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3/05/2021

शबरी जयंती

   
                           
   

शबरी जयंती




फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि को मनाई जाती है। सन 2021 में यह 5 मार्च को मनाई जाएगी।


यह माना जाता है कि शबरी, श्री राम की अनन्य भक्त थीं। इसी भक्ति के कारण ही भगवान श्री राम ने उनके जूठे बेर खाये थे। प्रेम निबाहने की भी अद्भुत पराकाष्ठा थी प्रभु की।


शबरी जी का वास्तविक नाम "श्रमणा" था। इनका सम्बन्ध भील समुदाय की शबरी जाति से था। पिता, भीलों के राजा थे। पिता ने उनका विवाह भील कुमार से करने का निश्चय किया।

विवाह के समय सैकड़ों भैंस - बकरे मंगाए गए थे। शबरी जी ने जब कारण जानना चाहा तो पिता ने उत्तर दिया कि, "ये सब दावत के लिये काटे जाएंगे। हमारी परंपरा है।" 


#शबरी जी के हृदय को बहुत धक्का लगा कि उनके कारण इतने पशुओं की हत्या होगी। ग्लानि वश उस रात्रि को ही वह जंगल की तरफ चुपके से निकल गईं। उन्होंने सोच लिया था कि इससे तो अच्छा है कि विवाह ही ना करूं।


इनका नाम श्री राम के प्रमुख भक्तों में गिना जाता है। इनकी कथा रामायण, राम चरित मानस, भागवत, सूर सागर व साकेत इत्यादि ग्रन्थों में चर्चित है।


केरला में स्थित भव्य शबरी माला मंदिर इनकी ही नाम पर स्थापित किया गया है । वहां प्रतिवर्ष विशाल मेले का आयोजन किया जाता है।


आपकी देवी स्वरूप में पूजा की जाती है। कहते हैं कि इनकी पूजन - अर्चन करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है। क्योंकि शबरी जी वैराग्य और भक्ति का अनुपम संगम हैं। इनकी पूजा करने से भी नारायण - पूजा सम्पन्न हो जाती है क्योंकि भगवान श्री राम का पूर्ण अनुग्रह आप पर माना जाता है।


इस दिन बेर का भोग लगाया जाता है। सफेद चंदन से तिलक लगाने की परंपरा है। दीप - सुगन्धि से आरती उतारी जाती हैं।   



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