चित्तौड़गढ़ क़िला( history )
समाधीश्वर मन्दिर
· रत्न सिंह महल
· जैन कीर्ति स्तम्भ
· फतेह प्रकाश महल
· कलिका माता का मन्दिर
· कुम्भास्वामी मन्दिर
· सात बीस देवरी
· विजय स्तम्भ
· गौमुख कुंड
· कुम्भा महल
· रानी पद्मिनी का महल
· कीर्ति स्तम्भ
#चित्तोड़गढ़_क़िला राजस्थान के इतिहास प्रसिद्ध चित्तौड़ में स्थित है। यह क़िला 25.53 अक्षांश और 74.39 देशांतर पर स्थित है। क़िला ज़मीन से लगभग 500 फुट ऊँचाई वाली एक पहाड़ी पर बना हुआ है। परंपरा से प्रसिद्ध है कि इसे चित्रांगद मोरी ने बनवाया था। आठवीं शताब्दी में गुहिलवंशी बापा ने इसे हस्तगत किया। कुछ समय तक यह परमारों, सोलंकियों और चौहानों के अधिकार में भी रहा, किंतु सन 1175 ई. के आस-पास उदयपुर राज्य के राजस्थान में विलय होने तक यह प्राय: गुहिलवंशियों के हाथ में ही रहा।
#समाधीश्वर_मन्दिर चित्तौड़गढ़ क़िला, राजस्थान में स्थित है। यह मन्दिर भगवान शिव को समर्पित है, जो भोज परमार द्वारा 11वीं शताब्दी के प्रारंभ में बनवाया गया था।
• इस मन्दिर का बाद में मोकल ने 1428 ई. में जीर्णोद्धार करवाया था।
• समाधीश्वर मन्दिर में एक गर्भगृह, एक अन्तराल तथा एक मुख्य मंडप है, जिसके तीनों मुखों अर्थात् उत्तरी, पश्चिमी तथा दक्षिणी ओर मुख मंडप हैं।
• देव मंदिर में भगवान शिव की त्रिमुखी विशाल मूर्ति स्थापित है।
#रत्न सिंह_महल राजस्थान के चित्तौड़गढ़ क़िले में स्थित है। रत्नेश्वर तालाब के साथ स्थित यह महल राणा रत्न सिंह द्वितीय (1528-31) का है।
• संरचना में इस महल की आकृति आयताकार है।
• इसमें एक आंगन भी है जो कक्षों तथा एक मंडप, जिसकी बॉलकोनी दूसरी मंज़िल के पूर्वी भाग पर है, से घिरा है।
• राणा रत्न सिंह के नाम पर ही इस महल का नाम रखा गया था।
#जैन कीर्ति_स्तम्भ का निर्माण श्रेष्ठी जीजा द्वारा 1300 ई. में करवाया गया था। यह स्तम्भ राजस्थान के चित्तौड़गढ़ में स्थित है।
• इस स्तम्भ की ऊँचाई लगभग 24.50 मीटर है।
• यह छह मंजिला स्तम्भ प्रथम जैन तीर्थंकर आदिनाथ को समर्पित है।
• यह कीर्ति स्तम्भ एक उठे हुए चबूतरे पर निर्मित है तथा इसमें आंतरिक रूप से व्यवस्थित सीढ़ियाँ बनाई गई हैं।
• स्तम्भ की निचली मंज़िल में सभी चारों मूलभूत दिशाओं में आदिनाथ की खड़ी प्रतिमाएँ बनी हैं, जबकि ऊपर की मंजिलों में जैन देवताओं की सैकड़ों छोटी मूर्तियाँ स्थापित हैं।
#फतेह_प्रकाश_महल:-राजस्थान के
चित्तौड़गढ़ में स्थित कई प्रमुख इमारतों में से एक है। यह ख़ूबसूरत दो मंजिला महल महाराजा फतेह सिंह (1884-1930 ई.) द्वारा बनवाया गया था।
• यह एक ऐसा महल है, जिसके चारों कोनों पर एक-एक बुर्ज है, जो गुम्बदाकार छतरियों से सुसज्जित है।
• महल आधुनिक भारत की वास्तुकला का एक उत्कृष्ट नमूना है।
• वर्तमान समय में इसमें एक संग्रहालय स्थापित कर दिया गया है।
#कलिका_माता_का _मन्दिर राजस्थान
के चित्तौड़गढ़ में स्थित है। रानीपद्मिनी
के महल के उत्तर में स्थित यह मन्दिर सुन्दर और ऊँची कुर्सी वाला एक विशाल महल है। राजा मानभंग द्वारा 9वीं शताब्दी में निर्मित यह मन्दिर मूल रूप से सूर्य को समर्पित है, जैसा कि इस मन्दिर के द्वार पाखों के केन्द्र में उकेरी गयी सूर्य की मूर्ति से स्पष्ट है।
• मन्दिर का निर्माण संभवतः 9वीं शताब्दी में मेवाड़ के गुहिलवंशीय राजाओं ने करवाया था।
• पहले यह मूल रुप से एक सूर्य मन्दिर था। निज मन्दिर के द्वार तथा गर्भगृह के बाहरी पार्श्व के ताखों में स्थापित सूर्य की मूर्तियाँ इसका प्रमाण है।
• सम्भवत: बाद के समय में इसमें कलिका की मूर्ति स्थापित की गई थी।
• मन्दिर के स्तम्भों, छतों तथा अन्तःद्वार पर खुदाई का काम बेजोड़ और दर्शनीय है।
• महाराणा सज्जन सिंह ने इस मन्दिर का जीर्णोद्धार कराया था, क्योंकि इस मन्दिर में मूर्ति प्रतिष्ठा वैशाख, शुक्ल पक्ष की अष्टमी को हुई थी। अतः प्रतिवर्ष यहाँ एक विशाल मेला लगता है।
• कलिका माता मन्दिर में गर्भगृह, अन्तराल, एक बंद मंडप तथा एक द्वारमण्डप है।
• इस समय कलिका माता या काली देवी की पूजा मन्दिर की प्रमुख देवी के रूप में होती है।
#कुम्भास्वामी_मन्दिर चित्तौड़गढ़ क़िला, राजस्थान में स्थित है। मूल रूप से यह मन्दिर भगवान विष्णु के शूकर अवतार 'वराह' को समर्पित है। मन्दिर का निर्माण 8वीं शताब्दी में करवाया गया था।
• महाराणा कुम्भा (1433-68 ई.) द्वारा इस मन्दिर का बड़े पैमाने पर जीर्णोद्धार किया गया था।
• मन्दिर एक ऊँचे अधिष्ठान पर निर्मित है तथा इसमें एक गर्भगृह, एक अन्तराल, एक मंडप, एक अर्द्ध मंडप तथा एक खुला प्रदक्षिणा पथ है।
• इस मन्दिर के पृष्ठ भाग के मुख्य आले में भगवान वराह की मूर्ति दर्शाई गई है।
• मन्दिर के सामने एक छतरी के नीचे गरुड़ की मूर्ति है।
• उत्तर में एक लघु मंदिर है, जिसे मीरा मन्दिर के नाम से जाना जाता है।
#सात_बीस_देवरी नाम से प्रसिद्ध 27 जैन मन्दिरों का समूह चित्तौड़गढ़ क़िला, राजस्थान में स्थित है।
• स्थानीय रूप से 'सात बीस देवरी' मंदिरों का समूह क़िले में एक अहाते के बीच स्थित है, जिसे सन 1448 ई. में बनवाया गया था।
• प्रमुख मन्दिर में गर्भगृह, अन्तराल, मंडप, सभा मंडप तथा मुखमंडप शामिल हैं। परिसर के पूर्व में दो पूर्वोन्मुख मन्दिर भी हैं।
#विजय_स्तम्भ राजस्थान के चित्तौड़गढ़ क़िले में स्थित है। इस स्तम्भ को 'कीर्ति स्तम्भ' भी कहा जाता है।
• इस स्तम्भ का निर्माण महाराणा कुम्भा ने 1448 ई. में करवाया था।
• महाराणा कुम्भा ने मालवा के सुल्तान महमूदशाह ख़िलजी को युद्ध में प्रथम बार परास्त कर उसकी स्मृति में इष्टदेव विष्णु के निमित्त यह विजय स्तम्भ बनवाया था।
#गौमुख_कुंड राजस्थान के प्रसिद्ध चित्तौड़गढ़ क़िले में स्थित है।
• समाधीश्वर मन्दिर के दक्षिण में स्थित तथा पश्चिमी परकोटे से सटा गौमुख कुंड एक विशाल, गहरा, शैलकृत जलाशय है, जिसका आकार आयताकार है।
• एक छोटी प्राकृतिक गुफ़ा से बिल्कुल स्वच्छ जल की भूमिगत धारा बारह माह 'गोमुख' (गाय के मुख के आकार) से बहती है, इसीलिए इसका नाम गौमुख पड़ा है।
#कुम्भा_महल राजस्थान के चित्तौड़गढ़ में स्थित है। इस महल का नाम महाराणा कुम्भा के नाम पर पड़ा है, जिन्होंने पुराने महल में बड़े स्तर पर मरम्मत कार्य करवाया था।
• इस महल में 'बड़ी पोल' तथा 'त्रिपोलिया' नामक द्वारों से प्रवेश किया जाता है, जो आगे खुले आंगन में सूरज गोखरा, जनाना महल, कंवरपाद के महल की तरफ़ जाता है।
• कुम्भा महल परिसर के दक्षिणी भाग में पन्ना धाय तथा मीराबाई के महल स्थित हैं।
#रानी_पद्मिनी का_महल
राजस्थान के चित्तौड़गढ़ में स्थित है। इतिहास प्रसिद्ध राणा रत्न सिंह की ख़ूबसूरत पत्नी रानी पद्मावती के नाम पर ही इस महल का नाम रखा गया था। यह महल 'पद्मिनी तालाब' की उत्तरी परिधि पर स्थित है।
• यह एक छोटा महल है, जो पानी के बीचों-बीच में बना हुआ है।
• इस महल को 'ज़नाना महल' भी कहा जाता है, और इसके किनारे के महल 'मरदाना महल' कहलाते हैं।
• मरदाना महल के एक कमरे में विशाल दर्पण इस तरह से लगा है कि यहाँ से झील के मध्य बने ज़नाना महल की सीढ़ियों पर खड़े किसी भी व्यक्ति का स्पष्ट प्रतिबिंब दर्पण में नज़र आता है।
• संभवतः अलाउद्दीन ख़िलजी ने यहीं खड़े होकर रानी पद्मिनी का प्रतिबिंब देखा था।
• रानी पद्मावती की सुन्दरता पर मोहित होकर ही अलाउद्दीन ने क़िले पर आक्रमण किया था।
• जल महल के रूप में विख्यात एक तीन मंजिला मंडप भी तालाब के बीच में खड़ा है।
इस महल को 'ज़नाना महल' भी कहा जाता है, और इसके किनारे के महल 'मरदाना महल' कहलाते हैं। मरदाना महल के एक कमरे में विशाल दर्पण इस तरह से लगा है कि यहाँ से झील के मध्य बने ज़नाना महल की सीढ़ियों पर खड़े किसी भी व्यक्ति का स्पष्ट प्रतिबिंब दर्पण में नज़र आता है।
#कीर्ति_स्तम्भ का निर्माण महाराणा कुम्भा ने 1448 ई. में करवाया था। यह स्तम्भ राजस्थान के चित्तौड़गढ़ क़िले में स्थित है। इस शानदार स्तम्भ को 'विजय स्तम्भ' के रूप में भी जाना जाता है। महाराणा कुम्भा ने मालवा के सुल्तान महमूदशाह ख़िलजी को युद्ध में प्रथम बार परास्त कर उसकी यादगार में इष्टदेव विष्णु के निमित्त यह कीर्ति स्तम्भ बनवाया था।
कीर्ति स्तम्भ वास्तुकला की दृष्टि से अपने आपमें मंज़िल पर झरोखा होने से इसके भीतरी भाग में भी प्रकाश रहता है।

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