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5/19/2022

शनि राहु केतु को प्रसन्न करना है तो, धारण कीजिए लाजवर्त !

   
                           
   

शनि राहु केतु को प्रसन्न करना है तोधारण कीजिए लाजवर्त !




लाजवर्त राहु, केतु और शनि द्वारा आ रही बाधाओं को दूर करता है और व्यक्ति को सफलता मिलने लगती है. लाजवर्त को धारण करने के बाद व्यक्ति का दुर्घटना और एक्सीडेंट से बचाव रहता है. यदि आपकी कुंडली में कालसर्प दोष है तो आपको लाजवर्त धारण करने से लाभ अवश्य मिलेगा.!


लाजवर्त रत्न धारण करने काला जादू खत्म करता है और बुरी नजर से बचाव करता है. यदि आपको राहु और केतु की महादशा या अन्तर्दशा चल रही है, तो आप लाजवर्द धारण कर सकते है. वहीं, नौकरी और व्यवसाय में आ रही अड़चनों को दूर करता है. इसके साथ ही पितृ दोष को खत्म करता है. लाजवर्त रत्न विद्यार्थियों के लिए अत्यंत लाभदायक होता है.!


लाजवर्त विद्यार्थी का आत्म विश्वास बढ़ा देता है और विद्यार्थी की शिक्षा में एकाग्रता भी बढ़ जाती है. लाजवर्त को धारण करने के बाद धीरे-धीरे आपके व्यवसाय में तरक्की होती है. यदि व्यवसाय काला जादू या टोना-टोटका की वजह से मंदा चल रहा है तो आपको लाजवर्त धारण करने से लाभ अवश्य मिलेगा. अगर घर में बरकत नहीं होती है तो बरकत होने लगती है.!


अगर आपके शत्रु ज्यादा है या आपका शत्रु आपको परेशान करता है या आप पर जादू टोना करवाता है तो आपका उसके किए हुए जादू टोना से बचाव करता है. इस रत्न को धारण करने पर आपका शत्रु आपके सामने शक्तिहीन हो जाता है. लाजवर्त को धारण करने से डिप्रेशन-तनाव दूर होता है.!


लाजवर्त धारण करने के लाभ:---


लाजवर्त शनि और राहू-केतु के समस्त दोषों और बुरे प्रभावों को समाप्त करता है।

यदि बार-बार दुर्घटनाएं हो रही हों तो लाजवर्त धारण करने से लाभ पहुंचता है।

यह आकस्मिक रूप से होने वाली धन हानि, स्वास्थ्य समस्याओं से बचाव करता है।

लाजवर्त बुरी नजर, जादू-टोना, नकारात्मक ऊर्जा को दूर करने में मदद करता है।

राहू-केतु के कारण पितृ दोष का निर्माण भी होता है। लाजवर्त पहनने से पितृ दोष शांत होता है।

व्यापार-व्यवसाय या नौकरी में बाधा आ रही हो तो लाजवर्त धारण करना उचित रहता है।

यह दिमाग को शांत रखने का काम भी करता है। मानसिक स्थिरता लाजवर्त से आती है।

इसे पहनने से आर्थिक तंगी दूर होती है, पैसों के आगमन में आ रही रूकावटें दूर होती हैं।

जिनकी जन्म कुंडली में सूर्य ग्रहण या चंद्र ग्रहण दोष है उन्हें भी यह पहनना चाहिए।

घर में बरकत नहीं रहती, सदस्यों को तनाव-डिप्रेशन रहता है तो लाजवर्त की माला को घर की पश्चिम दिशा में लटकाएं।


कैसे धारण करें लाजवर्त:---


लाजवर्त को धारण करने का सबसे शुभ दिन शनिवार है। इसे चांदी की अंगूठी या लॉकेट में बनवाकर पहना जा सकता है। लाजवर्त के मोतियों की माला भी गले में धारण की जा सकती है या इसका ब्रेसलेट भी पहना जा सकता है। इसे दाहिने हाथ की मध्यमा अंगुली में धारण करना चाहिए। धारण करने से पहले अंगूठी या लॉकेट को सरसो या तिल के तेल में पांच घंटे तक डुबोकर रखें। इसके बाद नीले रंग के वस्त्र पर रखकर ््््््््््््््् मंत्र की एक माला जाप करें। धूप-दीप, नैवेद्य करें। इसे कपड़े से पोंछकर धारण करें।


सावधानी:---उपरोक्त रत्न को धारण करने से पहले किसी विद्वान ज्योतिषी को अपनी कुंडली दिखाकर परामर्श अवश्य लें और उन्हीं के निर्देशानुसार लाजवर्त धारण करें !


( नोट- उपरोक्त लेख केवल सामान्य जानकारी हेतु है )

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