Ppanchak

Ppanchak.blogspot.com आस्था, प्रेम, हिन्दी जोक्स, अपडेट न्युज, सामाजिक ज्ञान, रेसिपी, परिवाहिक धारा

Breaking

9/22/2020

वाणी के प्रकार

   
                           
   

 वाणी के प्रकार

वाणी के प्रकार

वाणी चार प्रकार की होती है। जी हाँ चार प्रकार की। अब आप कहेंगे ऐसे कैसे? वाणी तो एक ही होती है, पर नहीं। वाणी चार प्रकार की है।
परा
पश्यन्ति
मध्यमा
वैखरी
यह चार प्रकार की वाणी है। आपस में जो बात होती है वह चौथी वाणी वैखरी होती है। जो लोग बोलते है और उसका कोई लेवल नहीं होता। जब दो औरतें बात करतीहै आपस में वह भी वैखरी वाणी है। जो आप रोज़ बोलते है वह भी वैखरी है। आप कुछ भी बोले तो वह वैखरी वाणी में ही बोलते है। तो सवाल यह है बाकी की तीन वाणी कौन बोलता है!

जब कोई बड़ा आदमी जैसे प्रधानमन्त्री, राष्ट्रपति, सच्चे संत महात्मा, कोई वचन पालनी बोलते है तो उसका असर लाखो लोगो पर पड़ता है। और उसका अनुसरण लोग करते है तो वह जो बोलते है उसे मध्यमा वाणी बोलते है। मतलब की उसका प्रभाव रहता है। वह जो भी बोलेंगे, लोग उसको मानेंगे और उनकी आज्ञा भी माननी पड़ेगी चाहे वह मर्ज़ी से या बिना मर्ज़ी के पर माननी पड़ेगी। वह बोले वह सही। ऐसी वाणी को मध्यमा वाणी कहते है।

आप किसी भी सच्चे संत पुरुष को मिले और कह दे कि जाओ बेटे तुम्हारा काम हो जायेगा तुम्हारा दुःख दूर हो जाएगा और तुम्हारा दुःख सच में चला जाता है और आपका काम भी हो जाता है तो उन्होंने जो बोला वह सही हुआ और जो बोले और सही होने लगे वह पश्यन्ति वाणी कहते है। यह वाणी बहुत ही कम लोग बोलते और जानते है। यह वाणी तब इंसान बोल सकता है जिनके पास बहुत सी सिद्धिया होती है। या कोई महान इंसान जिसका बोलना भी सच हो जाता है।

speaking-words (1)

वैखरी वाणी तो हम लोग रोज बोलते है पर मध्यमा वाणी बोलने के लिए आपको कॉन्फिडेंस आत्मविश्वास चाहिए। जिसके पास गज़ब का आत्मविश्वास हो वह यह वाणी बोल लेते है और होने लगता है। मध्यमा वाणी वह लोग भी बोल सकते है जिन्होंने मूल तत्त्व को कण्ट्रोल कर लिया हो। आत्मविश्वास प्राप्त करीये तो आपके पास भी मध्यमा वाणी आ सकती है। उससे आप जो भी बोलोगे जो भी बात दुसरो से करोगे वही सब लोग सुनेंगे और मानेंगे। तो सेल्फ कॉन्फिडेंस प्राप्त करें।

उससे आगे जाये तो पश्यन्ति वाणी को प्राप्त करने के लिए आपको अधिकतम ध्यान की आवश्यकता है। कुछ सिद्धियां चाहिए आपके पास तभी यह वाणी बोल सकते हो। यह वाणी तभी भी बोल सकते हो जब आप महत् तत्त्व को कण्ट्रोल कर लेते हो। याने कि आठ में से सात तत्त्व पर आपका नियंत्रण हो जाये तो आप यह वाणी बोलने लगते है और आप जो भी बोलोगे वह सब सच होने लगता है बेसर्ते वह दिल की गहराई से बोला हुआ हो। तो ध्यान के माध्यम से आप महत् तत्त्व को जाने और उसको नियंत्रित कीजिये। यह वाणी दुसरो का भला करने में भी बहुत काम की है। और खुद का तो भला करेगी ही करेगी परंतु दुसरो को दिया हुआ आशीर्वाद सच हो जाता है।

पहले के ज़माने में ऋषि मुनि श्राप देते थे तो यह वाणी का प्रयोग करके ही देते थे इसीलिए वो सच हो जाता था और उनको श्राप को भुगतना पड़ता था। अगर आशीर्वाद भी देते थे तो इसी वाणी से तभी उनका आशीर्वाद फल दे सकता है। इसीलिए सिद्ध पुरुष होते है वह पश्यन्ति वाणी बोलते है। श्राप और आशीर्वाद येही वाणी से जब तक ना निकले तब तक उसका कोई प्रभाव नहीं पड़ता। इसीलिए आज के ज़माने में कोई श्राप या आशीर्वाद सच नहीं होता है। क्योंकि आज वह वाणी ही किसी के पास नहीं है।

अब उससे आगे बढ़ ते है तो आती है परा वाणी। यह वाणी का उपयोग करने के लिए आपको पहले इशिता विद्या जो की अष्ट सिद्धि में से सातवी सिद्धि है। यह प्राप्त करनी पड़ती है जो कि बहुत ही मुश्किल है। इस सिद्धि को प्राप्त करने के लिए किसी किसी को तो कई जन्म लग जाते है। ऐसा सुना गया है। पर एक बार आपके पास यह सिद्धि आ गयी तो आपने परम तत्त्व को नियंत्रित कर लिया ऐसा समजना। परम तत्त्व याने खुद ईश्वर समज सकते हो। तब आप जो भी आशीर्वाद देंगे वह वरदान बन जायेगा। जैसे ब्रह्मा ने रावण जैसे कई लोगो को दिया था वह सब परा वाणी के माध्यम से बोला गया होता है। परा वाणी काफी मुश्किल है पर आप प्रयाश कर सकते है। एक बात याद रहे कि यह सब वाणी आप एक साथ कभी प्राप्त नहीं कर सकते। धीरे धीरे एक एक पायदान ऊपर चढ़ना होता है।

ओर आखिर में जो कह दे की हो गया सब। याने वह जो बोले वही सही और कोई सही नहीं वह जो बोलते है उसे परा वाणी बोलते है। उदहारण के तौर पर श्री कृष्ण, राम, बुद्ध, महावीर जैसे जो भी भगवान् हुए है वह सब परा वाणी के भीतर आ जाता है। उनको ही लोग सच मानने लगते है। उनकी आवाज़ सुनने को लोग तरस जाते है। यह सब वाणी आप अपने कर्मो से अर्जित कर सकते हो।

दोस्तों अगर आप को ये पसंद आया हो तो इसे शेर करे
ओर मेरे ब्लॉग को फोलो करे


कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

If you have any doubts,please let me know