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5/25/2021

पार्वती तपस्या

   
                           
   

पार्वती तपस्या



सती का स्वरूप ले हिमालय में थी जन्मी पार्वती।

बाल्यावस्था से जिसके, तन मन में थी शिव भक्ति।।


हृदय में ऐसी प्रीत आई, शिव भजन में वो लिंग हुई।

महादेव ही वर के रूप में मिलेे, मन ऐसी प्रणय हुई।।


सब ने समझाया हट ना कर,वो अघोरी,जटाधारी है ।

उसके साथ जीवन तू व्यतित ना कर।।


एक ना सुनी सब की, करने लगी शिव भक्ति ।

त्याग मोह माया, हिमालय में बन गई तपस्वी।।


देख अपने प्रति अनुराग, शम्भु को हुई परीक्षा की चाह।

भेज सप्त ऋषियो को, स्वयं की त्रुटि ऐसी कराई।।


वो भंग धतूरे का नशेड़ी , गले में सर्प की फेरी।

करता श्मशान में है तंडो ,लगाता भस्मो की रोरी।।


सुनि त्रुटि देव की, जगी हृदय में श्रद्धा महादेव की

मैं तो प्राण तज दूं शंकर की चरणों में ,ऐसी वाणी गौरी की


प्रसन्न हुए शिव शंकर सुन, गौरी की करुणा।

दिये दर्शन किए पूर्ण गौरी की प्रीत प्रण।।


सृष्टि में चारो ओर उमंग है छाया ।

शिव पार्वती विवहा का शुभ मंगल है गाया।।

हर हर महादेव

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