नारी तू नारायणी (जननी नारी के 16 श्रृंगार)
*नारी तू नारायणी*
नारी- श्रृंगार से अंगार तक
है जग जननी माँ,
माथे की बिंदिया देखूं, या फिर अवलोकित गात करूं।
मैं चकाचौंध हूंँ हूर बदन का नूर देख क्या बात करूं।
श्रवणों के झुमके हमें बताते, राज बहुत ही गहरे हैं।
मत देख मधुप! जूड़ों के गजरे,उस पर भी अब पहरे हैं।
कंगन हाथों के खनक रहे हैं, भ्रमर गुंज सम कानों में,
चमक रही रह रह कर दामिनी, मुक्ताहार के दानों में।
हुआ तिरोहित दूर गगन रवि, अवलोकन कर बदन कान्तिमय।
उद्विग्न अचानक हुआ सरोवर रहता था जो पूर्ण शांतिमय।
अप्रतिम सुंदर मूर्ति देखकर, दर्पण भी शरमाता है।
पर तेरी सुंदर सच्चाई भी, अक्सर वही बताता है।
भूषण श्रृंगार परिधान अलौकिक कर धारण जब इठलाई।
इन्द्र लोक में खड़ी मेनका देख तुझे खुद शरमाई।
वसन रक्त अतिरंजित करता, शुभ्र-सुनहरी काया को।
तुम ही प्रकृति, मां भी तुम ही, नमन तुम्हारी माया को।
पुरुष भोग तेरा ही यौवन, सुख अधिकाधिक पाता है।
बेशर्म मगर निज सत्ता का ही हनक तुझे दिखलाता है।
हैं नारी तेरे रूप हजारों, बहन बहू मां होती तुम।
दुष्टों का बन संहारक, दुर्गावतार भी लेती तुम।
भोग का साधन मात्र न नारी, अपितु सृष्टि का कारण है।
इस अमिट सृष्टि के हर दु:ख का, बस नारी एक निवारण है।
*जननी (नारी) के 16 श्रृंगार*
1. बिंदी– नारियो के लिए बिंदी लगाना अनिवार्य परम्परा है शास्त्रों के अनुसार बिंदी को घर-परिवार की सुख-समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। माथे पर बिंदी जहां लगाईं जाती है, वहां आज्ञा चक्र होता है, इसका संबंध मन से है। यहां बिंदी लगाने से मन की एकाग्रता बनी रहती है।
2. गज़रा– फूलों का गज़रा भी अनिवार्य श्रृंगार माना जाता है। इसे बालों में लगाया जाता है। मन प्रफुल्लित रहेता हैं।
3. टीका– विवाहित नारी के माथे पर मांग के बीच में जो आभूषण लगाती हैं, उसे टीका कहा जाता है। यह आभूषण सोने या चांदी का हो सकता है।
4. सिंदूर– विवाहित नारियो
के लिए सिंदूर को सुहाग की निशानी माना जाता है। मान्यता है कि सिंदूर लगाने से पति की आयु में वृद्धि होती है। सिर पर जहां मांग में सिंदूर भरा जाता है, वहां मस्तिष्क की महत्त्वपूर्ण ग्रंथि होती है|
5. काजल– आँखों की सुंदरता बढ़ने के लिए काजल लगाया जाता है। काजल लगाने से नारी पर किसी की बुरी नजर नहीं लगती हैं। साथ ही, आँखों से संबंधित कई रोगों से बचाव भी हो जाता है।
6. मंगल सूत्र और हार– नारी गले में हार पहनती है। विवाह के बाद मंगल सूत्र भी अनिवार्य रूप से पहनने की परम्परा है। मंगलसूत्र के काले मोतियों से स्त्री पर बुरी नज़र का बुरा असर नहीं पड़ता हैं।
7. लाल रंग का कपडे– कन्या विवाह के समय जो ख़ास कपडें पहनती है, वह भी अनिवार्य श्रृंगार है। ये परिधान लाल रंग का होता है और इसमें ओढनी, चोली और घाघरा शामिल होता है।
8. मेहंदी– किसी भी नारी के लिए मेहंदी भी अनिवार्य श्रृंगार माना गया है। किसी भी मांगलिक कार्यक्रम के दौरान नारी अपने हाथों और पैरों में मेहंदी रचाती है। ऐसा माना जाता है कि विवाह के बाद नववधू के हाथों में मेहंदी जितनी अच्छी रचती है, उसका धर्मपति उतना ही ज्यादा प्रेम करने वाला होता है। मेहंदी त्वचा से जुडी कई बीमारियों में औषधि का काम करती है।
9. बाजूबंद– सोने या चांदी के कडें नारी अपने बाहों में धारण करती हैं, इन्हें बाजूबंद कहा जाता है। ये आभूषण नारी के शरीर से लगातार स्पर्श होते रहता है, जिससे धातु के गुण शरीर में प्रवेश करते हैं, ये स्वास्थ्य के लिए लाभदायक होते हैं।
10. नथ– कन्या - नारी के लिए नथ भी अनिवार्य श्रृंगार है। इसे नाक में धारण किया जाता है। नथ धारण करने पर कन्या की सुंदरता में चार चांद लग जाते हैं। नाक छिदवाने से नारी को एक्यूपंक्चर के लाभ मिलते हैं, जिनसे स्वास्थ्य ठीक रहता हैं।
11. कानों के कुंडल– कानो में पहने जाने वाले कुंडल भी श्रृंगार का अनिवार्य अंग है। यह भी सोने या चांदी की धातु के हो सकते हैं। कान छिदवाने से भी स्वास्थ्य संबंधी कई लाभ मिलते है। ये भी एक्यूपंक्चर ही है।
12. चूड़ियां या कंगन– नारी के लिए चूड़ियां पहनना अनिवार्य है। यह लाख , काँच , चाँदी, सोने और अन्य धातुओ से बनती है | विवाह के बाद चूड़ियां सुहाग की निशानी मानी जाती है। सोने या चांदी की चूड़ियां पहनने से ये त्वचा से लगातार संपर्क में रहती हैं, जिससे नारी को स्वर्ण और चांदी के गुण प्राप्त होते हैं जो कि स्वास्थ्य लाभ प्रदान करते हैं।
13. कमरबंद– कमर में धारण किए जाने वाला आभूषण है कमरबंद। पुराने समय में कमरबंद को विवाह के बाद स्त्रियां अनिवार्य रूप से धारण करती थी। यह चाँदी या सोने के बने होते थे |
14. अंगूठी– उँगलियों में अंगूठी पहनने की परम्परा प्राचीन काल से ही चली आ रही है। हड्डियों का दर्द मिट जाता हैं।
15. पायल– पायल पैरो में पहनने के लिए नारी के लिए महत्त्वपूर्ण आभूषण है। इसके घुंघरुओं की आवाज़ से घर का वातावरण सकारात्मक बनता है। यह चांदी की बनी होती है | रक्त परिभ्रमण अच्छी तरह से होता है।
16. बिछुए – विवाह के बाद खासतौर पर पैरों की उँगलियों में पहने जाने वाला आभूषण है बिछुए। यह अंगूठी या छल्ले की तरह होता है। इसे बिछुड़ी भी कहते है | आलसीपन से राहत मिलती है।

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