महाभारत में कुरुक्षेत्र मेरठ को माना जाता था,
ओर इंद्रप्रस्थ दिल्ली को
मेरठ से दिल्ली तक का क्षेत्र
मात्र 100 किलोमीटर में है ....
अब बुद्धिमान लोग विचार करें
खुद को पूरे विश्व का सम्राट कहने वाले कौरव
क्या अपने शत्रु को , मात्र 100 किलोमीटर दूर
ही बसायेंगे ?
महाभारत का असल युद्ध भी संस्कृति
का ही युद्ध था , दुर्योधन एवं उसके समर्थक
सनातन संस्कृति उर्फ अहिंसा, सत्य का त्याग कर चुके थे ।
क्या मात्र 100 किलोमीटर के एरिया में संस्कृति बदल सकती है ?
आज भारत ३,२८७,५९० किलोमीटर में फैला हुआ है ।
वस्त्रों की बात छोड़ दे, तो लगभग पूरे भारत की
संस्कृति एक है
शिव-विष्णु-गणेश-शक्ति-सूर्य प्रत्येक स्थान पर समान
रूप से सम्मानीय है ...
वह केरल हो, या कश्मीर ....
भारत का किलोमीटर एरिया जानकर आप समझ सकते है, की मात्र 100 किलोमीटर की दूरी पर
कौरव पांडवो को इंद्रप्रस्थ नही दे सकते थे ....
अब या तो दिल्ली इंद्रप्रस्थ नही था
या हस्तिनापुर मेरठ नही था .....
हमारी टीम का शोध कहता है ..
प्राचीन हस्तिनापुर वर्तमान का इराक है ...
जहां से दुर्योधन अरब,रूस तथा यूरोप को
कंट्रोल करता था, यहां के लगभग सभी राजा
या तो दुर्योधन के अधीन थे, या मित्र, या समर्थक
जब पांडव कौरवो के साथ ही थे, तब उन्हें ईरान का क्षेत्र देखरेख को मिला था । यहां दुर्योधन हमेशा परेशानी खड़ी करता ।
अंग्रेजी इतिहासकारो ने इसे Elam प्रदेश लिखा है
।।
पांडवो को जो इंद्रप्रस्थ मिला था, उसकी राजधानी दिल्ली थी, तथा यह क्षेत्र - भारत मे , मेरठ, बिहार, उड़ीसा, बंगाल, बांग्लादेश होता हुआ, कम्बोडिया आदि होते हुए, कसागर के किनारे किनारे अमेरिका के पेरू देश तक था ....
अगर इस दृष्टिकोण से देखें, तो महाभारत आपको रियल लगेगी ...
भारत मे फिलहाल 28 राज्य ओर 8 केन्द्रशासित प्रदेश है ....अगर राजाओ के हिसाब से देखें, तो 36 राजा ज़्यादा से ज़्यादा हो सकते है ...
महाभारत में तो अकेले दुर्योधन के 100 भाई थे, ओर सबको अपना अपना राज्य, संचालन हेतु मिला हुआ था, 100 राज्य तो केवल धृतराष्ट्र के पुत्रों के थे
उसके बाद भी बकासुर, जरासन्ध, कंस, शिशुपाल, जैसे अनेक राजा, ओर उनके राज्य, यह तो बड़ी शक्तियां थी, इस कारण इनका नाम है, इनके समर्थक देश एवं राज्य थे वह अलग .....
महाभारतकाल में धरती भी क्षेत्रफल में आज बड़ी थी, समुद्र के अंदर डूबी सभ्यताएं इस बात का पुख़्ता प्रमाण है ....
किताबो के शब्दों को रट्टा मारकर केवल सम्मान प्राप्ति, ख्याति प्राप्ति के लिए लिखने वाले , हमारी बातों को नही समझ सकते ....
इसके लिए रिश्क उठानी पड़ती है ...
हंसी का पात्र बनने की रिश्क्
महाभारत को विश्व स्तर पर दिखाने के लिए
शुरू शुरू से लेकर, आज तक हमे हंसी का पात्र
ही बनना पड़ा है ...
अतिज्ञानी लोग मानने को तैयार ही नही है,
महाभारत युद्ध वैज्ञनिक उन्नति का परिणाम था , ओर यह वैश्विक ग्रहयुद्ध था ...
हमारे लोग तो, डार्विन के सिद्धांत को ही वेदवाक्य
मान चुके है ...
जहां कुछ हजार साल पहले इंसान बंदर था ।
आपको एक ओर जानकारी दे दे
आजकल अंग्रेज भी नही मानते
की इंसान बन्दर था, वह अपनी सभ्यता 12,000 से 15,000 वर्ष पुरानी बताने लगे है
ओर वेदों को मात्र,5000 वर्ष पुराना
उनके कहने का अर्थ है
हम हिन्दुओ से भी प्राचीन है ....
भारत के अतिज्ञानी, ख्याति के लिए मरने वाले
लोग, भारत के इतिहास का नाश करवा देंगे
अगर आपने यह साबित नही किया
की महाभारत का युद्ध विश्व्यापी युद्ध था
तो आने वाले 150 सालों में
विश्व की सबसे प्राचीन सभ्यता
सनातन नही, बल्कि अब्राहम कहलाएगी ....
( यह चित्र जो आप देख रहे है, यह इराक की मेसोपोटेनिया सभ्यता के है ।। यह सभ्यता ईसा से 3100-3200 पूर्व मानी गयी है, आर्यभट्ट के अनुसार महाभारत का समयकाल भी यही था , इतने बड़े बड़े महलों, शहरों का होना, ओर उसका खाक में मिल जाना, महाभारत युद्ध के प्रमाण नही, तो ओर क्या है ?? )

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