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8/17/2021

Kedarnath Dham : बाबा केदारनाथ एक पौराणिक कथा

   
                           
   

Kedarnath Dham : बाबा केदारनाथ एक पौराणिक कथा




पौराणिक कथा के अनुसार, महाभारत युद्ध के बाद पांचों पाण्डव भगवान श्री कृष्ण के साथ युद्ध की समीक्षा कर रहे थे। कृष्ण ने पाण्डवों से कहा कि युद्ध में भले ही जीत तुम्हारी हुई है, लेकिन तुम लोग गुरू और अपने बंधु-बांधवों को मारने के कारण पाप के भागी बन गये हो। इन पापों के कारण मुक्ति मिलना असंभव है। इस पर पाण्डवों ने पाप से मुक्ति पाने का उपाय पूछा।

कृष्ण ने कहा कि इन पापों से सिर्फ महादेव ही मुक्ति दिला सकते हैं, अतः महादेव की शरण में जाओ। उसके बाद श्रीकृष्ण द्वारका लौट गए। इसके बाद पांडव पापों से मुक्ति के लिए चिंतित रहने लगे और मन ही मन सोचते रहे कि कब राज पाठ को त्यागकर भगवान शिव की शरण में जाएंगे। उसी बीच एक दिन पांडवों को पता चला कि वासुदेव ने अपना देह त्याग दिया है और वो अपने परमधाम लौट गए हैं। ये सुनकर पांडवों को भी पृथ्वी पर रहना उचित नहीं लग रहा था।  गुरु, पितामह और सखा सभी तो युद्धभूमि में ही पीछे छूट गए थे। माता, ज्येष्ठ, पिता और काका विदुर भी वनगमन कर चुके थे। सदा के सहायक कृष्ण भी नहीं रहे थे।  ऐसे में पांडवों ने हस्तिनापुर का सिंहासन अभिमन्यु के बेट और अपने पौत्र परीक्षित को सौंप दिया और द्रौपदी समेत राज्य छोड़कर भगवान शिव की तलाश में निकल पड़े।  


हस्तिनापुर से निकलने के बाद पांचों भाई और द्रौपदी भगवान शिव के दर्शन के लिए सबसे पहले काशी पहुंचे, पर भोलेनाथ वहां नहीं मिले। उसके बाद उन लोगों ने कई और जगहों पर भगवान शिव को खोजने का प्रयास किया लेकिन जहां कहीं भी ये लोग जाते शिव जी वहां से चले जाते।  इस क्रम में पांचों पांडव और द्रौपदी एक दिन शिव जी को खोजते हुए हिमालय तक आ पहुंचे। 


यहां पर भी शिवजी ने इन लोगों को देखा तो वो छिप गए लेकिन यहां पर युधिष्ठिर ने भगवान शिव को छिपते हुए देख लिया था।  तब युधिष्ठिर ने भगवान शिव से कहा कि हे प्रभु आप कितना भी छिप जाएं लेकिन हम आपके दर्शन किए बिना यहां से नहीं जाएंगे और मैं ये भी जानता हूं कि आप इसलिए छिप रहे हैं क्योंकि हमने पाप किया है।  युधिष्ठिर के इतना कहने के बाद पांचों पांडव आगे बढ़ने लगे। उसी समय एक बैल उन पर झपट पड़ा।  ये देख भीम उससे लड़ने लगे। इसी बीच बैल ने अपना सिर चट्टानों के बीच छुपा लिया जिसके बाद भीम उसकी पुंछ पकड़कर खींचने लगे तो बैल का धड़ सिर से अलग हो गया और उस बैल का धड़ शिवलिंग में बदल गया और कुछ समय के बाद शिवलिंग से भगवान शिव प्रकट हुए।  शिव ने पंड़ावों के पाप क्षमा कर दिया। 


आज भी इस घटना के प्रमाण केदारनाथ में दिखने को मिलता है, जहां शिवलिंग बैल के कुल्हे के रूप में मौजूद है।  भगवान शिव को अपने सामने साक्षात देखकर पांडवों ने उन्हें प्रणाम किया और उसके बाद भगवान शिव ने पांडवों को स्वर्ग का मार्ग बताया और फिर अंतर्ध्यान हो गए। उसके बाद पांडवों ने उस शिवलिंग की पूजा-अर्चना की और आज वहीं शिवलिंग केदारनाथ धाम के नाम से जाना जाता है।  यहां पांडवों को स्वर्ग जाने का रास्ता स्वयं शिव जी ने दिखाया था इसलिए हिन्दू धर्म में केदार स्थल को मुक्ति स्थल मन जाता है और ऐसी मान्यता है कि अगर कोई केदार दर्शन का संकल्प लेकर भी निकले और उसकी मृत्यु हो जाए तो उस जीव को दोबारा जन्म नहीं लेना पड़ता है। गुरुदेव बोलते हैं की एक बार महादेव बोलने से सारे पाप धुल जाते है।  दो बार महादेव बोलने से महादेव ऋणी हो जाते हैं। तीन बार महादेव बोलने से तीनो शरीर से हमेशा के लिए जन्म मरण से मुक्ति मिल जाती है। तो आइए बोलिए :-

हर 🙋‍♂️हर 🙋‍♂️महादेव  🚩

हर 🙋‍♂️हर 🙋‍♂️महादेव  🚩

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