मृत्यु के बाद जीवन
आज का इंसान समस्याओ से बचने के लिए आत्महत्या कर लेता है, सोचता है कि मृत्यु के बाद सब खत्म हो जाएगा कोई समस्या ही नही रहेगी, लेकिन इंसान को नही पता कि इस देह को छोड़ने के बाद ही तो समस्या आती है और उन समस्याओ के आगे सांसारिक जीवन की समस्याए कुछ भी नही है।
जबतक हमारे पास देह है हम कर्म कर सकते है लेकिन जैसे ही देह छूट जाती है फिर कर्म का भोग बचता है। स्थूल देह नष्ट हो जाने के बाद सूक्ष्म शरीर बचता है जिसे सामान्य इंसान भूत प्रेत आदि कहते है। आपको ज्ञात है एक सूक्ष्म का जीवन काल कितना कठिन होता है भूख प्यास से यहा वहां भटकता रहता है लेकिन जबतक उनके नाम से कोई भोग आदि नही रखता है वो ग्रहण भी नही कर पाता है। सूक्ष्म रूप में जीवन बड़ा ही कष्टदायी हो जाता है।
देह का जीवन तो 80 से 100 वर्ष ही है लेकिन एक सूक्ष्म का जीवन काल कर्म के ऊपर निर्भर करता है सैकड़ो सालो से हजारो साल भी हो सकता है इस समय मे वो अपनी मुक्ति के लिए भटकता रहता है लेकिन कोई मुक्त कराने वाला नही होता उस समय उसे ज्ञात होता है कि ये मानव देह कितनी अनमोल है।
देवादि भी सूक्ष्म रूप में होते है यदि उनका पूजन पाठ और भोग आदि मनुष्य लगाना बन्द कर देता है तो उनकी ऊर्जा भी क्षीण होने लगती है तो विचार कीजिये सामान्य इंसान के सूक्ष्म का क्या हाल होता होगा।
जिसने सूक्ष्म जीवन को देखा है समझा है वो मनुष्य देह का महत्व समझता है और उस समय ही मार्गदर्शन करने वाले गुरु का महत्व समझ आता है लेकिन तबतक समय निकल जाता है। हम थोड़ी सी परेशानियों के कारण अपनी देह को नष्ट कर देते है आत्महत्या करके, इंसान नही जानता है कितने पुण्य कर्मों के द्वारा ये देह मिली है यही अवसर होता है मुक्ति पाने का, इसी देह के लिए तो देव भी तरसते है।
जब ये देह छूट जाएंगी तब ये जीवन याद आएगा कि हमने विषय वासनाओं में फसकर कैसे इस जीवन को नष्ट कर दिया और आधात्मिक साधना मार्ग को कभी अपनाया ही नही। कभी गुरु बनाकर मुक्ति के मार्ग पर चले ही नही, सदैव सांसारिक वस्तुओ की पूर्ति के लिए लगे रहे। अभी समय है ये कही निकल ना जाये।

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