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2/13/2021

कर्मो का फल"

   
                           
   

कर्मो का फल




मैं office से जरूरी मीटिंग के लिए बाहर आया,अभी बाइक को किक मारी ही थी कि जूते का सोल टूट गया। अब ऐसे कैसे मीटिंग अटेंड करता सो लगा किसी जूता रिपेयर वाले को देखु। अचानक मेरी नजर सडक किनारे बैठी बुजुर्ग महिला जोकि लगभग 65 साल के आसपास होगी लोगों के जूते चप्पल रिपेयर कर रही थी। पहले मुझे कुछ अच्छा नही लगा फिर जरूरी मीटिंग का ख्याल आया तो उनके पास पहुंच गया। बातों बातों मे मैंने पूछा---मां जी आप ऐसा काम क्यों करती हो ,वो बोली-बेटा सब कर्मों का फल है , मेरा मतलब कर्मो का फल ,वो बोली-बेटा मैं और मेरे पति शुरू से बेटा चाहते थे इसीलिए हमने दो बेटियों को कोख मे मार दिया उसके बाद दो बेटे हुए बडी उम्मीदो से उनकी परवरिश की पढाया-लिखाया उनकी हर छोटी बडी इच्छाओं को पूरा किया। धूमधाम से दोनों की शादी की। बस उसके बाद दोनों बदल गये। मेरे कहने पर मेरे पति ने घर कारोबार सब कुछ दोनों के नाम कर दिया। बहूओ ने हमसे भेदभाव शुरू कर दिया। कई बार लडाई होती बदले मे हमें भूखे सोना पडता था। पति ये सब सहन नही कर पाये और चल बसे। बस बेटे बहुओ ने बार बार किसी ना किसी तरह सताना जारी रखा और एकदिन घर से पागल ना जाने क्या-क्या कहकर निकाल दिया। कई दिनो भूखी रहने पर एक भले आदमी ने मुझे ये मेहनत का काम सिखाया, क्योंकि  मुझे भीख नही मांगनी थी, बस तबसे ऐसे ही काम करके अपना पेट पाल रही हूं ,*

*मैं स्तब्ध था क्या कहूं.. खैर मेरा जूता तब तक ठीक हो चुका था। मैंने100 रू दिए तो उसने बाकी के 60रू मुझे वापस देने को बढाये। मैंने कहा रख लीजिए बेटा समझकर कुछ खा लीजिएगा। मगर उसने साफ मना कर दिया बोली-नही बेटा बस अगर कुछ करने की इच्छा रखते हो तो इतना करना अपने माता पिता को कभी दुखी मत करना और अपनेआसपास भी किसी को ये अपराध मत करने देना कौन जाने कब किसे कैसे ऊपरवाला उसके कर्मो का फल दे दे।*

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