काली कौड़ियों से मिलेगी, शनिदेव की कृपा !
देव और दैत्यों के युद्ध उपरांत अमृत प्राप्ति के लिए जब समुद्र मंथन हुआ था। तब उसमे समुंद्र से १४ रत्नो की प्राप्ति हुई थी। … जिसमे भगवान विष्णु का पंच जन्य शंख निकले थे।और उसी के साथ रत्नो के रूप में अनेक रंगों की कोड़ियां भी निकली जिनमें काली कौड़ी बड़ी अनमोल थी…
चौदह (14) रत्नों की प्राप्ति-
समुद्र मंथन के बाद जो चौदह (14) रत्नों की प्राप्ति हुई थी जो निम्नलिखित हैं:-
हलाहल (विष)
कामधेनु
उच्चे: श्रवा (अश्व)
ऐरावत हाथी
कौस्तुभ मणि
कल्पद्रुम
रंभा
लक्ष्मी
वारुणी (मदिरा)
चन्द्रमा
पारिजात वृक्ष
पांचजन्य शंख
धन्वन्तरि (वैद्य)
अमृत
और इसमें अलग अलग रंग की कौड़िया भी प्राप्त हुई जैसे सफ़ेद,पीली, लालभूरि, और विशेष दुर्लभ काली कौड़ी और पुराने समय में लोग इसका परस्पर व्यापार में लेन देन के रूप में धन के रुप में उपयोग करते थे ।
यो आज भी कहावत कही जाती हैं की-तेरी या इसकी औकात 2 कौड़ी की नहीं हैं।
यो इन कौड़ियों में श्रेष्ठ काली कौड़ी का उपयोग एक और कार्य के लिए उपयोग बढ़ने लगा-भाग्य के देव शनिदेव की कृपा तथा काली माता व् कालरात्रि देवी और महालक्ष्मी की प्रसन्नता प्राप्ति को अमावस्या या अष्टमी की रात्रि के 11 से 1 बजे के मध्य पूजन करके काले जादू की सभी तांत्रिक क्रियाओं और नजर आदि के तोड़ के लिए प्रयोग।
और अनेक तांत्रिक सिद्धियों में इसका उपयोग बढ़ता गया। जिनमें अब वर्तमान में बहुत से प्रयोग गुप्त और लुप्त भी हो गए है। तो उन्हीं में से कुछ प्रयोग यहां हैं !
वैसे समुद्री जीवों के संरक्षण नियमों के कारण धीरे-धीरे कौड़ी आज लगभग दुर्लभ हो गयी हैं !
साथ ही बहुसंख्या में कौड़ियों का उपयोग तांत्रिक प्रयोगों में होने से भी अच्छी श्रेणी की कौड़ियों की कमी होने लगी।
कुछ कौड़ियो के तांत्रिक प्रयोग –
1-काले कपड़े में एक बड़ी काली कौड़ी बांधकर अपने व्यापार या ऑफिस में अपनी मेज की दराज में मंत्र से अभिमंत्रित कर रख लें,तो नजर लगनी बंद होकर धन और कार्य में बड़ी व्रद्धि होकर लाभ और सफलता की प्राप्ति होती हैं।
2- 2 या 7 काली कौड़ी, सात काली हल्दी की बिन टूटी गांठ को लेकर मंत्र से अभिमंत्रित करके एक काले रंग के कपड़े में बांधकर घर के दक्षिण भाग में या तिजोरी के दक्षिण भाग में रख यानि स्थापित कर लें। तो तांत्रिक असर समाप्त होकर आपके घर या ऑफिस में सदैव धन कार्य की व्रद्धि और आने वाले और परिजनों में प्रेम, स्नेह और भाग्योदय का वातावरण बना रहता हैं।
3-काले रंग कौड़ी काले रेशमी कपड़े में बांधकर उसे इस मंत्र से अभिमन्त्रित कर के, अपने शत्रु के या आपसे निरन्तर शत्रुता और वेमनस्य या प्रतिस्पर्द्धा रखने व्यक्ति के नाम के साथ लिख कर अपनी मनोकामना कह कर अपने घर या किसी भी मंदिर या पीपल या बड़ के पेड़ के नीचे दक्षिण भाग में दबा दें। और वहां सादा जल चढ़ा दें।बस वह व्यक्ति आपके साथ मित्रता पूर्ण नहीं तो सामान्य व्यवहार करने लगेगा।
4-कोई व्यक्ति या स्त्री कन्या या बच्चा यदि नींद में अचानक डर जाता हो, तो उसके सिरहाने एक काली बड़ी कौड़ी अभिमंत्रित करके सिरहाने रख दें। तो सभी प्रकार का नींद में डरना बंद हो जाता हैं ।
5-धन की प्राप्ति को पूर्णिमां की रात में और शनिदेव की महाकृपा और भाग्य व्रद्धि से लेकर तांत्रिक अभिचार की समाप्ति को अमावस्या की रात्रि को किये जाने वाला विशेष तांत्रिक प्रयोग इस प्रकार से है कि---
पूर्णमासी की रात 8 बजे के करीब नौ लाल रंग के या पीले रंग के गुलाब के फूल और साथ ही नौ पीली बड़ी कौड़ी और ९ काली कौड़ियां के साथ एक – एक गुलाब पुष्प पर..ये शाबरी मंत्र जप करते हुए उन्हें अभिमंत्रित करें., और लाल रंग के कपड़े में बांधकर उसी समय या अगले दिन प्रातः अँधेरी ही जाकर अपनी दुकान, कार्यस्थल पर रख देने से आप देखेंगे कि----
उसी दिन से दिन रात चौगुनी आपकी आय या धन व् कार्य में दिन पे दिन वृद्धि होने लगेगी।
2-अमावस्या की रात्रि 10 से 1 बजे के बीच कभी भी एक काली कौड़ी तथा कनेर का एक फूल या गुड़हल का एक फूल या मालती पुष्प की जड़ को पीले कपड़े में बांध करके उसे इसी मंत्र से अभिमंत्रित कर ताबीज़ की तरह अपने गले या सीधी बाह में धारण कर लेंने से सभी प्रकार के क़र्ज़ से मुक्ति व् भाग्य बन्धन खुलकर शनिदेव की कृपा और आय के साधन खुलकर अच्छी प्रकार से धन की व्रद्धि होती हुयी सभी प्रकार के पद प्रतिष्ठा आदि में लाभ में प्राप्त होता जता हैं।
6-अपने घर या दुकान आदि का निर्माण करते समय उसके ईशान्य यानि उत्तर कोने की नीव में मंत्र से अभिमंत्रित ९असली काली कौड़ियां दबा देने से सभी प्रकार के वास्तु दोष एवं उस जगह में होनेवाले सभी तांत्रिक क्रियाओं के निगेटिव असर और उनके दुष्परिणाम से सुरक्षा होकर घर कीलित होकर सुरक्षित रहता हैं।
7- सात-आठ काली कौड़ी लेकर 8 शनिवार या 4 अमावस्या के दिन सायंकाल को श्री शनिदेव के मंत्र ॐ शं शनेश्चराय नमः से 108 बार जप कर शनिदेव मन्दिर में जाकर तेल का दीपक जलाकर उसके साथ उनके चरणों में अर्पण करने से, श्री शनिदेव की ढईया या साढ़े साती का नकारात्मक प्रभाव कम होकर विशेष कृपा प्राप्त होती है।
वैसे भी इस मंत्र से काली कोड़ी को जपकर सिद्ध करके अपने गले या बाह में पहन लिया जाये। तो भी व्यक्ति की सभी प्रकार से रक्षा होकर कल्याण होता है।
ऊपर दिए उपायों के लिए-
काली कौड़ी का गुप्त सिद्ध शावरमंत्र है:-
कौड़ी कौड़ी काली कौड़ी
मंत्र सिद्ध तू भाग को मोड़ी।
शत्रु मिटे घर रक्षक तुझ आन
कालरात्रि संग तू लक्ष्मी जोड़ी।।
यहाँ कालरात्रि ही देवी या देव के विभिन्न रूप ही शनिदेव और काली माता या भैरवदेव या श्मशान देव और सभी तांत्रिक शक्तियों के स्वामी और रक्षक देव है। यह केवल इसके 1 माला यानि रुद्राक्ष की माला जपकर कोड़ी पर अपनी मनोकामना कहते हुए 9 बार फूँक मारना और फिर जिस कपड़े में रखना बताया है, उसमें रखकर ऊपर लिखे उपाय करने से आपका कल्याण होगा।
यहां किसी प्रकार का भ्रम फेलाना या जादूटोना करने के उपाय बताने का मेरा कोई लक्ष्य नहीं है। यह केवल उन भक्तों के लिए है। जो गुरु मंत्र नहीं लिए और गुरु मंत्र में विशेष आस्था नहीं रखते और तांत्रिक क्रियाओं में अधिक विस्वास रखते है। तो उन्हीं भक्तों के लिए यहां मेरे पूर्वकाल के अनुभूत प्रयोगों में से ये प्रयोग बताया जा रहा है।
यदि विश्वासी अपने गुरु मंत्र के जप से भी किसी भी वस्तु को अपने ध्यान में रखकर सिद्ध करेगा। तो वही वस्तु उसका मनोरथ पूर्ण करती है। सबके मूल में होता है।अपने मंत्र और शुभ संकल्प में पूर्ण विश्वास। जो कि आता है-तीन नियम से:-
1-कोई भी गुरु या इष्ट या माता पिता व् बन्धु और किसी भी प्रकार की जनसेवा जे निरन्तर सेवा करने से।
2-कल्याण और धर्म वृद्धि को निरन्तर निस्वार्थ भाव से अधिक सेअधिक दान करना।
3-अधिक से अधिक अपने गुरु और इष्ट मंत्र का जप करते हुए नियमितता रखना ही तप के प्रभाव से सभी भौतिक और आध्यात्मिक मनोरथ सम्पूर्ण होते है
नोध : इस लेख में दी गई सभी बातें सामान्य जानकारी के लिए है हमारी पोस्ट इस लेख की कोई पुष्टि नहीं करता

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