बुध की शान्ति के विविध उपाय # bhudh ki shanti ke vividh upay
१. अनिष्ट बुध की शान्ति का सर्वोत्तम उपाय बुध मंत्र के अनुष्ठान सहित नित्य विष्णु सहस्र नाम का पाठ है चमत्कारिक लाभ होगा।
२. पुरुष सूक्त के द्वारा भगवान विष्णु की घोडशोपचार पूजा भी कर ली जाय तो बुधकृत समस्त अरिष्ट निश्चित रूप से शान्त होते हैं। सन्तान कष्ट, गर्भ दोष, वाणी एवं मानसिक कष्ट दूर हो जाते हैं तथा सुख शान्ति की वृद्धि होती है।
३. नित्य शालिग्राम पूजन करके तुलसी पत्र का सेवन करें तथा मंत्र जप कर लें।
४. व्यापारिक अड़चनों एवं सन्तान कष्ट में गोपाल सहस्र नाम एवं कृष्ण पूजा भी में अमोघ है।
५. कलह, शत्रुता, हानि, बाधाओं आदि से त्रस्त, मानसिक रूप से बहुत आकुल
व्यक्ति यदि अधिक न कर सकें तो श्रीमद्भागवत, गजेन्द्र मोक्ष या रामरक्षा स्तोत्र
के पाठ से ही पर्याप्त लाभ उठा सकते हैं। ६. शत्रु बाघा एवं अभिचार कर्मों के शमन के लिए प्रत्यॉगरा जप तथा हवन अमोघ है।
७. शारीरिक व्याधियों के लिए महाधन्वन्तरि मंत्र अथवा मृत्युंजय प्रयोग प्रशस्त है। ८. शिक्षा में बाधा एवं वाणी दोष के लिए वैदिक मार्ग प्रेमी ऋग्वेदीय सारस्वत मंत्र एवं तंत्र प्रेमी नील सरस्वती मंत्र एवं स्तोत्र का अनुष्ठान करें, कल्याण होगा। ९. बुद्धि स्थान को मजबूत करने हेतु धन प्राप्ति हेतु पन्नायुक्त "बुध यन्त्र धारण करे।
१०. बुधवार को इलायची एवं तुलसी पत्र का भक्षण करें तथा एक हरी इलायची जल में प्रवाहित करें।
११. १ रत्ती स्वर्ण का दान करें (बुधवार के दिन)
१२. ११ एकादशी तथा ११ बुधवार को व्रत रखें।
१३. ११ बुधवार तक मुट्ठी भर मूंग भिखारियों को दान करें।
१४. ब्राह्मणों को प्रति बुधवार दुग्ध का दान करें।
१५. बुध अथवा पाण्डुरंग स्तोत्र का पठन करें।
१६. गणपति जी के दर्शन करें।
१७. बुध के होरा में निर्जल रहें।
१८. धनु या मीन लग्न में बुध छठें, आठवें या बारहवें हों तो बुध के अशुभ प्रभाव से बचने के लिये, विवाह समय में दो बराबर वजन के पन्ने एवं मूंग के दाने लें। विवाह समय में संकल्पपूर्वक एक हिस्सा बहते पानी में छोड़ दें तथा दूसरा हिस्सा अपने पास रखें। जब तक वह हिस्सा जातक के पास रहेगा उसका बुध के अशुभ प्रभाव से बचाव होता रहेगा तथा उसका वैवाहिक जीवन सुखी रहेगा।
१९. बुधवार का व्रत ५ या ११ या ४३ बार करना। २०. दुर्गा पाठ करना, कन्याओं का (दान-दक्षिणा दे कर) आशीर्वाद लेना या दुर्गा
तीर्थों की यात्रा करना २१. मूंसाबत, हरी चीजें दान देना या जल प्रवाह करना।
२२. रेडियो, घड़ियां, टेलिविजन, गाने-बजाने के यन्त्र ठीक रखना।
२३. तांबे के पैसे में सुराख करके चलते पानी में बहाना
२४. पन्ना धारण करना, पन्ने के अभाव में कली (धातु) धारण करें।
२५. बकरी तोते की सेवा करना
२६. हरा रंग निषेध (तुलसी, मनी प्लांट) ९६ घण्टा नाक छेदन। २७. लड़की बहन-बुआ, साली की सेवा करना और आशीर्वाद लेना।
२८. तड़ागी या बेल्ट बांधना।
२९. कौड़ियों को जलाकर चलते पानी में बहाना।
३०. हिजड़ों को हरी चूड़िया, हरे रंग के कपड़े आदि देना।
३१. भभूती ताबीज, साधुओं की तस्वीर, धार्मिक ग्रन्थ बन्द करके न रखना। ३२. बुध उच्च हो तो बुध की चीजों का दान न देना।
३३. बुध नीच हो तो बुध की चीजों का दान न लेना। उपरोक्त उपाय ५ या ११ या ४३ दिन या सप्ताह या माह लगातार करने चाहिये।
३४. बुध पीड़ा की विशेष शान्ति हेतु चावल, शहद, सफेद सरसों, गोबर, गोरोचन एवं नेवारी मल्वल मिलाकर ७ बुधवार तक स्नान करें।
३५. बुध पीड़ा को विशेष शान्ति हेतु हरड़े, गोमय, अक्षत, गोरोचन, स्वर्ण, आंवला
और मधु मिलाकर ७ बुधवार तक स्नान करें। ३६. यदि सन्तान अवरोधक ग्रह बुध है तो समझिये कि बिल्ली को मारने के कारण
या मछलियों तथा अन्य प्राणियों के अण्डों को नष्ट करने के कारण, कम उम्र के बालक-बालिकाओं (झडोलिये) के शाप से भगवान् विष्णु के अनादर के कारण सन्तान नहीं हो रही है। ऐसे में जातक को बुध के वेदोक्त मन्त्र के चार हजार जप करने चाहिये। बुध सम्बन्धी वस्तुओं का दान करते हुये, बुधवार का नियमित व्रत रखना चाहिये।
३७. हरिवंश पुराण के अनुसार ऐसे जातक का महाविष्णु या अतिविष्णु यज्ञ कर कांस्यपात्र दुध वार को दान में देना चाहिये।
नोध : इस लेख में दी गई सभी बातें सामान्य जानकारी के लिए है हमारी पोस्ट किसी को भी एसी बातों पर भरोसा करने को नहीं कहेती ओर नहीं इसे सच होने का दावा करती है

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