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12/08/2021

जानिए नागा साधुओं का रहस्य

   
                           
   
जानिए नागा साधुओं का रहस्य

नागा साधुओं की यह विचित्र जानकारियां आप नहीं जानते हैं,कहां से आते हैं, कहां चले जाते हैं...? जानिए नागा साधुओं का रहस्य!!!!!!!

कौन हैं ये नागा साधु, कहां से आते हैं और कुंभ खत्म होते ही कहां चले जाते हैं? क्या ऐसे सवाल आपके मन में आए हैं? अगर आपका जवाब हां है, तो आइए आपको बताते हैं इस बड़े रहस्य का पूरा सच।

प्रयागराज में नागा साधुओं की बहुत लोकप्रियता है। संन्यासी संप्रदाय से जुड़े साधुओं का संसार और गृहस्थ जीवन से कोई लेना-देना नहीं होता। गृहस्थ जीवन जितना कठिन होता है उससे सौ गुना ज्यादा कठिन नागाओं का जीवन है।

यहां प्रस्तुत है नागा से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी!!!

1. नागा अभिवादन मंत्र : ॐ नमो नारायण।

2. नागा का ईश्वर : - शिव के भक्त नागा साधु शिव के अलावा किसी को भी नहीं मानते। शम्भु उपासक नहिं हरि निंदक।

3. नागा वस्तुएं : - त्रिशूल, डमरू, रुद्राक्ष, तलवार, शंख, कुंडल, कमंडल, कड़ा, चिमटा, कमरबंध या कोपीन, चिलम, धुनी के अलावा भभूत आदि।

4. नागा का कार्य : - गुरु की सेवा, आश्रम का कार्य, प्रार्थना, तपस्या और योग क्रियाएं करना।

5. नागा दिनचर्या : - नागा साधु सुबह चार बजे बिस्तर छोडऩे के बाद नित्य क्रिया व स्नान के बाद श्रृंगार पहला काम करते हैं। इसके बाद हवन, ध्यान, बज्रोली, प्राणायाम, कपाल क्रिया व नौली क्रिया करते हैं। पूरे दिन में एक बार शाम को भोजन करने के बाद ये फिर से बिस्तर पर चले जाते हैं।

6. सात अखाड़े ही बनाते हैं नागा : - संतों के तेरह अखाड़ों में सात संन्यासी अखाड़े ही नागा साधु बनाते हैं:- ये हैं जूना, महानिर्वणी, निरंजनी, अटल, अग्नि, आनंद और आवाहन अखाड़ा।

7. नागा इतिहास : - सबसे पहले वेद व्यास ने संगठित रूप से वनवासी संन्यासी परंपरा शुरू की। उनके बाद शुकदेव ने, फिर अनेक ऋषि और संतों ने इस परंपरा को अपने-अपने तरीके से नया आकार दिया। बाद में शंकराचार्य ने चार मठ स्थापित कर दसनामी संप्रदाय का गठन किया। बाद में अखाड़ों की परंपरा शुरू हुई। पहला अखाड़ा अखंड आह्वान अखाड़ा’ सन् 547 ई. में बना।

8. नाथ परंपरा : - माना जाता है कि नाग, नाथ और नागा परंपरा गुरु दत्तात्रेय की परंपरा की शाखाएं है। नवनाथ की परंपरा को सिद्धों की बहुत ही महत्वपूर्ण परंपरा माना जाता है। गुरु मत्स्येंद्र नाथ, गुरु गोरखनाथ साईनाथ बाबा, गजानन महाराज, कनीफनाथ, बाबा रामदेवIi




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