मनुष्य के समस्त जीवन को प्रभावित करते हैं, केतु देवता !
वैदिक ज्योतिष में केतु को महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है। ज्योतिष में केतु ग्रह को अशुभ माना जाता है। हालांकि केतु द्वारा व्यक्ति को हमेशा ही बुरे फल प्राप्त नहीं होते हैं। केतु ग्रह के द्वारा... मनुष्य को शुभ फल भी प्राप्त होते हैं !
वैदिक ज्योतिष में केतु को महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है। ज्योतिष में केतु ग्रह को अशुभ माना जाता है। हालांकि केतु द्वारा व्यक्ति को हमेशा ही बुरे फल प्राप्त नहीं होते हैं। केतु ग्रह के द्वारा व्यक्ति को शुभ फल भी प्राप्त होते हैं। यह अध्यात्म, वैराग्य, मोक्ष, तांत्रिक आदि का कारक होता है। ज्योतिष में राहु को किसी भी राशि का स्वामित्व प्राप्त नहीं है। लेकिन धनु केतु की उच्च राशि है, जबकि मिथुन में यह नीच भाव में होता है।
27 नक्षत्रों में केतु अश्विनी, मघा और मूल नक्षत्र का स्वामी होता है। आकाश मंडल में केतु का प्रभाव वायव्य कोण में माना गया है। राहु और केतु ग्रहों के कारण ही सूर्य और चंद्र ग्रहण होता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार किसी व्यक्ति की जन्म कुंडली में स्थित 12 भाव उसके संपूर्ण जीवन को दर्शाते हैं और जब उन पर ग्रहों का प्रभाव पड़ता है तो व्यक्ति के जीवन में उसका असर भी दिखाई देता है।
केतु ग्रह का मनुष्य जीवन पर प्रभाव:---
ज्योतिष में केतु ग्रह की कोई निश्चित राशि नहीं है। इसलिए केतु जिस राशि में बैठता है वह उसी के अनुरूप फल देता है। इसलिए केतु का प्रथम भाव अथवा लग्न में फल को वहां स्थित राशि प्रभावित करती है। इसके प्रभाव से जातक अकेले रहना पसंद करता है लेकिन यदि लग्न भाव में वृश्चिक राशि हो तो जातक को इसके सकारात्मक परिणाम देखने को मिलते हैं।
- यदि किसी जातक की कुंडली में केतु तृतीय, पंचम, षष्टम, नवम एवं द्वादश भाव में हो तो जातक को इसके बहुत हद तक अच्छे परिणाम प्राप्त होते हैं।
- यदि केतु गुरु ग्रह के साथ युति बनाता है तो व्यक्ति की कुंडली में इसके प्रभाव से राजयोग का निर्माण होता है।
- यदि जातक की कुंडली में केतु बली हो तो यह जातक के पैरों को मजबूत बनाता है। जातक को पैरों से संबंधित कोई रोग नहीं होता है। शुभ मंगल के साथ केतु की युति जातक को साहस प्रदान करती है।
- केतु के पीड़ित होने से जातक को कई प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ता है। व्यक्ति के सामने अचानक कोई न कोई बाधा आ जाती है।
- यदि व्यक्ति किसी कार्य के लिए जो निर्णय लेता है तो उसमें उसे असफलता का सामना करना पड़ता है। केतु के कमजोर होने पर जातकों के पैरों में कमजोरी आती है।
- पीड़ित केतु के कारण जातक को नाना और मामा जी का प्यार नहीं मिल पाता है। राहु-केतु की स्थिति कुंडली में कालसर्प दोष निर्माण करती है, जो जातकों के लिए घातक होता है।
केतु से संबंधित तथ्य:----
रोग-पैर, कान, रीढ़ की हड्डी, घुटने, लिंग,
किडनी, जोड़ों के दर्द
आदि रोगों को ज्योतिष में केतु ग्रह के द्वारा दर्शाया जाता है।
कार्यक्षेत्र-समाज सेवा, धर्म अध्यात्मिक क्षेत्र से जुड़े सभी कार्यों को ज्योतिष में केतु ग्रह के द्वारा दर्शाया जाता है।
उत्पाद-काले रंग के पुष्प, काला कंबल, काले तिल, लहसुनिया पत्थर आदि उत्पाद केतु से संबंधित हैं।
स्थान-सेवाश्रम, आध्यात्मिक एवं धार्मिक स्थान केतु से संबंधित होते हैं।
पशु-पक्षी तथा जानवर जहरीले जीव एवं काले अथवा भूरे रंग के पशु पक्षियों को राहु के द्वारा दर्शाया जाता है।
जड़ी-अश्वगंधा की जड़।
रत्न-लहसुनिया।
रुद्राक्ष-नौ मुखी रुद्राक्ष।
यंत्र-केतु यंत्र।
रंग-भूरा।
केतु का वैदिक मंत्र :----
ॐ केतुं कृण्वन्नकेतवे पेशो मर्या अपेशसे।
सुमुषद्भिरजायथा:।।
केतु का तांत्रिक मंत्र
ॐ कें केतवे नम:
केतु का बीज मंत्र
ॐ स्रां स्रीं स्रौं स: केतवे नम :
गणेश अथर्वशीर्ष स्तोत्र का पाठ करें !
केतु के दुष्प्रभावों को दूर करने के लिए बुधवार के दिन गणेश पूजन करने तथा अथर्वास्तोत्र का पाठ पढ़ने से लाभ होगा. - काले रंग की गाय का दान करने से केतु ग्रह के संकट को दूर किया जा सकता है. लेकिन अगर काली गाय का दान संभव नहीं है तो काली गाय को चारा खिलाना और उसकी सेवा करने से भी केतु को प्रभावों को कम किया जा सकता है.
लहसुनियां या उसके उपरत्न धारण करें !
केतु दोष के निवारण के लिए आप उसके रत्न लहसुनिया को धारण कर सकते हैं. यदि यह नहीं मिलता है तो, केतु के उपरत्न फिरोजा, संघीय या गोदंत को पहन सकते हैं.
केतु दोष से मुक्त होना है तो:---
अपनी संतान के साथ अच्छा व्यवहार करें. क्योंकि केतु पुत्र का कारक होता है, केतु के कुपित होने से संतान विशेष रूप से पुत्र पर कष्ट आता है, गणेश जी की पूजा करें. कुत्ता पालना या कुत्ते की सेवा करना भी लाभकारी होता है.
जब केतु देवता प्रसन्न हो :---
माना जाता है कि केतु भक्त के परिवार को समृद्धि दिलाता है, सर्पदंश या अन्य रोगों के प्रभाव से हुए विष के प्रभाव से मुक्ति दिलाता है। ये अपने भक्तों को अच्छा स्वास्थ्य, धन-संपदा व पशु-संपदा दिलाता है। मनुष्य के शरीर में केतु अग्नि तत्व का प्रतिनिधित्व करता है।
सावधानी:-- उपरोक्त कोई भी उपाय करने से पहले अपनी कुंडली की विवेचना किसी विद्वान ज्योतिषी से अवश्य करा लें और उन्हीं के दिशा निर्देश अनुसार उपाय करें !
नोध : इस लेख में दी गई सभी बातें सामान्य जानकारी के लिए है हमारी पोस्ट इस लेख की कोई पुष्टि नहीं करता

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