क्योंकि संसार में जो कुछ भी नाटक चलता रहता, वह मूर्खता है ।
असली चीजें तो केवल श्मशान में ही होती हैं
लोगों में बस यही कमी कि उनके भीतर जरूरी तीव्रता नहीं होती।
चाहे प्रेम के पल, हंसी के पल,आनंद के पल हों या फिर कष्ट के,
तीव्रता को वे कभी महसूस ही नहीं कर पाते।
बस मौत के पलों में ही उन्हें तीव्रता का अनुभव होता।
इसी वजह से शिव श्मशान में जाकर बैठे।
मतलब जहां काया यानी शरीर का अंत होता ।
शरीर का अंत होता,जीवन का अंत नहीं होता ।
इस धरती पर आकर आपने जो भी इकठ्ठा किया सब कुछ छोड़ना है।
जीवन भर आपको यह लगता रहा कि शरीर ही सब कुछ,
आप इस शरीर को त्यागते वे पल जीवन के सबसे तीव्र पल होते।
आपको लगता कि शरीर के परे भी कुछ है,
तो इसका आपके लिए कोई खास महत्व नहीं रह जाता।
जिन लोगों को जीवन मैं कौन हूं ? क्या हूं’ ? का अहसास होता,
उनके लिए श्मशान कोई बड़ा मौका नहीं होता।
उनके लिए ये भी सामान्य पल ही होते ।
जिन लोगों ने पूरी जिंदगी खुद को एक शरीर मानते हुए गुजार दी ,
उनके लिए मृत्यु के पल बहुत तीव्र होते हैं।
शिव ने अपना निवास स्थान श्मशान में बना लिया।
शम का अर्थ शव और शान का अर्थ शयन यानी बिस्तर से है।
जहां मरे हुए शरीरों को रखा जाता वहां शिव रहते हैं।
दरअसल जीवित लोगों के साथ काम करना तो समय की बर्बादी।
लोगों को जिसकी जरूरत ,तीव्रता के उस स्तर तक नहीं ला सकते।
लोगों को थोड़ा बहुत तीव्र बनाने के लिए बहुत सारे करतब करने पड़ते।
शिव एक ऐसी जगह बैठते जहां जीवन के मायने पूरी तरह स्पष्ट हैं।
आपमें भय, खुद को सुरक्षित रखना चाहते तो ये स्पष्ट नहीं होगा।
ये आपके लिए सिर्फ तभी स्पष्ट होगा,
जब खुद का विस्तार करने और परम को छूने की आकांक्षा है।
#शिव_मेरे_गुरु
#जय_महाकाय
#नमःशिवाय

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