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1/13/2023

1/13/2023

पति_पत्नी_का_रिश्ता...

पति_पत्नी_का_रिश्ता...

शादी के दिन एक अटैची की तरफ इशारा करती नवविवाहित दुल्हन ने अपने पति से वादा लिया था कि वह उस अटैची को कभी नहीं खोलेंगे। 
उसके पति ने भी उससे वादा किया कि वह बिना उसके परमिशन के उस अटैची को कभी नहीं खोलेगा।

शादी के पचासवें साल में,
जब पत्नी बिस्तर पर ज़िंदगी की आखरी साँसे ले रही थी तो पति ने अपनी पत्नी को उस अटैची की याद दिला दी।

पत्नी बोली: अब इस अटैची का राज़ खोलने का वक़्त आ गया हैं,
अब आप इस अटैची को खोल सकते हो।

पति ने जब अटैची को खोला तो उससे दो गुड़िया और एक लाख रुपए बाहर निकलें।
۔
पति ने पूछा तो पत्नी बोली,
"मेरी माँ ने मुझे सफल शादी का राज़ दिया, 
उसने सलाह दी कि गुस्सा पीना बहुत अच्छा हैं। 
माँ ने मुझे ये तरीका बताया कि जब भी उसे अपने पति की किसी गलत बात पर ग़ुस्सा आये तो पति पर गुस्सा होने के बजाय एक गुड़िया सिल लिया करना।

इसलिए जब भी तुम्हारे बारे में किसी गलत बात पर ग़ुस्सा आता तो मैं एक गुड़िया सी लिया करती थी,
पति दो गुड़ियों को देखकर बहुत खुश हुआ कि उसने अपनी पत्नी को कितना खुश रखा हुआ हैं,
सफल दाम्पत्य जीवन के पचास वर्ष पूरे होने के बाद उसकी पत्नी ने सिर्फ दो गुड़िया बनाई।

जिज्ञासा में पति ने अटैची में रखें करीब एक लाख रुपए के बारे में पूछा तो पत्नी बोली,
"मैंने ये एक लाख रुपए गुडिया बेचकर इकठ्ठा किए हैं"

इतना सुनते ही पति को अपनी सभी गलतियों का एहसास हुआ और उसने अपनी पत्नी से सिर झुकाते हुए माफी मांगी।
पत्नी का दिल इतना बड़ा था कि उसने माफ कर दिया।

Note:- जीवन की खुशियों के लिए पति-पत्नी के रिश्ते को प्यार, विश्वास और समझदारी के धागों से मजबूत बनाना पड़ता हैं,
छोटी-छोटी बातें इग्नोर करनी होती हैं,
मुश्किल वक्त के समय में एक-दूसरे का सहारा बनना पड़ता हैं।
पति-पत्नी का रिश्ता इस दुनिया का सबसे खास रिश्ता होता हैं।

पति पत्नी के रिश्ते में विश्वास होना चाहिए
आपस में एक दूसरे के प्रति होने वाले विश्वास को कभी न डगमगाने दे,

पति पत्नी के रिश्ते में एक दूसरे के प्रति सम्मान होना जरुरी हैं,

पति-पत्नी के रिश्ते में क्रोध और घमंड के लिए कोई जगह नहीं होनी चाहिए,

पति-पत्नी के रिश्ते को मजबूत बनाने के लिए एक दूसरे को समय दे,

एक दूसरे की इच्छाओं का आदर करे,

एक दूसरे की भावनाओं को समझे,

एक-दूसरे के प्रति अपने प्यार को कभी कम न होने दे,
हमेशा मिलजुल कर अपने प्यार को बढ़ाने के लिए कुछ न कुछ खास करना चाहिए,
सबसे अहम बात दोनों को अपनी जिंदगी में एक दूसरे को बराबर समझना चाहिए!

1/11/2023

1/11/2023

मायका और माँ ( खूबसूरत सच्ची कहानी है )

मायका और माँ ( खूबसूरत सच्ची कहानी है ). 

माँ थीं तो मोहल्ले भर को मेरे आने का पता होता था 
माँ थीं तो बने होते थे राजमाह चावल पुदीने की चटनी 
माँ थीं तो बिलकुल बुरा नहीं लगता था 
बिस्तर में लेटे रहना , सुस्ताना , टी वी देखना , चाय पीना 
माँ थीं तो अपने साथ साथ मेरे लिए भी डाल लेती थीं आम का अचार साल भर के लिए 
ले लेती साल भर के लिए देसी चावल 
जब छोटे छोटे बच्चों के साथ जाती 
तो कहती 
भूल जाओ सब , आनंद करो , मस्ती करो 
सब मैं संभाल लूँगी 
मेरे घर आती तो सब बनेरों पे पड़े होते धुले हुए चादर खेस लिहाफ़ 
सारे मोहल्ले को पता होता माँ आईं हैं 
निहायत बुरे वक्तों में सीने में मेरा मुँह छुपा लेती 
और कहती 
मैं हूँ न 
बुरा सपना आता तो सुबह बस पकड़ आती 
देखती मैं ठीक हूँ तो शाम को लौट जातीं
हाँ , काफ़ी छुपाती थी मैं अपने दर्द उन से 
पर माँ की आँखें तो तस्वीर में भी भाँप जाती है दर्द 
गईं तो मेरा मायका भी साथ ले गईं
एक बार गई मैं तो बाहर वाले कमरे में बैठ घंटों रोती रही
किसी को ख़बर तक न पड़ी मेरे आने की 
फिर सालों साल उस शहर में क़दम पड़े ही नहीं 
वो रास्ते यूँ जैसे नाग फ़न फैलाए बैठे हों 
सोचा था , अब धुँधला पड़ने लगा है सब 
अब जाने लगी हूँ उस शहर 
ख़रीदारी भी कर लेती हूँ वहाँ 
माँ थीं तो ज़रूरी होता था शॉपिंग पे जाना 
नहीं तो पूछतीं
कोई बात है 
उदास हो क्या 
पैसे मुझ से ले लो 
कुछ बचा कर रखे हैं तुम्हारे बाबू जी से परे 
नहीं , पर कुछ भी धुँधला नहीं पड़ा है 
पालती मार कर बैठा था कहीं ज़िंदगी की व्यस्तता में 
कहीं एक शब्द पढ़ा 
तो ज़ार ज़ार फूट पड़ा सब 

कोई भी दर्द क्या मर पाता है कभी पूरी तरह 
यूँ तो सब ठीक है 
पर काश माँ को कोई दर्द न देती 
काश उनका दर्द बाँट लेती 
काश उनके लिए ढेरों सूट गहने ख़रीद पाती 
काश उन्हें घुमाने ले जा पाती 
काश उन्होंने कभी जो देखे थे ख़्वाब पूरे कर पाती 

पर यह काश भी तो ख़ुद माँ बन कर ही समझ आता है 
इतनी देर से क्यों समझ आता है ?

1/10/2023

1/10/2023

रिश्तों का महत्व

रिश्तों का महत्व 


घर की नई नवेली इकलौती बहू एक प्राइवेट बैंक में बड़े ओहदे पर थी । उसकी सास तकरीबन एक साल पहले ही गुज़र चुकी थी । घर में बुज़ुर्ग ससुर औऱ उसके पति के अलावे कोई न था । पति का अपना कारोबार था ।

पिछले कुछ दिनों से बहू के साथ एक विचित्र बात होती ।बहू जब जल्दी जल्दी घर का काम निपटा कर ऑफिस के लिए निकलती ठीक उसी वक़्त ससुर उसे आवाज़ देते औऱ कहते बहू ,मेरा चश्मा साफ कर मुझें देती जा। लगातार ऑफिस के लिए निकलते समय बहू के साथ यही होता । काम के दबाव औऱ देर होने के कारण क़भी कभी बहू मन ही मन झल्ला जाती लेकिन फ़िरभी अपने ससुर को कुछ बोल नहीं पाती ।

जब बहू अपने ससुर के इस आदत से पूरी तरह ऊब गई तो उसने पूरे माजरे को अपने पति के साथ साझा किया ।पति को भी अपने पिता के इस व्यवहार पर बड़ा ताज्जुब हुआ लेकिन उसने अपने पिता से कुछ नहीं कहा। पति ने अपनी पत्नी को सलाह दी कि तुम सुबह उठते के साथ ही पिताजी का चश्मा साफ करके उनके कमरे में रख दिया करो ,फिर ये झमेला समाप्त हो जाएगा ।

अगले दिन बहू ने ऐसा ही किया औऱ अपने ससुर के चश्मे को सुबह ही अच्छी तरह साफ करके उनके कमरे में रख आई।लेकिन फ़िरभी उस दिन वही घटना पुनः हुई औऱ ऑफिस के लिए निकलने से ठीक पहले ससुर ने अपनी बहू को बुलाकर उसे चश्मा साफ़ करने के लिए कहा। बहू गुस्से में लाल हो गई लेकिन उसके पास कोई चारा नहीं था। बहू के लाख उपायों के बावजूद ससुर ने उसे सुबह ऑफिस जाते समय आवाज़ देना नहीं छोड़ा ।

धीरे धीरे समय बीतता गया औऱ ऐसे ही कुछ वर्ष निकल गए। अब बहू पहले से कुछ बदल चुकी थी। धीरे धीरे उसने अपने ससुर की बातों को नजरअंदाज करना शुरू कर दिया और फ़िर ऐसा भी वक़्त चला आया जब बहू अपने ससुर को बिलकुल अनसुना करने लगी । ससुर के कुछ बोलने पर वह कोई प्रतिक्रिया नहीं देती औऱ बिलकुल ख़ामोशी से अपने काम में मस्त रहती। गुज़रते वक़्त के साथ ही एक दिन बेचारे बुज़ुर्ग ससुर भी गुज़र गए।

समय का पहिया कहाँ रुकने वाला था,वो घूमता रहा घूमता रहा। छुट्टी का एक दिन था। अचानक बहू के मन में घर की साफ़ सफाई का ख़याल आया। वो अपने घर की सफ़ाई में जुट गई। तभी सफाई के दौरान मृत ससुर की डायरी उसके हाथ लग गई।बहू ने जब अपने ससुर की डायरी को पलटना शुरू किया तो उसके एक पन्ने पर लिखा था-"दिनांक 24-08-09.... आज के इस भागदौड़ औऱ बेहद तनाव व संघर्ष भरी ज़िंदगी में, घर से निकलते समय, बच्चे अक्सर बड़ों का आशीर्वाद लेना भूल जाते हैं जबकि बुजुर्गों का यही आशीर्वाद मुश्किल समय में उनके लिए ढाल का काम करता है। बस इसीलिए, जब तुम चश्मा साफ कर मुझे देने के लिए झुकती थी तो मैं मन ही मन, अपना हाथ तुम्हारे सिर पर रख देता था क्योंकि मरने से पहले तुम्हारी सास ने मुझें कहा था कि बहू को अपनी बेटी की तरह प्यार से रखना औऱ उसे ये कभी भी मत महसूस होने देना कि वो अपने ससुराल में है औऱ हम उसके माँ बाप नहीं हैं। उसकी छोटी मोटी गलतियों को उसकी नादानी समझकर माफ़ कर देना । वैसे मेरा आशीष सदा तुम्हारे साथ है बेटा!! डायरी पढ़कर बहू फूटफूटकर रोने लगी। आज उसके ससुर को गुजरे ठीक 2 साल से ज़्यादा समय बीत चुके हैं लेकिन फ़िर भी वो रोज़ घर से बाहर निकलते समय अपने ससुर का चश्मा साफ़ कर, उनके टेबल पर रख दिया करती है, उनके अनदेखे हाथ से मिले आशीष की लालसा में।

जीवन में हम रिश्तों का महत्व महसूस नहीं करते हैं, चाहे वो किसी से भी हो, कैसे भी हो और जब तक महसूस करते हैं तब तक वह हमसे बहुत दूर जा चुके होते हैं।

रिश्तों के महत्व को समझें और उनको सहेज कर रखें।
❤️🙏❤️


8/14/2022

8/14/2022

विवाहित स्त्रियों के कर्तव्य

विवाहित स्त्रियों के कर्तव्य


विवाहित स्त्री के लिये पतिव्रतधर्म के समान कुछ भी नहीं है, इसलिये उसे मनसा-वाचा-कर्मणा पति के सेवा परायण होना चाहिये। 

स्त्री के लिये पति परायणता ही मुख्य धर्म है। इसके सिवा अन्य सब धर्म गौण हैं। 

महर्षि मनु ने स्पष्ट लिखा है कि स्त्रियों को पति की आज्ञा के बिना यज्ञ, व्रत, उपवास आदि कुछ भी न करने चाहिये। 

स्त्री केवल पति की सेवा-शुश्रुषा से ही उत्तम गति पाती है एवं स्वर्ग लोक में देवता लोग भी उसकी महिमा गाते हैं। जो स्त्री पति की आज्ञा के बिना व्रत, उपवास आदि करती है, वह अपने पति की आयु को हरती है और स्वयं नरक में जाती है।

इसलिये पति की आज्ञा के बिना यज्ञ, दान, तीर्थ, व्रत आदि भी नहीं करने चाहिये, दूसरे लौकिक कर्मो की तो बात ही क्या? 

स्त्री के लिये पति ही तीर्थ है, पति ही व्रत है, पति ही देवता एवं परम पूजनीय गुरु है। 

ऐसा होते हुए भी जो स्त्रियाँ अपने पति की आज्ञा के बिना दूसरे को गुरु बनाती हैं, वे घोर नरक को प्राप्त होती हैं। 

आज कल बहुत-से धूर्त लोग साधु, महन्त और भक्तों के वेष में 'बिना गुरु मुक्ति नहीं होती'-ऐसा भ्रम फैला कर भोली-भाली स्त्रियों को मुक्ति का झूठा प्रलोभन देकर उनके धन और सतीत्व का हरण करते हैं और घोर नरक के भागी बनते हैं। 

ऐसे धूर्त-ठगों से माताओं और बहनों को खूब सावधान रहना चाहिये। 

ऐसे पुरुषों का मुख देखना भी धर्म नहीं है। 

मनु आदि शास्त्र कारों ने स्त्रियों की मुक्ति तो केवल पाति व्रत से ही बतलायी है। 


गोस्वामी तुलसीदासजी भी कहते हैं-


                एकइ    धर्म     एक    व्रत    नेमा। 

                कारयँ  बचन  मन  पति  पद प्रेमा॥

                बिनु  श्रम  नारि  परम  गति लहई। 

                पतिब्रत  धर्म   छाड़ि   छल  गहई॥


वही स्त्री पतिव्रता है, जो अपने मन से पति का हित-चिन्तन करती है, वाणी से सत्य, प्रिय और हितकारी वचन बोलती है, शरीर से उसकी सेवा एवं आज्ञा का पालन करती है। 

जो पतिव्रता होती है, वह अपने पति की इच्छा के विरुद्ध कुछ भी आचरण नहीं करती। 

वह स्त्री पति सहित उत्तम गति को प्राप्त होती है और उसी को लोग साध्वी कहते हैं। 

स्त्रियों के लिये इस लोक और परलोक में पति ही नित्य सुख का देने वाला है। 

इसलिये स्त्रियों को किंचिन्मात्र भी पति के प्रतिकूल आचरण कभी नहीं करना चाहिये। 

जो नारी ऐसा करती है, यानी पति की इच्छा और आज्ञा के विरुद्ध चलती है, उसको इस लोक में निन्दा और मरने पर नीच गति की प्राप्ति होती है।


                  पति प्रतिकूल जनम जहँ जाई। 

                  बिधवा   होड   पाइ   तरुनाई॥


इस प्रकार पति की इच्छा के विरुद्ध चलने वाली की यह गति लिखी है। 

फिर जो नारी दूसरे पुरुषों के साथ रमण करती है, उसकी घोर दुर्गति होती है, इसमें तो कहना ही क्या है ?


                  पति बंचक परपति रति करई।

                  रौरव  नरक कल्प  सत परई॥


अत: स्त्रियों को जाग्रत् की तो बात ही क्या, स्वप्न में भी परपुरुष का चिन्तन नहीं करना चाहिये वही उत्तम पतिव्रता है, जिसके मन में ऐसा भाव है-


                  उत्तम के अस  बस  मन माहीं।

                  सपनेहुँ आन पुरुष जग नाहीं॥


पति यदि कामी हो, शील एवं गुणों से रहित हो तो भी साध्वी यानी पतिव्रता को उसे ईश्वर के समान मानकर उसकी सदा सेवा-शुश्रुषा करनी चाहिये-


         विशीलः कामवृत्तो  वा गुणैर्वा  परिवर्जितः।

         उपचर्यः स्त्रिया साध्व्या  सततं देववत्पति:॥


 अपमान तो अपने पति का कभी नहीं करना चाहिये; क्योंकि जो नारी अपने पति का अपमान करती है, वह परलोक में जाकर महान् दुःखों को भोगती है।


         बृद्ध   रोगबस    जड़  धनहीना।

         अंध बधिर  क्रोधी  अति  दीना॥

         ऐसेहु  पति कर किएँ अपमाना।

         नारि  पाव  जमपुर  दुख नाना॥


साध्वी स्त्रियों को पुरुषों और स्त्रियों के जो सामान्य धर्म बतलाये हैं, उनका पालन करना चाहिये। पतिव्रत-धर्म के रहस्य को जानने वाली स्त्रियों को अपने पति से बड़े सास, ससुर आदि की बड़े आदर के साथ सेवा-पूजा और आज्ञा पालन करनी चाहिये; क्योंकि वे पति के भी पति हैं। 

पति व्रत धर्म के आदर्श स्वरूप सीता, सावित्री आदि ने ऐसा ही किया है। 

जब सावित्री अपने पति के साथ वन में गयी, तब पति की आज्ञा होने पर भी वह सास-ससुर की आज्ञा लेकर ही गयी थी। 

श्री सीता जी भी श्री राम चन्द्र जी के साथ माता कौसल्या से आज्ञा, शिक्षा और आशीर्वाद लेकर ही गयी थीं।

साध्वी स्त्री को उचित है कि अपने लड़के लड़कियों को आचरण एवं वाणी द्वारा उत्तम शिक्षा दें । माता-पिता जो आचरण करते हैं, बालकों पर उनका विशेष असर पड़ता है। 

अत: स्त्रियों को झूठ-कपट आदि दुराचार एवं काम- क्रोध आदि दुर्गुणों का सर्वथा त्याग करके उत्तम आचरण करने चाहिये। 

बहुत-सी स्त्रियाँ लड़कियों को 'राँड़' और लड़कों को 'तू मर जा' 'तेरा सत्यानाश हो' इत्यादि कटु और दुर्वचन बोलती हैं, एवं उनको भुलाने के लिये 'मैं तुझे अमुक चीज मँगवा दूँगी' इत्यादि झूठा विश्वास दिलाती हैं और 'बिल्ली आयी' 'हाऊ आया' इत्यादि का झूठा भय दिखाती हैं। 

इससे बहुत नुकसान होता है, अतएव ऐसी बातों से स्त्रियों को बचना चाहिये। 

बालक का चित्त कोमल होता है, उसमें ये बातें सहज ही जम जाती हैं और वह झूठ बोलना, धोखा देना आदि सीख जाता है, एवं अत्यन्त भीरु और दीन बन जाता है। 

बालकों के मन में वीरता, धीरता और गम्भीरता उत्पन्न हो, ऐसे ओज और तेज भरे हुए सच्चे वचनों द्वारा उनको आदेश देना चाहिये। 

उनमें बुद्धि और ज्ञान की उत्पत्ति के लिये सत्-शास्त्र की शिक्षा देनी चाहिये। 

बालकों को गाली आदि नहीं देनी चाहिये; क्योंकि गाली देना उनको गाली सिखाना है। 

अश्लील, गंदे-कड़वे अपशब्दों का प्रयोग भी नहीं करना चाहिये। संग का बहुत असर पड़ता है। पशु-पक्षी भी संग के प्रभाव से सुशिक्षित और कुशिक्षित हो जाते हैं। 

सुना जाता है कि मण्डनमिश्र के द्वार पर रहने वाले पक्षी भी शास्त्रवचनों का उच्चारण किया करते थे। देखा जाता है कि गाली बकने वालों के पास रहने वाले पक्षी भी गाली बका करते हैं। 

अत: सदा सत्य, प्रिय, सुन्दर और मधुर हितकर वचन ही बहुत प्रेम से, धीमे स्वर से और शान्ति से बोलने चाहिये। बालकों के सम्मुख पति के साथ हँसी- मजाक एवं एक शब्या पर सोना बैठना कभी नहीं करना चाहिये। जो स्त्रियाँ ऐसा करती हैं, वे अपने बालकों को व्यभिचार की शिक्षा देती हैं। 

पर पुरुष का दर्शन, स्पर्श, एकान्त-वास एवं उसके चित्र का भी चिन्तन नहीं करना चाहिये। 

लोभ, मोह, शोक, हिंसा, दम्भ, पाखण्ड आदि से सदा बचकर रहना चाहिये और उत्तम गुण एवं आचरणों के लिये गीता, रामायण, भागवत, महाभारत एवं सती- साध्वी स्त्रियों के चरित्र पढ़ने का अभ्यास रखना चाहिये और उनके अनुसार ही बालकों को शिक्षा देनी चाहिये। 

 बच्चों को खिलाने-पिलाने इत्यादि में भी अच्छी शिक्षा देनी चाहिये। 

मदालसा ने अपने बालकों को बाल्यावस्था में ही ज्ञान और वैराग्य की शिक्षा देकर उन्हें उच्च श्रेणी का बना दिया था। 

बच्चे बुरे बालकों एवं बुरे स्त्री-पुरुषों का संग करके कुशिक्षा ग्रहण न कर लें, इसके लिये माता-पिता को विशेष ध्यान रखना चाहिये। 

बच्चों को ऐसी शिक्षा देनी चाहिये, जिससे उनका प्रेम श्रृंगार, देह की सजावट, विलासिता आदि में न होकर सदाचार, सद्गुण, सादगी, सेवा और ईश्वर तथा धर्म आदि में प्रवृत्ति हो।

बालकों को गहने पहना कर नहीं सजाना चाहिये। इससे स्वास्थ्य की हानि एवं कहीं- कहीं प्राणों का भी जोखिम ही जाता है। 

बल बढ़ाने के लिए व्यावाम और बुद्धि की वृद्धि के लिये विद्या एवं उत्तम शिक्षा देनी चाहिये। 

थियेटर सिनमा आदि देखने का व्यसन और बीड़ी, सिगरेट, तम्बाकू, भाँग, गाजा, सुलाफा आदि मादक वस्तुओं का सेवन करने की आदत न पढ़ जाय इसके लिये भी माता-पिता को ध्यान रखना चाहिये। 

लड़की और लड़के के खान पान ज्यार-दुलार और व्यवहार में भेद भाव नहीं रखना चाहिये। 

प्रायः स्त्रियों खान-पान, प्यार-दुलार आदि में भी लड़कों के साथ जैसा व्यवहार करती हैं, लड़कियों के साथ बैसा नही करतीं। 

उनका अपमान करती हैं। 

जो स्त्रियाँ इस प्रकार अपने ही बालकों में विषमता का व्यवहार करती हैं, उनसे समता की आशा कैसे की जा सकती है ? 

इस प्रकार की विषमता से इस लोक में आपकीर्ति और परलोक में दुर्गति होती है। 

अत: बालकों के साथ समता का ही व्यवहार रखना चाहिये।

बहुत-सी स्त्रियाँ भूत, प्रेत, देवता, पीर आदि का किसीे में आवेश समझ कर भय करने लग जाती हैं। यह प्रायः व्यर्थ बात है। 

ऐसी बात पर कभी बहम-विश्वास नहीं करना चाहिये। इस प्रकार की बातें अधिकांश में तो हिस्टीरिया आदि की बीमारी से होती हैं। 

बहुत-सी जगह तो जान-बूझकर ऐसा ढोंग किया जाता है कभी-कभी वहम या भय से भी आवेश आ जाता है। 

अत: इन पर विश्वास नहीं करना चाहिये। यह सब व्यर्थ की और हानिकारक बातें हैं। 

इसलिये स्त्रियों को जादू-टोना, हाथ दिखाना, झाड़- फूँक, मन्त्र आदि अपने या अपने घरवालों पर नहीं करवाने चाहिये एवं ऐसा करने वाली स्त्रियों का संग भी नहीं करना चाहिये।

वेश्या, व्यभिचारिणी, लड़ाई-झगड़ा करने वाली निर्लज्ज और दुष्ट स्त्रियों का संग कभी नहीं करना चाहिये। 

परंतु उनसे घृणा और द्वेष भी नहीं करना चाहिये। उनके अवगुणों से ही घृणा करनी चाहिये। 

बड़ों की, दुखियों की और घर पर आये हुए अतिथियों की एवं अनाथों की सेवा पर विशेष ध्यान देना चाहिये। 

यज, दान, तप, सेवा, तीर्थ, व्रत, देवपूजन आदि पति के साथ उनकी आज्ञा के अनुसार उनके सन्तोष के लिये अनुगामिनी होकर करें, स्वतन्त्र होकर नहीं।

पति का जो इष्ट है, वही स्त्री का भी इष्ट है, अत: पति के बताये हुए इष्टदेव परमात्मा के नाम का जप और रूप का ध्यान करना चाहिये। 

स्त्रियों के लिये पति ही गुरु है। 

यदि पति को ईश्वर भक्ति अच्छी न लगती हो तो पिता के घर से प्राप्त हुई शिक्षा के अनुसार भी ईश्वर भक्ति, बाहरी भजन, सत्संग, कीर्तन आदि न करके गुप्त रूप से मन में ही भगवान् का स्मरण, जप और ध्यान करना चाहिये। 

भक्ति का मन से विशेष सम्बन्ध होने के कारण जहाँ तक बन सके, गुप्त रूप से भक्ति करनी चाहिये, क्योंकि गुप्त रूप से की हुई भक्ति विशेष महत्त्व की होती है।

पति जो कुछ भी कहे उसका अक्षरश: पालन करे, किंतु जिस आज्ञा के पालन से पति नरक का भागी हो, उसका पालन नहीं करना चाहिये। जैसे पति काम, क्रोध, लोभ, मोहवश चोरी या किसी के साथ व्यभिचार करने, मांस-मदिरा सेवन करने, किसी को विष पिलाने, जान से मारने, भ्रूण हत्या-गोहत्या आदि घोर पाप करने के लिये कहे तो वह नहीं करे। 

ऐसी आज्ञा का पालन न करने से अपराध भी समझा जाय तो भी पति को नरक से बचाने के लिये उसका पालन नहीं करना चाहिये। 

जिस काम से पति का परम हित हो, वह काम स्वार्थ छोड़ कर करने की सदा चेष्टा करनी चाहिये । 

पतियों को चाहिये कि वे अपनी सदाचार परायणा साध्वी पत्नियों को कदापि बुरे आचरण करने का आदेश भूलकर भी न दें ।

विधवा स्त्रियों की सेवा पर विशेष ध्यान देना चाहिये; क्योंकि अपने धर्म में दृढ़ रहने वाली विधवा स्त्री देवी के समान है। 

उसकी सेवा-शुश्रूषा करने, उसके साथ प्रेम करने से स्त्री इस लोक में सुख और परलोक में उत्तम गति पाती है। 

जो स्त्री विधवा को सताती है, वह उसकी हाय से इस लोक में दुखिया हो जाती है और मरने पर नरक में जाती है। 

ऊपर बताये हुए पतिव्रत-धर्म को स्वार्थ छोड़ कर पालन करने वाली साध्वी स्त्री इस लोक में परम शान्ति एवं परम आनन्द को प्राप्त होती है।

                       ----------:::×:::-----------

रचनाः ब्रह्मलीन परम श्रद्धेय 

 श्री जय दयाल जी गोयन्दका

       पत्रिका: कल्याण (९३।८)


                          "जय जय श्री राधे"





8/09/2022

8/09/2022

किसी बहन ने अपने भाई के लिए बहोत ही अच्छा पोस्ट लिखा है....उस बहन को मेरा प्रणाम

किसी बहन ने अपने भाई के लिए बहोत ही अच्छा पोस्ट लिखा है....उस बहन को मेरा प्रणाम


इस राखी पर भैया ,मुझे बस

यही तोहफा देना तुम ,

रखोगे ख्याल माँ-पापा का , बस यही इक

वचन देना तुम ,

बेटी हूं मैं , शायद ससुराल से रोज़ न आ

पाऊंगी ,

जब भी पीहर आऊंगी , इक मेहमान बनकर

आऊंगी ,

पर वादा है, ससुराल में संस्कारों से,

पीहर की शोभा बढाऊंगी ,

तुम तो बेटे हो , इस बात को न

भुला देना तुम ,

रखोगे ख्याल माँ -पापा का बस यही वचन

देना तुम ,

मुझे नहीं चाहिये सोना-चांदी , न चाहिये

हीरे-मोती ,

मैं इन सब चीजों से कहां सुःख पाऊंगी

देखूंगी जब माँ-पापा को पीहर में खुश

तो ससुराल में चैन से मैं भी जी पाऊंगी

अनमोल हैं ये रिश्ते , इन्हें यूं ही न

गंवा देना तुम ,

रखोगे ख्याल माँ-पापा का , बस

यही वचन देना तुम ,

वो कभी तुम पर यां भाभी पर

गुस्सा हो जायेंगे ,

कभी चिड़चिड़ाहट में कुछ कह भी जायेंगे ,

न गुस्सा करना , न पलट के कुछ कहना तुम ,

उम्र का तकाजा है, यह

भाभी को भी समझा देना तुम ,

इस राखी पर भैया मुझे बस

यही तोहफा देना तुम ,

रखोगे ख्याल माँ-पापा का , बस

यही वचन देना तुम ।❤️❤️love u bhaiya





8/07/2022

8/07/2022

एक बेटी का पिता

एक बेटी का पिता


*एक पिता ने अपनी बेटी की सगाई करवाई,*

*लड़का बड़े अच्छे घर से था*

*तो पिता बहुत खुश हुए। 💜*

*लड़के ओर लड़के के माता पिता का स्वभाव*

*बड़ा अच्छा था..*

*तो पिता के सिर से बड़ा बोझ उतर गया।💝*

*एक दिन शादी से पहले*

*लड़के वालो ने लड़की के पिता को खाने पे बुलाया।*


*पिता की तबीयत ठीक नहीं थी*

*फिर भी वह ना न कह सके।* 

*लड़के वालो ने बड़े ही आदर सत्कार से उनका स्वागत किया।*

*फ़िर लडकी के पिता के लिए चाय आई..*

*शुगर कि वजह से लडकी के पिता को चीनी वाली चाय से दुर रहने को कहा गया था।*

.

*लेकिन लड़की के होने वाली ससुराल घर में थे तो चुप रह कर चाय हाथ में ले ली।*

*चाय कि पहली चुस्की लेते ही वो चोक से गये,चाय में चीनी बिल्कुल ही नहीं थी..* 💜

*और इलायची भी डली हुई थी।* 💜


*वो सोच मे पड़ गये कि ये लोग भी हमारी जैसी ही चाय पीते हैं।*


*दोपहर में खाना खाया वो भी बिल्कुल उनके घर जैसा,दोपहर में आराम करने के लिए दो तकिये पतली चादर।उठते ही सोंफ का पानी पीने को दिया गया।*

.

*वहाँ से विदा लेते समय उनसे रहा नहीं गया तो पुछ बैठे - मुझे क्या खाना है,*

*क्या पीना है, मेरी सेहत के लिए क्या अच्छा है ?*

*ये परफेक्टली आपको कैसे पता है ?*

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*तो बेटी कि सास ने धीरे से कहा  कि कल रात को ही आपकी बेटी का फ़ोन आ गया था।*


*ओर उसने कहा कि मेरे पापा स्वभाव से बड़े सरल हैं*

*बोलेंगे कुछ नहीं, प्लीज अगर हो सके*

*तो आप उनका ध्यान रखियेगा।* 💜💜

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*पिता की आंखों मे वहीँ पानी आ गया था।*

*लड़की के पिता जब अपने घर पहुँचे तो घर के हाल में लगी अपनी स्वर्गवासी माँ के फोटो से हार निकाल दिया।*

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*जब पत्नी ने पूछा कि ये क्या कर रहे हो ? ?*

*तो लडकी का पिता बोले - मेरा ध्यान रखने वाली मेरी माँ इस घर से कहीं नहीं गयी है,* 💜💜

*बल्कि वो तो मेरी बेटी*

*के रुप में इस घर में ही रहती है।* 💜💜

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*और फिर पिता की आंखों से आंसू झलक गये ओर वो फफक कर रो पड़े।* 💜

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*दुनिया में सब कहते हैं ना !*

*कि बेटी है,*

*एक दिन इस घर को छोड़कर चली जायेगी।*

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*मगर मैं दुनिया के सभी माँ-बाप से ये कहना चाहता हूँ*

*कि बेटी कभी भी  अपने माँ-बाप के घर से नहीं जाती।*

*बल्कि वो हमेशा उनके दिल में रहती है।* 💜





8/02/2022

8/02/2022

बच्चों के 13 अनुरोध हैं जो वे कभी नहीं कह सकते हैं

बच्चों के 13 अनुरोध हैं जो वे कभी नहीं कह सकते हैं


1. पूरे दिल से मुझे प्यार करो।


2. मुझे भीड़ में मत डाँटो।


3. भाई, भाई, बहन या किसी और के साथ मेरी तुलना मत करो।


4. मत भूलो, पिता और माता, मैं तुम्हारी फोटोकॉपी हूं।


5. जैसे-जैसे मेरी उम्र बढ़ती है, वैसे-वैसे मुझे हमेशा एक बच्चा मत समझिए।


6. मुझे कोशिश करने दें, फिर मुझे बताएं कि क्या यह गलत है


7. मेरी गलतियों को मत लाओ।


8. मैं आपके लिए पुरस्कारों का क्षेत्र हूं।l


9. मुझे बुरी बातें कहने के लिए डांटें नहीं, माता-पिता के रूप में आपके मुंह से ऐसी बात नहीं निकलती जो मेरे लिए प्रार्थना है?


10. "DON'T" कहकर मुझे प्रतिबंधित न करें, लेकिन एक स्पष्टीकरण दें कि मैं कुछ क्यों नहीं कर सकता।


11. कृपया पिता और माता, हर दिन मुझ पर चिल्लाकर मेरे दिमाग और मेरी सोच को नुकसान न पहुंचाएं।


12. मुझे अपनी समस्याओं में मत घसीटो जिसका मुझसे कोई लेना-देना नहीं है। आप दूसरों से नाराज़ हैं, मैंने प्रेरित किया।


13. मैं चाहता हूं कि तुम प्यार करो और प्यार करो क्योंकि तुम मेरे जीवन और मेरे भविष्य में एक हो।


"माता-पिता के लिए अच्छे लाभ"।

खुद सहित ,