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4/10/2021

धंधे की मंदी में एक पति की अपनी पत्नी को लिखी इक कविता..

   
                           
   

धंधे की मंदी में एक  पति की अपनी पत्नी को लिखी इक कविता..😀😀😀




रिय क्यूँ तुम नए-नए सूट सिलाती हो !


पुरानी साडी में भी तुम अप्सरा सी नजर आती हो !!!


इन ब्यूटी पार्लरों के चक्करों में ना पडा करो !


अपने चांद से चेहरे को क्रीम पाउडर से यूँ ना ढका करो !!!


रेस्टोरेंट होटल के खाने में क्या रखा है !


तुम्हारे हाथों से बना बैंगन का भर्ता, इनसे लाख गुना अच्छा है !!!


इन सैर सपाटों में वो बात कहाँ !


तुम्हारे मायके जैसा ऐशो-आराम कहाँ !!!


नौकरों से खिटपिट में, मत सेहत तुम अपनी खराब करो !


झाडू-पौछा लगा हल्का सा व्यायाम करो !!!


सोने-चांदी में मिलती अब सो सो खोट है !


तुम्हारी सुन्दरता ही 24 कैरेट प्योर गोल्ड है !!!


माया-माया मत किया कर पगली, यह तो महा ठगिनी है !


मेरे इस घर-आंगन की तो, तू ही असली धन लक्ष्मी है !!!

🙏🙏🙏👌🏼👌🏼👌🏼

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