सोमनाथ मंदिर का चंदन द्वार
बहुत कम लोग जानते होगे
50 हजार निहत्थे भक्तों को पुजारियों सहित कत्ल कर *1025 में महमूद गजनवी ये दरवाजा गजनी ले गया था.....*
1842 मे हिंदुस्तान की (जाट रेजिमेंट) सेना उसके मकबरे से उखाडकर भारत लाई थी।
सरदार पटेल ने मांगा गुजरात में मंदिर निर्माण के समय तब तथाकथित *महात्मा गांधी* ने मना कर दिया, यह कहते हुए कि... *हिंदुस्तान के सरकारी संपत्ति खर्च से मन्दिर पुनरुद्धार"* नही होगा..... आज भी ये दरवाजा जस का तस आगरा के लालकिले मे पड़ा है।
*श्री सोमनाथ का पुराना चंदन दरवाजा अखण्ड राष्ट्र के साम्प्रदायिक बंटवारे के बाद, पाकिस्तान प्रेमी गांधी जिद से कभी सोमनाथ नही पहुच पाया था....*
बाद मे गांधी वध हो गया और पटेल भी स्वर्गवासी हो गए, आज सनातनी वैदिक हिन्दू जनजागरण के चलते बढ़ती हिन्दू एकता व सजगता से अब आशा बंधी है। शायद श्री सोमनाथ मंदिर अपने पुराने वैभव में लौटे.....
*आज 1000 साल पुरानी विरासत आगरा लालकिले मे दर्शनार्थियों के लिए पुरातत्व ने खोल दिया है। जब भी अवसर मिले, जाईए दर्शन कीजिए......*
औऱ *"स्मरण रखें पाकिस्तान निर्माताओं (थोपा गया महात्मा) की करतूतें......*
*भारतीय सेना की जाट रेजिमेंट के उन बहादुर जवानों को नमन् करता हूँ जो यह वापस लाऐ थे उनको नमन......*

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