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7/16/2022

शिवजी को इसलिए प्रिय है श्रावण मास

   
                           
   

शिवजी को इसलिए प्रिय है श्रावण मास


पौराणिक मान्यता के अनुसार श्रावण महीने को देवों के देव महादेव भगवान शंकर का महीना माना जाता है। 

इस संबंध में पौराणिक कथा है कि जब सनत कुमारों ने महादेव से उन्हें श्रावण महीना प्रिय होने का कारण पूछा तो महादेव भगवान शिव ने 

बताया कि जब देवी सती ने अपने पिता दक्ष के घर में योगशक्ति से शरीर त्याग किया था, उससे पहले देवी सती ने महादेव को हर जन्म में पति के रूप में पाने का प्रण किया था।

अपने दूसरे जन्म में देवी सती ने पार्वती के नाम से हिमाचल और रानी मैना के घर में पुत्री के रूप में जन्म लिया। 

पार्वती माता ने युवावस्था के सावन महीने में निराहार रह कर कठोर व्रत किया और शिव को प्रसन्न कर उनसे विवाह किया, जिसके बाद ही महादेव के लिए यह विशेष हो गया।


इसके अतिरिक्त एक अन्य कथा के अनुसार,पौराणिक कथाओं में वर्णन आता है कि इसी सावन मास में समुद्र मंथन किया गया था। 

समुद्र मथने के बाद जो हलाहल विष निकला, उसे भगवान शंकर ने कंठ में समाहित कर सृष्टि की रक्षा की; लेकिन विषपान से महादेव का कंठ नीलवर्ण हो गया।

 इसी से उनका नाम 'नीलकंठ महादेव' पड़ा। विष के प्रभाव को कम करने के लिए सभी देवी-देवताओं ने उन्हें जल अर्पित किया। इसलिए शिवलिंग पर जल चढ़ाने का ख़ास महत्व है। 

यही वजह है कि श्रावण मास में भोले को जल चढ़ाने से विशेष फल की प्राप्ति होती है। 'शिवपुराण' में उल्लेख है कि भगवान शिव स्वयं ही जल हैं।

 इसलिए जल से उनकी अभिषेक के रूप में अराधना का उत्तमोत्तम फल है, जिसमें कोई संशय नहीं है।


शिव की पूजा

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सावन मास में भगवान शंकर की पूजा उनके परिवार के सदस्यों संग करनी चाहिए। इस माह में भगवान शिव के 'रुद्राभिषेक' का विशेष महत्त्व है। 

इसलिए इस मास में प्रत्येक दिन 'रुद्राभिषेक' किया जा सकता है, जबकि अन्य माह में शिववास का मुहूर्त देखना पड़ता है। 

भगवान शिव के रुद्राभिषेक में जल, दूध, दही, शुद्ध घी, शहद, शक्कर या चीनी, गंगाजल तथा गन्ने के रस आदि से स्नान कराया जाता है। 

अभिषेक कराने के बाद बेलपत्र, शमीपत्र, कुशा तथा दूब आदि से शिवजी को प्रसन्न करते हैं। अंत में भांग, धतूरा तथा श्रीफल भोलेनाथ को भोग के रूप में चढा़या जाता है।

भगवान शिव को प्रसन्न करने का सबसे सरल तरीका उन्हें 'बेलपत्र' अर्पित करना है। 


राशि  के अनुसार शिव पूजा कैसे करे !

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1. मेष - इस राशि का स्वामी मंगल है। गन्ने के रस से रुद्राभिषेक करें।शहद से करवाएं भगवान शिव का अभिषेक तथा गाय को गुड़ खिलाएं।मेष राशि के लोग शिवलिंग पर चांदी का चन्द्रमा चढ़ाएं।


2. वृष - भगवान शिव की कृपा पाने के लिए वृष राशि के जातकों को विशेष रूप से दूध-दही और शक्कर का प्रयोग करना चाहिए। सबसे पहले शिवलिंग पर दही से अभिषेक करें, फिर जल चढ़ाएं। 

इसके बाद शक्कर से अभिषेक करें और फिर जल चढ़ाएं। इसके पश्चात् दूध से अभिषेक करें और फिर जल चढ़ाकर सफेद चंदन से तिलक लगाएं और ​श्रद्धा भाव से शिव मंत्र का जप करें।

3. मिथुन - मिथुन राशि के जातकों को भगवान शिव की कृपा पाने के लिए शिवलिंग का शहद से अभिषेक करना चाहिए। इस उपाय को करने से न शिव की कृपा प्राप्त होगी और आर्थिक समस्याएं दूर होंगी।

4. कर्क - इस राशि का स्वामी चन्द्रमा है।दूध से भगवान का अभिषेक करें।एक चांदी का चंद्रमा भगवान को चढ़ाएं।दुर्गासप्तशती का पाठ करें।

5. सिंह - इस राशि का स्वामी सूर्य है। सिंह राशि के शिव साधक भगवान शिव की कृपा पाने के लिए शुद्ध घी से अभिषेक करना चाहिए। इस पूजन से उनके जीवन में आ रही आर्थिक समस्याएं शीघ्र ही दूर हो जाएंगी।

6. कन्या - कन्या राशि के जातक को भगवान शंकर का आशीर्वाद पाने के लिए शिवलिंग पर चढ़ाने के लिए दूध, घी और शहद का विशेष रूप से प्रयोग करना चाहिए।

7. तुला - इस राशि का स्वामी शुक्र है।भगवान को इत्र से स्नान कराएं।चावल तथा चीनी का दान करें।दही से रुद्राभिषेक करें।

8. वृश्चिक - इस राशि का स्वामी मंगल है।गन्ने के रस से रुद्राभिषेक कराएं।मसूर की दाल का दान करें।पार्थिव का शिवलिंग बनाकर नित्य पूजन करें।

भगवान भोलेनाथ का आशीर्वाद पाने के लिए वृश्चिक राशि के जातकों को गंगाजल और दूध में शक्कर मिलाकर शिवलिंग पर अर्पित करना चाहिए। इसके पश्चात् शिवलिंग पर लाल चंदन से तिलक जरूर लगाएं।

9. धनु -  भगवान शंकर की कृपा पाने के लिए धनु राशि के जातकों को कच्चे दूध के साथ केसर, गुड़, हल्दी मिलाकर अभिषेक करना चाहिए। शुभ फलों की प्राप्ति के लिए पूजा में पीले फूल का प्रयोग करें।

10. मकर - मकर राशि के जातकों को शिवकृपा पाने के​ लिए घी, शहद, दही और बादाम के तेल से शिवलिंग का पूजन करना चाहिए। इसके पश्चात् नारियल का जल अर्पित करें और नीले रंग के फूल चढ़ाएं।

11. कुम्भ-  कुंभ राशि के जातकों को सावन के महीने में घी, शहद, शक्कर और बादाम के तेल से अभिषेक करना चाहिए। इसके पश्चात् नारियल का जल अर्पित करें और नीले रंग के फूल चढ़ाएं।

 इसके पश्चात् सरसों के तेल से तिलक करें और फिर रोली से तिलक लगाएं।

12. मीन- मीन रशि के जातकों को श्रावण मास में भगवान शिव का कच्चे दूध, केसर एवं गंगाजल से अभिषेक करना चाहिए। अभिषेक के बाद शिवलिंग का हल्दी एवं केसर से तिलक करें।





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