भगवान शिव से जुड़े ग्रहों से पाए सुख और समृद्धि
कुछ पर्व मनुष्य को खुशी प्रदान करते तो कुछ आर्थिक और सांस्कृतिक विरासत की पहचान कराते हैं
परंतु शिवरात्रि के पर्व से मनुष्य के अंदर व्याप्त अज्ञानता का तम दूर होता है ।
सभी पर्वों में महाशिवरात्रि सबसे महान और अलौकिक है जिसमें मनुष्य अंदर के तम को दूर कर परमात्मा का ज्ञान प्रकाश अर्जित करता है ।
देवों के देव महादेव परमपिता परमात्मा शिव की पूजा शिवलिंग के रूप में की जाती है शिवलिंग को ज्योतिर्लिंग भी कहा जाता है । द्वादश ज्योतिर्लिंग पूरे भारत में विख्यात है जिनका पूजन और अर्चना करना प्रत्येक धर्मपरायण की पूणय आस होती है।
त्रिदेव समस्त सॄष्टि का जन्म पालन व संहार करते है। जन्म तथा पालन करने मॆ जीवन का आनंद रहता है।
लेकिन जीवन की समाप्ति रोग,दुर्घटना व अपघात के द्वारा ही होता है। जिस तरह जन्म देने वाले ग्रह है।
उसी तरह पालने व कष्ट द्वारा नष्ट करने वाले ग्रह भी होते है।
शनि ग्रह कॊ भगवान शिव ने संहार का कार्य दिया है। वही राहु महराज़ कॊ जीवन कॊ ग्रसने का कार्य दिया है।
जिनकी कुण्डली में शनि ग्रह ठीक नहीं है या महादशा में चल रहा है। भगवान शनि कालपुरुष के दंडाधिकारी है।जातक कॊ उसके कर्म के अनुसार प्रगति व पतन शनि महाराज ही देते है।
शनि देव कॊ दंड देने का यह अधिकार भगवान शिव ने ही दिया।
इसीलिये जब शनि की साढ़ेसाती या ढैया का प्रकोप हो तो महाशिवरात्रि व्रत विशेष लाभकारी होता है।शिव पूजन से शनि के कष्टों से राहत मिलती है।
मंगल जीवन में किस तरह की समस्याएं पैदा करता है?
कुंडली का खराब मंगल किसी भी इंसान की जिंदगी को तहस-नहस कर सकता है.
व्यक्ति का स्वभाव क्रूर और हिंसक हो जाता है.आत्मविश्वास और साहस का स्तर भी कमजोर हो जाता है.
-संपत्ति और जमीन के मामले में मुश्किलों का सामना करना पड़ता है.
रक्त से जुड़ी समस्याएं परेशान करती हैं.
कर्ज बहुत है और उत्तर नहीं रहा है और बढ़ता जा रहा है तो इसके लिए भी आप शिवरात्रि पर उपाय कर सकते हैं।
राहु वसूलीकर्ता
राहु कॊ कालपुरुष का वसूलीकर्ता कहेंगे तो यह उपयुक्त होगा।
यदि आपने पिछले जन्मों मॆ किसी की कोई भी वस्तु का ऋण बाकी रखा है
तो राहु महाराज इस जन्म मॆ आपसे वह ऋण सूद समेत वसूल करते है।
पिता द्वारा कोई ऋण ही तो सूर्य कॊ ग्रहण लगाकर ,मातृऋण हो तो चंद्रग्रहण,ज्ञान शिक्षा या धन का कोई ऋण हो तो चांडाल योग,इस तरह वे प्रत्येक ग्रह से सम्बन्धित ऋण उसे ग्रस कर वसूल करते है।
राहु ग्रह केवल भगवान शिव की पूजा करते है इसीलिये राहुजनित कष्ट शिवपूजन से ही ख़त्म होते है।
चंद्र कॊ बलि करना
चंद्र मानव जीवन का कारक है।यदि आपका मन खराब है तो आपका जीवन खराब।मन खराब होने के कई कारण है जैसे गरीबी,शारीरिक निर्बलता,बीमारी, कर्ज ,अपंगता इत्यादि।
भगवान शिव ने चंद्र कॊ अपने मस्तक मॆ जगह दी है इसीलिये आपकी किसी भी प्रकार की परेशानी हो उसका निदान शिव पूजा ही है।
शुक्र जनित कष्ट
शुक्र ग्रह दैत्यचार्य है।यह पद उन्हे भगवान शिव ने दिया।
शुक्र से प्रेम विवाह ,धनलक्ष्मी विलासिता ऐश्वर्य देखा जाता है।
भगवान शिव की सेवा पूजा से शुक्र ग्रह प्रसन्न होते है।तथा उत्तम विवाह व समृध्दि प्रदान करते है।
कुबेर कॊ धन का अधिकारी भगवान शिव ने बनाया।समस्त खजानों पर कुबेर का अधिकार होता है।
कुबेर भगवान शिव मॆ परम मित्रता है।यदि आप भगवान शिव के पूजन के साथ कुबेर पूजन भी करते है तो आपको इसका श्रेष्ठ लाभ मिलता है।
कौन से ग्रह भगवान शिव से जुड़े हैं और सकारात्मक प्रभाव के लिए क्या उपाय करें अपनी राशि के हिसाब से कैसे करें शिवरात्रि की पूजा
नोट ---आपको शिवरात्रि के महत्व के बारे में बताएंगे अगली पोस्ट में।

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