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10/05/2020

बुजुर्गों को सम्मान देना चाहिए

   
                           
   



*छोटे ने कहा," भैया, दादी कई बार कह चुकी हैं कभी मुझे भी साथ होटल ले जाया करो."*
*गौरव बोला, " ले तो जायें पर चार लोगों के खाने पर कितना खर्च होगा.* 
*याद है, पिछली बार जब हम तीनों ने डिनर लिया था, तब सोलह सौ का बिल आया था.*
 *हमारे पास अब इतने पैसे कहाँ बचे हैं.*
*" पिंकी ने बताया," मेरे पास पाकेटमनी के कुछ पैसे बचे हुए हैं."*
 *तीनों ने मिलकर तय किया कि इस बार दादी को भी लेकर चलेंगे,*
 *इस बार मँहगी पनीर की सब्जी की जगह मिक्सवैज मँगवायेंगे और आइसक्रीम भी नहीं खायेंगे.*

*छोटू, गौरव और पिंकी तीनों दादी के कमरे में गये और बोले,*
*"दादी इस' संडे को लंच बाहर लेंगे, चलोगी हमारे साथ."*
*दादी ने खुश होकर कहा," तुम ले चलोगे अपने साथ."*
 *"हाँ दादी "*

*संडे को दादी सुबह से ही बहुत खुश थी.*
 *आज उन्होंने अपना सबसे बढिया वाला सूट पहना, हल्का सा मेकअप किया, बालों को एक नये ढंग से बाँधा.* 
*आँखों पर सुनहरे फ्रेमवाला नया चश्मा लगाया.*
*यह चश्मा उनका मँझला बेटा बनवाकर दे गया था जब वह पिछली बार लंदन से आया था.*
 *किन्तु वह उसे पहनती नहीं थी, कहती थी, इतना सुन्दर फ्रेम है, पहनूँगी तो पुराना हो जायेगा.*
 *आज दादी शीशे में खुद को अलग अलग एंगिल से कई बार देख चुकी थी और संतुष्ट थी.*

*बच्चे दादी को बुलाने आये तो पिंकी बोली,"अरे वाह दादी, आज तो आप बडी क्यूट लग रही हैं".*
*गौरव ने कहा," आज तो दादी ने गोल्डन फ्रेम वाला चश्मा पहना है. क्या बात है दादी किसी ब्यायफ्रैंड को भी बुला रखा है क्या."*
 *दादी शर्माकर बोली, " धत."*

*होटल में सैंटर की टेबल पर चारो बैठ गए.*
 *थोडी देर बाद वेटर आया, बोला, " आर्डर प्लीज ".* 
*अभी गौरव बोलने ही वाला था कि दादी बोली," आज आर्डर मैं करूँगी क्योंकि आज की स्पेशल गैस्ट मैं हूँ."*
 *दादी ने लिखवाया- दालमखनी, कढाईपनीर, मलाईकोफ्ता, रायता वैजेटेबिल वाला, सलाद, पापड, नान बटरवाली और मिस्सी रोटी.*
*हाँ खाने से पहले चार सूप भी.*

*तीनों बच्चे एकदूसरे का मुँह देख रहे थे.*
*थोडी देर बाद खाना टेबल पर लग गया.*
*खाना टेस्टी था,*
 *जब सब खा चुके तो वेटर फिर आया, "डेजर्ट में कुछ सर".*
 *दादी ने कहा,  " हाँ चार कप आइसक्रीम ".* 
*तीनों बच्चों की हालत खराब, अब क्या होगा, दादी को मना भी नहीं कर सकते पहली बार आईं हैं.*

*बिल आया,*
*इससे पहले गौरव उसकी तरफ हाथ बढाता,*
*बिल दादी ने उठा लिया और कहा," आज का पेमेंट मैं करूँगी.*
*बच्चों मुझे तुम्हारे पर्स की नहीं,*
*तुम्हारे समय की आवश्यकता है,*
 *तुम्हारी कंपनी की आवश्यकता है.* 
*मैं पूरा दिन अपने कमरे में अकेली पडे पडे बोर हो जाती हूँ.*
*टी.वी. भी कितना देखूँ,,*
*मोबाईल पर भी चैटिंग कितना करूँ.*
*बोलो बच्चों क्या अपना थोडा सा समय मुझे दोगे,"*
*कहते कहते दादी की आवाज भर्रा गई.* 

*पिंकी अपनी चेयर से उठी,*
*उसने दादी को अपनी बाँहों में भर लिया और फिर दादी के गालों पर किस करते हुए बोली," मेरी प्यारी दादी जरूर."*
*गौरव ने कहा, " यस दादी, हम प्रामिस करते हैं, कि रोज आपके पास बैठा करेंगे* 
*और तय रहा कि हर महीने के सैकंड संडे को लंच या डिनर के लिए बाहर आया करेंगे और पिक्चर भी देखा करेंगे."*

*दादी के होठों पर 1000 वाट की मुस्कुराहट तैर गई,*
*आँखों में फ्लैशलाइट सी चमक आ गई और चेहरे की झुर्रियाँ खुशी के कारण नृत्य सा करती महसूस होने लगीं...-*
*मित्रों,*
*बूढ़े मां-बाप रूई के गठठर समान होते है,*
*शुरू में उनको बोझ नहीं महसूस होता, लेकिन बढ़ती उम्र के साथ जैसे रुई भीग कर बोझिल होने लगती है. वैसे जिंदगी की थकान बोझ लगती है।*
*बुजुर्ग समय चाहते हैं पैसा नही,*
*पैसा तो उन्होंने सारी जिंदगी आपके लिए कमाया-की बुढ़ापे में आप उन्हें समय देंगे।* 
*यदि वृक्ष से फल न मिले,*
*तो कोई बात नहीं,*
    *किन्तु छाया सकून प्रदान करती है।।*

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