व्रत का पारण # एका दशी व्रत का पारण कब और कैसे करें ?
व्रत को पूर्ण करने या खोलने को व्रत का पारण करना कहते हैं...।
एकादशी के पूरे दिन-रात निराहार रहकर व्रत रखा जाता है और द्वादशी पर प्रात:काल व्रत खोला जाता है। व्रत खोलने को पारण कहा जाता है..। एकादशी व्रत के अगले दिन द्वादशी पर सूर्योदय के बाद पारण किया जाता है..।
शास्त्रों का कथन है कि एकादशी व्रत का पारण द्वादशी तिथि समाप्त होने से पहले कर लेना अति आवश्यक होता है..।
यदि तिथियों की घट-बढ़ के कारण द्वादशी तिथि सूर्योदय से पूर्व ही समाप्त हो गई हो तो ऐसी स्थिति में भी पारण सूर्योदय के बाद ही करना होता है...।।
➖ *व्रत का पारण हरि वासर के दौरान भी नहीं किया जाता है---*
द्वादशी तिथि की पहली एक चौथाई अवधि को हरि वासर कहा जाता है। एकादशी व्रत का पारण हरि वासर के दौरान नहीं किया जाता है। व्रती को पारण करने के लिए हरि वासर समाप्त होने की प्रतीक्षा करनी चाहिए। अर्थात् द्वादशी तिथि की प्रथम एक चौथाई अवधि बीत जाए उसके बाद पारण किया जा सकता है। पंचांग में प्रत्येक तिथि की पूर्ण अवधि लिखी रहती है, उसके चार भाग करके प्रथम भाग जितना समय बीत जाए उसके बाद पारण करना चाहिए। सामान्य जनों की सुविधा के लिए अनेक पंचांगों में पारण का समय लिखा होता है। उसमें भी देखा जा सकता है...।
➖ *प्रात:काल में व्रत खोलना सबसे उत्तम--*
एकादशी व्रत खोलने का सबसे उत्तम समय प्रात:काल होता है। व्रती को मध्यान्ह काल के दौरान व्रत खोलने से बचना चाहिए। इसका अर्थ यह हुआ कि प्रात: सूर्योदय के बाद तीन-चार घंटों के भीतर व्रत खोल लेना चाहिए.,मध्यान्हकाल अर्थात् प्रात: 11 से दोपहर 1 बजे तक व्रत नहीं खोलना चाहिए.,
जो व्रती किसी कारणवश प्रात:काल में व्रत ना खोल पाएं उन्हें मध्यान्हकाल बीत जाने के बाद ही व्रत खोलना चाहिए....।
➖ *दो दिन एकादशी हो तो क्या करें...?*
तिथियों की घट-बढ़ के कारण कभी-कभी एकादशी का व्रत लगातार दो दिनों तक आ जाता है। ऐसे में स्मार्त मत को मानने वालों को पहले दिन वाली एकादशी और वैष्णव मत को मानने वालों को दूसरे दिन वाली एकादशी का व्रत करना चाहिए। संन्यासियों, विधवाओं और मोक्ष प्राप्ति के इच्छुक लोगों को दूसरे दिन वाली एकादशी करना चाहिए। भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करने के लिए दोनों दिन एकादशी का व्रत किया जा सकता है...।।
➖ *सात्विक भोजन से करें पारण--*
व्रत सात्विक भोजन से खोलना चाहिए.,
पारण के दौरान सबसे पहले सुबह स्नान करने के बाद भगवान विष्णु या (विष्णु अवतार श्री राम,श्री कृष्ण जी ) को सात्विक भोजन में तुलसी दल डालकर भोग लगाएं, पारण के दौरान ज्यादा मिर्च मसाले का व गरिष्ठ भोजन नहीं बनाना चाहिए,,,,,,,.✍

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