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8/23/2021

Mahabharat: विदुर के बारेमें जाने

   
                           
   

Mahabharat: विदुर के बारेमें जाने




महाभारत में विदुर की स्थिति महत्त्वपूर्ण मानी जाती है। विदुर अपने व्यक्तित्व में प्रेरणाप्रद और मानवीय व्यवहार रखते  हैं। इनका एक-एक शब्द महाभारत में राज्य, राजा और प्रजा का कुशल संचालन के लिए उपदेश भी देता है। महात्मा विदुर युद्ध टालने के लिए धृतराष्ट्र को अधर्म का साथ छोड़ने के लिए उपदेश करते हैं।लेकिन विदुर के उपदेश धृतराष्ट्र का हृदय परिवर्तन नहीं कर पाते और जिसका परिणाम महाभारत के युद्ध के रूप में सामने आता है। लेकिन इसके लिए हम विदुरजी की नीति को विफल नहीं ठहरा सकते। उनका प्रत्येक उपदेश काल की कसौटी पर भली-भाँति जाँचा-परखा गया है।


आइये शुरू करते है पहले उपदेश से


कार्य सिद्धि की दृष्टि से मनुष्य तीन प्रकार के होते हैं, उत्तम, मध्यम, और अधम! जो कार्य को श्रम के डर से पूरा ही नहीं करते या प्रारम्भ ही नहीं करते, वे आलसी अधम कहलाते हैं। जो उत्साह में कार्य तो प्रारम्भ कर देते हैं, लेकिन श्रम के भय से अथवा फल की आशंका से कार्य को बीच में ही छोड़ देते हैं अथवा शिथिलतापूर्वक करते रहते हैं, वे मध्यम श्रेणी के और जो पुरुष उत्साहपूर्वक कार्य प्रारम्भ करते हैं और पूरी शक्ति से उसे सम्पन्न करते हैं, वे उत्तम पुरुष कहलाते हैं।


सुखी मनुष्य वही है, जो रोग रहित रहे, उस पर किसी का कोई ऋण न हो, उसे परदेस में न रहना पड़े, मेलजोल अच्छे लोगों के साथ हो। धर्मपूर्वक अपनी वृत्ति से जीविका चलाता हो और निडर रहता हो। यही मनुष्य के सुख के आधार हैं।

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