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10/04/2020

मॉ का पल्लू

   
                           
   
माँ का पल्लू* ....

मुझे नहीं लगता कि आज के बच्चे  पल्लू के बारे में जानते हैं , पल्लू बीते समय की बात हो चुका है।




माँ के पल्लू का सिद्धांत माँ को गरिमामयी छवि प्रदान  करने के लिए था। लेकिन इसके साथ ही, यह गरम बर्तन को चूल्हे से  हटाते समय  पकड़ने के काम भी आता था।

पल्लू की बात ही निराली थी। पल्लू पर कितना ही लिखा जा सकता है 

साथ ही पल्लू बच्चों का पसीना / आँसू पोछनेे , गंदे कानों/मुंह की सफाई के लिए भी इस्तेमाल किया जाता था। माँ इसको अपने हाथ तौलिये के रूप में भी इस्तेमाल कर लेती थी । खाना खाने के बाद पल्लू से  मुंह साफ करने का अपना ही आनंद होता था।

कभी आँख मे दर्द होने पर माँ अपने पल्लू को गोल बनाकर, फूँक मारकर, गरम करके आँख में लगा देतीं थी , सभी दर्द उसी समय गायब हो जाता था ।
माँ की गोद मे सोने वाले बच्चों के लिए उसकी गोद गद्दा और उसका पल्लू चादर का काम करता था  ।

जब भी कोई अंजान घर पर आता , तो उसको,बच्चा   माँ के पल्लू की ओट ले कर देखता था । जब भी बच्चे को किसी बात पर शर्म आती, वो पल्लू से अपना मुंह ढक कर छुप जाता था ।

और जब बच्चों को बाहर जाना होता , तब माँ का पल्लू  एक मार्गदर्शक का काम करता था । जब तक  बच्चे ने हाथ मे  थाम रखा होता, तो सारी कायनात उसकी मुट्ठी में होती।

और जब मौसम ठंडा होता था ,  मां उसको अपने चारो और लपेट कर ठंड से बचने की कोशिश करती ।

पल्लू एप्रन का काम भी करता था   पल्लू का उपयोग पेड़ों से गिरने वाले जामुन और मीठे सुगंधित फूलों को लाने के लिए किया जाता था। पल्लू घर मे रखे समान  से धूल हटाने मे भी बहुत सहायक होता था ।

पल्लू मे गांठ लगा कर माँ एक चलता फिरता बैंक या तिजोरी  रखती थी और अगर सब कुछ ठीक रहा तो कभी कभी उस बैंक से कुछ पैसे भी मिल जाते  थे।
मुझे नहीं लगता की विज्ञान इतनी तरक्की करने के बाद भी पल्लू का विकल्प ढूंढ पाया है ।

*पल्लू कुछ और नहीं बल्कि एक जादुई एहसास है..*

**सभी माँओं को मेरा शत शत नमन**

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