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4/28/2022

शमशान साधना / shamasan shadhana

   
                           
   

शमशान साधना / shamasan shadhana


आधी रात ... साए साए करता हुआ सन्नाटा, इतनी शांति कि, छोटे से छोटे जीव जंतु की आवाज स्पष्ट रूप से सुनाई दे, जली- अधजली चिताओं से निकलती, मध्यम मध्यम रोशनी जिसमें कुछ दिखाई दे और कुछ नहीं.... कभी धीरे-धीरे कभी जोर से तांत्रिकों के मुंह से निकलती मंत्रों की आवाज !


मुर्दों के ऊपर बैठकर साधना करते यह अघोरी, श्मशान में साधनाओं में रत देखे जा सकते हैं, जो अपनी साधना ओं के बल पर असंभव को संभव और असंभव को संभव करने की क्षमता रखते हैं..... कामना पूरी ना होने पर जोर-जोर से चीखना भूत और प्रेतों को डांटना और इच्छा पूरी होने पर जोर जोर से हंसना, जिसको सुनकर अच्छे अच्छों का दिल दहल जाए, शमशान साधना कोई हंसी खेल नहीं है, कभी-कभी ऐसे दृश्य सामने आ जाते हैं कि, बड़े से बड़े दिलेर व्यक्ति की भी रूह कांप जाए, कमजोर दिल वाले का यहां कोई काम नहीं है !


शमशान अघोरियों द्वारा खास तौर से श्मशान में तीन प्रकार की साधनाएं की जाती हैं !


जिनमें श्मशान साधना, शव साधना और शिव साधना शामिल हैं। प्रमुख रूप से इन साधनाओं को अघोरी प्रसिद्ध शक्तिपीठों जैसे - कामाख्या शक्तिपीठ, तारापीठ, बगुलामुखी या भैरव आदि स्थानों पर करते हैं।


तांत्रिक उपाय इन साधनाओं को करने के अलावा संसार में इनका कोई और लक्ष्य नहीं होता और साधना के बाद या अन्य समय में ये अघोरी हिमालय के जंगलों में निवास करते हैं। इन्हें साधारण तौर पर देखा भी नहीं जा सकता ना ही ये अघोरी तांत्रिक समाज में शामिल होते हैं। परंतु सिंहस्थ या कुंभ के समय इनके दर्शन आसानी से किए जा सकते हैं।

 

शव-साधना का अर्थ है:---


 श्मशान में स्वयं के शरीर की अनुभूति को शव के समान निःसत्व करके, अपने उद्देश्य की मानसिक रूप से साधना करना है। अघोरियों द्वारा की जाने वाली श्मशान साधना में श्मशान को जगाकर साधना की जाती है।


शव साधना के लिए किसी शव का होना आवश्यक है। अघोरी यदि पुरुष है, तो उसे साधना के लिए स्त्री के शव की आवश्यकता होगी और यदि अघोरी स्त्री है तो शव साधना के लिए पुरुष का शव आवश्यक है। 


परंतु शव का चयन करते समय इस बात का विशेष ध्यान रखना आवश्यक है कि शव किस श्रेणी का है। किसी चांडाल, दुर्घटना में मरे हुए व्यक्ति या फिर अकारण मरने वाले युवा का शव, शवसाधना के लिए अधिक उपयुक्त माना जाता है।


शव साधना विशेष समयकाल में और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। कृष्ण पक्ष की अमावस्या या शुक्ल पक्ष अथवा कृष्णपक्ष की चतुर्दशी वाले दिन यह बेहद महत्वपूर्ण होती है। इसके साथ यदि मंगलवार का संयोग हो यह सोने पर सुहागे के समान है। 


कहा जाता है कि, शव साधना आसान नहीं है। इस साधना को करते समय श्मशान में कई दृश्य और अदृश्य बाधाएं आती हैं, जिन्हें हटाना एक सिद्ध और जानकार अघोरी अच्छी तरह से जानता है। साधना के पूर्व ही अघोरी को संबंधित स्थान को भूत-प्रेतों और अन्य बाधाओं से सुरक्षित रखना होता है, ताकि वे साधना के बीच में विघ्‍न पैदा न कर सके। इसके लिए अग्नि तो होती ही है, अघोरी मंत्रोच्चार करते हुए आसपास एक लकीर खींचते हुए एक घेरा बनाता है और साथ ही तुतई बजाता है जिससे भूत-प्रेत या कोई भी बाधा प्रवेश न कर सके। इसके बाद विधि-विधान से साधना आरंभ की जाती है।

 

जिस शव की साधना की जानी है उसे स्नान करवाकर, कपड़े से पोंछकर उस पर सुगंधित तेलों का छिड़काव किया जाता है। लाल चंदन का लेप किया जाता है। शव के उदर पर यंत्र बनाकर, उदर पर बैठकर यह साधना की जाती है। साधना में लगातार मंत्रोच्चार और क्रिया जारी रहती है। शव साधना में विशेष बात यह है कि, यह साधना उपयोग किए जा रहे शव की मर्जी से होना आवश्यक है, अन्यथा यह मुसीबत भी बन सकती है।

 

कैसे होती है, साधक की रक्षा..?


चारों दिशाओं में रक्षा हेतु गुरु, बटुक भैरव, योगिनी और श्रीगणेश की आराधना भी की जाती है। भैरव और भैरवी की साधना भी इसमें आवश्यक मानी जाती है। वहीं सभी दिशाओं के दि‍गपाल की आराधना भी आवश्यक है।


भोग स्वरुप बकरे या मुर्गे की बलि देने के साथ ही शराब चढ़ाना भी अनिवार्य होता है। शव को भी यह चीजें अर्पित की जाती है। कुछ ही समय में देखते ही देखते य‍ह भोग समाप्त हो जाता है। 

 

इस साधना के पूर्ण होते-होते मुर्दा या शव भी बोलने लगता है। साधना पूर्ण होने पर साधक वह सिद्धी प्राप्त कर लेता है, जिसके लिए वह शव साधना कर रहा था।


आधी रात बीतते-बीतते शव की आंखें भी विचलित होने लगती है और उसके शरीर में कई परिवर्तन एक साथ देखे जा सकते हैं। लेकिन इन भयावह और खतरनाक दृश्यों को देखते हुए भी साधक का मन लक्ष्य से नहीं हटना चाहिए। उसे मंत्रोच्चार जारी रखने होते हैं, ताकि साधना को पूर्ण किया जा सके।


चेतावनी:-- किसी सिद्ध तांत्रिक या योग गुरु के बिना, इस तरह की साधनाएं जानलेवा हो सकती हैं, इसलिए बिना योग्य गुरु या तांत्रिक  की सलाह के बिना कोई भी साधना करने का भूलकर भी प्रयास ना करें !


नोध : इस लेख में दी गई सभी बातें सामान्य जानकारी के लिए है हमारी पोस्ट इस लेख की कोई पुष्टि नहीं करता





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