कहीं तंत्र क्रिया के द्वारा आपको कोई बर्बाद करना तो नहीं चाहता ?
कहा जाता है कि, लोग अपने दुख से इतना दुखी नहीं है, जितना कि, दूसरों के सुख से हैं कि, वह सुख चैन से कैसे रोटी खा रहा है और इसी बात से जलकर सामने वाले को बर्बाद कर देना चाहते हैं, इसके लिए सीधी लड़ाई ना लड़कर, तंत्र मंत्र का सहारा लेते हैं, जो किसी की पकड़ में भी नहीं आता और पूरा काम हो जाता है, हालांकि तांत्रिक क्रियाएं हमेशा दूसरों के भले के लिए बनाई गई हैं, लेकिन पैसे के लालच में लोग इसका दुरुपयोग करते हैं ! ऐसा नहीं है कि, ऐसा करने वालों को कोई दंड नहीं मिलता, उनको ऐसा डंड ईश्वर की अदालत से मिलता है, जिसे देखकर इंसान की रूह दहल जाए !
तंत्र शास्त्र में छह अभिचार कर्म है, शांति कर्म, वशीकरण, स्तंभन, विद्वेषण, उच्चाटन और मारन यह 6 कर्म 10 महाविद्या की कार्यप्रणाली का हिस्सा है इनमें सबसे खतरनाक क्रिया षटकर्म है।
शास्त्रों में शांति कर्म को छोड़कर अन्य सभी को वर्जित किया गया है, तंत्र शास्त्र का निर्माण इसलिए हुआ था कि, व्यक्ति अपनी साधना और सिद्धि की सुरक्षा के लिए उपयोग करेगा, परंतु....!
इन षटकर्म में एक कर्म है, जादू टोना या इसे ऐसे समझें, काला जादू जिसे ब्लैक मैजिक कहा जाता है, यह व्यक्ति के जीवन को मृत्यु के समान बना देता है, दूसरा षटकर्म है वशीकरण अथार्थ किसी दूसरे व्यक्ति अथवा वस्तु को अपने वश में करना, तीसरा षटकर्म है व्यक्ति को जिंदा रहते मारना यानी मारन का प्रयोग,चौथा शर्ट कर्म है व्यक्ति पर बंधन करना ताकि वह जीवन में किसी कार्य में आगे ना बढ़ सकें !
पांचवा प्रयोग है, उच्चाटन यह ऐसा प्रयोग है कि, व्यक्ति का मन किसी भी स्त्री या पुरुष से अलग हो जाता है और वह व्यक्ति उसे अच्छा नहीं लगता है, छटा कर्म है विद्वेषण यह व्यक्ति के बीच में विवाद करवाता है !
अभीष्ट सिद्धि के लिए मानव जीवन में प्रायः तीन विधिया प्रचलित है जो कि, तंत्र मंत्र और यंत्र की होती है। मंत्र क्रिया में नियम पालन मंत्र के उच्चारण व अन्य अनिवार्य सावधानियां बरतनी आवश्यक होती है ! यंत्र क्रिया में यंत्र निर्माण कर यंत्रों को मंत्रों द्वारा सिद्ध करने हेतु आवश्यक नियमों का पालन करना जरूरी होता है।
तंत्र क्रिया में साधक के लिए इतनी श्रमसाध्य वह मुश्किल नहीं होती, बल्कि कुछ तंत्र क्रियाएं तो स्वयं सिद्ध हो जाती है, यानि उन्हें मंत्रों द्वारा जाग्रत करने की आवश्यकता ही नहीं होती है। लेकिन फिर भी यह तंत्र क्रियाएं इतनी शीघ्र एवं प्रभावित व चमत्कारी होती है कि, नास्तिक से नास्तिक मनुष्य भी इनके चमत्कारों को नमस्कार करने में विवश हो जाता है।
वह किसी को बर्बाद करने के लिए ऐसे गलत तांत्रिकों का सहारा ले लेता है जोकि व्यापार के रूप में इसे लेकर यह नहीं सोचते कि वह जो करेंगे जिससे किसी का जीवन बर्बाद हो जाएगा।
मैं भी यह मानता हूं कि, तंत्र- मंत्र जैसी चीज कुछ नहीं होती, पर जब इनके प्रभाव हजारों लाखों लोगों पर देखे और उन्हें तड़प-तड़प कर जिंदगी जीते देखा तो, मेरे एक बात समझ में आई, इस संसार में असली क्राइम तो ऐसे लोग करते हैं, जो किसी का जीवन बर्बाद करने में इन गलत कामों का उपयोग करते हैं और इस क्राइम की सजा उन्हें कोई और नहीं दे सकता, सिर्फ ईश्वर देता है, पर जिन पर तंत्र-मंत्र हो गया जिनका जीवन बर्बाद हो गया उनका क्या ?
तांत्रिक क्रिया के लक्षण !
*जिंदा रहते हुए तड़प तड़प कर बीमारियों से घिरे रहना।
*आकस्मिक दुर्घटना का शिकार हो जाना।
*घर में लगातार अशांति का होना, सब के ऊपर शक करना।
* हर बात पर क्रोध करना तथा आवेश में आकर दूसरों को नुकसान पहुंचाना।
* व्यापार का चलते हुए बंद हो जाना।
* नौकरी में मन नहीं लगना।
*किसी भी बुरे कार्य का भागीदार बनना।
* दिल और दिमाग पर एक व्यक्ति हावी रहना। हमेशा उसके बारे में सोचते रहना।
*किसी पर विश्वास नहीं अंधविश्वास करना।
*हर समय क्रोध में रहना। बात-बात पर भड़क जाना।
*भय युक्त सपने आना, डर से उठ जाना।
* आचरण में परिवर्तन आना, अपशब्द बोलना, जो मदद को आए वह भी बर्बाद ।
* अमावस्या अथवा पूर्णिमा के दिन अशांति, तड़प और अधीरता रहना, आत्महत्या जैसे मन में विचार आना।
*अचानक से अत्याधिक कर्ज बढ़ जाना और उसे निपटाने का कोई तरीका नजर नहीं आना !
*कोई भी सगा संबंधी मदद को आगे नहीं आता, हर कोई बचने लगता है !
*घर बाहर बुरी तरीके से अपमानित होना, किसी भी पूजा पाठ का असर नहीं होना आदि !
*चल अचल संपत्ति का विक जाना, हर तरह से बर्बादी !
लेकिन इंसान को किसी भी परिस्थिति से निराश नहीं होना चाहिए, संसार में ऐसी कोई समस्या नहीं है, जिसका समाधान नहीं है, बशर्ते समय पर कोई योग गुरु मिल जाए जो, आपको इस तांत्रिक क्रिया से छुटकारा दिला सकें !
जय महाकाल !
नोध : इस लेख में दी गई सभी बातें सामान्य जानकारी के लिए है हमारी पोस्ट इस लेख की कोई पुष्टि नहीं करता

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