28 मार्च को पापमोचिनी एकादशी, जानिए
पूजा विधि,महत्व एवं शुभ मुहूर्त
💌 चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को पापमोचिनी एकादशी के रूप में मनाया जाता है। यह व्रत इस वर्ष 28 मार्च,सोमवार को है। इस दिन शंख,चक्र,गदा और कमल धारण करने वाले सृष्टि के पालनहार भगवान विष्णु के चतुर्भुज रूप की पूजा की जाती है। जाने-अनजाने में हुए पापों से मुक्ति व सर्वकामना सिद्धि के लिए शास्त्रों में इस व्रत का विधान बताया गया है।
💌 पापमोचिनी एकादशी डेट व शुभ मुहूर्त- ❓👇
🌿 पापमोचिनी एकादशी व्रत, सोमवार- 28 मार्च 2022
एकादशी तिथि की शुरुआत- 27 मार्च 2022 को शाम 06 बजकर 04 मिनट से 28 मार्च 2022 को शाम 04 बजकर 15 मिनट तक।
💌 पापमोचिनी एकादशी 2022 व्रत पारण मुहूर्त-
🌿 29 मार्च को सुबह 06 बजकर 31 मिनट से सुबह 10 बजकर 37 मिनट तक। पारण तिथि के दिन द्वादशी समाप्त होने का समय- दोपहर 02 बजकर 38 मिनट तक।
💌 पापमोचिनी एकादशी पूजा विधि-
👉 सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि से निवृत्त हो जाएं।
घर के मंदिर में दीप प्रज्वलित करें।
भगवान विष्णु का गंगा जल से अभिषेक करें।
भगवान विष्णु को पुष्प और तुलसी दल अर्पित करें।
अगर संभव हो तो इस दिन व्रत भी रखें।
भगवान की आरती करें।
भगवान को भोग लगाएं। इस बात का विशेष ध्यान रखें कि भगवान को सिर्फ सात्विक चीजों का भोग लगाया जाता है। भगवान विष्णु के भोग में तुलसी को जरूर शामिल करें। ऐसा माना जाता है कि बिना तुलसी के भगवान विष्णु भोग ग्रहण नहीं करते हैं।
इस पावन दिन भगवान विष्णु के साथ ही माता लक्ष्मी की पूजा भी करें।
इस दिन भगवान का अधिक से अधिक ध्यान करें।
💌 एकादशी पूजन सामग्री-
🌼 भगवान विष्णु को पूजन में पीले फूल, पीले वस्त्र, केला, पीली मिठाई, श्रीखंड, पंचामृत, तुलसी का पत्ता, अक्षत्, धूप, दीप, गंध, फल, माला आदि अर्पित करें।
🌼🌿 भगवान विष्णु जी का मंत्र 🌿🌼
💓🥀🥀ओम नमो भगवते वासुदेवाय।🥀🥀💓
😇 पापमोचिनी एकादशी तो मनुष्य के सभी पापों को जलाकर भस्म कर देती है। इस व्रत को करने से सहस्त्र गोदान का फल मिलता है। ब्रह्म ह्त्या,सुवर्ण चोरी,सुरापान और गुरुपत्नी गमन जैसे महापाप भी इस व्रत को करने से दूर हो जाते हैं,अर्थात यह व्रत बहुत ही पुण्य प्रदान करने वाला है। यदि भक्तिपूर्वक सात्विक रहते हुए पापमोचिनी एकादशी का व्रत किया जाए तो संसार के स्वामी सर्वेश्वर श्री हरि संतुष्ट होकर अपने भक्तों के समस्त कष्टों का निवारण करते हैं। बड़े-बड़े यज्ञों से भगवान को उतना संतोष नहीं मिलता,जितना एकादशी व्रत के अनुष्ठान से होता है। इस एकादशी की रात्रि में मन को प्रभु के चरणों में समर्पित कर रात्रि जागरण करके हरि कीर्तन करने से भगवान विष्णु अपने भक्तों पर कृपा करते हैं।

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