विषम ज्वर क्या है ?
परिचय :
वह बुखार जो कभी भी आ जाता है जैसे कभी रात को सोने के समय तो कभी दिन में बैठे-बैठे ही, कभी एक दिन छोड़कर तो कभी दो-तीन बाद, कभी हल्का तो कभी बहुत तेज, कभी इस बुखार में ठंड लगती है और कभी गर्मी लगने लगती है तो उसे विषम बुखार कहते हैं।
उपचार :
* इन्द्रजौ, पटोल के पत्ते और कुटकी को पीसकर काढ़ा बना लें। इस काढ़े को पीने से हर प्रकार के विषम बुखार दूर हो जाता है।
* नीम, पटोल के पत्ते, दाख, नागरमोथा, इन्द्रजौ और त्रिफला को मिलाकर काढ़ा बना लें। इस काढ़े को पीने से विषम बुखार मिट जाता है।
* कंघी की जड़ और सोंठ को मिलाकर काढ़ा बना लें। इसे पीने से शीतकम्प बुखार, दाह (जलन) यानी शरीर में जलन पैदा होने वाले और विषम बुखार 2-3 दिन में ही समाप्त हो जाते हैं।
* तुलसी के पत्तों के रस में कालीमिर्च का चूर्ण डालकर पीने से विषम बुखार में लाभ होता है।
* पटोल के पत्तें, हरड़, नागरमोथा, कुटकी, चिरायता, मुलहठी और गिलोय को मिलाकर काढ़ा बनाकर पीने से सभी प्रकार के विषम बुखार मिट जाते हैं और खांसी और अरूचि (भूख का न लगना) भी समाप्त हो जाता है।
* सोंठ, नागरमोथा, गुरूच, चिरायता, दशमूल (बेल, श्योनाक, खंभारी, पाढ़ल, अरलू, सरियवन, पिठवन, बड़ी कटेरी, छोटी कटेरी और गिलोय) को बराबर मात्रा में लेकर आधा लीटर पानी में पकायें। जब पानी 100 मिलीलीटर शेष रह जाए तब रोगी को पिलाने से विषम बुखार में लाभ होता है।
* पीपल का चूर्ण लगभग एक ग्राम के चौथाई भाग से कम को शहद में मिलाकर सुबह और शाम चाटने से विषम बुखार में आराम मिलता है।
Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं. हमारी ये पोस्ट इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.

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