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4/10/2021

नासा : मंगल ग्रह पर खास मिशन पहली बार उड़ान भरने को तैयार हेलिकॉप्टर,

   
                           
   

नासामंगल ग्रह पर खास मिशन पहली बार उड़ान भरने को तैयार हे लिकॉप्टर,


इंजीन्यूटी हेलिकॉप्टर को मार्स पर्सेवरेंस रोवर के पेट के नीचे कवर करके लाल ग्रह पर भेजा गया था। ताकि मंगल की सर्द भरी रातों से उसे बचाया जा सके

इंजीन्यूटी हेलिकॉप्टर मंगल ग्रह पर 11 अप्रैल को उड़ान भरेगा


Updated Sat, 10 Apr 2021 10:20 AM





मंगल ग्रह पर जीवन तलाशने के अभियान में नासा एक आयाम और जोड़ने जा रहा है। फरवरी में नासा ने पर्सेवरेंस रोवर को मंगल ग्रह की सतह पर उतार कर इतिहास रच दिया था। अब इंजीन्यूटी हेलिकॉप्टर मंगल ग्रह पर उड़ने को तैयार है। यह 11 अप्रैल को उड़ान भरेगा।


इंजीन्यूटी हेलिकॉप्टर के जरिए नासा इतिहास रचने जा रहा है। इस पहले पर्सेवरेंस रोवर ने मंगल की सतह पर अच्छा काम किया और रोवर ने डेटा और तस्वीरों के जरिए बहुमूल्य जानकारी उपलब्ध कराई है।


क्या है इंजीन्यूटी हेलिकॉप्टर और कैसे पहुंचा मंगल ग्रह पर 


इंजीन्यूटी हेलिकॉप्टर को मार्स पर्सेवरेंस रोवर के पेट के नीचे कवर करके लाल ग्रह पर भेजा गया था। यह कंगारुओं के बच्चों की तरह रोवर के पेट में छिपा था। मंगल ग्रह की रात बेहद सर्द भरी होती है और सतह पर तापमान -130°F (-90°C) तक गिर जाता है, इसलिए इसे वहां काफी संभाल के रखा था। नासा ने बताया था कि इंजीन्यूटी मार्स हेलिकॉप्टर ने लाल ग्रह मंगल पर अपनी पहली सर्द रात काफी सफलतापूर्वक काटी, जो काफी बड़ी सफलता है। 


इंजीन्यूटी हेलिकॉप्टर ने अप्रैल के पहले हफ्ते में निकलना शुरू किया और चार अप्रैल तक इसने मंगल ग्रह की सतह को छू लिया था। साथ ही बिना किसी सुरक्षा के मंगल पर पहली बार सर्द रात काटी। इसमें सोलर पैनल लगे हैं जिससे यह चार्ज होगा और उड़ान भरेगा। हालांकि यह एयरक्राफ्ट आठ अप्रैल को उड़ने वाला था लेकिन अब यह 11 अप्रैल को उड़ेगा।  


इंजीन्यूटी हेलिकॉप्टर की उड़ान इतनी आसान नहीं होगी होगी क्योंकि मंगल ग्रह का वातावरण पृथ्वी से बहुत अलग होता है। मंगल की हवा पृथ्वी की हवा से काफी हल्की होती है। इसलिए हेलिकॉप्टर को उड़ने में बहुत समस्या हो सकती है। हालांकि नासा ने इस परेशानी से निपटने के लिए पूरे इंतजाम किए हैं। 


अखिरकार क्यों खास है इंजीन्यूटी हेलिकॉप्टर की उड़ान 


ऐसा दुनिया में आज तक नहीं हुआ है कि पृथ्वी के अलावा किसी और ग्रह पर हेलिकॉप्टर उड़ा हो। वहीं मंगल की सतह से उड़ने का मतलब है कि पृथ्वी पर 30,000 मीटर की ऊंचाई पर उड़ रहे हों। यह काफी ऐतिहासिक उपलब्धि है।

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