब से है वीरां वो लोग कब के गये;


गिरफ़्ता दिल थे मगर हौसला नहीं हारा;

गिरफ़्ता दिल है मगर हौंसले भी अब के गये;


तुम अपनी शम्ऐ-तमन्ना को रो रहे हो 'फ़राज़';

इन आँधियों में तो प्यारे चिराग सब के गये।


🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸


भड़का रहे हैं आग...


भड़का रहे हैं आग लब-ए-नग़्मागार से हम;

ख़ामोश क्या रहेंगे ज़माने के डर से हम;


कुछ और बड़ गए अंधेरे तो क्या हुआ;

मायूस तो नहीं हैं तुलु-ए-सहर से हम;


ले दे के अपने पास फ़क़त एक नज़र तो है;

क्यों देखें ज़िंदगी को किसी की नज़र से हम


माना कि इस ज़मीं को न गुलज़ार कर सके;

कुछ ख़ार कम कर गए गुज़रे जिधर से हम।


🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺


फिर उसके जाते ही दिल सुनसान हो कर रह गया;

अच्छा भला इक शहर वीरान हो कर रह गया;


हर नक्श बतल हो गया अब के दयार-ए-हिज्र में;

इक ज़ख्म गुज़रे वक्त की पहचान हो कर रह गया;


रुत ने मेरे चारों तरफ खींचें हिसार-ए-बाम-ओ-दर;

यह शहर फिर मेरे लिए ज़ान्दान हो कर रह गया;


कुछ दिन मुझे आवाज़ दी लोगों ने उस के नाम से;

फिर शहर भर में वो मेरी पहचान हो कर रह गया;


इक ख्वाब हो कर रह गई गुलशन से अपनी निस्बतें;

दिल रेज़ा रेज़ा कांच का गुलदान हो कर रह गया;


ख्वाहिश तो थी "साजिद" मुझे तशीर-ए-मेहर-ओ-माह की;

लेकिन फ़क़त मैं साहिब-ए-दीवान हो कर रह गया।


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ज़रा-सी देर में...


ज़रा-सी देर में दिलकश नज़ारा डूब जायेगा;

ये सूरज देखना सारे का सारा डूब जायेगा;

न जाने फिर भी क्यों साहिल पे तेरा नाम लिखते हैं;

हमें मालूम है इक दिन किनारा डूब जायेगा;


सफ़ीना हो के हो पत्थर, हैं हम अंज़ाम से वाक़िफ़;

तुम्हारा तैर जायेगा हमारा डूब जायेगा;


समन्दर के सफर में किस्मतें पहलू बदलती हैं;

अगर तिनके का होगा तो सहारा डूब जायेगा;


मिसालें दे रहे थे लोग जिसकी कल तलक हमको;

किसे मालूम था वो भी सितारा डूब जायेगा।


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अगर आपको हमारी ये ग़ज़ल शायरी पसंद आइ हो तो

इसे शेर करे ओर हमें फोलो करे 🙏

7/31/2021

7/31/2021

राजस्थान के बीकानेर की प्रसिद्ध प्रेम कहानी

राजस्थान के बीकानेर की प्रसिद्ध प्रेम कहानी




इस कहानी के अनुसार नरवर के राजा नल के पुत्र साल्हकुमार का विवाह महज 3 साल की उम्र में बीकानेर स्थ‍ित पूंगल क्षेत्र के पंवार राजा पिंगल की पुत्री से हुआ। चूंकि यह बाल-विवाह था, अत: गौना नहीं हुआ था। जब राजकुमार वयस्क हुआ तो उसकी दूसरी शादी कर दी गई, परंतु राजकुमारी को गौने का इंतजार था। बड़ी होकर वह राजकुमारी अत्यंत सुंदर और आकर्षक दिखाई देती थी। 


 राजा पिंगल ने दुल्हन को लिवाने के लिए नरवर तक कई संदेश भेजे लेकिन राजकुमार की दूसरी पत्नी उस देश से आने वाले हर संदेश वाहक की हत्या करवा देती थी। राजकुमार अपने बचपन की शादी को भूल चुके थे, लेकिन दूसरी रानी इस बात का जानती थी। उसे डर था कि राजकुमार को सब याद आते ही वे दूसरी रानी को छोड़कर चले जाएंगे, क्योंकि पहली रानी बेहद खूबसूरत थी।   


पहली रान इस बात से अंजान, राजकुमार को याद किया करती थी। उसकी इस दशा को देख पिता ने इस बार एक चतुर ढोली को नरवर भेजा। जब ढोली नरवर के लिए रवाना हो रहा था, तब राजकुमारी ने उसे अपने पास बुलाकर मारू राग में दोहे बनाकर दिए और समझाया कि कैसे उसके प्रियतम के सम्मुख जाकर गाकर सुनाना है। 


चतुर ढोली एक याचक बनकर नरवर के महल पहुंचा। रात में रिमझिम बारिश के साथ उसने ऊंची आवाज में ने मल्हार राग में गाना शुरू किया। मल्हार राग का मधुर संगीत राजकुमार के कानों में गूंजने लगा। ढोली ने गाते हुए साफ शब्दों में राजकुमारी का संदेश सुनाया। गीत में जैसे ही राजकुमार ने राजकुमारी का नाम सुना, उसे अपनी पहली शादी याद आ गई। ढोली ने बताया कि उसकी राजकुमारी कितनी खूबसूरत है औरवियोग में है।


ढोली के अनुसार राजकुमारी के चेहरे की चमक सूर्य के प्रकाश की तरह है, झीणे कपड़ों में से शरीर ऐसे चमकता है मानो स्वर्ण झांक रहा हो। हाथी जैसी चाल, हीरों जैसे दांत, मूंग सरीखे होंठ है। बहुत से गुणों वाली, क्षमाशील, नम्र व कोमल है, गंगा के पानी जैसी गोरी है, उसका मन और तन श्रेष्ठ है। लेकिन उसका साजन तो जैसे उसे भूल ही गया है और लेने नहीं आता। 


सुबह राजकुमार ने उसे बुलाकर पूछा तो उसने राजकुमारी का पूरा संदेशा सुनाया। आखिर साल्हकुमार ने अपनी पहली पत्नी को लाने का निश्चय किया पर उसकी दूसरी पत्नी मालवणी ने उसे रोक दिया। उसने कई बहाने बनाए पर मालवणी हर बार उसे किसी तरह रोक देती।


आखिरकार एक दिन राजकुमार एक बहुत तेज चलने वाले ऊंट पर सवार होकर अपनी प्रियतमा को लेने पूंगल पहुंच गया। राजकुमारी अपने प्रियतम से मिलकर खुशी से झूम उठी। दोनों ने पूंगल में कई दिन बिताए। एक दिन जब दोनों ने नरवर जाने के लिए राजा पिंगल से विदा ली तब जाते समय रास्ते के रेगिस्तान में राजकुमारी को सांप ने काट लिया पर शिव पार्वती ने आकर उसको जीवन दान दे दिया। 


लेकिन इसके बाद उनका सामना उमरा-सुमरा सें हुआ जो साल्हकुमार को मारकर राजकुमारी को हासिल करना चाहता था।  वह उसके रास्ते में जाजम बिछाकर महफिल सजाकर बैठ गया। राजकुमार सल्हाकुमार अपनी खूबसूरत पत्नी को लेकर जब उधर से गुजरा तो उमर ने उससे मनुहार की और उसे रोक लिया। राजकुमार ने राजकुमारी को ऊंट पर बैठे रहने दिया और खुद उमर के साथ अमल की मनुहार लेने बैठ गया। इधर, ढोली गा रहा था और राजकुमार व उमर अफीम की मनुहार ले रहे थे। मारू के देश से आया ढोली बहुत चतुर था, उसे उमर सुमरा के षड्यंत्र का ज्ञान आभास हो गया था। ढोली ने चुपके से इस षड्यंत्र के बारे में राजकुमारी को बता दिया।


राजकुमारी भी रेगिस्तान की बेटी थी, उसने ऊंट को एड़ी मारी जि‍ससे ऊंट भागने लगा। ऊंट को रोकने के लिए राजकुमार दौड़ने लगा, जैसे ही राजकुमार पास आया,  मारूवणी ने कहा - धोखा है जल्दी ऊंट पर चढ़ो, ये तुम्हें मारना चाहते हैं। इसके बाद दोनों ने वहां से भागकर नरवर पहुंचकर ही दम लिया। यहां राजकुमारी का स्वागत सत्कार किया गया और वह,वहां की रानी बनकर राज करने लगी। इतिहास में इस प्रेमी जोड़े को ढोला मारू के नाम से जाना जाता है। तब से आज तक उनके नाम व प्रेम का गुणगान किया जाता है।

4/06/2021

4/06/2021

बेवफा लोगो को हम से बेहतर कौन जानेगा..पढ़िए बेवफ़ा शायरी

बेवफा लोगो को हमसे बेहतर कौन जानेगा.. पढ़िए बेवफ़ा शायरी




बेवफा लोगो को हम से बेहतर कौन जानेगा, 

हम तो वो दीवाने है, जिन्हे किसी की नफरत से भी प्यार था !!


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बेशक तू बदल ले अपनी मोहब्बत लेकिन ये याद रखना,

तेरे हर झूठ को सच मेरे सिवा कोई नहीं समझ सकता !!


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परिन्दों की फ़ितरत से आए थे वो मेरे दिल में,

ज़रा पंख निकल आए तो आशियाना छोड दिया !!


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मजा चख लेने दो उसे गैरों की मोहब्बत का भी, 

इतनी चाहत के बाद जो मेरा न हुआ वो औरों का क्या होगा !!


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बदनाम क्यों करते हो तुम इश्क़ को ए दुनिया वालो,

मेहबूब तुम्हारा बेवफा है तो इश्क़ का क्या कसूर !!


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अब मायूस क्यूँ है उसकी बेवफाई से ए दोस्त,

तुम ही तो कहते थे की वो जुदा है सबसे !!


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एक दूसरे से बिछड़ के हम कितने रंगीले हो गये,

मेरी आँखें लाल हो गयी और तेरे हाथ पीले हो गए !!


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सच कहा था किसी ने तन्हाई में जीना सीख लो, 

मोहब्बत जितनी भी सच्ची हो साथ छोड़ ही जाती है !!


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तेरी यादें हर रोज आती है मेरे पास,

लगता है तुमने बेवफाई नहीं सिखाई इसको !!


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ज़िन्दगी तुझ से एक सबक सीखा है मैंने,

वफ़ा सब से करो, वफ़ा की उम्मीद किसी से न करो !!


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3/31/2021

3/31/2021

ये संगदिलों की दुनिया है..पढ़िए दर्द भरी शायरी

ये संगदिलों की दुनिया है..पढ़िए दर्द भरी शायरी




नज़र चाहती है दीदार करना;

दिल चाहता है प्यार करना;

क्या बतायें इस दिल का आलम;

नसीब में लिखा है इंतजार करना!


💔💔💔💔💔💔💔💔💔💔💔💔


अपनी तस्वीर को आँखों से लगाता क्या है;

एक नज़र मेरी तरफ देख, तेरा जाता क्या है;

मेरी बर्बादी में तू भी है बराबर का शामिल;

मेरे किस्से मेरे यारों को सुनाता क्या है!


💔💔💔💔💔💔💔💔💔💔💔💔


ज़ख्म देने की आदत नहीं हमको;

हम तो आज भी वो एह्साह रखते हैं;

बदले-बदले तो आप हैं जनाब;

हमारे आलावा सबको याद रखते हैं।


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 काश की खुदा ने दिल पत्थर के बनाये होते;

तोड़ने वाले के हाथों में जख्म तो आए होते।


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रेत पर नाम लिखते नहीं;

रेत पर लिखे नाम कभी टिकते नहीं;

लोग कहते हैं पत्थर दिल हैं हम;

लेकिन पत्थरों पर लिखे नाम कभी मिटते नहीं।


💔💔💔💔💔💔💔💔💔💔💔💔


दर्द गैरों को सुनाने की ज़रूरत क्या है;

अपने साथ औरों को रुलाने की ज़रूरत क्या है;

वक्त यूँही कम है दोस्ती के लिए;

रूठकर वक्त गंवाने की ज़रूरत क्या है!


💔💔💔💔💔💔💔💔💔💔💔💔💔


उसका चेहरा भी सुनाता हैं कहानी उसकी;

चाहता हूँ कि सुनूं उससे जुबानी उसकी;

वो सितमगर है तो अब उससे शिकायत कैसी;

क्योंकि सितम करना भी आदत हैं पुरानी उसकी!


💔💔💔💔💔💔💔💔💔💔💔💔💔


तु कहीं भी रह तेरे सर पे इल्जाम तो है;

तेरी हाथों की लकीरों में मेरा नाम तो है;

मुझे अपना बना या ना बना तेरी मर्जी;

पर तु मेरे नाम से बदनाम तो है।


💔💔💔💔💔💔💔💔💔💔💔💔💔


ये संगदिलों की दुनिया है;

यहाँ संभल के चलना ग़ालिब;

यहाँ पलकों पे बिठाया जाता है;

नज़रों से गिराने के लिए।


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बस एक ही गलती हम सारी ज़िन्दगी करते रहे मोहसिन;

धूल चेहरे पर थी और हम आईना साफ़ करते रहे।


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दिल पे क्या गुज़री वो अनजान क्या जाने;

प्यार किसे कहते है वो नादान क्या जाने;

हवा के साथ उड़ गया घर इस परिंदे का;

कैसे बना था घोसला वो तूफान क्या जाने।


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एक अजीब सा मंजर नज़र आता है;

हर एक आंसू समंदर नज़र आता है;

कहाँ रखूं मैं शीशे सा दिल अपना;

हर किसी के हाथ में पत्थर नज़र आता है।


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