ग्रह बृहस्पति जब खराब फल देते हैं तब जिंदगी पर क्या प्रभाव पड़ता है ओर उसके क्या लक्षण है
{{ कैसे होते हैं गुरु ग्रह ख़राब }}
*घर में हवा आने वाले रास्ते यदि खराब हैं तो गुरु भी खराब हो जाएगा।
*दक्षिण का द्वार भी गुरु के खराब होने की निशानी है।
* ईशान कोण यदि दूषित है तो गुरु भी खराब हो जाएगा।
*कुछ लोग किसी बाबा या गुरु के प्रभाव में आकर अपने विचारों को दूषित कर लेते हैं।
* कुछ लोग माला आदि पहने लग जाते हैं या दाढ़ी बढ़ा लेते हैं तो उनका गुरु खराब हो जाता है।
*जिनके सिर पर चोटी के स्थान से बाल उड़ जाते हैं, तो समझो उनका गुरु खराब है।
*आपका अपने पिता से विवाद चलता रहता है तो भी गुरु खत्म हो जाएगा।
*व्यक्ति अकारण झूठ बोलता रहता है तो भी गुरु अपना अच्छा असर देना बंद कर देता है।
*शराब पीने और मांस खाते रहने से भी कुंडली में गुरु नष्ट हो जाता है।
* 2, 5, 9, 12वें भाव में बृहस्पति के शत्रु ग्रह हों या शत्रु ग्रह उसके साथ हों तो बृहस्पति मंदा होता है।
* यदि बृहस्पति कुंडली की उच्च राशि के अलावा 2, 5, 9, 12वें भाव में हो तो भी शुभ होता है, लेकिन लोग अपने कर्मों से इसे अशुभ कर लेते हैं।
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{{ कैसे पहचाने की गुरु खराब है }}
*बिना कारण शिक्षा रुक जाती है।
*आंखों में तकलीफ होना, मकान और मशीनों की खराबी, अनावश्यक दुश्मन पैदा होना, धोखा होना, सांप के सपने आना भी गुरु खराब की निशानी हैं।
*गुरु खराब होने की निशानी यह भी है कि आपका सोना खो जाता है या आप उसे गिरवी रख देते हैं या बेच देते हैं।
*व्यक्ति के संबंध में व्यर्थ की अफवाहें उड़ाई जाती हैं।
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{{ गुरु की बीमारी }}
*गुरु के बुरे प्रभाव से धरती की आबोहवा बदल जाती है। उसी प्रकार व्यक्ति के शरीर की हवा भी बुरा प्रभाव देने लगती है।
*इससे श्वास रोग, वायु विकार, फेफड़ों में दर्द आदि होने लगता है।
*कुंडली में गुरु-शनि, गुरु-राहु और गुरु-बुध जब मिलते हैं तो अस्थमा, दमा, श्वास आदि के रोग, गर्दन, नाक या सिर में दर्द भी होने लगता है।
*इसके अलावा गुरु की राहु, शनि और बुध के साथ युति अनुसार भी बीमारियां होती हैं, जैसे- पेचिश, रीढ़ की हड्डी में दर्द, कब्ज, रक्त विकार, कानदर्द, पेट फूलना, जिगर में खराबी आदि।

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