मारण क्रिया ( मारण तंत्र विद्या )
मारण क्रिया का मतलब किसी व्यक्ति की जान ले लेना, मारण तंत्र विद्या की छह मुख्य शाखाएं होती है !
वशीकरण, सम्मोहन, उच्चाटन, विद्वेषण, मारन, स्तंभन इनमे से सब से ज्यादा भयानक "मारण तंत्र" होता है।
मारण तंत्र का अर्थ :- ---
किसी व्यक्ति के कपड़े, बाल, नाखून, खून, फोटो आदि के माध्यम से किसी उच्चाबली नकारात्मक ऊर्जा को उसके शरीर में प्रवेश करवा के उसके शरीर को नष्ट करना मारण तंत्र कहलाता है।
इस तंत्र में सिर्फ अतृप्त आत्माओं का प्रयोग किया जाता है, जो प्रेत, पिशाच, ब्रह्मराक्षस जैसी योनियों में फसी हुवी होती है। कोई सकारात्मक दिव्य शक्ति आपके लिए यह कार्य नही करेगी अगर उसे कसम , दुहाई देकर विवश कर के करवाओगे तो, इसके भीषण दुष्परिणाम देखने को मिल सकते है।
अब मारण तंत्र की प्रक्रिया का विश्लेषण करता हूं :-
मारन तंत्र करने वाला कभी सुखी नही होता क्योंकि वो बुरी आत्माओं के संपर्क में होता है। उनसे बातचीत करता है, उनको शराब, बलि, खून आदि चीजे चढ़ा के उनसे कार्य करवाता है। बुरी आत्माएं अपने स्वामी को ही सताती है, इसलिए मारण तंत्र करने वाले तांत्रिक घर छोड़कर चले जाते है, क्योंकि उसके परिवार को भी खतरा होता है। ऐसा व्यक्ति विक्षिप्त(पागल) अवस्था में होता है और भगवान को अप्रिय होता है।
:- मारन तंत्र करने के लिए एक अतृप्त आत्मा को जो प्रेतयोनी में फसी है उसको वश में करना होता है.! ये करने को बोहोत अलग अलग प्रक्रियाएं तंत्रिको ने विकसित की है।
उसके बाद उस आत्मा की ताकत को बढ़ाना होता है। इसके कुछ तरीके बता रहा हु...!
१:- ताकत बढ़ाने के लिए उसे पशुबलि दी जाती है! बलि देने के बाद उस पशु की आत्मा उस प्रेत की गुलाम बनती है और उसके लिए कार्य करती है। या फिर उस पशु का आत्मबल उस प्रेत को मिल जाता है।
२:- शराब, खून, मांस आदि चीजों से हवन कर के उस हवन का हविष्य उस प्रेत को दिया जाता है इस से भी प्रेत की ताकत बढ़ती है।
३:- मंत्रजप कर के भी उस प्रेत की ताकत बढ़ाई जाती है।
..... इस ताकत का अर्थ :- अशरीरी आत्माएं भौतिक वस्तुओं को स्पर्श नही कर सकती है। ये प्रेत आत्माएं किसी मनुष्य को या पदार्थ को स्पर्श नही कर सकती। यही स्पर्शशक्ति तांत्रिक प्रेतात्माओ को तंत्र के माध्यम से देते है और उनसे कार्य करवाते है। कुछ प्रेतात्माओ में इतनी स्पर्शशक्ति आती है की वे दिवारो को चीर देते है, वस्तुओ को अपने स्थान से हिला देते है।
ऐसी ताकतवर प्रेतात्मा के बिना मारण तंत्र करने के बारे में सोच भी नही सकते क्युकी :- तंत्र केवल धनुष है और पारलौकिक शक्ति उसका बाण है, बिना बाण के धनुष किसी काम का नही है। कुछ लोग यहां वहा टोटके देख के करते है और सोचते है कोई परिणाम क्यू नही दिख रहा? अब तुमको बाण के विषय में ज्ञान नही है सिर्फ धनुष के साथ खेलोगे तो यही होगा ना....!
अब मारण तंत्र का विज्ञान बताता हूं !
मारन तंत्र तीन चरणों में कार्य करता है।
१:-मारन तंत्र में सामने वाले के कपड़े, बाल, नाखून और उस से जुड़ी वस्तुओ के सहारे प्रेतात्मा को उसके शरीर में भेजा जाता है। भेजने से पहले उस प्रेतात्मा को बलि दी जाती है और उसका मनपसंद भोग चढ़ाया जाता है जिसमे शराब, खून, मांस आदि शामिल है। भोग चढ़ाकर उसे कार्य बता के सामने वाले के शरीर में भेजा जाता है।
२:- प्रेतात्मा उसके शरीर में प्रवेश करने से पहले स्वप्न में उसे दर्शन देती है.... उसके बाद अपनी स्पर्श शक्ति का प्रयोग कर के व्यक्ति के शरीर के नाजुक अंगों पे प्रहार करती है। उसका हृदय दबाती है, लिवर दबाती है, लिंग दबाती है, दिमाग के अंदरूनी हिस्से दबाती है और उसके शरीर के साथ खेलती है। पीड़ित व्यक्ति दवाखाना जाता है !
लेकिन डॉक्टर को भी सही से तकलीफ समझ में नहीं आती। आ भी गई तो क्या कर लेगा? एक तकलीफ ठीक करने से पहले दूसरी तकलीफ प्रेत पैदा कर देता है। आखिर में पीड़ित व्यक्ति मृत्यु को प्राप्त हो जाता है।
३:- मारन तंत्र में पीड़ित व्यक्ति की हत्या करने के बाद प्रेतात्मा उस व्यक्ति की आत्मा को अपना गुलाम बना लेती है और साथ में लेकर चली जाती है। इसलिए तंत्र से मरने वाले व्यक्ति का अंतिम संस्कार उचित तरीके से करना अत्यावश्यक है।
नोट :- तंत्र का दुरुपयोग करने से साक्षात महादेव का प्रकोप झेलना पड़ता है, भौतिक दंड से ज्यादा भयानक आध्यात्मिक दंड होता है !
नोध : इस लेख में दी गई सभी बातें सामान्य जानकारी के लिए है हमारी पोस्ट इस लेख की कोई पुष्टि नहीं करता

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