सफल जीवन के सात्विक नियम
सर्व सुखः शान्ति से जीवन जीने के सनातन धर्म में ज्ञनियों द्वारा कुछ आवश्यक नियम मानव के लिये बनाये गये हैं , जिनका निजी जीवन मे पालन किया जाये तो मनुष्य अपने सतकर्म की बढोतरी करते हुए , निडरतापूर्वक , दृढ़ इच्छाशक्ति का पालन करते हुये अपना परलोक भी सुधार सकता है ;-
🌷घर के मुख्य प्रवेश द्वार को सफाई करके वन्दरवार -
रंगोली से सजाकर रखें
🌷 घर मे जाले ना लगें , लगातार सफाई करते रहें
🌷 घर मे प्रति दिन पूजाघर मे २ समय की ज्योत
अवश्य जलायें
🌷 शंखनाद एवं पूजा की घंटी अवश्य बजायें इससे
नकारात्मक प्रभाव दूर होकर सकारात्मकता आती है
🌷घर आंगन मे तुलसी का पौधा लगाकर जल से उचित
दिनों पर ही सींचे
🌷माँ लक्ष्मी की उपासना करें
🌷सूर्य को अधर्य ( जल ) के साथ प्रणाम नित्य करें
🌷ब्राह्मणों को भोजन समय समय पर खिलायें
🌷एकादशी के दिन सामर्थ्यानुसार दान करें एवं चावल
का सेवन कदापि न करें
🌷अपने जीवन काल मे कम से कम सात वृक्ष ;
-पीपल , बरगद , बिल्व , केला , तुलसी , शमी ,
नीम के अवश्य लगायें
🌷नित्य प्रातः अपने घर के बडे बुजुर्गों से आशिर्वाद लें
🌷माता पिता , सास ससुर की सेवा भाव से सेवा करें
🌷अतिथि सेवा सत्कार अवश्य ही करें
🌷पारिवारिक परंम्परा के अनुसार सभी वृत त्योहार
यथा योग्य श्रद्धा से मनायें
🌷सदा ही वैष्णव - सात्विक भोजन , शुद्ध जल ग्रहण करें , इससे
तन - मन - बुद्धि सभी शुद्ध रहता है
🙏पृथिव्यां त्रीणि रत्निनि जलमन्नं सुभाषितम् 🙏
अर्थात , पृथ्वी पर तीन ही रत्न हैं : अन्न , जल और
मधुर वचन ।
🌷 गाय के लिये ग्रास प्रतिदिन निकालें
🌷 घर के बडों को भोजन खिलाने के पश्चात ही स्वयं
तन मन से खायें
🌷यथा समय ९ वर्ष तक की कन्याओं को देवी माँ का
रुप मानते हुये उत्तम वस्त्र , भोजन एवं दक्षिणा देते
हुये पूजन करें
🌷घर मे बहन - बेटी , माँ एवं पुत्रवधु को समय समय
पर उपहार देते रहें
🌷पित्रपक्ष मे अपने पित्रों का श्राद्ध कर्म श्रद्धा एवं
सात्विकता के साथ नियमानुसार करें , पित्र प्रसन्न
होकर बहुत सा आशिर्वाद देते हैं
🌷 संभव हो तो , संयुक्त परिवार मे निवास करें
🌷 कभी भी अपने एवं पुत्र - पुत्री के ससुराल पक्ष से
झगड़ा ना करें , ये सभी सम्मानीय हैं
🌷 गुरु की पत्नी , बडी भाभीजी , बडी बहन , सासु जी
दोस्त की पत्नी , बडे साले की पत्नी ये सभी माँ तुल्य
होती हैं , इनसे ऐसा ही सम्मानीय व्यवहार करें
🙏 राजपत्नि गुरोः पत्नि मित्रपत्नि तथैव च ।
पत्नि माता स्वमाता च पंचैता मातरः स्मृता ।।🙏
🌷छोटे भाई , साले , साली , छोटी बहन ये सब बेटी
समान होती हैं इनसे इसी प्रकार का स्नेह भाव रखें
🌷 कभी पर स्त्री की ओर बुरी नजर ना रखें
🙏विद्याः समस्तास्तव देवी भेदाः
स्त्रियः समस्ताः सकला जगतसु ।
त्वयैकया पूरितमम्बयैतत्
का ते स्तुति सत्वयपरा परोक्तिः ।।🙏
अर्थात , हमारे शास्त्रों में सभी स्त्रियां देवी मां का रुप
बतायी गई हैं
🌷सभी सुहागिन स्त्रियां नित्य सामान्य श्रंगार करके ही
रहें ( वैसे तो सोलह श्रंगार होते हैं )
🌷 कभी दक्षिण मुखी मकान मे ना रहें , इससे घर की
शुभता जाती है और बिमारी एवं क्लेश आता है , यदि
संभव ना हो हो वास्तु निवारण करा लेना चाहिए
🌷कभी भी किसी से मुफ्त या चोरी का समान ना लें ,
अन्यथा यह हजारों गुना होकर चुकाना अवश्य ही
पड़ता है , चाहे वर्तमान जीवन मे चाहे अगले ...
🌷 घर मे भोजन शुद्धता के साथ नहाकर ही घर की
स्त्रियों ( माँ , पत्नी आदि ) को ही पकाना चाहिये
क्योंकि , ये साक्षात अन्नपूर्णा , का रुप होती हैं , इसी
लिये इनको गृहलक्ष्मी भी कहा जाता है
🌷तामसिक , बासी भोजन एवं मद्यपान का त्याग कर दें
🌷 दोपहर के झूठे बर्तन दोपहर को और रात्रिभोज के
बर्तन रात को ही साफ करें , कूड़ा पाकशाला से बाहर
निकाल दें , इसके पश्चात ही शयन करें
🌷जानवरों विषेशतः कुत्ते , कौवे को ग्रास दें एव चिडियों
- चीटियों को अवश्य जिमाते रहें
🌷निःसहाय ,अपाहिज , गरीब , विधवा की निस्वार्थ
सहायता करें
🌷टूटे - जले बर्तन , एवं टूटा कांच - शीशा , बंद घडी़ घर
से निकाल दें
🌷कभी किसी को अपशब्द ना बोलें , क्रोध पर नियंत्रण
रखें , असत्य का त्याग कर दें
🌷कभी किसी की जमानत ना दें
🌷 दिन के समय मैथुन कदापि ना करें
🌷 मंगलवार , बृहस्पतिवार , एकादशी , पूर्णिमा एवं वृत
के दिन दाडी़ , बाल एवं नाखूनों को नहीं काटें
🌷प्रातः काल उठकर अपनी हथेलियों का सबसे पहले
दर्शन करें , तत्पश्चात धरती मां को हाथ से छूकर मांथे
से लगायें , फिर भगवान से सात्विक धर्म पालन करने
की प्रार्थना करें , फिर जिस तरफ की नासिका से
श्वसन चल रहा हो उस तरफ के पैर को जमीन पर
रखें , फिर खडे होवें
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कराग्रे वसते लक्ष्मी करमध्ये सरस्वती ।
करमूले तू गोविन्दः
प्रभाते करदर्शनम् ।।
समुद्र वसने देवी पर्वत स्तन मंडिते ।
विष्णु पत्नी नमस्तुभ्यं पाद स्पर्शं क्षमश्वमेव ।।
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🌷अपने कर्म पर विश्वास रखें
🌷अपने काम पर बडे बुर्जुगों का आशिर्वाद लेकर जायें
🌷सुकर्म के बिना व्यक्ति को सुखः - चैन नहीं मिलता न
इस लोक मे न परलोक में
🌷 भगवान पर आस्था , श्रद्धा , विश्वास रखें और अपने
कर्म मे जुट जायें , सफलता आपके कदमों मे होगी
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सानन्दं सदनं सुताश्च सुधियः कान्ता प्रियालापिनी
इच्छापूर्तिधनं स्वयोषितिरतिः स्वाअज्ञापराः सेवका ।
आतिथ्यं शिवपूजनं प्रतिदिनं मिष्टान्नपानं गृहे
साधोः सड़ग्मुपासते च सततं धन्यो गृहस्थाश्रमः ।।
🙏अर्थात , जो व्यक्ति आनंद से परिपूर्ण है , जहाँ बुद्धिमान संतान और प्रिय मीठा बोलने वाली पत्नी , आवश्यकताओं को पूरा करने के लिये पर्याप्त धन है , सभी एक दूसरे के प्रति अनुरक्त हैं , जहाँ सेवक स्वामी भक्त है , जहां अतिथि का आदर सत्कार होता है , भगवान की पूजा होती है , प्रतिदिन सात्विक स्वादिष्ट पकवान एवं पेय बनते हैं , जहाँ अच्छे मित्रों और साधु संतों का आवागमन और सत्कार होता रहता है , वहीं सच्चा गृहस्थाश्रमः है ।🙏
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इस तरह उक्त सभी को आत्मसात कर लें तथा अपनी दिनचर्या मे अपनाकर हम अपना जीवन सहजता से सफल कर अपना परलोक भी सवांर सकते हैं ।
क्योंकि :-
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जन्ममृत्यु हि यात्येको भुनक्तयेकः शुभाशुभम् ।
नरकेषु पतत्येक एको याति परां गतिम् ।।
🙏⚖️ अर्थात , मनुष्य अकेला ही जन्म लेता है , अकेला
ही जाता है , शुभ और अशुभ , पाप और पुण्य के फल
को भी अकेले ही भोगता है , अकेला ही मोक्ष को भी
प्राप्त करता है । ⚖️🙏
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🎪जिन परिवारों में इस तरह की उच्च मानसिकता के लोग वास करते हैं , ऐसे ही परिवारों का घर मन्दिर कहलाता है 🎪
🙏🌹यही प्रार्थना है ,भगवान सबका भला करें 🌹🙏

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