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3/14/2021

भगवान् श्री कृष्ण जी के कुछ नाम और उन के अर्थ:

   
                           
   

भगवान् श्री कृष्ण जी के कुछ नाम और उनके अर्थ:




1 कृष्ण :  सब को अपनी ओर आकर्षित करने वाला.


2गिरिधर: गिरी: पर्वत ,धर: धारण करने वाला। अर्थात गोवर्धन पर्वत को उठाने वाले।


3मुरलीधर: मुरली को धारण करने वाले।


4 पीताम्बर धारी: पीत :पिला, अम्बर:वस्त्र। जिस ने पिले वस्त्रों को धारण किया हुआ है।


5मधुसूदन: मधु नामक दैत्य को मारने वाले।


6 यशोदा या देवकी नंदन: यशोदा और देवकी को खुश करने वाला। या पुत्र


7 गोपाल: गौओं का या पृथ्वी का पालन करने वाला।


8गोविन्द: गौओं का रक्षक।


9 आनंद कंद: आनंद की राशि देंने वाला।


10 कुञ्ज बिहारी:कुंज नामक गली में विहार करने वाला।


11चक्रधारी: जिस ने सुदर्शन चक्र या ज्ञान चक्र या शक्ति चक्र को धारण किया हुआ है


12 श्याम: सांवले रंग वाला


13 माधव: माया के पति।


14 मुरारी:मुर नामक दैत्य के शत्रु।


15 असुरारी:असुरों के शत्रु।


16 बनवारी: वनो में विहार करने वाले।


17  मुकुंद: जिन के पास निधियाँ है।


18 योगीश्वर: योगियों के ईश्वर या मालिक।


19 गोपेश :गोपियों के मालिक।


20 हरि :दुःखों का हरण करने वाले।


21मदन:सूंदर


22 मनोहर:मन का हरण करने वाले।


23 मोहन:सम्मोहित करने वाले।


24जगदीश:जगत के मालिक।


25 पालनहार:सब का पालन पोषण करने वाले।


26 कंसारी:कंस के शत्रु।


27 रुख्मीनि वलभ:रुक्मणी के पति


28 केशव: केशी नाम दैत्य को मारने वाले. या पानी के उपर निवास करने वाले या जिन के बाल सुंदर है।


29 वासुदेव:वसुदेव के पुत्र होने के कारन।


30रणछोर:युद्ध भूमि स भागने वाले।


31 गुड़ाकेश: निद्रा को जितने वाले।


32 हृषिकेश: इन्द्रियों को जितने वाले।


33 सारथी: अर्जुन का रथ चलने के कारण।


34 दुर्योधन: जिन की रणनिति बहुत ही कठिन है ऐसे कृष्ण भगवान् ( दुतवाक्यम्)


35 पूर्ण परब्रह्म::देवताओ के भी मालिक।


36 देवेश: देवों के भी  ईश।


37 नाग नथिया: कलियाँ नाग को मारने के कारण।


38 वृष्णिपति: इस कुल में उतपन्न होने के कारण


39 यदुपति:यादवों के मालिक।


40 यदुवंशी: यदु वंश में अवतार धारण करने के कारण।


41: द्वारकाधीश:द्वारका नगरी के मालिक।


42: नागर:सुंदर।


43 छलिया:छल करने वाले।


44  मथुरा गोकुल वासी:इन स्थानों पर निवास करने के कारण।


45  रमण: सदा अपने आनंद में लीन रहने वाले।


46 दामोदर: पेट पर जिन के रस्सी बांध दी गयी थी। 


47 अघहारी: पापों का हरण करने वाले।


48 सखा: अर्जुन और सुदामा के साथ मित्रता निभाने के कारण।


49 रास रचिया: रास रचाने के कारण।


50 अच्युत: जिस के धाम से कोई वापिस नही आता है।


51 नन्द लाला:नन्द के पुत्र होने के कारण।


#જય_શ્રી_કૃષ્ણ

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