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4/19/2021

माँ काली स्तवन

   
                           
   

माँ काली स्तवन 





महाकालिका मालिकामुंड धारा,

सबं श्रोन सीसं करं मुक्त बारा,

परं निर्भयं गाहिनी नग्गखग्गा,

ज्वलंती चिता में शवारूढ नग्गा,

महाकाल विप्रीत रत्ती रमस्ते,

नमस्ते नमस्ते नमस्ते नमस्ते||१

महा विध्यया राजितं रक्त बंबा,

सधै जोग जोति अलौकिक अंबा,

त्रिनैनं सरोजं करं नील सज्जै,

कुचं गौर मुख्खं कला चंद्र लज्जै,

महारूद्र चित्तं कटाक्षं भ्रमस्ते,

नमस्ते नमस्ते नमस्ते नमस्ते||२


भुवंनेश्वरी चंद्र रूपा रसाला,

धरे कुंडलं हेम मुक्ती सुमाला,

बँधै बार जूरा सु सिंगार सज्जै,

कटी किंकिनी पाय री जेह बज्जै,

रसं रंजितं नैन शंभु समस्ते,

नमस्ते नमस्ते नमस्ते नमस्ते||३


बगल्ला कनंका समं हेम अंगा,

किरीटं ससी अंबरे पीत अंगा,

कुलीसं गदा पाश जीहा धरंती,

गरै चंपकं जूहि की वैजयंती,

महादेव संगा उछंगा बिसस्ते,

नमस्ते नमस्ते नमस्ते नमस्ते||४


महम्माय धूमावती धूम्रदेहा,

करालं कला चंचला ज्वाल मेहा,

भयंकार द्रढ्ढा जयंकार प्रेता,

उरंपीन छिनंकटी दीन हेता,

भवा भीम जोगान भोगा त्रपस्ते,

नमस्ते नमस्ते नमस्ते नमस्ते||५


जयो जोगिनी भोगिनी जा सुसंगे,

जयो जोगियं भोगियं जासु रंगे,

जयो दंपति जोग हासं बिलासं,

जयो कारूना रूप प्रेमं प्रकासं,

रखै लाज मां राज जोग सधस्ते,

नमस्ते नमस्ते नमस्ते नमस्ते||६


प्रबीन सागर ग्रंथसे साभार ।

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