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12/14/2021

आज गीता जयंती है, विश्व का एकमात्र ग्रंथ जिसकी जयंती मनाई जाती है

   
                           
   

आज गीता जयंती हैविश्व का एक मात्र ग्रंथ जिसकी जयंती मनाई जाती है




14-दिसम्बर मंगलवार को सभी को मोक्ष देने वाली मोक्षदा एकादशी है। कुरुक्षेत्र में जिस दिन भगवान श्रीकृष्ण ने गीता ज्ञान दिया था। इसीलिए ग्यारहवीं गीता जयंती कहलाती है। गीता ने भगवान श्रीकृष्ण के मुख से निकला ज्ञान। हर अवतार की जयंती मनाई जाती है लेकिन एक ही ग्रंथ जिसकी जयंती मनाई जाती हैं।


गीता में कुल 18 अध्याय और 700 श्लोक हैं। गीता के श्लोक अनुष्टुप छंद में रचे गए हैं। महर्षि वेदव्यास ने गीता का नाम दिया है। ज्ञान, कर्म, विश्वास, संयम, नाना प्रकार की भक्ति, कला कर्म, जीव माया प्रभु प्रकृति, कैसे जीवन बंधन और मोक्ष। यह इस पर एक प्रतिपादन किया गया है। गीता की रचना लगभग 5 हजार साल पहले हुई थी। पुस्तक पूरी दुनिया में रह रहे हिन्दू धर्म के मानने वालों के घर में है। इसका 100 से अधिक भाषाओं में अनुवाद हो चुका है। प्रज्ञाचक्षु क्रुणाल शास्त्री के अनुसार गीताजी में कोई विषय नहीं बचा है। ज्ञान भक्ति और कर्म साधक द्वारा आवश्यक सभी विषयों पर चर्चा होती है। शाम को जब आदमी निष्क्रिय हो जाता है तो उसे सहारा मिलता है। गीता का सारांश केवल एक वाक्य में है कि फल की इच्छा के बिना कर्म किया जाना चाहिए। समाज में अंधविश्वासों से मुक्त होकर सच्ची आस्था का धारण करता है। मनुष्य को अपने कर्मों का फल भोगना ही पड़ता है। निराशा साहस बन जाती है। महात्मा गांधीजी भी कहा करते थे कि श्रीमद्भागवत गीताजी का अध्ययन करता तो मुझे हिम्मत मिलती थी। जब तीर्थयात्रा के लिए गए स्वामी विवेकानंद, अपने पास रखी गीता मनुष्य को अभयदान प्राप्त करना है, उसके जीवन से भय दूर करना है।


आजमोक्षदा एकादशी


मणिनगर स्वामिनारायण मंदिर कुमकुम साधु प्रेमवत्सलदासजी ने कहा है कि मगशर सुद अगियारस के व्रत से वाजपेयी यज्ञ का फल मिलता है। एकादशी के दिन नर्क में गए व्यक्ति को फल दिया जाए तो मोक्ष होता है। एकादशी का विशेष महात्म्य ब्रह्मांड में वर्णित है।


गीता जयन्ती*


🕉️जीवन का ऐसा कोई क्षेत्र नहीं जिसे गीता ने स्पर्श ना किया हो, जीवन की ऐसी कोई समस्या नहीं जिसका समाधान गीता से न प्राप्त किया जा सके। जीवन जीने की दिव्यतम-भव्यतम कल्पना का साकार रूप है गीता। गीता अर्जुन के समक्ष अवश्य गाई गई मगर इसका उद्देश्य बहुत दूर गामी था।

 

🕉️गीता गाई गई ताकि हम जी सकें। लाभ-हानि में, सुख-दुःख में और सम-विषम परिस्थितियों में भी प्रसन्न रह सकें। गीता ने कर्म के अति रहस्यमय सिद्धान्त को स्पष्ट करते हुये कहा कि भावना की शुद्धि ही कर्म की शुद्धि है। महत्वपूर्ण ये नहीं कि आप क्या करते हैं ? अपितु यह है कि किस भाव से करते हैं।

 

🕉️आज आदमी जीवन की बहुत सी समस्याओं से पीड़ित है। जिनके पास सुख साधन है वो दुखी और जिनके पास नहीं है वो भी दुखी। यद्यपि यहाँ हर मर्ज की दवा है मगर समस्या यहाँ पर आती है कि मर्ज क्या है ? गीता रोग भी बताती है और दवा भी बताती है। आपका विषाद, प्रसाद बन जाये यही तो गीता की सीख है। 


गीता सुनें- गीता चुनें। गीता पढ़ें- आगे बढ़ें।

*!! गीता जयन्ती की आप सबको बधाई !!*


🇮🇳🌹🙏🏻🕉️ *जय श्री कृष्णा*🙏🏻🌹🇮🇳

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