महाराष्ट्र के गाँव की लड़की की कहानी
एक लड़की महाराष्ट्र के एक गांव में बेहद गरीब घर में पैदा होती है, बचपन से ही उसके घर वाले उसे घर की गाय भैंसों के पालने में लगा देते, 9 साल की उम्र में उसका ब्याह 30 साल के आदमी से कर दिया जाता है, 19 साल की उम्र तक आते-आते उसके तीन बच्चे होते हैं और वह चौथे बच्चे के साथ गर्भवती होती है ।
उसके गांव में एक बाहुबली किस्म का आदमी मजदूरों का शोषण करता है, यह लड़की उसकी शिकायत वहां के स्थानीय अधिकारी से कर देती है, जिस वजह से इस बाहुबली का अत्याचार खत्म हो जाता है, लेकिन यह बाहुबली इस लड़की से बदला लेने की ठान लेता है । बाहुबली इस लड़की के पति को आकर इस लड़की के चरित्र के बारे में उल्टा सीधा बताता है और कहता है कि जिस चौथे बच्चे के साथ लड़की गर्भवती है वो असल में उस बाहुबली का बच्चा है ।
लड़की का पति आगबबूला हो जाता है और उसे बाल से पकड़कर घसीटते हुए गाय के तबेले में ले जाता है और उसके पेट में लात मारता है ताकि वो लड़की और उसका चौथा बच्चा मर जाए, लड़की बेहोश हो जाती है, यह सोचकर कि लड़की शायद मर गई वो उसे वहीं छोड़ जाता है जिससे कि गांव वालो को यह लगे कि तबेले में गाय भैसो ने उसे कुचल कर मार दिया ।
थोड़ी देर में उस लड़की को होश आता है और वो देखती है कि एक गाय उसकी छाया बनकर उसकी रक्षा करने के लिए उसके ऊपर खड़ी होती है, शायद बाकी गाय भैंस उसको कुचल ही देते लेकिन यह गाय उसकी रक्षा के लिए उसके ऊपर खड़ी रही, कोई भी जानवर अगर उसके पास जाने की कोशिश करता तो यह गाय अपने सींग से डराकर अन्य जानवरो को पीछे खदेड़ देती, उस लड़की को प्रसव पीड़ा शुरू हो जाती है, वो लड़की उस गाय के पैर पकड़ती है और भगवान कृष्ण को याद करती है और पूरी ताक़त लगाती है और कुछ देर में एक बच्ची को उस गाय की छाव में तबेले में जन्म देती है, पास ही पड़े एक पत्थर से वो गर्भनाल (umbilical cord) को काफी प्रयास के बाद काट देती है । वो गाय घंटो तक उस लड़की की रक्षा के लिए उसकी छाव बनकर वहा खड़ी रही ।
काफी देर बाद जब लड़की के पास इतनी शक्ति आ जाती है कि वो चलफिर सके वो लड़की गाय के पैर पकड़कर धन्यवाद करती है और कहती है कि आज भगवान कृष्ण साक्षात तेरा रूप धरकर मुझे बचाने आ गए और उसके आंसू निकल पड़ते है ।
वो लड़की फिर अपने मायके जाती है लेकिन वहा से उसे भगा दिया जाता है, उसके बाद वो शमशान में जाकर रहने लगती है अपनी नन्ही बच्ची के साथ, शमशान में जो लोग खाना छोड़ जाते थे उसे खाकर वो अपनी गुजर बसर करती है, उसकी ज़िन्दगी इतनी ज़्यादा कष्टदायक हो जाती है कि वो अपनी जीवन लीला ट्रेन से कटकर समाप्त करने का सोचती है, वो आत्महत्या करने जा रही होती है कि तभी वो देखती कि एक दिव्यांग उम्रदराज आदमी रो रहा होता है, वो आदमी उस लड़की से खाना और पानी मांगता है, लड़की भीख मांग कर उस आदमी के लिए खाना और पानी लाती है, लड़की फिर सोचती है कि यह आदमी शायद भगवान कृष्णा की आवाज़ है जो शायद मुझे यह बताना चाह रहे है कि मेरी ज़िन्दगी शायद किसी उद्देश्य के लिए बनी है, वो उस आदमी को पूरी सहायता करती है और आत्महत्या का विचार त्याग देती है ।
लड़की एक पेड़ के नीचे बैठती है और सोचती है कि मेरी खुद की ज़िंदगी इतनी कष्टदाय है कि मैं किसी की क्या ही सहायता करूंगी, लेकिन वो देखती है कि जिस पेड़ के नीचे वो बैठी है उसमे सिर्फ एक डाल है जिसमे कुछ पत्तियां निकली हुई है जिनसे उसके और उसके बच्चे पर छाव आ रही है । उसे अपने अन्तर्द्वंद का जवाब मिल चुका होता है ।
उसे गाना आता है तो वो गाना गाकर भीख मांगना शुरू करती है, धीमे धीमे वो अनाथ और विधवा महिलाओं को अपने साथ जोड़ती जाती है, वो लड़की उस गाय की तरह इन महिलाओं की रक्षक / मां बन जाती है, लोग देखते है कि यह लड़की ने कैसे इन महिलाओं के जीवन में सकारात्मक बदालव लाया तो वो इस लड़की के लिए अनाथालय बनवा देते है, वक्त बीतता जाता है, वो लड़की अब समाजसेविका बन चुकी होती है ।
उसके अनाथालय के कई बच्चे डॉक्टर, वकील, किसान बन बैठते है, कई तो समाज में काफी रसूखदार पद पर पहुंच जाते है, उसे राष्ट्रपति, गवर्नर, मुख्यमंत्री द्वारा पुरस्कारों से नवाजा जाता है ।
सालो बाद उसके अनाथालय पर एक बूढ़ा आदमी आता है, वो बीमार है, भूखा है, बेघर है किसी ने उसे बताया होता है कि इस अनाथालय में उसे खाना और रहने का इंतजाम हो जाएगा, यह आदमी असल में उस लड़की का पति था जो आज अपनी ही बीवी की चोखट पर दर दर की ठोकरें खाने के बाद खड़ा हुआ था, यह समाजसेविका अपने पति को पहचान लेती है ।
समाजसेविका आगे कहती है जब तुमने मुझे छोड़ा था तब मैं गर्भवती थी, बेघर थी आज तुम उसी अवस्था में हो, मैं तुम्हे यहां आश्रय दूंगी लेकिन अब तुम मेरे पति नहीं हो बल्कि मैं तुम्हारी मां हूं, उसके अनाथालय में जब लोग उस बूढ़े आदमी के बारे में पूछते तो वो कहती कि यह आदमी मेरा सबसे बड़ा बेटा है और कभी कभी बहुत शरारती हो जाता है ।
आप लोग सोच रहे होंगे कि उसकी नवजात बच्ची का क्या हुआ जो उस तबेले में गाय की छाव में पैदा हुई थी, वो आज डॉक्टर है जो उस अनाथालय के संचालन में अपनी मां की मदद करती है । उस समाजसेविका का नाम सिंधुताई सपकल है , नीचे की फोटो में सिंधुताई अपनी बिटिया के साथ (पीछे आप भगवान कृष्ण का चित्र भी देख सकते है)

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