जहर किसे कहते हैं ? चाणक्य ने अच्छा और सटीक जवाब दिया
जीवन में जो आवश्यकता से अधिक हो उसे जहर कहते हैं।
चाहे वो ताकत हो, दौलत हो, विद्या हो, भूख हो, लालच हो, अभिमान हो, प्रेम हो, प्रशंसा हो, नफरत हो या अमृत हो।
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"वक्त" भी सिखा देता है
और
"गुरु" भी सिखाता है,,
दोनों में फर्क सिर्फ इतना है कि,,,,
"टीचर" पढ़ाकर इम्तिहान लेता है...
और
"वक्त" इम्तिहान लेकर सिखाता है
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हर चीज की कीमत समय समय
जब आता है तभी होता है.....
देखो तो देखो,
मुफ्त ऑक्सीजन
अस्पताल में कैसे बिकता है...
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"जीभ पर चोट" सबसे ज्यादा
पहले तो रुज़ाई है ऐसा मेडिकल
विज्ञान सब कुछ कहता है।
लेकिन।
"जीभ से लगी चोट"
जिंदगी भर ऐसा नहीं है
अनुभव कहता है
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जलने वाले से दोस्ती और दुश्मनी मत करो
क्योंकि
कोयला गरम हो तो हाथ जलते हैं और ठंडा हो तो हाथ काले पड़ जाते हैं....
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बात छोटी है पर मतलब बहुत बड़ा है
उम्र भर उठाया है बोझ महकने ने और लोग तारीफ़ तस्वीर की कर रहे है !
🌞🌹 *शुभ-प्रभात* 🌹🌞

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