निरोगी कुंजी ( भाग- 1 )
उत्तर:- शहद बच्चों से लेकर बूढों तक सभी के लिये अच्छा होता है। इसमें कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, विटामिन बी, सी, लौह, मैगनीशियम, कैल्शियम, फॉस्फोरस, पोटेशियम, सोडियम आदि गुणकारी तत्व होते हैं।शहद में ग्लूकोज पाया जाता है। साथ ही शहद में पाए जाने वाला विटामिन और शुगर शरीर के भीतर जाते ही कुछ ही समय में घुल जाता है। बच्चों की खांसी दूर करने के लिए अदरक के रस में शहद मिलाकर देने से खांसी में आराम मिलता है। सूखी खांसी में भी शहद और नींबू का रस लेने से फायदा होता है। यदि आप थकान महसूस करते हैं या फिर आपको एनीमिया है तो भी आप नियमित रूप से शहद का सेवन कर इस बीमारी को दूर कर सकते हैं। जुकाम दूर करने के लिए शहद, अदरक और तुलसी के पत्तों का रस बराबर मात्रा में मिलाकर चाटने से राहत मिलती है। इतना ही नहीं यदि आपको ठीक तरह से नींद नहीं आती तो रात को दो चम्मच शहद खाकर सोना लाभकारी होता है।
प्रश्न:- रूमेटाइड अर्थराइटिस का फेफड़ों पर क्या प्रभाव पड़ता है?
उत्तर:- सूजन की बीमारी रूमेटाइड अर्थराइटिस मुख्य रूप से शरीर के जोड़ों को प्रभावित करती हैं। लेकिन, इसका फेफड़ों पर भी महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ता है। क्रोनिक सूजन फेफड़ों के ऊतकों में घाव, फेफड़ों के अस्तर ऊतकों की सूजन, फेफड़ों तक जाने वाले ब्लड धमनियों को कसने, एयरवे प्रतिबंध और फेफड़े के तरल पदार्थ का निर्माण करती है। हालांकि इन प्रभावों में से कुछ का इलाज हो सकता है, जबकि कुछ अपरिवर्तनीय क्षति का कारण बन सकता है।
प्रश्न:- हाथों से टैन हटाने के लिए क्या करे?
उत्तर:- हाथों से टैन हटाने में बादाम बेहद उपयोगी होता है। पांच-दस ताजा हरे बादाम लें और उन्हें ग्राइंड कर लें। इस पेस्ट में पांच बूंदें चंदन का तेल डाल दें। इस पेस्ट को त्वचा के प्रभावित हिस्से पर लगाएं। अगर ताजा बादाम उपलब्ध न हों, तो बादाम को सारी रात पानी में भिगोकर रखें और फिर यही प्रक्रिया करें।एक कटोरी में ठंडा दही लें। इसमें थोड़ी सी हल्दी मिला लें। इस पेस्ट को नहाने से बीस मिनट पहले अपने हाथों पर लगा लें। आप चाहें तो इस मिश्रण को अपने गले और चेहरे पर भी लगा सकते हैं। इससे आपको टैनिंग से निजात पाने में काफी मदद मिलेगी।टमाटर को दो टुकड़ों में काट लें। टमाटर के अंदरूनी हिस्से को अपनी त्वचा पर इस प्रकार रगड़ें कि टमाटर के बीज और रस आपकी त्वचा के संपर्क में आए। इससे आपकी त्वचा की रंगत तो निखरेगी ही साथ ही टैनिंग की समस्या भी दूर होगी ।
प्रश्न:- लो ब्लड प्रेशर होने पर कौन से घरेलु नुस्खों को आजमाना चाहिए?
उत्तर:- नमक का पानी लो ब्लड प्रेशर के लिए बड़े काम का है। इससे ब्लड प्रेशर सामान्य हो जाता है। नमक में सोडियम मौजूद होता है और यह ब्लड प्रेशर बढ़ाता है। ध्यान रहें, नमक की मात्रा इतनी भी ना दें कि इससे स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़े। लो ब्लड प्रेशर होने पर किशमिश खाना बहुत फायदेमंद होता है। रात में 30 से 40 किशमिश भिगो दें और सुबह खाली पेट इसका सेवन करें। जिस पानी में किशमिश भिगोई थी आप उस पानी को भी पी सकते हैं।तुलसी कम होते ब्लड प्रेशर को सामान्य करने में मददगार साबित होती है। इसमें विटामिन सी, पोटैशियम, मैग्नीशियम जैसे कई तत्व पाए जाते हैं जो दिमाग को संतुलित करते हैं और तनाव को भी दूर करते हैं।
प्रश्न:- पेट के दाईं तरफ दर्द के क्या कारण हैं?
उत्तर:- पेटदर्द एक ऐसी गंभीर बीमारी है। लेकिन अलग-अलग हिस्सों में दर्द अलग-अलग कारणों से होते हैं। पेट के दाईं हिस्से में दर्द अपेन्डिसाइटिस के कारण होता है। महिलाओं में पेट के दाईं तरफ दर्द या अम्बिलिकल लेवल से नीचे दर्द होना अपेन्डिसाइटिस का संकेत भी हो सकता है तो इसे नजरअंदाज ना करें। कई बार अगर महिलाओं को अगर इस हिस्से में ज्यादा दर्द होता है। तो जरूर आपको अंडाशय में कोई गंभीर समस्या हो गई है।
प्रश्न:- अस्थमा फेफड़ों को कैसे प्रभावित करता है?
उत्तर:- अस्थमा एक ऐसी बीमारी है, जिसमें श्वासनली या इससे जुड़े हिस्सों में सूजन आ जाती है। इसके चलते फेफड़ों में हवा जाने में रुकावट पैदा हो जाती है। जब एलर्जन्स या इरिटेंट्स श्वासनली के संपर्क में आते हैं तो सांस लेने में परेशानी होने लगती है। अस्थमा फेफड़ों की एक साधारण बीमारी है, जिसमें सांस की नली सामान्य से अधिक संवेदनशील होती है और इनमें सूजन आ जाती है। इस वजह से सांस की नलियों में सिकुड़न और रुकावट आ जाती है।
प्रश्न:- पाइलोनाइडल सिस्ट को ठीक करने के लिये घरेलू नुस्खे बताएं?
उत्तर:- पाइलोनाइडल सिस्ट्स के उपचार के लिये पानी के साथ लहसुन का पेस्ट बना लें। अब इस पेस्ट को प्रभावित जगह पर लगाएं और आधा घंटा लगा रहने दें। इसके अलावा आप लैवेंडर बाथ सॉल्ट या किसी अन्य बाथ सॉल्ट से स्नान कर सकते हैं। जो आपको किसी भी स्पा आदि में मिल जाएगा। इसके अलावा पानी मिलाकर हल्दी का पेस्ट बना लें। अब इस पेस्ट को सिस्ट पर लगाएं और फिर सूखने तक लगा रहने दें और फिर धो दें। आप चाहें तो चूना लेकर इसमें थोड़ी हल्दी मिला लें। पानी मिलाकर इसका पेस्ट बनाएं और प्रभावित स्थान पर इसका लेप लगाएं। थोड़ी देर लगा रहने दें और फिर सादे पानी से इसे धो लें।
प्रश्न:- क्या सेहत के लिए लाभकारी है ककड़ी ?
उत्तर:- ककड़ी यानी गर्मियों के मौसम में आने वाला बेहतरीन फल। इसका सेवन कच्ची अवस्था में ही किया जाता है। कच्ची ककड़ी में आयोडीन की पर्याप्त मात्रा पाई जाती है, जिससे यह कई रोगों से बचाव करती है। ककड़ी स्वास्थ्यवर्धक होने के साथ ही रोगनाशक भी है। गर्मियों में ककड़ी का सेवन पेट संबंधी रोगों से छुटकारा दिलाने के साथ ही पाचन शक्ति भी बढ़ाता है। ककड़ी में खीरे की अपेक्षा जल की मात्रा ज्यादा होती है। इसके सेवन से तेज गर्मी में भी शरीर तर रहता है। ककड़ी के सेवन से डायबिटीज और कोलेस्ट्रॉल की मात्रा सामान्य रहती हैं। यदि आपको ज्यादा भूख लगती है और आपका वजन दिन पर दिन बढ़ रहा है तो ककड़ी आपके लिए फायदेमंद साबित होगी।
प्रश्न:- ऑटोइम्यून डिजीज को दूर करने के प्राकृतिक उपाय बताये ?
उत्तर:- ऑटो इम्यून डिजीज में शरीर में मौजूद प्रतिरक्षण प्रणाली उसके खिलाफ ही कार्य करने लगती है। इस रोग से शरीर का कोई भी अंग प्रभावित हो सकता है जैसे जोडों का रोग, त्वचा, रक्त नलिकाओं और नर्वस सिस्टम आदि। रंत अपने खानपान में बदलाव करें, और ऐसे आहार का सेवन करें जो आपकी प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाते हों। इसके लिए सबसे साबुत अनाज का सेवन अधिक मात्रा में करें, इसमें मौजूद लेक्टिन आपकी प्रतिरोधक क्षमता को तुरंत बढ़ायेगा। खाने में ताजे फल और सब्जियों को शामिल कीजिए। इसके अलावा नियमित व्यायाम को अपनी दिनचर्या बनाइए। तनाव भी अप्रत्यक्ष रूप से आपके प्रतिरक्षा प्रणाली को प्रभावित करता है। तनाव से पाचन तंत्र प्रभावित होने के कारण इम्यून सिस्टम कमजोर होने लगता है। हम जैसा खाएंगे आहार वैसा ही बनेगा मन और शरीर। अगर हम पौष्टिक व संतुलित आहार लेते हैं तो शरीर में ऐसे लोगों के मुकाबले ज्यादा बेहतर रोग प्रतिरोधक क्षमता होगी जो संतुलित व पौष्टिक भोजन नहीं लेते।
प्रश्न:- शुगर डाइट क्या है?
उत्तर:- शुगर की बहुत अधिक मात्रा लेना भी स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक होता है। अगर आपको नहीं पता चलता है कि आपने कितनी शुगर ले ली है तो इस स्लाइडशो में लिखे संकेतों को पढ़ें और जाने कि कहीं आप बहुत अधिक शुगर तो नहीं खा रहे। ज्यादा मीठा खाने से दांतों में कैविटीज जम जाती है। दांतों में कीड़ने लग जाते हैं। वहीं ज्यादा मीठा वजन बढ़ने का कारण बनता है। अगर आप आजकल बहुत ज्यादा तनाव में रहने लगे हैं तो अपने खान-पान में नजर डालिए कि कहीं आप ज्यादा शुगर तो नहीं ले रहे। दरअसल ब्लड में शुगर लेवल ज्यादा होने से एंजाइटी और डिप्रेशन बढ़ा जाता है जिससे तनाव होने लगता है।
प्रश्न:- दूध पीने के बाद किन आहारों का सेवन करना वर्जित होता है?
उत्तर:- आयुर्वेदिक नियम के अनुसार दूध के साथ कुछ आहारों का सेवन पूर्णत वर्जित माना जाता है। इन आहारों का साथ में सेवन करने से शरीर को नुकसान पंहुच सकता है।दूध के साथ कुलत्थी व नींबू, कटहल करेला या फिर नमक का कभी भी एक साथ सेवन नहीं करना चाहिये । ये आपको लाभ पंहुचाने के बजाए नुकसान पंहुचा देगा। जिससे कि आपको शारीरिक परेशानी हो सकती है। इसको खाने से सबसे ज्यादा चमड़ी के रोग दाद,खाज ,खुजली,एगसिमा ,सोराईसिस, आदि हो सकते है।दूध के साथ मूँग, उड़द, चना आदि सभी दालें,, गाजर, शककंद, आलू, , तेल, गुड़, शहद, दही, नारियल, लहसुन, कमलनाल, सभी नमकयुक्त व अम्लीय प्रदार्थ नहीं लेना चाहिए। इनके बीच कम-से-कम 2 घंटे का अंतर अवश्य रखें | अगर आप उड़द की दाल को दूध के साथ खाते है तो हार्टअटैक का खतरा बढ़ जाता है।
प्रश्न:- अर्थराइटिस के लिए सर्वश्रेष्ठ घरेलू उपाय क्या हैं?
उत्तर:- विटामिन, एंटीऑक्सीडेन्ट और पौष्टिक तत्वों से भरपूर ताजे फल और सब्जियों का रस अर्थराइटिस के लिए अद्भुत उपचार है। लहसुन, मौसमी, संतरा, गाजर और चुकंदर के रस का पर्याप्त सेवन इस रोग से निजात दिलाने में सहायक है। साथ ही फूलगोभी का रस पीते रहने से जोड़ों के दर्द में लाभ मिलता है। अर्थराइटिस रोगी को ना ही ज्यादा देर तक खाली बैठना चाहिए और न ही आवश्यकता से अधिक परिश्रम करना चाहिए, क्योंकि गतिहीनता के कारण जोड़ों में अकड़न आ जाती है, और अधिक परिश्रम से जोड़ों को हानि पहुंच सकती है। स्टीम बाथ और शरीर की मालिश अर्थराइटिस में काफी हद तक लाभ देती है। इसके लिए लहसुन के रस को कपूर में मिलाकर मालिश करना या फिर लाल तेल से मालिश करना आरामदेह रहता है। जैतून के तेल से भी मालिश करने से अर्थराइटिस की पीड़ा काफी कम हो जाती है।
प्रश्न:- अनिद्रा की समस्या कैसे दूर करें?
उत्तर:- 30 सेकेंड के इस ट्रिक में आप अपने दिमाग को 30 सेकेंड के अंदर सोने के लिए ट्रेन करते हैं। ये बहुत ही कारगर ट्रिक है जिसकी मदद से आप अपनी अनिद्रा की बीमारी दूर कर सकते हैं साथ ही स्वास्थ्य को होने वाले नुकसानों से बचा सकते हैं। लेकिन इस ट्रिक को आजमाने से पहले कॉफी, चाय, चॉकलेट, कोला औऱ जंक फुड का सेवन छोड़ दें। सबसे पहले पढ़ने की आदत अपनाइए। रोत को बिस्तर में किताब पढ़ने की आदत डालें। इससे दिमाग रिलेक्स होता है और दिनभर की उलझनों और परेशानियों से दिमाग हटकर किताब में लगता है। किताब पढ़ने के बीस से तीस मिनट बाद नींद आनी शुरू हो जाती है। रोज ऐसा करने से एक महीने के अंदर नींद आनी शुरू हो जाएगी।
प्रश्न:- त्रिफला के सेवन से क्या फायदा होता है।
उत्तर:- त्रिफला ऐसी ही आयुर्वेदिक औषधी है जो शरीर का कायाकल्प कर सकती है। त्रिफला के सेवन से बहुत फायदें हैं। स्वस्थ रहने के लिए त्रिफला चूर्ण महत्वपूर्ण है। त्रिफला सिर्फ कब्ज दूर करने ही नहीं बल्कि कमजोर शरीर को एनर्जी देने में भी प्रयोग हो सकता है।त्रिफला के नियमित सेवन से लंबे समय तक रोगों से दूर रहा जा सकता है।त्रिफला और इसका चूर्ण वात,पित्त व कफ को दूर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।बालों के खराब होने और समय से पूर्व सफेद होने से भी त्रिफला के सेवन से बचा जा सकता है।सुबह के समय तरोताजा होकर खाली पेट ताजे पानी के साथ त्रिफला का सेवन करें और इसके बाद एक घंटे तक पानी के अलावा कुछ ना लें।त्रिफला का सेवन करने से पहले या तो आप किसी अनुभवी वैद्य से संपर्क करें जिससे साथ त्रिफला का सही-सही लाभ उठा सकें।हमेशा मौसम के हिसाब से त्रिफला का सेवन करना चाहिए। यानी मौसम को ध्यान में रखकर त्रिफला के साथ गुड़, सैंधा नमक, देशी खांड, सौंठ का चूर्ण, पीपल छोटी का चूर्ण, शहद इत्यादि मिलाकर सेवन कर सकते हैं।
प्रश्न:- थ्रेडि़ग के बाद पिंपल्स से बचने के क्या उपाय है ?
उत्तर:- वैक्सिंग जैसे विकल्प की तुलना में थ्रेडिंग एक बेहतर विकल्प है क्योंकि यह त्वचा की परत को दूर नहीं करती। लेकिन कभी-कभी खासकर संवदेनशील त्वचा पर थ्रेडिंग करवाने के बाद पिंपल्स, चकत्ते या त्वचा में लालिमा आ जाती है। इससे बचने के लिए थ्रेडिंग करवाने से पहले चेहरे को धोकर अच्छे से पोंछ लें। त्वचा को गुनगुने पानी से धोने पर ज्यादा फायदा होता है। इससे थ्रेडिंग करवाते समय दर्द कम होगा और आप फ्रेश फील करेगी। फिर एक कॉटन का साफ कपड़ा लेकर अपने चेहरे को हल्के हाथों से पोंछ लें। क्योंकि रगड़कर पोंछने से आपकी त्वचा ड्राई हो सकती है। अब घरेलू टोनर लगाकर अपने चेहरे को हल्का नम कर दें। दाने वाली त्वचा के लिए विच हेजल जडी़ बूटी से बना टोनर अच्छा रहता है। आप चाहें तो दालचीनी की चाय को टोनर के रूप में लगा सकते हैं।
प्रश्न:- बवासीर का इलाज बताएं।
उत्तर:- आयुर्वेदिक औषधियों को अपनाकर बवासीर से छुटकारा पाया जा सकता है। अच्छे पाचन क्रिया के लिए फाइबर से भरा आहार बहुत जरूरी होता है। इसलिए अपने आहार में रेशयुक्त आहार जैसे साबुत अनाज, ताजे फल और हरी सब्जियों को शामिल करें। साथ ही फलों के रस की जगह फल खाये। बवासीर के मस्सों को दूर करने के लिए मट्ठा बहुत फायदेमंद होता है। इसके लिए करीब दो लीटर छाछ लेकर उसमे 50 ग्राम पिसा हुआ जीरा और स्वादानुसार नमक मिला दें। प्यास लगने पर पानी के स्थान पर इसे पीये। चार दिन तक ऐसा करने से मस्से ठीक हो जायेगें। इसके अलावा हर रोज दही खाने से बवासीर होने की संभावना कम होती है। और बवासीर में फायदा भी होता है।
प्रश्न:- क्या सच में करीब से टीवी देखने पर कमजोर हो जाती है आंखें?
उत्तर:- यूं तो बेहद नजदीक बैठकर टीवी कभी नहीं देखना चाहिए। लेकिन आपको यह बता दें कि ऐसा करने से आंखें खराब नहीं होतीं। विशेषज्ञों के मुताबिक बेहद नजदीक से टीवी देखने से सिर में दर्द हो सकता है। इतना ही नहीं आखों को सूखेपन का एहसास होने लगता है। नतीजतन आंखों में खुजली भी हो सकती है।टीवी देखते हुए बीच बीच में ब्रेक अवश्य लें।
प्रश्न:- 50 की उम्र के बाद खुद का उपचार कैसे करें?
उत्तर:- उम्र बढ़ने के साथ शरीर की प्रतिरोधक क्षमता भी कमजोर होती जाती है जिसके कारण कई बीमारियां होने लगती हैं। लेकिन अगर कुछ बातों को ध्यान में रखा जाये तो बढ़ती उम्र के साथ होने वाली बीमारियों पर न केवल काबू पाया जा सकता है बल्कि उनसे बचाव भी किया जा सकता है। ऐसा आपने सुना भी होगा कि हम जो खाते हैं वह बाद में काम आता है। यानी अगर आपने 30 की उम्र तक हेल्दी डायट ली है तो 50 की उम्र पार होने के बाद भी आप हेल्दी ही रहेंगे। 50 की उम्र पार करने के बाद खानपान का विशेष ध्यान देने की जरूरत होती है, क्योंकि उम्र के इस पड़ाव पर पाचन क्षमता प्रभावित होती है। यानी हमारी डाइजेशन पॉवर कम हो जाती है, इसलिए पेट संबंधित बीमारियों से अगर आप बचना चाहते हैं तो कम खायें। 50 साल के बाद अधिक से अधिक एक्टिव रहने की जरूरत होती है। हालांकि इस समय आप जिम नहीं जा सकते हैं लेकिन योग कर सकते हैं, वॉक कर सकते हैं, तो इसे जरूर करें।
प्रश्न:- सूर्य नमस्कार को बेहतर बनाने के क्या उपाय है?
उत्तर:- यह योग आसन शरीर को सही आकार देने और मन को शांत व स्वस्थ रखने का उत्तम तरीका है। इस योग को करने से शरीर निरोग और स्वस्थ होकर तेजस्वी बनाता है। यह अकेला योग सम्पूर्ण योग व्यायाम का लाभ पहुंचाने में समर्थ है। लेकिन कुछ सरल उपाय करके आप इस योग से अधिकतम लाभ पा सकते है। इसे बेहतर बनाने के लिए योग शुरू करने से पहले, सामान्य तापमान से थोड़े ठंडे पानी से स्नान करें। योग करने के लिए बहुत जरूरी है कि कोशिकाएं संकुचित हों और कोशिकाओं के बीच का अंतर खुल जाए क्योंकि शरीर की कोशिका संरचना को एनर्जी के एक अलग आयाम से सक्रिय करती हैं। कोई भी योग चाहे वह सूर्य नमस्कार ही क्यों न हो- अगर आपको पसीना आता है तो आपको तौलिये से पसीना नहीं पोंछना चाहिए, पानी नहीं पीना चाहिए या योग के दौरान बॉथरूम जाने से भी बचना चाहिए, जब तक कि बहुत जरूरी न हो।
प्रश्न:- क्या टैनिंग भी विटामिन डी का अवरोधक बनता है?
उत्तर:- टैनिंग हमें पराबैंगनी किरणों से बचाती है। लेकिन ये विटामिन डी भी शरीर तक नहीं पहुंचने देती। दरअसल टैनिंग हमारे स्किन पोर्स को बंद कर यूवी रेडिएशन से बचाता है। लेकिन हाल ही में आई एक शोध से इस बात की पुष्टि हुई है कि टैनिंग विटामिन डी को भी शरीर द्वारा ऑब्जर्व करने से रोक देता है। जैसा कि स्किन टैनिंग नुकसानदायक पराबैंगनी किरणों से बचाती है। लेकिन अधिक टैनिंग होने से पोर्स के ब्लॉक होने में बढ़ोतरी होने लगती है जिस कारण शरीर को विटामिन डी भी नहीं मिल पाता।
प्रश्न:- पल्मोनरी एडिमा क्या है?
उत्तर:- पल्मोनरी एडिमा फेफड़ों में पानी भर जाने की स्थिति है। इसके हर मरीजों में उपचार का तरीका अलग अलग होता है। दरअसल फेफड़ों में पानी कई कारणों से एकत्र हो जाता है। जैसे कि कई बार छोती में सामान्य सी चोट लगने से भीस निमेनिया से, कुछ टॉक्सिन या दवाईयों के संपर्क में आने से या कई बार तो गलत व्यायाम करने से भी फेफड़ों में पानी भर जाता है। वहीं फेफड़ों में पानी भरने के अलावा पल्मोनरी एडिमा बहुत से मामलों में, हृदय में किसी भी प्रकार की समस्या के कारण हो जाता है। अगर आपको पल्मोनरी एडिमा की शिकायत है औऱ आप बहुत अधिक ऊंचाई पर रहते हैं तो आपकी बीमारी की गंभीरता बढ़ सकती है। इसमें ध्रूमपान ना करें औऱ वजन को नियंत्रण में रखें।
प्रश्न:- आंखों को नुकसान पहुंचाने वाली आदतें कौन सी है?
उत्तर:- धूल, धूप, प्रदूषण और धुंए के लगातार संपर्क में रहने पर इसकी देखभाल खासतौर पर जरूरी हो जाती हैं। लेकिन जाने अनजाने हम ऐसी चीजे करते है, जिनके चलते हमारी आंखों को नुकसान होने लगता है। जैसे आंखों को जोर से रगडने से बचें आंखों के आसपास की त्वचा बहुत कोमल और नाजुक होती है, बहुत ज्यादा रगड़ने से आंखों की त्वचा को नुकसान पहुंचा सकता है। आंखों में खुजली होने पर गंदे हाथों से आंखों को रगड़ने पर पलक संबंधी संक्रमण होने का खतरा बना रहता है। अक्सर कांटेक्ट लेंस का इस्तेमाल करने वाले लोग इसे पहनकर सो जाते हैं। लेकिन इसे लगाकर सोने से आंखों का कॉर्निया ऑक्सीजन से वंचित हो जाता है। इलेक्ट्रॉनिक स्क्रीन, जैसे हमारे कंप्यूटर, टेबलेट्स और स्मार्टफोन से निकालने वाली नीली लाईट सूरज की पराबैंगनी किरणों की तरह हानिकारक हो सकती है। इसके अलावा कंप्यूटर और लैपटॉप के स्क्रीन से निकलने वाली नीली रोशनी से आंखें खराब होने के साथ-साथ मोतियाबिंद जैसी बीमारी तक हो सकती है। अक्सर लोग रात को मेकअप हटाना भूल जाते हैं। सुबह तक मेकअप लगा रहने से आपकों आंखों की पलकों पर इन्फेक्शन हो सकता है।
प्रश्न:- हाईड्रोथैरेपी क्या है?
उत्तर:- पेट से संबंधित रोगों में जल की भूमिका अति आवश्यक होती है। त्वचा रोगों, कब्ज, अनिद्रा, थकान, जोड़ों में के दर्द, मिर्गी, डायबिटीज, शुगर व कई अन्य रोगों में जल चिकित्सा बेहद असरदार होती है। एक और खास बात यह कि इसका कोई दुष्प्रभाव नहीं पड़ता। जैसे की मृगी की बीमारी का इलाज जल चिकित्सा से किया जा सकता है। इसके लिए रोगी के सिर पर 4-5 मिनट तक गीला तौलिया बांधें। पीठ पर धीरे-धीरे पानी की धार छोड़ें। टब या बाल्टी में 5-7 मिनट तक दोनों पैरों को पानी में डुबाकर रखें। शरीर में पानी की कमी न होने दें। इससे रोग को आऱाम मिलेगा।
प्रश्न:- क्या शहद में भीगा आंवला भी सेहत के लिए फायदेमंद होता है?
उत्तर:- आंवला के साथ शहद का सेवन कहीं अधिक स्वास्थ्यवर्धक होता है। साथ शहद में मिलाने से आंवले का खट्टा स्वाद स्वादिष्ट हो जाता है। शहद में आंवला भिगोने से न केवल आंवला कई महीनों तक प्रिजर्व रहता है, बल्कि उसके स्वास्थ्य लाभ और स्वाद भी बढ़ जाता है। आंवले और शहद के संयोजन से आप दोनों के स्वास्थ्य लाभों को फायदा उठा सकते हैं। शहद और आंवले के मिश्रण को बालों में लगाने से बाल सुंदर, मुलायम और कहीं अधिक घने होते है। साथ ही यह उपाय बालों को झड़ने से बचाता है और कमजोर बालों को मजबूत बनाता है। शहद में भीगे आंवले को खाने से लिवर स्वस्थ रहता है, और पीलिया के इलाज में भी मदद मिलती है। इसके अलावा शहद में भीगा आंवला अपच और एसिडिटी का सबसे अच्छा उपाय है। यह आपकी भूख को बढ़ाने के साथ आहार के उचित पाचन में भी मदद करता है। शहद में भीगे आंवला और इसका मिश्रण पीने से कब्ज और बवासीर से राहत मिलती है।
प्रश्न:- हेड इंजरी के भविष्य में भी होते हैं क्या नुकसान?
उत्तर:- हेड इंजरी का सीधा कनेक्शन ब्रेन स्टेम एरिया से है। ये एरिया अन्य भागों की तुलना में ज्यादा संवेदनशील है। हाल ही में नए शोध से पता चला है कि हेड इंजरी होने से अगले 13 सालों में मौत की संभावना बनी रहती है। केस-कंट्रोल स्टडी के अनुसार हेड इन्जवॉयरी के बाद अगले 13 सालों तक उसका खतरा बना रहता है। ग्लासगो के अस्पताल में हेड इन्ज्वॉयरी के लिए एडमिट हुए युवाओं में से 40 प्रतिशत से अधिक युवाओं की 13 साल बाद मौत हो गई।
प्रश्न:- तेज धूप से चेहरे पर झुर्रियों की समस्या के लिए क्या उपचार है?
उत्तर:- गर्मी में तेज धूप ना सिर्फ त्वचा की नमी चुरा लेती है बल्कि इससे चेहरे पर झुर्रियों की समस्या भी बढ़ जाती है। इसीलिए महिलाओं को घर से बाहर निकलने से पहले अच्छी क्वालिटी का सनस्क्रीन इस्तेमाल करने की सलाह दी जाती है। झुर्रियों से त्वचा में सिकुड़न पड़ जाती है तथा आंखों के नीचे काले घेरे बनने की समस्या भी हो जाती है, जिससे आपकी खूबसूरती प्रभावित होती है। ऐसे में आपको जरूरत है अतिरिक्त देखभाल की। खट्टे फल जैसे संतरे, नीबू और अंगूर जैसे फलों का सेवन अधिक से अधिक मात्रा में करें, क्योंकि इनमें विटामिन सी अधिक मात्रा में होता है। विटामिन सी कोलाजन और त्वचा के लिए दूसरे प्रोटीन बनाने में सहायक होता है। इससे आप झुर्रियों की समस्या से बच सकते हैं। झुर्रियों के सफल उपचार के लिए पानी पीना बहुत जरूरी है। दिन में कम से कम 12-13 गिलास पानी पीयें। खीरे के छोटे-छोटे टुकड़ों को पीसकर उसे आंखों के आसपास और झुर्रियों पर मलना चाहिए।
प्रश्न:- गर्मियों में से एब्स को टोन करने के लिये कौंन सी एक्सरसाइज करूं?
उत्तर:- गर्मियों के मौसम में किस तरह की एक्सरसाइज और खान-पान रखा जाए, ये बेहद अहम बात होती है। हील क्रंच कुछ-कुछ पारंपरिक क्रंच जैसी ही होती हैं, लेकिन उससे अधिक प्रभावी होती हैं। साथ ही वर्टिकल लेग क्रंच शरीर को लचीला बनाने के साथ-साथ एब्स बनाने में भी काफी मदद करते हैं। इसके अलावा बॉल क्रंच, प्लांक एक्सरसाइज तथा लौंग आर्म क्रंच व साइकलिंग भी गर्मियों में एब्स को टोन करने की बेहतरीन एक्सरसाइज हैं। इसके साथ खान-पान का ध्यान रखना भी उतना ही जरूरी होता है।
प्रश्न:- प्रीक्लेम्पसिया क्या है?
उत्तर:- गर्भावस्था के 20वें हफ्ते में होने वाली उच्च रक्तचाप की समस्या को प्रीक्लेम्पसिया कहते हैं। ये सामान्य तौर पर होने वाले उच्च रक्तचाप से बिल्कुल अलग है जो प्रसव के बाद अपने आप ठीक हो जाता है। प्रीक्लेम्पसिया के कारणों का पता लगाने में अब तक विशेषज्ञ सफल नहीं हुए हैं। लेकिन एक आम धारणा है कि प्लासेंटा में रक्त का उचित तरीके से संचालन नहीं होना प्रीक्लेम्पसिया की स्थिती है। प्रीक्लेम्पसिया की स्थिती में अधिक से अधिक बेड रेस्ट लें। गर्भावस्था में महिलाओं का वजन बढ़ जाता है जिससे रक्तचाप भी बढ़ता है। इसलिए गर्भावस्था में वजन प्रबंधित करके प्रीक्लेम्पसिया से बचा जा सकता है। वजन की हर पंद्रह दिन में जांच करते रहे। गर्भावस्था में यूरीन कभी ना रोकें। हमेशा अधिक से अधिक पानी पिएं और समय-समय पर यूरीन जाकर मूत्राशय को खाली करत रहें।
प्रश्न:- मोजे पहनकर सोने से क्या फायदा होता है?
उत्तर:- मोजे पहनकर सोने का सबसे बड़ा फायदा है कि एड़ियां नहीं फटती। पैर मुलायम रहते हैं। जबकि आपने एक चीज नोटिस की होगी कि जब आप सोकर उठते हैं तो पैर बहुत ज्यादा ड्राई रहते हैं। पैरों को इस तरह से ड्राई होने से मोजे बचाते हैं। सोने के बाद पैर काफी ठंडे हो जाते हैं। ये अधिकतर लोगों में होते हैं। ऐसे में अगर आपको ये समस्या है तो मोजे पहनकर सोएं। इससे आपके पैर गर्म रहेंगे। कई लोगों को पैरों से काफी पसीना आता है। इस स्थिति को हाइपरहाइड्रोसिस कहते हैं। अगर आप पैरों से अत्यधिक पसीना आने की समस्या से ग्रस्त हैं तो मोजा पहनकर सोना आपके लिए फायदेमंद होगा।
प्रश्न:- रोजेशिया क्या है?
उत्तर:- रोजेशिया एक बहुत ही सामान्य बीमारी है जो गर्मियों में अधिक देखने को मिल जाती है। ये एक तरह की त्वचा की बीमारी है जो 30 से अधिक उम्र के लोगों में ज्यादा देखने को मिलती है। ये गोरे लोगों को अधिक होती है। ये पिंपल की तरह होता है लेकिन ये पिंपल से अलग है। इसमें चेहार लाल हो जाता है। आंखें सूज जाती हैं। रोजेशिया के कारणों का पता तो अब तक डॉक्टर नहीं लगा पाएं है। उनका मानना है कि किसी भी तरह से किसी भी चीज से एलर्जी रोजेशिया का कारण बनती है। लेकिन इतना तय है कि रोजेशिया बैक्टिरीया के कारण नहीं होते। ये गोरे लोगों को अधिक होते हैं। इसके अधिक होने पर कई बार मेडिकल टेस्ट भी कराने पड़ते हैं। रोजेशिया में अल्कोहल का सेवन करने से बचना चाहिए, इससे समस्या बढ़ सकती है।
प्रश्न:- ओसीडी के लिए हर्ब्स का सेवन कैसे करें?
उत्तर:- हालांकि कुछ दवाओं से दिमाग की कोशिकाओं में सेरोटोनिन की मात्रा बढ़ाकर ओसीडी को दूर किया जा सकता हैं। लेकिन आप कुछ हर्ब्स की मदद से भी इसका उपचार कर सकते हैं। जैसे बर्गमोट, दक्षिणी इटली सिट्रिक पेड़ से उत्पादित होने वाला छोटी सी, नींबू की तरह का फल है। आरोमाथेरेपिस्ट इस फल के छिलके के तेल का उपयोग चिंता और अवसाद के इलाज के लिए करते हैं। दक्षिणी प्रशांत क्षेत्र में पाया जाना वाला औषधीय पौधा कावा बेचैनी से पीड़ित लोगों के लिए काफी उपयोगी साबित हो सकता है। सेंट जॉन पौधा उल्लेखनीय विरोधी अवसाद और मूड उठाने के गुणों के साथ एक जड़ी बूटी है। इस संयंत्र इसका वैज्ञानिक नाम बसंत से जाना जाता है।
प्रश्न:- अंबिलिकल कॉर्ड क्या है?
उत्तर:- अंबिलिकल कॉर्ड शिसु की नाभिरज्जु है। वर्तमान समय में कोर्ड ब्लड स्टेम सेल्स का इस्तेमाल 80 से भी ज्यादा बीमारियां ठीक करने हेतु किया जा रहा है। स्टेल सेल प्रत्यारोपण हेतु डाक्टर बोर्न मैरो का नहीं वरन कोर्ड ब्लड का इस्तेमाल करने को प्राथमिकता दे रहे हैं। इसके अलावा कोर्ड ब्लड स्टेम सेल का उपयोग स्पाइनल इंजुरी, अल्झाइमर, हृदयाघात, डायबिटीज, हृदय सम्बंधी बीमारियों के लिए भी हो रहा है। यदि आप अपने शिशु के प्रति सजग हैं और चाहते हैं कि उसके जीवन के सुखद एवं स्वस्थ बनाएं तो इसके पैदा होते हुए नाभिरज्जु का सुरक्षित रखें। यकीन मानें इसमें अकेले इतनी ताकत होती है कि ये आपके शिशु को ताउम्र किसी भी किस्म की शारीरिक समस्याओं से दूर रख सकता है। स्टेम सेल का बेहतरीन स्रोत अम्बलिकल कोर्ड ब्लड है
प्रश्न:- क्या घरेलू उपायों द्वारा फूड एलर्जी का बचाव हो सकता है?
उत्तर:- आमतौर पर गंभीर खाद्य एलर्जी के मामले में डॉक्टर से परामर्श करने की सलाह दी जाती है, लेकिन इससे बचने घरेलू उपचार प्रभावी साबित हो सकते हैं। और तो और इन्हें उपयोग करना भी बेहद आसान होता है। केला लाभकारी पोषक तत्वों से भरपूर होने के साथ फूड से होने वाली एलर्जी के लक्षणों को कम करने में भी बहुत अच्छा होता है। प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर होने से भी खाद्य पदार्थों से एलर्जी होने लगती है। रक्षा प्रणाली में खराबी कुछ प्रोटीन की गलत ढंग से प्रतिक्रिया के कारण होती है। प्रतिरक्षा प्रणाली के स्वास्थ्य में प्रभावी ढंग से सुधार करने के लिए विटामिन सी और फलों और सब्जियों में मौजूद अन्य लाभकारी विटामिन और मिनरल का प्रयोग किया जा सकता है। लंबे समय से विभिन्न खाद्य पदार्थो से होने वाली एलर्जी के लिए इसका प्रयोग किया जाता है। यह पेट की शक्ति और प्रतिरोधकता में सुधार करने में सहायक होता है।
प्रश्न:- कान का संक्रमण कैसे होता है?
उत्तर:- कान में दर्द संक्रमण की वजह से होता है। कान का संक्रमण बैक्टीरिया और वायरस के कारण होता है। कान का दर्द बच्चों और नवजातों में आम है। कई बार ये आनुवांशिक और पोषक-तत्वों की कमी से होता है। कान के दर्द का उपचार घरेलू नुस्खों से भी हो सकता है। खाली समय में कान में अदरक के रस की दो बूंदें डालकर लेट जाएं। कान के दर्द और सूजन में आराम मिलेगा। जैतून के तेल की बोतल गर्म पानी में रखें। जब तेल हल्का गुनगुना गर्म हो जाए तो उसकी 2-3 बूँदें कान में डाल लें औऱ कान को रुईं के गोले से बंद कर लें। कान के दर्द में राहत मिलेगी। नाक हमेशा साफ कर के रखें जिससे नाक की नली हमेशा साफ रहे और पानी जाने पर भी उसमें पानी ना जमे।
प्रश्न:- स्लीप पैरालिसिस क्या होता है और इसके लक्षण कैसे होते हैं?
उत्तर:- विज्ञान के अनुसार यह जागी और सोई स्थिति के बीच की अवस्था होती है, जिसमें कुछ छणों से लेकर कुछ मिनटों तक व्यक्ति हिलने-डुलने के साथ-साथ बोलने की शक्ति भी खो देता है। इसके लक्षणों में कानों में किसी चीज़ के तेजी से गुजरने की ध्वनि आना, किसी के साथ होने पर भी खुद को बिल्कुल अकेले महसूस करना, सांस लेने में समस्या होना तथा कान में फुसफुसाने की आवाज़ का आना आदि होते हैं। यह समस्या आमतौर पर सामान्य उपायों से ही ठीक हो जाती है। लेकिन कुछ गंभीर मामलों में दवाइयों या इलाज की जरूरत भी पड़ सकती है।
प्रश्न:- अनार का जूस के क्या फायदे हैं?
उत्तर:- अनार का जूस कभी खाली पेट नहीं पीना चाहिए। लेकिन इसका जूस शरीर के लिए काफी फायदेमंद होता है। अनार विटामिन्स और फोलिक एसिड से भरपूर होता है। इसका जूस रक्त के संचालन में मदद करता है। अगर आपके शरीर में आयरन की कमी है तो अनार का जूस आपके लिए काफी फायदेमंद होगा। साथ में ये प्रोस्टेट, लंग और ब्रेस्ट कैंसर से भी बचाता है।
प्रश्न:- प्रसव के बाद घी का इस्तेमाल लाभदायक है कि नहीं?
उत्तर:- प्रसव के बाद महिलाओं को अपनी सेहत का ध्यान रखना काफी जरूरी हो जाता है जिसके लिए डॉक्टर कई सारी हिदायत देते हैं। ऐसे में हेल्दी खाने के लिए महिलाएं घी का उपयोग करती हैं। गाय का शुद्ध देशी घी स्वास्थ्य के लिए काफी फायदेमंद होता है। घी पीने से घाव जल्दी भरते हैं तथा अधिकाँश दादियों का ऐसा विश्वास है कि जब दूध पिलाने वाली माताओं को घी खिलाया जाता है तो दूध अच्छी गुणवत्ता का और अधिक मात्रा में आता है।
प्रश्न:- बालों के झड़ने का आयुर्वेद मे कोई उपचार होता है?
उत्तर:- आयुर्वेदिक तेलों से बालों से मसाज कर, आप अपने बालों को खूबसूरत बना सकती है।आयुर्वेदिक तेल सिर में जा कर बालों की जड़ों को मजबूत करने का काम करते है। गुडहल का तेल कई समय से प्रयोग होता आ रहा है। इस तेल को लगाने से बाल काले और सुंदर हो जाते हैं। साथ ही यह तेल असमय सफेद बालों को बचाता है और उसमें ब्लैक शाइन लाता है। इसके अलावा गुडहल का तेल बालों को पतला होने और झड़ने से भी रोकता है।बालों के झड़ने, असमय सफेद होने और बालों की अन्य समस्याओं के लिए आंवले का तेल बहुत फायदेमंद होता है। यह बालों के लिए सबसे अच्छा आयुर्वेदिक उपचार है। आंवला तेल में मौजूद विटामिन सी और आयरन, कैल्शियम, फॉस्फोरस जैसे पोषक तत्व बालों और स्कैल्प को हेल्दी रखने में मदद करते है। पहले की महिलाएं आंवला को एक प्राकृतिक डाई के रूप में प्रयोग करती थी। आंवले का तेल सफेद हो रहे बालों को काला करने में मदद करता है।आयुर्वेद में बालों के लिए भृंगराज को बहुत उपयोगी माना जाता है। इसे बालों का राजा कहा जाता है। आपके बाल झड़ रहे हो या आप रूसी की समस्या से निजात पाने चाहते हैं तो भृंगराज का इस्तेमाल आपके लिए अचूक औषधि साबित होगा। रोजाना भृंगराज तेल से बालों में मालिश करने से बाल काले और घने होते हैं। इससे बालों का झड़ना बंद हो जाता है। इसे लगाने से बालों में रुसी भी कम होती है। यह सिर को ठंडक भी पहुंचाता है।
प्रश्न:- बड़े बच्चों की बिस्तर गीला करने की आदत से कैसे निजात पाएं?
उत्तर:- अगर बच्चा 5 से 7 साल की उम्र के बाद भी बिस्तार पर पेशाब करता है तो उसे डॉक्टर को दिखाना चाहिए। कुछ कमियां जैसे टॉयलेट ट्रेनिंग के अभाव या बार-बार पेशाब, या बहुत ज्यादा मात्रा में पेशाब करने के कारण ऐसा होता है। हालांकि डॉक्टर से बातचीत पर पता चलता कि वह पेशाब की मात्रा नॉर्मल से बहुत ज्यादा है। बहुत से ऐसे लक्षण होते हैं जो हमें पता नहीं चलते लेकिन डॉक्टर से बातचीत से पता चलता है। इसलिए इसे सिर्फ बेड वेटिंग समझकर छोड़ न दें बल्कि डॉक्टर से संपर्क करें। साथ ही इस बात का भी ध्यान रखें कि बेड वेटिंग के लिए बच्चे को डॉटें नहीं बल्कि समझें कि यह एक अंदुरूनी समस्या है।
प्रश्न:- वजन कम करने के लिए कौन से योगासन लाभदायक होते है ?
उत्तर:- वर्तमान में केवल भारत ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में मोटापा एक समस्या की तरह बनता जा रहा है। मोटापे के कारण ही ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, थायराइड आदि खतरनाक और जानलेवा बीमारियां आसानी से हो रही हैं। इसलिए मोटापे पर जल्द से जल्द नियंत्रण करने की आवश्यकता है। मोटापा कम करने के लिए योग बहुत ही कारगर और प्रभावी तरीका है। हस्तसुंडिकासन मोटापा कम करने के लिए करें, यह बच्चों, बड़ों और बुजुर्गों के लिए बहुत अधिक फायदेमंद है। लेकिन अगर आपको स्पाइन इंजरी हो या इससे संबंधित दूसरी समस्या हो तो चिकित्सक से सलाह लेकर ही ये आसन करें। क्योंकि इसका सबसे अधिक असर पेट और रीढ़ की हड्डी पर ही पड़ता है। इस क्रिया को करने के लिए पैरों के बीच 2 से 2.5 फिट का गैप कीजिए, हाथों को सामने की तरफ ले जायें, फिर सांस लेंगे जैसे हाथी अपनी सूंढ़ के अंदर पानी भरता है। ऊपर की तरफ उठते वक्त सांस अंदर लीजिए और आगे की तरफ झुकते वक्त सांस बाहर निकालें। धीरे-धीरे इस आसन को करें।
प्रश्न:- महिलाओं को लंबे लड़के ज्यादा पसंद क्यों आते हैं?
उत्तर:- लम्बे पुरुष अकसर दूसरों पर अपना प्रभुत्व बनाए रखने में कामयाब होते हैं। दरअसल यह सारा कमाल आत्मविश्वास का होता है। लम्बे होने के कारण उनमें आत्मविश्वास की जरा भी कमी नहीं होती। नतीजतन अपने दोस्तों से लेकर आफिस के ग्रुप तक में उनका विशेष प्रभुत्व नजर आता है। महिलाओं को यही प्रभुत्व खासा पसंद आता है। असल में कहना यह चाहिए कि महिलाएं खुद पर पुरुषों का प्रभुत्व पंसद करती हैं। लेकिन महिलाएं उसी पुरुष के प्रभुत्व को स्वीकार करती हैं जो दूसरों पर दबदबा कायम करने में सफल होते हैं।
प्रश्न:- क्या कच्चा पपीता इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाता है?
उत्तर:- कच्चा पपीता लीवर के लिए काफी फायदेमंद होता है। यह लीवर को शक्ति प्रदान करता है और पीलिया आदि में लीवर के कमज़ोर पड़ जाने की स्थिति में इसके सेवन से या कच्चे पपीते की सब्जी बनाकर खाने से पीलिया रोगियों को काफी फायदा होता है। जी हां कच्चे पपीते और इसके बीजों में काफी मात्रा में विटामिन ‘ए’, ‘सी’ और ‘ई’ होता है, जो शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली अर्थात इम्यून सिस्टम को मजबूत बनता है। कच्चा पपीता सर्दी और जुखाम के साथ कई अन्य प्रकार के इंफेक्शन से भी लड़ने में मददगार साबित होता है और मूत्र संबंधी समस्याओं में भी फायदा पहुंचा सकता है। यह बैक्टीरिया बढ़ने से रोकता है।
प्रश्न:- हीमोफीलिया ए क्या है, इसके क्या लक्षण होते है?
उत्तर:- हीमोफीलिया बीमारी दो तरह की होती है हीमोफीलिया ए और हीमोफीलिया बी। यह एक अनुवाशिंक बीमारी होती है। इस बीमारी में शरीर में रक्त के थक्के बनने की प्रक्रिया धीमी हो जाती है, जिसके कारण, चोट लगने पर रक्त जम नहीं पाता और वह असामान्य रूप से बहता रहता है। इस बीमारी पर तब तक लोगों का ध्यान नहीं जाता, जब तक कि उन्हें किसी कारण से गंभीर चोट न लगे और उनमें रक्त का बहना न रुकें।यदि कोई व्यक्ति हीमोफिलिया A का शिकार है तो उसके मांसपेशियों और जोड़ों में रक्तस्राव हो सकता है और साथ ही कोई हरकत करने पर दर्द भी महसूस हो सकता है। कभी-कभी सूजन और सूजन वाली जगह को छूने पर गर्माहट का भी एहसास हो सकता है। हीमोफिलिया A से पीड़ित रोगी के दिमाग में भी रक्तस्त्राव है। बिना किसी कारण के, नाक से खून निकलना, मूत्र या मल में खून आना, शरीर में चोट के बड़े निशान का बनना आदि
हीमोफीलिया ए के लक्षण होते है। चोट लगने की स्थिति में खून जमाने और घाव भरने के लिए मुंह से खाने वाली दवाएं और चोट वाली जगह पर लगाने की दवाएं आदि भी दी जाती हैं। मांसपेशियों और हड्डियों की मजबूती के लिए नियमित व्यायाम करें। यह आपकी सामान्य तंदुरूस्ती के लिए भी जरूरी है और आपके जोड़ों को भी स्वस्थ रखने और उनमें इंटर्नल ब्लीडिंग से बचाव में लाभदायक होगा।अगर आपका बच्चा बाहर खेल रहा है या साइकल चलाना सीख रहा है अथवा चला रहा है तो आपको सावधानी बरतने की जरूरत है। खेलते समय हेलमेट, एल्बो और नी पैड्स एवं प्रोटेक्टिव जूते पहनाकर रखें।
प्रश्न:- टीवी देखने से आंखें खराब हो जाती हैं क्या?
उत्तर:- नजदीक से बैठकर टीवी देखने से सिर में दर्द हो सकता है। इतना ही नहीं आखों को सूखेपन का एहसास होने लगता है। नतीजतन आंखों में खुजली भी हो सकती है। असल में लगातार टीवी देखने से आंखें खराब नहीं होतीं। हालांकि आंखों से पानी रिस सकता है। टीवी देखते हुए बीच बीच में ब्रेक अवश्य लें।
कम रोशनी में टीवी देखना हानिकारक भी नहीं होता है।अकसर लोग कहते हैं कि कम रोशनी में पढ़ने से आंखें खराब हो जाती हैं। जबकि इसका सच्चाई से कोई लेना देना नहीं है। ठीक इसी तरह कम रोशनी में टीवी देखने से आंखें पर कोई खास असर नहीं पड़ता। क्योंकि हमारी आंखें रोशनी अनुसार खुद ही सामंजस्य बैठा लेती है।
प्रश्न:- खसरा में लहसुन फायदेमंद है क्या?
उत्तर:- खसरा एक वायरल बीमारी है जिस कारण ये फैलता है। अगर किसी एक बच्चे को खसरा है तो अन्य बच्चों को उससे दूर रखें। खसरा में हलसुन बहुत ही प्रभावकारी माना जाता है। इस शहद के साथ पीसकर खसरे से पीड़ित व्यक्ति को दें। फायदा मिलेगा। नीम की पत्तियों में उसे सुलाएं और नीम की पत्तियों के पानी से उसे नहलाएं। खसरा एक हफ्ते में ठीक हो जाएगा और घर में फैलेगा भी नहीं।
प्रश्न:- सफेद बाल के लिए क्या उपाय करूं?
उत्तर:- बालों का असमय सफेद होना एक बड़ी समस्या बन चुकी है। इसके लिए कई लोग कलर का इस्तेमाल करते हैं। हालांकि कलर बालों को जड़ से कमजोर बना सकता है। कई ऐसे घरेलू उपाय हैं, जो सफेद होते बालों की समस्या को दूर कर सकते हैं। आंवले को मेंहदी में मिलाकर इसके घोल से बालों की कंडिशनिंग करते रहें। चाहे तो आंवले को बारीक काट लें और गर्म नारियल तेल में मिलाकर सिर पर लगाएं। या फिर ब्लैक टी और कॉफी का इस्तेमाल करें। सफेद हो चुके बालों को अगर आप ब्लैक टी या कॉफी के अर्क से धोएंगें तो आपके सफेद होते बाल दोबारा से काले होने लगेगें। ऐसा आप दो दिन में एक बार जरूर करें।
प्रश्न:- आंखों के नीचे होने वाले काले घेरों के कैसे छुटकारा मिलेगा। उपाए बताएं?
उत्तर:- वॉटर रिटेंशन भी अंडर आई पफीनेस का एक बड़ा कारण होता है, जो इशारा करता है कि पाचन तंत्र तक जरूरत जितना पानी नहीं पहुंचा रहा है। इसलिए दिन में खूब पानी पियें और इस समस्या को दूर करें। इसके अलावा कैमोमाइल या ग्रीन टी बैग्स को आंखों पर रखने से अंडर आई पफनेस में लाभ होता है। टी बैग्स को ठंडे पानी में डुबो कर बंद आंखों पर रखें। यदी चाय पत्ती खुली हो, तो बारीक कपडे में लपेट कर ठंडे पानी में डबो कर निचोडें और आंखों के ऊपर 15 मिनट के लिए रखें। चाय में मौजूद टैनिन, कैफीन और ठंडक से सूजन कम होती है साथ ही काले घेरे हों तो वे भी कम हो जाते हैं।
प्रश्न:- नकसीर की आयुर्वेदिक चिकित्सा क्या हैं?
उत्तर:- गर्मी के दिनों में नाक से खून बहने की समस्या हममें से कई लोगों को परेशान करती है। इस समस्या को नकसीर के नाम से भी जाना जाता है। फिटकरी के पाउडर को गाय के घी के साथ मिलाकर नोज़ ड्रॉप्स की तरह नाक में डालने से नकसीर को रोकने में सहायता मिलती है। थोडा सा कपूर, धनिये के पत्तों के रस में मिला दें और इस मिश्रण को नाक में डालें। इस मिश्रण को नाक में डालने से नाक से खून बहना जल्दी बंद हो जाता है! 20 ग्राम आंवले को पूरी रात पानी में सोख कर रखें, और सुबह उस पानी को छान कर पी लें और आमला की लेई को अपने माथे और नाक के आसपास मल दें। इससे भी नाक का ख़ून रुकने में आपको काफी मदद मिलेगी। लाल चन्दन, मुलेठी, और नाग केसर को समान मात्रा में मिलाकर चूरा बना लें और उसमे से 3 ग्राम चूरा दूध के साथ लेने से भी आपको नकसीर में लाभ मिलेगा।
प्रश्न:- पीठ दर्द से बचने के क्या उपाय है ?
उत्तर:- पीठ में दर्द कई कारणों से होता है, कुछ बीमारियां और इसके लिए जिम्मेदार होती हैं लेकिन कुछ मामलों में हम ही इसके लिए जिम्मेदार होते हैं। आजकल युवाओं में इसकी समस्या अधिक देखने को मिल रही है क्योंकि डेस्क जॉब करने वालों की संख्या बहुत अधिक हो रही है और घंटों एक ही जगह बैठकर काम करना लोगों की आदत बनता जा रहा है। लेकिन पीठ दर्द के इलाज से बेहतर है इसकी रोकथाम की जाये। इसके लिए सबसे अधिक जरूरी है बैठने के दौरान पोश्चर का ध्यान रखना। इसके अलावा अगर आप नियमित व्यायाम और योग करते हैं तो इससे मांसपेशियां मजबूत होती हैं और पीठ दर्द की समस्या नहीं होती है। लेकिन अगर कोई दर्द लंबे समय तक बना रहता है तो यह ठीक बात नहीं है, क्योंकि लंबे समय तक बने रहने वाले दर्द को ठीक करना मुश्किल होता है। इसलिए कोशिश करें कि पीठ दर्द, कमरदर्द, गर्दनदर्द होने से बचाने की कोशिश की जानी चाहिए।
प्रश्न:- मसल्स के लिए कितना प्रभावी है स्टेरॉयड?
उत्तर:- सिक्स पैक ऐब्स और मसल्स बनाने का शौक आज के हर युवा का शौक है। इसी शौक को पूरा करने के लिए यूथ जिम में घंटों पसीना बहाने के साथ स्टेरॉयड का इस्तेमाल कर लेते हैं। लेकिन ये गलत है। स्टेरॉयड से पुरुष नपुसंक बन जाते हैं। स्टेरॉयड सबसे ज्यादा बुरा असर श्वेत रक्त कणिकाओं पर पड़ता है, जिससे प्रतिरोधक क्षमता खत्म होने लगती है औऱ आपका शरीर अंदर ही अंदर कमजोर हो जाता है जो आपको अंत में केवल बहुत सारी बीमारियां देता है।
प्रश्न:- दूध फट जाने पर क्या करुं?
उत्तर:- फटे दूध के पानी का इस्तेमाल आप कई चीजों में कर सकते हैं। इससे आटा गूंथ सकते हैं। ग्रेवी को गाढ़ा करने के लिए उपयोग कर सकते हैं। फटे दूध का पानी का फ्लेवर काफी लाइट होता है जिसे उपमा में मिलाने से उपमा का स्वाद और भी बेहतर हो जाता है। उपमा में टेस्ट लाने के लिये टमाटर या दही मिलाने की जगह फटे दूध का पानी मिलाने पर ज्यादा बेहतर स्वाद आता है। आप सूप बनाने के लिये भी इस पानी का इस्तेमाल कर सकती हैं।
डिस्क्लेमर: स्टोरी के टिप्स और सुझाव सामान्य जानकारी के लिए हैं।इन्हें किसी डॉक्टर या मेडिकल प्रोफेशनल की सलाह के तौर पर नहीं लें।बीमारी या संक्रमण के लक्षणों की स्थिति में डॉक्टर की सलाह जरूर लें।

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