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9/22/2020

भगवान् श्री कृष्ण के नाम ओर अर्थ

   
                           
   


भगवान् श्री कृष्ण जी के कुछ नाम और उन के अर्थ:

1  कृष्ण :  सब को अपनी ओर आकर्षित करने वाला.

 2 गिरिधर : गिरी: पर्वत ,धर: धारण करने वाला। अर्थात गोवर्धन पर्वत को उठाने वाले।

3 मुरलीधर : मुरली को धारण करने वाले।

4 पीताम्बर धारी: पीत :पिला, अम्बर:वस्त्र। जिस ने पिले वस्त्रों को धारण किया हुआ है।

5 मधुसूदन : मधु नामक दैत्य को मारने वाले।

6 यशोदा या देवकी नंदन: यशोदा और देवकी को खुश करने वाला। या पुत्र

7 गोपाल: गौओं का या पृथ्वी का पालन करने वाला।

8 गोविन्द : गौओं का रक्षक।

9 आनंद कंद: आनंद की राशि देंने वाला।

10 कुञ्ज बिहारी:कुंज नामक गली में विहार करने वाला।

11चक्रधारी: जिस ने सुदर्शन चक्र या ज्ञान चक्र या शक्ति चक्र को धारण किया हुआ है

12 श्याम: सांवले रंग वाला

13 माधव: माया के पति।

14 मुरारी:मुर नामक दैत्य के शत्रु।

15 असुरारी:असुरों के शत्रु।

16 बनवारी: वनो में विहार करने वाले।

17  मुकुंद: जिन के पास निधियाँ है।

18 योगीश्वर: योगियों के ईश्वर या मालिक।

19 गोपेश :गोपियों के मालिक।

20 हरि :दुःखों का हरण करने वाले।

21मदन:सूंदर

22 मनोहर:मन का हरण करने वाले।

23 मोहन:सम्मोहित करने वाले।

24जगदीश:जगत के मालिक।

25 पालनहार:सब का पालन पोषण करने वाले।

26 कंसारी:कंस के शत्रु।

27 रुख्मीनि वलभ:रुक्मणी के पति

28 केशव: केशी नाम दैत्य को मारने वाले. या पानी के उपर निवास करने वाले या जिन के बाल सुंदर है।

29 वासुदेव:वसुदेव के पुत्र होने के कारन।

30रणछोर:युद्ध भूमि स भागने वाले।

31 गुड़ाकेश: निद्रा को जितने वाले।

32 हृषिकेश: इन्द्रियों को जितने वाले।

33 सारथी: अर्जुन का रथ चलने के कारण।

34 दुर्योधन: जिन की रणनिति बहुत ही कठिन है ऐसे कृष्ण भगवान् ( दुतवाक्यम्)

35 पूर्ण परब्रह्म::देवताओ के भी मालिक।

36 देवेश: देवों के भी  ईश।

37 नाग नथिया: कलियाँ नाग को मारने के कारण।

38 वृष्णिपति: इस कुल में उतपन्न होने के कारण

39 यदुपति:यादवों के मालिक।

40 यदुवंशी: यदु वंश में अवतार धारण करने के कारण।

41: द्वारकाधीश:द्वारका नगरी के मालिक।

42: नागर:सुंदर।

43 छलिया:छल करने वाले।

44  मथुरा गोकुल वासी:इन स्थानों पर निवास करने के कारण।

45  रमण: सदा अपने आनंद में लीन रहने वाले।

46 दामोदर: पेट पर जिन के रस्सी बांध दी गयी थी। 

47 अघहारी: पापों का हरण करने वाले।

48 सखा: अर्जुन और सुदामा के साथ मित्रता निभाने के कारण।

49 रास रचिया: रास रचाने के कारण।

50 अच्युत: जिस के धाम से कोई वापिस नही आता है।

51 नन्द लाला:नन्द के पुत्र होने के कारण।

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