वीरभद्र अत्यंत शक्तिशाली साधना !
भगवान वीरभद्र कि, यह अत्यधिक शक्तिशाली साधना है, इस साधना को करने से पहले किसी विद्वान गुरु से दीक्षा लें, और उन्हीं के निर्देशन में, फिर शुभ मुहूर्त से साधना शुरू करें, बिना दीक्षा यह साधना न करें।
वीरभद्र को भगवान शिव ने राजा दक्ष का यज्ञ विध्वंस करने के लिए प्रकट किया था, जैसा की विदित है, माता पार्वती ने भगवान शिव के अपमान से आहत होकर अपने आप को यज्ञ कुंड में होम कर दिया था, इसी बात से क्रोधित होकर भगवान शिव ने राजा दक्ष से बदला लेने के लिए अपनी एक जटा को शिला पर पटका, शिला पर पटकते ही वह जटा वीरभद्र के रूप में प्रकट हो गई और उसने भगवान शिव से कहा प्रभु आदेश करें !
भगवान शिव ने कहा कि, जाओ और दक्ष के यज्ञ को नष्ट कर डालो और जो भी तुम्हें रोकने की कोशिश करें, उसे भी समाप्त कर देना, यह मेरा आदेश है, चाहे वह साक्षात काल ही क्यों ना हो, भगवान शिव का आदेश पाकर वीरभद्र ने यज्ञ को विध्वंस कर दिया, और जो भी सामने आया या तो मारा गया या भाग गया, यह उन्हीं वीरभद्र की साधना है, इसके बारे में आपको बताया जा रहा है !
इस साधना को रात या दिन में कभी भी कर सकते है,
साधना के लिए आसन का रंग कोई भी हो सकता है।
माला - संस्कारित रुद्राक्ष की माला/नरकंकाल के हड्डियों की माला।
एक भैरव तंत्र धारण धारण कर लें तो, काफी अच्छा रहेगा।
दिशा - दक्षिण/पूर्व-दक्षिण कोन
साधना के लिए ध्यान की आवश्यकता नही है।
जप के दौरान तेल या घी का दीपक अवश्य जलाएं।
आइये अब जप संख्या के बारे में जाने ---
13 माला जप 23 दिन तक करना है।
फिर दशांश हवन करें !
इसके बाद शत्रु आपकी तरफ आंख नही उठा सकता,भूत प्रेत ग्रसित व्यक्ति को आराम मिल जाता है,गलत किये गए कर्मो के दुष्प्रभाव नष्ट हो जाते है,पूर्ण रूप से सुरक्षा मिलती है।
15 माला 23 दिन कर के हवन करने से
आर्थिक लाभ भी काफी मिलता है ।
15 माला 50 दिन कर के हवन करने से
व्यापार लाभ बहुत तेजी से प्राप्त होता है।
9 माला 51 दिन तक कर के हवन करने से किसी भी प्रकार के व्यवसाय में सफलता मिलती है,लेकिन शत्रु जलन भावना बढ़ जाती है, इसलिए भैरव तन्त्र या माता बगलामुखी तंत्र भी धारण किये रहे।
19 माला 51 दिन करके हवन करने से किसी भी प्रकार के शत्रु का नाश हो जाता है।
शर्त यह है कि, शत्रु महाविद्या ,महामृत्युंजय,भैरव का कोई तंत्र न धारण किया हो या इनका साधक न हो।
21 माला 37 दिन करके हवन करने से प्रेम विवाह में सफलता मिलती है सारी परेशानियां दूर हो जाती है।
14 माला 50 दिन करके हवन करने से स्वास्थ लाभ मिलता है और हर प्रकार से सुरक्षा मिलती है।
21 माला 21 दिन कर के हवन करने से मन लायक नौकरी प्राप्त होती है।
14 माला 19 दिन करके हवन करने से विद्यार्थियों को हर एक प्रकार से लाभ प्राप्त होता है।
51 माला 51 दिन तक करके हवन करने से सभी मनोरथ सिद्ध होते है,सबी प्रकार की नकारात्मक शक्तियों का नाश होता है,भूत प्रेत डायन इत्यादि आपको परेशान नही कर सकते।
भगवान वीरभद्र के दर्शन प्राप्ति और वरदान प्राप्ति के लिए 510000 जप पूर्ण कर हवन करें।
किश्तों में यह इतना जप सम्पन्न कर सकते है।
इस साधना को करने के बाद जिंदगी में अन्य कोई साधना करने की आवश्यकता नही पड़ती।
भगवान वीरभद्र स्वयम अंतर्ज्ञान प्रदान करते है।
ज्यादा बोलना सूर्य के आगे दीपक जलाने के समान होगा इसलिए ज्यादा वर्णन नही किया जा सकता।
पूजन विधि: वीरभद्र या महादेव के चित्र का विधिवत दशोपचार पूजन करें। चमेली के तेल का दीपक करें, गुग्गल से धूप करें, लाल फूल चढ़ाएं। लाल चंदन चढ़ाएं, गुड का भोग लगाएं तथा लाल चंदन की माला से इस विशेष मंत्र से का 1 माला जाप करें। पूजन के बाद भोग प्रसाद स्वरूप वितरित करें।
पूजन मुहूर्त: प्रातः 08:25 से प्रातः 09:25 तक।
पूजन मंत्र:---- ॐ ह्रौं हूं वं वीरभद्राय नमः॥
उपाय
मान-सम्मान की प्राप्ति हेतु वीरभद्र पर सिंदूर चढ़ाएं।
मुश्किलों से बचने हेतु शिवलिंग पर चढ़े मसूर पर्स में रखें।
शत्रुता समाप्त करने हेतु लाल धागे में पिरोए 6 नीबू वीरभद्र पर चढ़ाएं।
यह अपने आप में स्वयं सिद्ध चमत्कारिक विरभद्र साधना है !
भगवान वीरभद्र जो कि शिव शम्भू के अवतार हैं, उनकी पूजा-उपासना करने से बड़े-बड़े कष्ट दूर हो जाते हैं, वीरभद्र, भगवान शिव के परम आज्ञाकारी हैं, उनका रूप भयंकर है, देखने में वे प्रलयाग्नि के समान प्रतीत होते हैं। उनका शरीर महान ऊंचा है,।
वे एक हजार भुजाओं से युक्त हैं। वे मेघ के समान श्यामवर्ण हैं! उनके सूर्य के समान जलते हुए तीन नेत्र हैं। एवं विकराल दाढ़ें हैं और अग्नि की ज्वालाओं की तरह लाल-लाल जटाएं हैं। गले में नरमुंडों की माला तो हाथों में तरह-तरह के अस्त्र-शस्त्र हैं ! परन्तु वे भी भगवान शिव की तरह जल्दी प्रसन्न होने वाले है!
चमत्कारिक तथा तत्काल फल देने वाला मंत्र है, स्वयंसिद्ध मंत्र से तात्पर्य उन मंत्रो से होता है जिन्हे सिद्ध करने की जरुरत नहीं पड़ती, वे अपने आप में सिद्ध होते हैं, इस मंत्र के जाप से अकस्मात् आयी दुर्घटना, कष्ट, समस्या आदि से क्षण भर में निपटा जा सकता है !
(उदाहरण- कार्यबाधा, हिंसक पशु कष्ट, डर! इत्यादि) ये तत्काल फल देने वाला मंत्र है, और साथ ही साथ ये बेहद तीव्र तेज वाला मंत्र है, इसके द्वारा प्राप्त किये जा सकने वाले लाभ –
(१). इस मंत्र के स्मरण मात्र से डर भाग जाता है, और अकस्मात् आयी बाधाओ का निवारण होता है. जब भी किसी प्रकार के कोई पशुजन्य या दूसरे तरह से प्राणहानि आशंका हो तब इस मंत्र का ७ बार जाप करना चाहिए. इस प्रयोग के लिए मात्र मंत्र याद होना ज़रुरी है. मंत्र कंठस्थ करने के बाद केवल ७ बार शुद्ध जाप करें व चमत्कार देंखे !
(२). अगर इस मंत्र का एक हज़ार बार बिना रुके लगातार जाप कर लिया जाए तो व्यक्ति की स्मरण शक्ति विश्व के उच्चतम स्तर तक हो जाती है तथा वह व्यक्ति परम मेधावी बन जाता है !
(३). अगर इस मंत्र का बिना रुके लगातार १०,००० बार जप कर लिया जाए तो उसे त्रिकाल दृष्टि (भूत, वर्त्तमान, भविष्य का ज्ञान) की प्राप्ति हो जाती है !
(४). अगर इस मंत्र का बिना रुके लगातार एक लाख बार, रुद्राक्ष की माला के साथ, लाल वस्त्र धारण करके तथा लाल आसान पर बैठकर, उत्तर दिशा की और मुख करके शुद्ध जाप कर लिया जाये, तो उस व्यक्ति को “खेचरत्व” एवं “भूचरत्व” की प्राप्ति हो जायेगी !
मंत्र : – “ॐ हं ठ ठ ठ सैं चां ठं ठ ठ ठ ह्र: ह्रौं ह्रौं ह्रैं क्षैं क्षों क्षैं क्षं ह्रौं ह्रौं क्षैं ह्रीं स्मां ध्मां स्त्रीं सर्वेश्वरी हुं फट् स्वाहा ”
सावधानी-- प्रिय भक्तों यह अत्यधिक उग्र साधना है और बहुत ही शक्तिशाली है, इसको कदापि खिलवाड़ ना समझें, नहीं तो, इसका बड़ा ही घातक परिणाम आपको भुगतना पड़ेगा, इसको हमेशा जनकल्याण की भावना से ही करें, यदि शत्रु नाश के लिए यह पूजा बहुत ही आवश्यक हो तो, अपने गुरु से आज्ञा लेकर करें !
नोध : इस लेख में दी गई सभी बातें सामान्य जानकारी के लिए है हमारी पोस्ट इस लेख की कोई पुष्टि नहीं करता

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