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9/23/2021

साइटिका क्या होता है ?

   
                           
   

साइटिका क्या होता है 





 मनुष्य के शरीर में एक साईटिका नाड़ी होती है जिसका ऊपरी सिरा 1 इंच मोटा होता है। यह साईटिका नाड़ी शरीर में प्रत्येक नितम्ब के नीचे से शुरू होकर टांग के पीछे के भाग से होती हुई पैर की एड़ी पर खत्म होती है। इस साईटिका नाड़ी को साइटिका नर्व भी कहते हैं।

इस नाड़ी में जब सूजन तथा दर्द होने लगता है तो इसे साईटिका या फिर वात-शूल कहते हैं। जब यह रोग होता है तो व्यक्ति के पैर में अचानक तेज दर्द होने लगता है। यह रोग अधिकतर 30 से 50 वर्ष की आयु के लोगों को होता है।

🌸साईटिका का दर्द एक समय में एक ही पैर में होता है। जब यह दर्द सर्दियों में होता है तो यह रोगी व्यक्ति को और भी परेशान करता है।

🌻इस रोग में किसी-किसी रोगी को कफ प्रकोप भी हो जाता है। इस रोग के कारण रोगी को चलने में परेशानी होती है।

🌻रोगी व्यक्ति जब उठता-बैठता या सोता है तो उसकी टांगों की पूरी नसें खिंच जाती हैं और उसे बहुत कष्ट होता है।

🍂साइटिका बीमारी के लक्षण :


जब किसी व्यक्ति को साईटिका रोग हो जाता है तो उसके पैर के निचले भाग से होते हुए ऊपर के भागों तक तेज दर्द होता है। इस रोग के कारण रोगी व्यक्ति अपने पैर को सीधा नहीं कर पाता है तथा सीधा खड़ा भी नहीं हो पाता है। रोगी व्यक्ति को चक्कर आने लगते हैं। रोगी व्यक्ति को कभी-कभी धीरे-धीरे दर्द होता है तो कभी बहुत तेज दर्द होता है। इस दर्द के कारण रोगी व्यक्ति को बुखार भी हो जाता है। आइये जाने साइटिका क्यों होता है ?


🍂साइटिका होने के कारण :


🌾असंतुलित भोजन का सेवन करने तथा गलत तरीके के खान-पान से भी यह रोग हो जाता है।

 रात के समय में अधिक जागने के कारण भी यह रोग हो सकता है।स्नेहा आयूर्वेद ग्रुप

🌻जब किसी व्यक्ति की रीढ़ की हड्डी में चोट लग जाती है तो उसे यह रोग हो जाता है।

.🌼यदि साईटिका नाड़ी के पास विजातीय द्रव (दूषित द्रव) जमा हो जाता है तो नाड़ी दब जाती है जिसके कारण साईटिका रोग हो जाता है।

🌼रीढ़ की हड्डी के निचले भाग में आर्थराइटिस रोग हो जाने के कारण भी यह रोग हो सकता है।

🌾अधिक समय तक एक ही अवस्था में बैठने या खड़े रहने के कारण भी यह रोग हो सकता है।

🌾अपनी कार्य करने की क्षमता से अधिक परिश्रम करने के कारण या अधिक सहवास करने के कारण भी यह रोग हो सकता है। आइये जाने साईटिका के लिये आयुर्वेदिक 🌼घरेलु उपचार ,

🌾साईटिका का घरेलू उपचार : 


🌾लहसुन से साईटिका का इलाज


रोजाना एक दिन में 2-3 लहसुन की कलियों को पानी के साथ निगले इससे भी साइटिका में लाभ मिलती हैं 


🌺नींबू से साईटिका का उपचार :


2 चम्मच शहद को एक नींबू के रस में मिलाकर पिने से साइटिका का दर्द दूर होता है


🥀हार-श्रृंगार से साईटिका का उपचार 


हार-श्रृंगार के ताजे पत्ते पीस कर एक गिलास पानी में उबाल लें, जब आधा गिलास पानी बचे तो उसको छान कर रोजाना पिए ऐसा एक सप्ताह तक करे साइटिका में लाभ मिलती हैं |


🌺जायफल से साईटिका का इलाज


10 ग्राम जायफल 100 ग्राम तिल के तेल में मिलाकर पका लें, पके हुए तेल से कमर पर मालिश करे इस प्रयोग से साइटिका का दर्द दूर होता हैं 


🌺आलू से साईटिका का इलाज 


310 ग्राम आलू का रस रोजाना दो-तीन महीने तक पिने से साइटिका के दर्द में बहुत आराम मिलता हैं |(गाजर का रस मिलकर भी इसका सेवन कर सकते हैं और भी ज्यादा असरकारी हो जायेगा)


🌺साइटिका का तेल


2-3 लहसुन लें और इसको राई के तेल में डालकर पकाये, जब अच्छे से पक जाए तो इस तेल से दर्द वाली जगह पर मालिश करने से तुरंत आराम मिलता हैं, यह तुरंत असरकारी /साइटिका का अचूक उपाय/ हैं |


🌹तुलसी से साईटिका का उपचार 


तुलसी की 5 पत्तियां प्रतिदिन सुबह के समय में खाने से रोगी व्यक्ति को बहुत अधिक लाभ मिलता है।


🌾कालीमिर्च से साईटिका का उपचार


5 कालीमिर्च को तवे पर सेंककर कर सुबह के समय में खाली पेट मक्खन के साथ सेवन करना चाहिए। इस प्रयोग को प्रतिदिन करने से यह रोग कुछ ही दिनों में ठीक हो जाता है।स्नेहा समूह


🌼पारिजात से साईटिका का उपचार 


लगभग 250 ग्राम पारिजात के पत्तों को 1 लीटर पानी में अच्छी तरह से उबाल लें और जब उबलते-उबलते पानी 700 मिलीलीटर बच जाए तब उसे छान लें। इस पानी में 1 ग्राम केसर पीसकर डाल दें और फिर इस पानी को ठंडा करके बोतल में भर दें। इस पानी को रोजाना 50-50 मिलीलीटर सुबह तथा शाम के समय पीने से यह रोग 30 दिनों में ठीक हो जाता है। अगर यह पानी खत्म हो जाए तो दुबारा बना लें।


🌹नेगड़ से साईटिका का उपचार


100 ग्राम नेगड़ के बीजों को कूटकर पीस लें। फिर इसके 10 भाग करके 1-1 पर्ची में पैक करके पुड़ियां बना लें। इसके बाद शुद्ध घी में सूजी या आटे का हलवा बना लें और जितना हलवा खा सकते हैं उसको अलग निकाल लें। इस हलवे में एक पुड़िया नेगड़ के चूर्ण की डालकर इसे खा लें और मुंह धो लें। लेकिन रोगी व्यक्ति को पानी नहीं पीना चाहिए। इस हलवे का कम से कम 10 दिनों तक सेवन करने से यह रोग ठीक हो सकता है ।

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