कमजोर इम्यूनिटी के 5 बड़े संकेत
इम्यूनिटी हमें कई बीमारियों से बचाती है। अगर इम्यूनिटी कमजोर पड़ रही है, तो शरीर इसका भी संकेत देता है। इन संकेतों को समझकर शरीर की रोगों से लड़ने की क्षमता को बढ़ाया जा सकता है। कोरोनाकाल में इम्यूनिटी को कमजोर होने से रोकना और भी ज्यादा जरूरी है।
एम्स में ऑन्कोलॉजी डिपार्टमेंट के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. अजय गोगिया से जानिए इम्यूनिटी क्यों कमजोर पड़ती है, इसे कैसे स्ट्रॉन्ग बनाएं और रोगों से लड़ने की क्षमता बढ़ाएं....
* लंबे समय तक तनाव: लंबे समय तक तनाव रहने के कारण इम्यून सिस्टम का रिस्पॉन्स काफी कमजोर हो जाता है। अमेरिकन साइकोलॉजिकल एसोसिएशन का कहना है, तनाव शरीर में लिम्फोसाइट यानी व्हाइट ब्लड सेल्स की मात्रा को कम करता है। यही सेल्स संक्रमण से लड़ने में मदद करती हैं।
* अक्सर सर्दी-जुकाम होना: सर्दी के मौसम में 2 से तीन बार सर्दी जुकाम होना सामान्य है। अधिकांश लोग 7 से 10 दिन में ठीक भी हो जाते हैं। रोगों से लड़ने वाले इम्यून सिस्टम को एंटीबॉडी बनाने में 3 से 4 दिन का समय लगता है। अगर अधिकांश समय आपको जुकाम रहता है तो यह कमजोर इम्यूनिटी का संकेत है।
* अक्सर कान में संक्रमण होना: अमेरिकन एकेडमी ऑफ एलर्जी अस्थमा एंड इम्यूनोलॉजी के मुताबिक, एक साल में 4 बार से अधिक कान का संक्रमण होना, एक साल में दो बार निमोनिया होना कमजोर इम्यून सिस्टम के संकेत हो सकते हैं। ऐसे संकेतों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
* पेट का सही ना रहना: नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ के मुताबिक, इम्यूनिटी 70% आपके पाचन तंत्र पर निर्भर होती है। यहां लाभकारी बैक्टीरिया और सूक्ष्मजीव आंत को संक्रमण से बचाते हैं। यदि आपको अक्सर डायरिया की शिकायत होती है, कब्ज रहता है तो यह कमजोर इम्यूनिटी का संकेत है।
* शरीर के घावों को देरी से भरना: शरीर पर कहीं भी कटने, जलने अथवा छिलने पर त्वचा तेजी से डैमेज कंट्रोल मोड में आ जाती है। शरीर नई त्वचा बनाने में मदद करने के लिए उस जगह पर पोषक तत्वों से युक्त रक्त भेजकर घाव की रक्षा शुरू कर देता है। यह प्रक्रिया भी स्वस्थ इम्यून कोशिकाओं पर निर्भर करती है।

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें
If you have any doubts,please let me know