राव सेतल सिंह राठौड़ ( प्रेरक प्रसंग )
साल 1492, मारवाड़ का राणा "राव सेतल सिंह राठौड़"
:- घुडलो घूमलो जी घुमलो:-
अफगानी जिहादी मीर घुड़ला खान ने मेड़ता से 140 लड़कियों का अपहरण कर लिया, मेड़ता की लड़किया उस दिन गणगौर पूजने गाँव से बाहर मंदिर गई थी।
जब "राव सेतलसिंह राठौड़" ने इस अपहरण के बारे में सुना तो उन्होंने तत्काल अपने सेनिको के साथ उन 140 लड़कियों को बचाने के लिए रवाना हो गए, कोसाना नाम की जगह के पास "राव सेतल सिंह राठौड़" ओर मीर घुड़ला खान का युद्ध हुआ, आपने सामने के हुए भयंकर युद्ध मे "राव सेतल सिंह राठौड़ ने घुड़ला खान की गर्दन काट दी लेकिन सेतल सिंह खुद भी बुरी तरह घायल हो गए, युद्ध जितने के बाद "राव सेतल सिंह" ने अपनी निजी सुरक्षा में उन लड़कियों को मेड़ता पहुँचाया, राव सेतल सिंह के मिलीट्री कमाण्डर "सारंग खिंची" ने घुडला खान के सर में कई छेद किये और उस सर को उन 140 लड़कियों को दे दिया, लड़कियों ने उस कटे सर् को लेकर पूरे गाँव मे घुमाया ओर गीत गाया " म्हारो तेल बळ घी घाल, घुडलो घूम लो जी घूम लो" ये गीत गाते गाते लडकिया घायल राव सेतल सिंह के पास धन्यवाद कहने पहुचीं, घायल सेतल सिंह ने उन लड़कियों को कुछ सोने के सिक्के उपहार में दिए और उसी दिन उस महान राजपूत ने अपने प्राण त्याग दिए ओर ये दिन था 1 मार्च 1492,
राजस्थान में गणगौर के त्यौहार पर लडकिया आज भी ये गीत गाती है और अनजाने में (क्योकि इस घटना को पढ़ाया ही नही गया) "राव सेतल सिंह राठौड़" को धन्यवाद करती है और संदेश देती है की अगर किसी घुड़ला खान ने उनका अपहरण करने की कोशिश की तो उनकी गर्दन काटने "राव सेतल सिंह राठौड़" फिर आएंगे।
ये गीत "राव सेतल सिंह राठौड़" को धन्यवाद गीत है

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