शुक्र यंत्र धारण करने के चमत्कारी लाभ !
संसार के समस्त भौतिक सुख कार, गाड़ी, बंगला, मान -सम्मान, यश, कीर्ति, वैभव, प्रेम, संतान, शैय्या सुख आदि सब शुक्र की कृपा से ही संभव है !
जिसके ऊपर शुक्र देवता की कृपा होती है, उसका जीवन इस पृथ्वी पर राजाओं के समान होता है और जिन से शुक्र देवता की कृपा नहीं होती, उनका जीवन घोर गरीबी और दरिद्रता हमें गुजरता है, एक तरह से माना जाए तो, जिन पर शुक्र की कृपा नहीं होती, उनका जीवन ही इस पृथ्वी पर व्यर्थ हो जाता है !
इसलिए पृथ्वी पर अपने जीवन को सार्थक करने के लिए जीवन में एक बार शुक्र देवता की आराधना, उपासना अवश्य करनी चाहिए !
शुक्र यंत्र ज्योतिषीय क्षेत्र में सबसे महत्वपूर्ण यंत्रों में से एक है, क्योंकि यह शुक्र ग्रह को प्रसन्न करने के लिए यंत्र होता है, जो मानव जीवन में प्रमुख भूमिका निभाता है। कुंडली में शुक्र ग्रह की स्थिति हमारे जीवन पर बहुत गहरा प्रभाव डालता है।
शुक्र ग्रह हमारे आंतरिक स्व का शासक होता है। जो हमारे मन और हृदय की स्थिरता पर हावी रहता है, और हमारे प्रेम और निजी संबंधों में प्रकट होता है।
इसके अलावा हमें एक व्यक्ति के रूप में और एक इंसान के रूप में प्रदर्शित करता है।
केवल शुक्र की ग्रह स्थिति हमें प्रेम संबंधों में मजबूत या संवेदनशील बनाती है, या तो कठोर या प्रेमपूर्ण, या तो रचनात्मक या नीरस, या तो नैतिक या अनैतिक व्यक्ति के वास्तविक व्यक्तित्व पर शासन करती है।
कुल मिलाकर शुक्र मानव जीवन में सम्मान, प्रेम और शांति का दाता ग्रह है। किसी भी व्यक्ति की कुंडली में यदि शुक्र ग्रह की स्थिति अच्छी होती है, तभी जातक को प्रेम, विवाह इत्यादि के क्षेत्र में अत्यंत सफलता प्राप्त होती है। वही शुक्र गृह की ख़राब स्थिति जातक को अत्यंत परेशानियों का सामना करने के लिए विवश कर देती है।
जिन लोगों को अपने निजी जीवन में समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है, और मन की स्थिरता की कमी है, या कुंडली में शुक्र की स्थिति खराब है।
उन्हें इस यंत्र की पूजा करनी चाहिए। जिससे उन्हें शुक्र ग्रह प्रदत्त जीवन के सभी सकारात्मक रंगों एवं सुखों को प्राप्त करने में आसानी हो सके।
इसके अलावा रचनात्मक और कला क्षेत्र के लोगों को अपने पेशेवर विकास के लिए इसका प्रयोग करना चाहिए।
शास्त्रों के अनुसार, शुक्र ग्रह “महर्षि भृगु” के पुत्र हैं। शुक्र राक्षसों का स्वामी गुरु है, इसलिए इसे “दैत्य गुरु” भी कहा जाता है। शुक्र सौरमंडल का सबसे चमकीला और सुंदर ग्रह है।
वृषभ और तुला लग्न या चंद्र राशि वाले जातकों को इस यंत्र की पूजा करने की विशेष सलाह दी जाती है।
भगवान शुक्र की प्रतिकूल दशा / गोचर वाले जातकों को भी अपनी कुंडली के अशुभ प्रभावों को समाप्त करने के उपाय के रूप में शुक्र यंत्र को स्थापित करने और पूजा करने की सलाह दी जाती है।
महान महाकाव्य महाभारत के अनुसार, शुक्राचार्य न केवल धन के स्वामी है, बल्कि औषधीय जड़ी बूटियों, मंत्रों और सभी प्रकार के स्वाद के स्वामी भी यही हैं।
शुक्र यंत्र के लाभ:--
यह यंत्र वित्तीय स्थिरता लाता है, और ऋणों को दूर करने में मदद करता है।
यह यंत्र शादी शुदा और प्रेमी जोड़ों के बीच आपसी समझ को बढ़ावा देता है।
यह जीवन में समृद्धि, विलासिता, आराम, सकारात्मकता और सद्भाव को आकर्षित करता है।
पारिवारिक रिश्तों से संबंधित मुद्दों को सुलझाने में मदद करता है, और परिवार में सद्भाव लाता है।
यह आंख, त्वचा, पेट और सेक्स से संबंधित रोगों को ठीक करने में भी मदद करता है।
यह कला, संगीत और मीडिया के क्षेत्र में पुरस्कार, सौंदर्य और सफलता प्रदान करता है।
यह अन्य ग्रहों के अशुभ प्रभाव को भी दूर करता है।
शुक्र यंत्र स्थापना विधि:--
यह यंत्र तांबे की धातु पर उकेरा जाता है, और माना जाता है, कि जातक के लिए इसे शुक्रवार को उगते चंद्रमा के समय स्थापित करना अत्यंत लाभदायक रहता है।
यंत्र जिस स्थान पर स्थापित होता है। उस स्थान को ऊर्जा प्रदान करता है। इसे घर/कार्यालय/दुकान के प्रवेश द्वार के पास या बैठक कक्ष में/रिसेप्शन/अध्ययन कक्ष या कार्यालय केबिन में रखा जा सकता है।
यंत्र को पूर्व दिशा में रखना सर्वोत्तम होता है। यह सूर्य की बढ़ती किरणों से सक्रिय हो जाता है।
पूर्वी कोने के दिव्य स्पंदनों के साथ, यंत्र अपनी रहस्यमय ज्यामिति के माध्यम से आवास को असाधारण सकारात्मक कंपन और ऊर्जा प्रदान करता है।
शुक्र यंत्र की शुक्र यंत्र की पूजा सामग्री सामग्री:--
1 कोई भी एक फलों का रस (नारियल का पानी, गन्ने का रस, अनार का रस)
2 पंच द्रव्य (पानी, दूध, दही, घी, शहद)
3 दीपक, धुप, गंगा जल
4 गंडक नदी का पानी / गंगाजल
5 साफ कपड़ा
6 चंदन का लेप
7 तुलसी का पत्ता
8 धूप और अगरबत्ती
9 मीठा, फल और अन्य खाने योग्य
10 यंत्र से संबंधित देवता का चित्र
शुक्र यंत्र की पूजा:--
भक्त सप्ताह में एक या दो बार अपनी सुविधानुसार निन्मलिखित विधि से शुक्र यंत्र का अभिषेक कर सकते हैं।
पूर्व दिशा की ओर मुख करके बैठें ।
सबसे पहले यंत्र को किसी धातु की थाली में रख दें ।
यंत्र को गंडक नदी के जल अन्य किसी गंगा के जल से स्नान कराएं।
उसके बाद इसे साफ कपड़े से पोंछ लें।
उसके बाद पंच द्रव्य (पानी, दूध, दही, घी, शहद) और कोई एक फलों का रस (नारियल का पानी, गन्ने का रस, अनार का रस) एक-एक करके सभी अभिषेकम तरल अर्पित करें।
तत्पश्चात यंत्र को किसी साफ कपड़े से पोंछ कर आसन पर रख दें।
यंत्र पर चंदन के लेप का टीका लगाएं और एक तुलसी का पत्ता यंत्र पर रखें। ताकि तुलसी यंत्र पर अच्छी तरह से टिकी रहे ।
यंत्र पर चंदन के लेप का टीका लगाएं और एक तुलसी का पत्ता यंत्र पर रखें, ताकि तुलसी यंत्र पर अच्छी तरह से टिकी रहे ।
शुक्र ग्रह से सम्बंधित देवी/देवता के मंत्र का जाप करें। यंत्र को धूप/अगरबत्ती दिखाएं ।
यंत्र पर कुछ मीठा, फल और खाने योग्य अन्य चीजें चढ़ाएं और यंत्र के सामने अपनी मनोकामना जोर से बोलें।
शुक्र यंत्र पूजन के लिए बीज मंत्र :--
“ॐ ह्रीं श्रीं शुक्राय नम: “!
” द्रां द्रीं द्रौं स: शुक्राय नम: ” !
” ह्रीं हिमकुन्दमृणालाभं दैत्यानां परमं गुरुम ! सर्वशास्त्रप्रवक्तारं भार्गवं प्रणमाम्यहम ” !!
सावधानी:-- अपनी कुंडली में शुक्र की स्थिति जानने के लिए किसी विद्वान ज्योतिषी को अपनी कुंडली अवश्य दिखाएं और उन्हीं के दिशा निर्देशानुसार उपाय करें !
( नोट- उपरोक्त लेख केवल सामान्य जानकारी हेतु है )

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